-मेदांता अवध अस्पताल के शिलान्यास पर साथ दिखे मुलायम, अमर और अखिलेश
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लखनऊ : रिश्ता निभाने की अदा हो या दूर की सियासी कौड़ी, मगर यह साफ है कि समाजवादी परिवार में अमर सिंह की स्वीकार्यता बढ़ गयी है। जाहिर है, इससे उनकी 'घर वापसीÓ की संभावनाओं को और बल मिला है।
वर्ष 2009 में सपा से निकाले जाने के बाद पांच अक्टूबर, 2014 को हुए पार्टी के राष्ट्रीय अधिवेशन में अमर सिंह मंच पर दिखे थे। गुरुवार को वह फिर सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के साथ सार्वजनिक मंच पर दिखे। एक अंतर जरूर है। अक्टबूर, 2014 में अमर सिंह मंच पर गुमसुम से थे और अग्रिम पंक्ति के नेताओं ने उनसे मुलाकात में गुरेज किया था पर एक साल बाद का दृश्य ठीक उल्टा था। मुलायम के साथ उनका अंदाज-ए-गुफ्तगू भी जल्द 'घर वापसीÓ का संकेत दे रहा था। गुरुवार को मेदांता अवध अस्पताल के शिलान्यास मंच पर अमर सिंह चढ़े तो मुलायम सिंह ने उनका हाथ थामा हुआ था। उन्होंने अमर सिंह को अपने बगल की कुर्सी दी और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को दूसरी ओर बैठने का इशारा किया। कार्यक्रम के दौरान मुलायम, अमर और डा. नरेश त्रेहन में गुफ्तगू होती रही। अमर सिंह ने कागज पर कुछ लिखा और मुख्यमंत्री की ओर इशारा किया, तो उन्होंने लपककर कागज पकड़ा। पढ़ा और फिर हंस पड़े। कागज का वह टुकड़ा मुख्यमंत्री ने जेब में रख लिया। कार्यक्रम खत्म होने के बाद मुख्यमंत्री ने सीढिय़ां उतरने तक अमर सिंह को सहारा दिये रखा।
एक घंटे का कार्यक्रम अमर सिंह की सपा में वापसी की पटकथा तैयार हो जाने का संकेत दे रहा था। यह और बात है कि अमर सिंह इसे पारिवारिक रिश्ते की मिठास के रूप में रेखांकित करते हैं।
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रामगोपाल, आजम पक्ष में नहीं
सपा के राष्ट्रीय अधिवेशन के बाद से अब अमर सिंह और सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के बीच हुई मुलाकातों में से छह सार्वजनिक हो चुकी हैं। वह जब-तब अखिलेश से भी मिलते रहे हैं। मुलायम भी अमर को अपना करीबी बता चुके हैं। ऐसे में उनकी वापसी की राह खुल जाने की चर्चा होती है लेकिन सूत्रों का कहना है कि सपा महासचिव प्रो.राम गोपाल यादव और मोहम्मद आजम खां अमर की घर वापसी के पक्षधर नहीं हैं।
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