मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने चार ब्राह्मण मंत्रियों के पर कतरे है। प्रदेश के मनोरंजन कर राज्यमंत्री पद से तेज नारायण पांडेय उर्फ पवन पांडेय की मंत्रिमंडल से छुट्टी करने के अलावा चुनाव से पहले कैबिनेट मंत्री बनाए गए मनोज पांडेय से कृषि जैसा अहम विभाग को लेकर विज्ञान व प्रौद्योगिकी विभाग थमा दिया गया है। इसी क्रम में ब्रह्माशंकर त्रिपाठी को भी हलका किया गया है। त्रिपाठी के पास से व्यवसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग लेकर केवल होमगार्ड व प्रांतीय रक्षक दल विभाग तक समेट दिया गया। इतना ही नहीं विजय कुमार मिश्र राज्य मंत्री(स्वतंत्र प्रभार) का भी कद घटा। विजय के पास से अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत विभाग हटा उनको धर्मार्थ कार्य में लगा दिया गया।
बलिया में सपा प्रत्याशी के चुनाव हारने की सजा देते हुए राम गोविंद चौधरी से बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग हटा दिया और नारद राय का खेल एवं युवा कल्याण विभाग बदल कर खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग दिया गया। फेरबदल की इस कड़ी में सपा प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी को भी नुकसान हुआ। चौधरी से कारागार मंत्रालय ले कर राजनैतिक पेंशन जैसा महत्वहीन विभाग दे दिया गया है। जाट वोट न मिलना भी राजेंद्र चौधरी का कद कम होने की वजह माना जा रहा है परन्तु सूत्रों का कहना है कारागार विभाग में अधिक ध्यान न दे पाने के कारण भी उनका काम घटाया गया।
कैबिनेट मंत्री बलराम यादव से पंचायती राज विभाग लिए जाने के पीछे उनका लचर प्रदर्शन भी माना जा रहा है। भूख मुक्ति योजना के तहत गरीबों को कंबल व साड़ी बांटने की योजना पर अमल न हो पाने से सरकार की काफी किरकिरी हुई थीे। इतना ही नहीं निर्मल भारत अभियान में ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालय निर्माण कार्य सुस्त होने का खामियाजा भी बलराम को भुगतना पड़ा। माध्यमिक शिक्षा विभाग नवाब महमूद इकबाल से वापस लेना भी उनके समर्थकों को हजम नहीं हो पा रहा। माना जा रहा है कि आजम खां से पंगा लेना महमूद को भारी साबित हुआ। महमूद इकबाल से माध्यमिक शिक्षा विभाग लेकर उनके पडौसी महबूब अली को सौंपने से स्थानीय सियायत में उलटफेर होने के कयास लगाए जा रहे है।
---------------------
No comments:
Post a Comment