Saturday, 10 October 2015

विशेष वक्फ न्यायाधिकरण बोर्ड गठित करने की तैयारी

लोकसभा चुनावों से पहले मुसलमानों को पाले में गोलबंद करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है फैसला

परवेज़ अहमद, लखनऊ: लोकसभा चुनावों की डुगडुगी से पहले मुसलमानों को गोलबंद करने की मुहिम में जुटी राज्य की समाजवादी सरकार ने विशेष वक्फ न्यायाधिकरण बोर्ड गठित करने की तैयारी पूरी कर ली है। बोर्ड में जिला जज स्तर के न्यायिक अधिकारी अध्यक्ष, वक्फ कानून की समझ रखने वाले किसी भी व्यक्ति को सदस्य सचिव और वरिष्ठ पीसीएस अधिकारी को न्यायिक सदस्य नियुक्त किये जाने का प्रस्ताव है। आदर्श चुनावी आचार संहिता से पहले ही इस प्रस्ताव को मंजूर किये जाने के आसार हैं।
प्रदेश में सुन्नी व शिया वक्फ बोर्ड बना हुआ है, जहां उत्तर प्रदेश वक्फ एक्ट 1995 के नियमों की रोशनी में मदरसों, दरगाहों, इमामबाड़ों और वक्फ के रूप में दर्ज संपत्तियों के विवादों की सुनवाई और फैसले होते हैं। अब तक बोर्ड के फैसले के खिलाफ वादी या प्रतिवादी संबंधित जिलों के जिला जज के यहां अपील कर सकता था, क्योकि जिला जज में ही न्यायाधिकरण के अधिकार निहित थे। राज्य सरकार ने कुछ दिन पहले उत्तर प्रदेश वक्फ एक्ट 1995 में संशोधन कर वक्फ बोर्डो के फैसले के खिलाफ सुनवाई के लिए विशेष वक्फ न्यायाधिकरण बोर्ड गठित करने का अधिकार हासिल किया था।
  अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने सोमवार को विशेष न्यायाधिकरण बोर्ड का प्रस्ताव शासन भेजा, जिस पर सहमति जता दी गयी है। सूत्रों का कहना है कि प्रस्ताव में न्यायाधिकरण का अध्यक्ष रिटायर्ड जिला जज होगा या कार्यरत जिला जज इस खामोशी है लेकिन यह स्पष्ट है कि अध्यक्ष जिला जज स्तर का होगा। इसके अलावा वक्फ कानूनों की जानकारी रखने वाला कोई व्यक्ति सदस्य सचिव और एक वरिष्ठ पीसीएस सदस्य न्यायिक होगा। जिनकी नियुक्ति राज्य सरकार करेगी।  इस प्रक्रिया से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि आदर्श  आचार संहिता से पहले ही सरकार विशेष न्यायाधिकरण बोर्ड के गठन को मंजूरी प्रदान कर देगी। वक्फ बोर्ड के चेयरमैन जफर फारुकी का कहना है कि इससे मुकदमों का निस्तारण तेजी से होगा।



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