17.09.2015 को हुआ था फेरबदल
लोकसभा चुनावों में हार के बाद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जून में एक राज्यमंत्री को बर्खास्त करते हुए आधा दर्जन मंत्रियों के विभागों में फेरबदल किया था मगर क्षेत्रीय व जातीय समीकरण दुरुस्त नहीं हो पाया था, लिहाजा कुछ दिन बाद ही नए सिरे मंत्रिमंडल में बदलाव की सुगबुगाहट शुरू हुई। समाजवादी परिवार के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, मंत्री शिवपाल यादव, प्रो.राम गोपाल यादव के साथ मंत्रिमंडल में फेरबदल पर चर्चा की और खराब कामकाज वाले मंत्रियों के हटाने के संकेत भी दिए। कई बार मिले इन संकेतों का कोई नतीजा सामने नहीं आया।
अब सोमवार को फिर विक्रमादित्य मार्ग स्थित आवास पर मुलायम सिंह यादव, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, प्रो.राम गोपाल यादव के बीच बैठक हुई। थोड़ी ही देर चली इस बैठक में राज्यपाल के बयानों से सरकार की किरकिरी, कानून व्यवस्था की हालत, मंत्रिमंडल में फेरबदल, नामित कोटे की पांच एमएलसी सीटों के लिए राजभवन से नये सिरे से मांगे गए नामों पर चर्चा के अलावा जनवरी में रिक्त होने वाली निकाय कोटे की 36 सीटों के प्रत्याशियों को लेकर भी चर्चा हुई। तय किया गया कि जल्द से जल्द प्रत्याशी घोषित कर दिये जाएं। इस बैठक के तुरंत बाद मुलायम सिंह यादव दिल्ली रवाना हो गए और अखिलेश यादव मुख्यमंत्री आवास चले गए। प्रो.राम गोपाल ने जरूर इतना कहा कि 'वह व्यक्तिगत रूप से मंत्रिमंडल में नये चेहरे देखना चाहते हैं मगर इस पर फैसला लेने का अधिकार मुख्यमंत्री का है। वही इस पर कोई निर्णय लेंगे।Ó प्रो.राम गोपाल यादव ने यह भी कहा मंत्रिमंडल में बदलाव हो सकता है, नहीं भी हो सकता है। कयासों को हवा देने वाले इसबयान से संकेत तो मिल ही रहा है कि मंत्रिमंडल में फेरबदल को लेकर समाजवादी परिवार 'एक रायÓ नहीं बना पायी है लेकिन मिशन-2017 की दिशा में कदम बढ़ाने से पहले मंत्रिमंडल विस्तार व बदलाव होगा ही।
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सियासी गलियारों में चर्चा थी कि इस बैठक के बाद मंत्रियों के सामूहिक इस्तीफे लिए जा सकते हैं। साथ ही अखिलेश यादव अपने मंत्रिमंडल में फेरबदल भी कर सकते हैं। हालांकि ऐसा कोई ठोस फैसले नहीं किया जा सका। प्रदेश सरकार के सभी कैबिनेट मंत्री , स्वतंत्र प्रभार राÓयमंत्री भी बैठक में मौजूद रहे।
चनावी हार की वजह से उठाया कदम
लोकसभा चुनावों में शिकस्त के बाद प्रदेश की सत्तारूढ़ सपा सरकार में बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे थे। उम्मीद की जा रही थी यह बदलाव न केवल मंत्रिमंडल में होंगे बल्कि संगठनात्मक ढांचे में भी फेरबदल कि?ए जाएंगे। शुक्रवार को सीएम अखि?लेश की यूपी के गवर्नर से मुलाकात और शनिवार को सपा सुप्रीमो के निवास पर हुई बैठक के बाद यह तय माना जा रहा था। सपा सुप्रीमो के निवास पर शनि?वार को हुई बैठक में सीएम अखिलेश और शिवपाल यादव सहित सरकार के कुछ विश्वासपात्र अधिकारी भी शामिल थे। माना जा रहा है इस बैठक में मंत्रिमंडल में परिवर्तन और विस्तार को लेकर चर्चा हुई। अब इसे रवि?वार को अमलीजामा पहनाया जा सकता है।
