Thursday, 15 October 2015

गाढ़ी हो रही मुलायम-मोदी की दोस्ती !

12 oct 2015



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 लखनऊ : समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच 'दोस्तीÓ गहरा रही है? एक-दूसरे की तारीफ फिर राजनीतिक वार में नरमी, अब अच्छे कामों की सराहना में हिचक नहीं होने के मुलायम सिंह यादव के एलान से सियासी हलकों में कुछ ऐसे ही निहतार्थ निकाले जा रहे हैं।
संसद के मानसून सत्र की कार्यवाही में अवरोध पर सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए सत्र चलाने की पक्षधरता जाहिर की थी, जिसके चंद दिनों बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नेसहारनपुर में मुलायम को 'लोकतंत्र रक्षकÓ की उपमा से नवाज दिया। लोकसभा चुनाव में मुलायम पर वार के लिए इस्तेमाल '56 इंच की छातीÓ के जुमलों से इतर प्रधानमंत्री की इस सराहना को सपाइयों ने 'व्यवहारÓ निभाने की परम्परा के रूप में रेखांकित किया, मगर वक्त के साथ दोनों नेताओं के बीच चलने वाले सियासी तीरों का कसैलापन भी घटने लगा।
तीन सितंबर को बिहार में महागठंधन की अगुआ समाजवादी पार्टी ने अचानक गठबंधन से नाता तोड़ अपने बूते चुनावी जंग की घोषणा कर दी, इसकी जाहिरा वजह सीटों के बंटवारे में तवज्जो नहीं मिलना बतायी गई, मगर सियासी इकरार व इंकार की भाषा समझने का दावा करने वालों ने फैसले के पीछे मुलायम व मोदी में नजदीकी के रूप में देखा। यादव सिंह प्रकरण में सीबीआइ जांच को भी एक कारण बताया गया।
22 सितंबर को पूर्व सांसद मोहन सिंह की पुण्यतिथि पर मुलायम सिंह ने फिर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नरम रूख दिखाया और सवाल उठाया कि अच्छे कार्यो की तारीफ में बुराई क्या है?
और अब 12 अक्टूबर को लोहिया के विचारों व उनकी नीतियों का उल्लेख कर मुलायम सिंह ने कहा कि 'राष्ट्रहित, भाषा और सीमाÓ के मुद्दे पर वह भाजपा के साथ हैं। सीमा की सुरक्षा को लेकर वह पहले भी केन्द्र की सरकारों का समर्थन करते रहे हैं मगर डा.लोहिया के 'राजनीतिक छुआछूतÓ खत्म करने के विचारों की याद दिलाते हुए जिस अंदाज में कहा कि प्रधानमंत्री के अच्छे कामों की तारीफ करने में उन्हें हिचक नहीं है, उससे दोनों के बीच रिश्ते गाढ़े होने की सियासी चर्चाओं को बल मिला है। एक राजनीतिक विश्लेषक का कहना है कि मुलायम सिंह ने पार्टी के फोरमों पर भाजपा के नेता व प्रधानमंत्री की ऐसी तारीफ नहीं की। अटलजी को कुछ बातों के लिए सराहा लेकिन वह भी इस अंदाज में नहीं। उनका मानना है कि इस सराहना के पीछे कोई सियासी मजबूरी हो सकती है, इससे इनकार नहीं किया जा सकता।

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