परवेज़ अहमद, लखनऊ: इंसानियत को शर्मसार करने वाले हत्यारों में से तीन दर्जन लोग कौन हैं, कहां रहते हैं? यह मुजफ्फरनगर पुलिस जानती है, फिर भी उसके हाथ अपराधियों की गिरेबान तक नहीं पहुंच रहे हैं। आखिर क्यों? ये सवाल शासन में उपलब्ध आंकड़ों से उठे हैं।
हजारों परिवार को तबाही के मुहाने पर खड़ा करने...और 64 लोगों को मौत की नींद सुलाने वाले उन्मादी हत्यारों में से 78 को मुजफ्फरनगर पुलिस पहचानती है। शासन को भेजी रिपोर्ट में मुजफ्फरनगर पुलिस ने खुद यह दावा किया है, उनकी ओर से कहा गया है कि हत्या में शामिल रहे अपराधियों में से 78 के नाम प्रकाश में आ गए लेकिन गिरफ्तारी सिर्फ 40 की हो सकती है यानी लगभग 50 फीसद से ज्यादा हत्यारे उसकी गिरफ्त से दूर हैं।
इससे इतर गैर हत्या के दर्ज 101 मुकदमों की तफ्तीश में पुलिस 100 लोगों के नाम प्रकाश में आए फिर भी गिरफ्तारी 213 लोगों की कर डाली गयी।
इससे सवाल यह है कि तफ्तीश में प्रकाश में आने, नाम, ठौर का पता होने के बाद भी हत्या का आरोपित पुलिस की पकड़ से दूर हैं? जबकि और गैर हत्या के मामलों की तफ्तीश में प्रकाश में 100 व्यक्तियों का नाम-पता पुलिस के सामने आया और गिरफ्तारी 253 व्यक्तियों की हो गयी।
आंकड़ों पर नजर डालें तो दंगे के चलते मारे गए 64 लोगों के मामलों को सिर्फ 43 एफआइआर में समेट दिया गया। एक एफआइआर में कई-कई लोगों के मारे जाने का उल्लेख है। आइजी/ एडीजी राजकुमार विश्वकर्मा का कहना है कि विवेचना के लिए एसआइसी गठित है, जो पूरी निष्पक्षता से विवेचना करेगी। एफआइआर के तकनीकी पहुलओं की भी जांच होगी, जहां कोई चूक रह गयी होगी, उसे दूर किया जाएगा। दोषी गिरफ्तार होंगे। जिन लोगों का हत्या में नाम प्रकाश में आया है, उनको गिरफ्तार करने में शिथिलता नहीं होगी।
अपराध मुकदमे मृतक अभियुक्त
हत्या 43 65 78
गैर हत्या 102 00 100
गिरफ्तार मरे हत्याभियुक्त
40 03
213 --
(स्रोत: शासन में उपलब्ध आंकड़े)
हजारों परिवार को तबाही के मुहाने पर खड़ा करने...और 64 लोगों को मौत की नींद सुलाने वाले उन्मादी हत्यारों में से 78 को मुजफ्फरनगर पुलिस पहचानती है। शासन को भेजी रिपोर्ट में मुजफ्फरनगर पुलिस ने खुद यह दावा किया है, उनकी ओर से कहा गया है कि हत्या में शामिल रहे अपराधियों में से 78 के नाम प्रकाश में आ गए लेकिन गिरफ्तारी सिर्फ 40 की हो सकती है यानी लगभग 50 फीसद से ज्यादा हत्यारे उसकी गिरफ्त से दूर हैं।
इससे इतर गैर हत्या के दर्ज 101 मुकदमों की तफ्तीश में पुलिस 100 लोगों के नाम प्रकाश में आए फिर भी गिरफ्तारी 213 लोगों की कर डाली गयी।
इससे सवाल यह है कि तफ्तीश में प्रकाश में आने, नाम, ठौर का पता होने के बाद भी हत्या का आरोपित पुलिस की पकड़ से दूर हैं? जबकि और गैर हत्या के मामलों की तफ्तीश में प्रकाश में 100 व्यक्तियों का नाम-पता पुलिस के सामने आया और गिरफ्तारी 253 व्यक्तियों की हो गयी।
आंकड़ों पर नजर डालें तो दंगे के चलते मारे गए 64 लोगों के मामलों को सिर्फ 43 एफआइआर में समेट दिया गया। एक एफआइआर में कई-कई लोगों के मारे जाने का उल्लेख है। आइजी/ एडीजी राजकुमार विश्वकर्मा का कहना है कि विवेचना के लिए एसआइसी गठित है, जो पूरी निष्पक्षता से विवेचना करेगी। एफआइआर के तकनीकी पहुलओं की भी जांच होगी, जहां कोई चूक रह गयी होगी, उसे दूर किया जाएगा। दोषी गिरफ्तार होंगे। जिन लोगों का हत्या में नाम प्रकाश में आया है, उनको गिरफ्तार करने में शिथिलता नहीं होगी।
अपराध मुकदमे मृतक अभियुक्त
हत्या 43 65 78
गैर हत्या 102 00 100
गिरफ्तार मरे हत्याभियुक्त
40 03
213 --
(स्रोत: शासन में उपलब्ध आंकड़े)
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