बीते तीन हफ्तों से यूपी के सीएम अखि?लेश लोकसभा चुनावों में हुई हार के बाद डैमेज कंट्रोल में लगे हैं। अभी तक जो भी फेरबदल हुए हैं वे ब्यूरोक्रेसी तक सीमित थे। इस बड़े फेरबदल में 150 से अधिक आईएएस, आईपीएस, पीसीएस और पीपीएस अधिकारी शामिल थे। इसके बाद अब मंत्रिमंडल में फेरबदल की तैयारी है। इस फेरबदल में कई मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है। इसी के साथ चुनावों के ठीक पहले हटाए गए मनोज पारस और आनंद सिंह को दोबारा मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है।
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अखिलेश यादव भले ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हों लेकिन नेताजी जिस अंदाज मे अखिलेश सरकार की ओवर हालिंग कराने के लिये लगातार बोल रहे है उससे ऐसा लगने लगा है कि नेता जी ने सरकार की कमान अपने हाथ मे ले रखी है। पिछले करीब 2 माह से वे लगातार अफसरों और मंत्रियों की लगाम टाइट करने की ताकीद देते देते मुलायम सिंह यादव लगता है अब थक चुके है इसलिए अब उन्होंने अखिलेश सरकार को दुरुस्त करने का खाका तैयार कर लिया है। बुधवार को उनके रुख से उत्तर प्रदेश के राजनीतिक और प्रशासनिक अमले मे हड़कंप मच गया है।
अब मुलायम सिंह यादव सिर्फ अफसरों तक ही सीमित नही रहे, उन्होने अखिलेश के मंत्रियो को भी बुरी तरह से आड़े हाथों लिया है और सपा के पुख्ता सूत्रों का दावा है कि मुलायम सिंह यादव ने अखिलेश यादव से कम से कम दस मंत्रियो को पद मुक्त करने का फरमान जारी किया है।
उत्तर प्रदेश में दो जिलों के एसएसपी और डीएम को छोड करके पूरे प्रदेश के पुलिस प्रमुख और जिला प्रमुख सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के पैमाने पर खरे नही उतर रहे है इसलिये उन्होने अपने मुख्यमंत्री बेटे अखिलेश यादव से सभी को हटाने के लिये संकेतिक तौर पर कह दिया है। मुलायम सिंह यादव के इस बयान को लेकर कई मायने लगाये जा रहे है कहा जा रहा है कि मुलायम सिंह यादव काफी दिनो से अखिलेश सरकार के मंत्रियो और अफसरो से खासे नाखुस है पहले अफसरो और उसके बाद मंत्रियो की आयेगी बारी ऐसा माना जा रहा है।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री मुलायम सिंह यादव ने आज यहां कहा कि प्रदेश के विकास की गाड़ी पिछले पांच साल में पटरी से उतर गई थी। बसपा राज में प्रदेश में जबरर्दस्त लूट हुई। विकास के काम ठप्प रहे। बिजली की एक यूनिट नहीं लगी। ऐसी मुख्यमंत्री थी जो मंत्री-विधायकों तक से नहीं मिलती थी, आम आदमी की तो बात ही बेकार है। समाजवादी पार्टी सरकार हालात बदल रही है। पांच साल के कई वायदे 10 माह के अन्दर पूरे हो गए हैं।
सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव पार्टी उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ मे समाजवादी पार्टी मुख्यालय पर एकजुट सपा कार्यकर्ताओं को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होने कहा कि अब आम आदमी को अस्पतालों में मुफ्त इलाज मिल रहा है। किसानों का 50 हजार तक का कर्ज माफ है। सरकारी ट्यूबवेल और नहरों से सिंचाई का मुफ्त पानी दिया जा रहा है। कन्या विद्याधन और बेकारी भत्ता दिया गया है। लोकतंत्र रक्षक सेनानियों को पेंशन मिलेगी। मुस्लिम लड़कियो को, जो हाईस्कूल पास हैं, &0 हजार रूपए आगे की पढ़ाई और शादी के लिए दिए जा रहे हैं। उर्दू को रोजी रोटी से जोड़कर मुस्लिमों को नौकरियों में अवसर दिए जा रहे हैं। इन सबकी नकल अब दूसरे प्रदेशों की सरकारें कर रही हैं।