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-आजम हैं कि बोलते ही जाते...
-लगातार विवादित बयानों से किरकिरी, सपा ने पल्ला झाड़ा
-हलाल गोश्त के बयान से मुसलमानों में भी नाराजगी
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पहले दो बयान-
हम भगवा भारत के पीडि़त हैं।
16 अक्टूबर, लखनऊ में
-'मोदी सियासत छोड़ दें और मंदिर में जाकर घंटा बजाएं।
-14 अक्टूबर, कानपुर में
दोनों बयान सपा सरकार में नंबर दो की हैसियत वाले मंत्री आजम खां के हैं। वह ऐसा ही तीखा बोलते हैं, फिर चाहे उससे विवाद हो, उनकी पार्टी के लिए असहज स्थिति हो या उनके बोलने के बाद चारों तरफ से शुरू होने वाला बयान युद्ध हो।
आजम खां नगर विकास मंत्री हैं। यह ऐसा विभाग है जिसका काम और विफलता सबसे पहले दिखती है लेकिन, तीन साल में यह विभाग अपने काम की बदौलत कम, अपने मंत्री के कारण अधिक जाना गया। यही आजम हैं जिन्होंने बीते लोकसभा चुनाव के दौरान गाजियाबाद में कहा था कि, 1999 के कारगिल युद्ध में मुस्लिम सैनिकों ने भारत को फतह दिलाई। आजम के मुताबिक जब कारगिल मोर्चा जीता गया तो वहां कोई हिंदू सैनिक नहीं था। दो दिन पहले यह कहकर उन्होंने मुसलमानों को भी नाराज कर दिया कि, निर्यात किया जा रहा गोश्त हलाल का नहीं झटके का है और हज, उमरा पर जाने वाले वहां गोश्त न खाएं।Ó
समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में एक आजम की पहचान सोशलिस्ट नेता की रही। वर्ष 2012 में समाजवादी सरकार बनने के बाद उनके जुमलों ने पार्टी के लिए मुश्किलें खड़ी कीं। कारगिल की लड़ाई पर उनके बयान को चुनाव आयोग ने भी 'सद्भाव बिगाडऩेÓ वाला माना था। अपनी ही सरकार के डीजीपी को लिखे उनके खत, प्रधानमंत्री से लेकर अन्य नेताओं के लिए इस्तेमाल उनके जुमले और फैसलों विवादों में रहे। उनके अपर निजी सचिवों ने तो उनके साथ काम करने से ही इंकार कर दिया। दादरी के बिसाहड़ा कांड को यूएन ले जाने का एलान कर आजम ने अपनी ही सरकार को सकते में ला दिया। यही कारण था कि दूसरे ही दिन एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस बयान को यह कहते हुए खारिज किया कि घर के मसले घर में सुलझाये जाने चाहिए।
मुलायम परिवार में आजम पर एकराय नहीं है। गुरुवार को मेरठ में समाजवादी पार्टी के महासचिव शिवपाल यादव ने कह ही दिया कि आजम का यूएन वाला बयान उनकी निजी राय थी। इसके विपरीत इस दौरान मुलायम सिंह दो बार सार्वजनिक मंच पर आए मगर इस मुद्दे पर चुप्पी साधे रहे। सपा प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने भी कुछ कहने से साफ इंकार कर दिया। यह सवाल अब आम है कि क्या समाजवादी पार्टी को आजम के बयानों से सियासी नुकसान का खतरा सताने लगा है।
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आजम को अतिरिक्त आजादी : माथुर
आजम खां के बयानों से विवाद की स्थिति बनने पर कांग्रेस विधानमंडल दलनेता प्रदीप माथुर का कहना है कि अखिलेश सरकार में आजम खां को अतिरिक्त आजादी मिली है इसीलिए वह कुछ भी बयान दे सकते है और देते भी रहे है। इसबाबत इससे अधिक कुछ कहना मुनासिब न होगा।
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आजम के बोल
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-'गूगल में पर टॉप 10 क्रिमिनल सर्च करने पर नरेंद्र मोदी का नाम आता है।Ó
-'बच्चे पैदा करने के लिए मर्दानगी की जरूरत होती है, पुरस्कार बांटने से बच्चे पैदा नहीं होते।Ó
-'मुसलमान खौफजदा है, उन्हें कुर्बानी से रोका जा रहा है, उनकी धार्मिक भावनाएं आहत की जा रही हैं।Ó
-आजम हैं कि बोलते ही जाते...
