Friday, 9 October 2015

पाकिस्तानी युवक शातिर फिदाइन हैं



परवेज़ अहमद, लखनऊ : अफगानिस्तानी संगठन तहरीक-ए-तालिबान से प्रशिक्षित पाकिस्तानी युवक शातिर फिदाइन हैं या नौसिखिये आतंकी? पुलिस अभिरक्षा में तीन दिनों से चल रही पूछताछ में सुरक्षा एजेंसियों कोइस सवाल का माकूल जवाब नहीं मिल पाया है। लिहाजा अब झूठ पकडऩे वाली मशीन के जरिए उनसे सच उगलवाने की तैयारी है।
गोरखपुर रेलवे स्टेशन के करीब से गिरफ्तार पाकिस्तानी आतंकी अब्दुल वलीद व फहीम यूपी पुलिस की आतंकवाद निरोधक इकाई (यूपी-एटीएस) की अभिरक्षा में हैं। जहां उनसे पूछताछ हो रही है। सूत्रों का कहना है कि आतंकियों में से एक  कक्षा आठ व दूसरा मैट्रिक फेल है। दोनों पाकिस्तान के निम्न आर्थिक आय वाले परिवार से ताल्लुक रखते हैं फिर भी वे बेहद चतुराई से सवालों को टाल रहे हैं। सूत्रों पर भरोसा किया जाए तो  आतंकि यों कई बार दोहराया है कि वह यूपी (उत्तर प्रदेश) को छोटा सा कस्बा और गोरखपुर को एक मोहल्ला समझते थे। जहां उन्हें अज्ञात व्यक्ति टारगेट देने वाला था। हालांकि उस अज्ञात का हुलिया और पहचान का कोड उनके पास था। वे यूपी के दूसरे शहरों, हिस्सों के बारे में कुछ भी नहीं जानते हैं। उनके ऐसे जवाबों से जांच अधिकारी भौचक हैं।
सूत्रों का कहना है कि गिरफ्तार आतंकियों ने खुलासा किया है कि उन्होंने दो साल पहले तहरीक-ए-तालिबान के शिविर से शस्त्र चलाने व चैटिग का प्रशिक्षण लिया था। उनके जैसे कई सौ पाकिस्तानी युवक अफगानिस्तान के शिविरों से असलहा चलाने, खुद को छिपाने और जांच एजेंसियों को गुमराह करने का प्रशिक्षण ले चुके हैं। अलकायदा से जुड़े कुछ खतरनाक आतंकवादी ऐसे युवकों के दिल में समय-समय पर भारत के प्रति नफरत भरकर उन्हें नेपाल के रास्ते घुसपैठ कराने की मुहिम चलाते हैं।
सूत्रों का कहना है कि पूछे गए सवालों के आतंकी जिस तरह से जवाब दे रहे हैं, उससे उनके शातिर फिदाइन होने या फिर नौसिखिए होने का संदेह है। अधिकारियों को यह सवाल भी मथ रहा है कि अगर ये दोनों भारत में घुसते ही गोरखपुर में धर लिये गए और यूपी को कस्बे के रूप में जानते हैं तो फिर इनका गाइड कौन था? उस गाइड का आका कौन है? युवकों के पास से बरामद सिम नम्बरों से कुछ नम्बरों पर ही बमुश्किल 15-20 सेकेण्ड की बात हुई है। जिनका विश्लेषण हो रहा है। एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि इसमें तो कोई संदेह नहीं है कि इन दोनों को निहत्थे व्यक्तियों पर हमला करना था। संदेह है ये पुलिस दल हो सकता है। रैली, भीड़ और सैलानियों पर हमले के अंदेशे को भी खारिज नहीं किया जा सकता है।

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