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि समाजवादी पार्टी के शासनकाल में 17 पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने का शासनादेश सन् 2005 में जारी किया गया था। वर्ष 2007 में बसपा की सरकार बनने पर इन जातियों को मिल रही तमाम सुविधाओं से वंचित कर दिया गया। अब 16 फरवरी,201& को इन जातियों का सम्मेलन बुलाया गया हैं। उन्होने कहा कि दलितों की छोटी जातियों की कहीं पूछ नहीं होती थी। समाजवादी पार्टी ने उनकी पहचान बनाई। छोटी जाति के नेताओं को विधायक तथा दूसरे पद देकर सम्मानित किया गया।
यादव ने माना कि पिछली बसपा संस्कृति के प्रदूषण से बहुत से अफसर बेलगाम हो गए थे। उनकी आदतें बिगड़ी हुई थी। धीरे-धीरे अब इनमे बदलाव भी हो रहा है। भ्रष्टाचार पर रोक लगी हैं। अधिकारी डरने लगे हैं। मुख्यमंत्री के लिए सुझाव है कि वे कुछ बड़े अधिकारियों के दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्यवाही करें। साथ ही उन्होने कार्यकर्ताओं और पार्टी नेताओं को भी ताकीद दी कि वे अफसरों की ट्रांसफर पोस्टिंग में रूचि न लें। उन्होने कहा उत्तर प्रदेश एक बड़ा प्रदेश है। इसलिए एक बार ब्यूरोक्रेसी की ओवर हालिंग होनी चाहिए। कार्यकर्ता अधिकारियों की चापलूसी करने से बचें। श्री यादव ने सलाह दी कि पार्टी कार्यकर्ताओं को सरकार की उपलब्धियों की ठीक से जानकारी लेकर जनता के बीच उनको प्रचारित प्रसारित करना चाहिए। कार्यकर्ताओं को अपने सभी लोकसभा प्रत्याशियों को जिताना चाहिए ताकि सन् 2014 में दिल्ली में समाजवादी पार्टी के निर्णायक हस्तक्षेप की स्थिति बन सके।
लोकसभा चुनावों में हार के बाद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जून में एक राज्यमंत्री को बर्खास्त करते हुए आधा दर्जन मंत्रियों के विभागों में फेरबदल किया था मगर क्षेत्रीय व जातीय समीकरण दुरुस्त नहीं हो पाया था, लिहाजा कुछ दिन बाद ही नए सिरे मंत्रिमंडल में बदलाव की सुगबुगाहट शुरू हुई। समाजवादी परिवार के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, मंत्री शिवपाल यादव, प्रो.राम गोपाल यादव के साथ मंत्रिमंडल में फेरबदल पर चर्चा की और खराब कामकाज वाले मंत्रियों के हटाने के संकेत भी दिए। कई बार मिले इन संकेतों का कोई नतीजा सामने नहीं आया।
अब सोमवार को फिर विक्रमादित्य मार्ग स्थित आवास पर मुलायम सिंह यादव, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, प्रो.राम गोपाल यादव के बीच बैठक हुई। थोड़ी ही देर चली इस बैठक में राज्यपाल के बयानों से सरकार की किरकिरी, कानून व्यवस्था की हालत, मंत्रिमंडल में फेरबदल, नामित कोटे की पांच एमएलसी सीटों के लिए राजभवन से नये सिरे से मांगे गए नामों पर चर्चा के अलावा जनवरी में रिक्त होने वाली निकाय कोटे की 36 सीटों के प्रत्याशियों को लेकर भी चर्चा हुई। तय किया गया कि जल्द से जल्द प्रत्याशी घोषित कर दिये जाएं। इस बैठक के तुरंत बाद मुलायम सिंह यादव दिल्ली रवाना हो गए और अखिलेश यादव मुख्यमंत्री आवास चले गए। प्रो.राम गोपाल ने जरूर इतना कहा कि 'वह व्यक्तिगत रूप से मंत्रिमंडल में नये चेहरे देखना चाहते हैं मगर इस पर फैसला लेने का अधिकार मुख्यमंत्री का है। वही इस पर कोई निर्णय लेंगे।Ó प्रो.राम गोपाल यादव ने यह भी कहा मंत्रिमंडल में बदलाव हो सकता है, नहीं भी हो सकता है। कयासों को हवा देने वाले इसबयान से संकेत तो मिल ही रहा है कि मंत्रिमंडल में फेरबदल को लेकर समाजवादी परिवार 'एक रायÓ नहीं बना पायी है लेकिन मिशन-2017 की दिशा में कदम बढ़ाने से पहले मंत्रिमंडल विस्तार व बदलाव होगा ही।