-लगातार विवादित बयानों से किरकिरी, सपा ने पल्ला झाड़ा
-हलाल गोश्त के बयान से मुसलमानों में भी नाराजगी
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पहले दो बयान-
हम भगवा भारत के पीडि़त हैं।
16 अक्टूबर, लखनऊ में
-'मोदी सियासत छोड़ दें और मंदिर में जाकर घंटा बजाएं।
-14 अक्टूबर, कानपुर में
दोनों बयान सपा सरकार में नंबर दो की हैसियत वाले मंत्री आजम खां के हैं। वह ऐसा ही तीखा बोलते हैं, फिर चाहे उससे विवाद हो, उनकी पार्टी के लिए असहज स्थिति हो या उनके बोलने के बाद चारों तरफ से शुरू होने वाला बयान युद्ध हो।
आजम खां नगर विकास मंत्री हैं। यह ऐसा विभाग है जिसका काम और विफलता सबसे पहले दिखती है लेकिन, तीन साल में यह विभाग अपने काम की बदौलत कम, अपने मंत्री के कारण अधिक जाना गया। यही आजम हैं जिन्होंने बीते लोकसभा चुनाव के दौरान गाजियाबाद में कहा था कि, 1999 के कारगिल युद्ध में मुस्लिम सैनिकों ने भारत को फतह दिलाई। आजम के मुताबिक जब कारगिल मोर्चा जीता गया तो वहां कोई हिंदू सैनिक नहीं था। दो दिन पहले यह कहकर उन्होंने मुसलमानों को भी नाराज कर दिया कि, निर्यात किया जा रहा गोश्त हलाल का नहीं झटके का है और हज, उमरा पर जाने वाले वहां गोश्त न खाएं।Ó
समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में एक आजम की पहचान सोशलिस्ट नेता की रही। वर्ष 2012 में समाजवादी सरकार बनने के बाद उनके जुमलों ने पार्टी के लिए मुश्किलें खड़ी कीं। कारगिल की लड़ाई पर उनके बयान को चुनाव आयोग ने भी 'सद्भाव बिगाडऩेÓ वाला माना था। अपनी ही सरकार के डीजीपी को लिखे उनके खत, प्रधानमंत्री से लेकर अन्य नेताओं के लिए इस्तेमाल उनके जुमले और फैसलों विवादों में रहे। उनके अपर निजी सचिवों ने तो उनके साथ काम करने से ही इंकार कर दिया। दादरी के बिसाहड़ा कांड को यूएन ले जाने का एलान कर आजम ने अपनी ही सरकार को सकते में ला दिया। यही कारण था कि दूसरे ही दिन एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस बयान को यह कहते हुए खारिज किया कि घर के मसले घर में सुलझाये जाने चाहिए।
मुलायम परिवार में आजम पर एकराय नहीं है। गुरुवार को मेरठ में समाजवादी पार्टी के महासचिव शिवपाल यादव ने कह ही दिया कि आजम का यूएन वाला बयान उनकी निजी राय थी। इसके विपरीत इस दौरान मुलायम सिंह दो बार सार्वजनिक मंच पर आए मगर इस मुद्दे पर चुप्पी साधे रहे। सपा प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने भी कुछ कहने से साफ इंकार कर दिया। यह सवाल अब आम है कि क्या समाजवादी पार्टी को आजम के बयानों से सियासी नुकसान का खतरा सताने लगा है।
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आजम को अतिरिक्त आजादी : माथुर
आजम खां के बयानों से विवाद की स्थिति बनने पर कांग्रेस विधानमंडल दलनेता प्रदीप माथुर का कहना है कि अखिलेश सरकार में आजम खां को अतिरिक्त आजादी मिली है इसीलिए वह कुछ भी बयान दे सकते है और देते भी रहे है। इसबाबत इससे अधिक कुछ कहना मुनासिब न होगा।
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आजम के बोल
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-'गूगल में पर टॉप 10 क्रिमिनल सर्च करने पर नरेंद्र मोदी का नाम आता है।Ó
-'बच्चे पैदा करने के लिए मर्दानगी की जरूरत होती है, पुरस्कार बांटने से बच्चे पैदा नहीं होते।Ó
-'मुसलमान खौफजदा है, उन्हें कुर्बानी से रोका जा रहा है, उनकी धार्मिक भावनाएं आहत की जा रही हैं।Ó
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