Saturday, 10 October 2015

कुछ को 'क्लीन चिट, कुछ 'गुनहगार


 परवेज़ अहमद, लखनऊ: जुर्म एक जैसा फिर भी कुछ को 'क्लीन चिटÓ मिल गयी, कुछ 'गुनहगारÓ ठहरा दिये गये। ये खामी सामान्य जांच एजेंसी से नहीं, सीबीआइ की तफ्तीश में हुई है। नतीजे में कई महिला डॉक्टर जेल के सीकचों के पीछे पहुंच गईं, कुछ आत्मसमर्पण की जुगत में हैं।
एनआरएचएम घोटाले की जांच कर रही सीबीआइ ने लखनऊ के मामले में 32 डॉक्टरों को आरोपित किया। जिनमें से 17 महिला हैं। इन पर एम्बुलेंस और बाल स्वास्थ्य योजना के तहत चले 'चार पहियाÓ वाहनों के संचालन में गड़बड़ी। वाहनों के चले बिना भुगतान करने का आरोप है, मगर ऐसे ही आरोपों वाले कुछ डॉक्टरों का नाम सीबीआइ के आरोप पत्र में फिलहाल नहीं है, यहीं से सीबीआइ की जांच सवालों के घेरे में है। मसलन, डॉ  गीता भारती, डॉ. इंदुबाला को जिस तरह के बिलों के सत्यापन के लिए वित्तीय अनियमितता का दोषी पाया गया, वैसी ही अनियमितता के बिल उपलब्ध होने पर भी सीएचसी मलिहाबाद, सीएचसी माल और सीएचसी काकोरी के पुरुष डॉक्टरों को 'क्लीन चिटÓ मिल गई। इनमें से एक चिकित्सालय में तैनात रही महिला डॉक्टर ने बिलों पर दर्ज हस्ताक्षर फर्जी होने का बयान दिया  और वह आरोप पत्र से बाहर हो गयी लेकिन दूसरी महिला डॉक्टर के  ऐसे ही बयान को सीबीआइ के विवेचनाधिकारी ने तर्क संगत नहीं माना।
लखनऊ रेडक्रास के एक डॉक्टर के सत्यापित बिलों की छाया प्रतियां उपलब्ध होने के बावजूद उन्हें आरोप पत्र से बाहर रखा गया, जबकि ऐसी ही गलती के लिए डॉ.(श्रीमती) रेखा चौधरी को आरोप बनाकर जेल भेज दिया गया।
सिर्फ इन बिन्दुओं पर ही तफ्तीश पर उंगली नहीं उठ रही बल्कि जिस एम्बुलेंस का फर्जी रूप से चलने के आरोप में डॉ.(श्रीमती) चित्रा सक्सेना, डॉ(श्रीमती) अंजली पंत और  डॉ.साधना त्रिपाठी को सीबीआइ ने दोषी ठहराया, वह एम्बुलेंस इन डॉक्टरों की तैनाती से पहले राष्ट्रीय ग्र्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) में पहले से ही चल रही थी, तब भी पहले के बिलों के सत्यापित करने वाले डॉक्टरों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। चार्जशीट में उनके नाम का उल्लेख तक नहीं है।
सूत्रों का कहना है कि एम्बुलेंस और चौपहिया वाहनों के सेवा प्रदात्ता(सर्विस प्रोवाइडर) कम्पनी और  डीपीओ (जिला परियोजना अधिकारी) के बीच अनुबंध हुआ। इन वाहनों के भुगतान के लिए प्रथम हस्ताक्षरी डीपीओ होते हैं, उनकी ओर से बिलों के भुगतान करने के साक्ष्य उपलब्ध हैं, फिर भी सीबीआइ की नजर में वह दोषी नहीं पाये गए।  अलबत्ता डॉ. नीलिमा ंिसह, डॉ.केके सक्सेना और डॉ.चन्द्रजीत यादव को आरोपित ठहरा दिया गया।
सूत्रों का कहना है कि एनआरएचएम घोटाले में आरोपित किये गये डॉक्टरों के परिजन सीबीआइ की कथित भेदभावपूर्ण कार्रवाई के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रही है।

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