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सियासी गलियारों में चर्चा थी कि इस बैठक के बाद मंत्रियों के सामूहिक इस्तीफे लिए जा सकते हैं। साथ ही अखिलेश यादव अपने मंत्रिमंडल में फेरबदल भी कर सकते हैं। हालांकि ऐसा कोई ठोस फैसले नहीं किया जा सका। प्रदेश सरकार के सभी कैबिनेट मंत्री , स्वतंत्र प्रभार राÓयमंत्री भी बैठक में मौजूद रहे।
चनावी हार की वजह से उठाया कदम
लोकसभा चुनावों में शिकस्त के बाद प्रदेश की सत्तारूढ़ सपा सरकार में बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे थे। उम्मीद की जा रही थी यह बदलाव न केवल मंत्रिमंडल में होंगे बल्कि संगठनात्मक ढांचे में भी फेरबदल कि?ए जाएंगे। शुक्रवार को सीएम अखि?लेश की यूपी के गवर्नर से मुलाकात और शनिवार को सपा सुप्रीमो के निवास पर हुई बैठक के बाद यह तय माना जा रहा था। सपा सुप्रीमो के निवास पर शनि?वार को हुई बैठक में सीएम अखिलेश और शिवपाल यादव सहित सरकार के कुछ विश्वासपात्र अधिकारी भी शामिल थे। माना जा रहा है इस बैठक में मंत्रिमंडल में परिवर्तन और विस्तार को लेकर चर्चा हुई। अब इसे रवि?वार को अमलीजामा पहनाया जा सकता है।
बीते तीन हफ्तों से यूपी के सीएम अखि?लेश लोकसभा चुनावों में हुई हार के बाद डैमेज कंट्रोल में लगे हैं। अभी तक जो भी फेरबदल हुए हैं वे ब्यूरोक्रेसी तक सीमित थे। इस बड़े फेरबदल में 150 से अधिक आईएएस, आईपीएस, पीसीएस और पीपीएस अधिकारी शामिल थे। इसके बाद अब मंत्रिमंडल में फेरबदल की तैयारी है। इस फेरबदल में कई मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है। इसी के साथ चुनावों के ठीक पहले हटाए गए मनोज पारस और आनंद सिंह को दोबारा मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है।
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अखिलेश यादव भले ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हों लेकिन नेताजी जिस अंदाज मे अखिलेश सरकार की ओवर हालिंग कराने के लिये लगातार बोल रहे है उससे ऐसा लगने लगा है कि नेता जी ने सरकार की कमान अपने हाथ मे ले रखी है। पिछले करीब 2 माह से वे लगातार अफसरों और मंत्रियों की लगाम टाइट करने की ताकीद देते देते मुलायम सिंह यादव लगता है अब थक चुके है इसलिए अब उन्होंने अखिलेश सरकार को दुरुस्त करने का खाका तैयार कर लिया है। बुधवार को उनके रुख से उत्तर प्रदेश के राजनीतिक और प्रशासनिक अमले मे हड़कंप मच गया है।
अब मुलायम सिंह यादव सिर्फ अफसरों तक ही सीमित नही रहे, उन्होने अखिलेश के मंत्रियो को भी बुरी तरह से आड़े हाथों लिया है और सपा के पुख्ता सूत्रों का दावा है कि मुलायम सिंह यादव ने अखिलेश यादव से कम से कम दस मंत्रियो को पद मुक्त करने का फरमान जारी किया है।
उत्तर प्रदेश में दो जिलों के एसएसपी और डीएम को छोड करके पूरे प्रदेश के पुलिस प्रमुख और जिला प्रमुख सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के पैमाने पर खरे नही उतर रहे है इसलिये उन्होने अपने मुख्यमंत्री बेटे अखिलेश यादव से सभी को हटाने के लिये संकेतिक तौर पर कह दिया है। मुलायम सिंह यादव के इस बयान को लेकर कई मायने लगाये जा रहे है कहा जा रहा है कि मुलायम सिंह यादव काफी दिनो से अखिलेश सरकार के मंत्रियो और अफसरो से खासे नाखुस है पहले अफसरो और उसके बाद मंत्रियो की आयेगी बारी ऐसा माना जा रहा है।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री मुलायम सिंह यादव ने आज यहां कहा कि प्रदेश के विकास की गाड़ी पिछले पांच साल में पटरी से उतर गई थी। बसपा राज में प्रदेश में जबरर्दस्त लूट हुई। विकास के काम ठप्प रहे। बिजली की एक यूनिट नहीं लगी। ऐसी मुख्यमंत्री थी जो मंत्री-विधायकों तक से नहीं मिलती थी, आम आदमी की तो बात ही बेकार है। समाजवादी पार्टी सरकार हालात बदल रही है। पांच साल के कई वायदे 10 माह के अन्दर पूरे हो गए हैं।
सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव पार्टी उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ मे समाजवादी पार्टी मुख्यालय पर एकजुट सपा कार्यकर्ताओं को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होने कहा कि अब आम आदमी को अस्पतालों में मुफ्त इलाज मिल रहा है। किसानों का 50 हजार तक का कर्ज माफ है। सरकारी ट्यूबवेल और नहरों से सिंचाई का मुफ्त पानी दिया जा रहा है। कन्या विद्याधन और बेकारी भत्ता दिया गया है। लोकतंत्र रक्षक सेनानियों को पेंशन मिलेगी। मुस्लिम लड़कियो को, जो हाईस्कूल पास हैं, &0 हजार रूपए आगे की पढ़ाई और शादी के लिए दिए जा रहे हैं। उर्दू को रोजी रोटी से जोड़कर मुस्लिमों को नौकरियों में अवसर दिए जा रहे हैं। इन सबकी नकल अब दूसरे प्रदेशों की सरकारें कर रही हैं।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि समाजवादी पार्टी के शासनकाल में 17 पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने का शासनादेश सन् 2005 में जारी किया गया था। वर्ष 2007 में बसपा की सरकार बनने पर इन जातियों को मिल रही तमाम सुविधाओं से वंचित कर दिया गया। अब 16 फरवरी,201& को इन जातियों का सम्मेलन बुलाया गया हैं। उन्होने कहा कि दलितों की छोटी जातियों की कहीं पूछ नहीं होती थी। समाजवादी पार्टी ने उनकी पहचान बनाई। छोटी जाति के नेताओं को विधायक तथा दूसरे पद देकर सम्मानित किया गया।
यादव ने माना कि पिछली बसपा संस्कृति के प्रदूषण से बहुत से अफसर बेलगाम हो गए थे। उनकी आदतें बिगड़ी हुई थी। धीरे-धीरे अब इनमे बदलाव भी हो रहा है। भ्रष्टाचार पर रोक लगी हैं। अधिकारी डरने लगे हैं। मुख्यमंत्री के लिए सुझाव है कि वे कुछ बड़े अधिकारियों के दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्यवाही करें। साथ ही उन्होने कार्यकर्ताओं और पार्टी नेताओं को भी ताकीद दी कि वे अफसरों की ट्रांसफर पोस्टिंग में रूचि न लें। उन्होने कहा उत्तर प्रदेश एक बड़ा प्रदेश है। इसलिए एक बार ब्यूरोक्रेसी की ओवर हालिंग होनी चाहिए। कार्यकर्ता अधिकारियों की चापलूसी करने से बचें। श्री यादव ने सलाह दी कि पार्टी कार्यकर्ताओं को सरकार की उपलब्धियों की ठीक से जानकारी लेकर जनता के बीच उनको प्रचारित प्रसारित करना चाहिए। कार्यकर्ताओं को अपने सभी लोकसभा प्रत्याशियों को जिताना चाहिए ताकि सन् 2014 में दिल्ली में समाजवादी पार्टी के निर्णायक हस्तक्षेप की स्थिति बन सके।
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