Friday, 9 October 2015

सीतापुर के आसमान से नीचे निगाहें गड़ाए अखिलेश यादव

परवेज अहमद
...अरे, ये अस्पताल है। इतनी भीड़ क्यों हैं ? सीतापुर के आसमान से नीचे निगाहें गड़ाए अखिलेश यादव बुदबुदाए। फिर हेलीकाप्टर के पॉयलट से बोले-' वन राउंड डाउन, प्लीज।Ó फिर मुख्य सुरक्षा अधिकारी से कहा-स्वास्थ्य मंत्री को फोन लगाओ। तेज धूप में लोग खड़े हैं। आचार संहिता खत्म हो तो छाया का इंतजाम करवाऊँ। फिर संवाददाता से मुखातिब हो तंजिया जुमला उछाला-भाजपा इस पर नहीं बोलती। वे तो बस, इंसान और इंसान के बीच जितना रिश्ता-नाता जीवित है, उसे मार डालना चाहते हैं। शुक्र है, धर्म निरपेक्ष जनता का, जो इनके मंसूबे नाकाम कर रही है। देखिएगा, भाजपा के झूठे प्रचार की हवा निकल जाएगी। सपा यूपी में सबसे बड़ी ताकत होगी, उसके बगैर केन्द्र में सरकार नहीं बनेगी।
 कालिदास मार्ग स्थित आवास से मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के काम और प्रचार की शैली को परखने की शुरूआत की, तो कई अनकहे पहलू भी सामने आए। सुबह नौ बजे सैंडविच। काली चाय पीकर नाश्ते की मेज से उठे अखिलेश ड्राइंग रूम-१ में पहुंचे। इंतजार कर रहे कारागार मत्री, कृषि मंत्री से गुफ्तगू की। फिर ड्राइंग रूम नम्बर-२ में मौजूद उलमा से खैरियत पूछी। कार्यकर्ताओं से मिले।  और शुरू होगा चुनावी सफर। आवास के बाहर निकलते ही फरियादियों की भीड़ देख कहा-अरे इतने लोग? लामार्टिनयर ग्राउंड पर गाड़ी से  उतरे तो सबसे पहले डे-अफसर को फरियादियों से मिलने के लिए चेताया। और हेलीकाप्टर पर सवार हो गये। इंजन स्टार्ट होते ही संवाददाता ने पूछा कैसी है चुनावी फिजा? जवाब में अखिलेश ने कहा कि भाजपा दिलेरी से परिवर्तन का झूठ बोल रही है। मगर यह नहीं बता रही कि परिवर्तन की दिशा क्या होगी। रौ में वह बोले कि नरेन्द्र मोदी दूसरों को बुरा कहकर खुद बुलंद होने की कोशिश कर रहे हैं। मीडिया में विकास का मंत्र जपा जा रहा लेकिन अंदर खाने सांप्रदायिकता का जहर फैलाया जा रहा है। समाज के विभाजन की साजिशें हो रही हैं। ऐसे दल और लोगों का हश्र अच्छा नहीं होता।
अब उडऩखटोला सीतापुर के आकाश में था। यहां उन्हें एक अस्पताल की ओपीडी नजर आ गयी। बात का रूख बदला। उडऩखटोला नीचे कराया। अस्पताल की ओपीडी  छायादार बनाने की जरूरत जतायी।...हेलीकाप्टर ने फिर ऊंचाई पकड़ी तो पर्यावरण को लेकर उनका दर्द उभरा। कहा-नीचे देखिए ना, जल, जंगल और जमीन का विनाश हो रहा है। केन्द्र की सत्ता में हिस्सेदारी हुई तो इस दिशा में काम होगा।
हेलीकाप्टर मोहम्मदी में लैंड करने को हुआ तो कुछ चौकीदार सुरक्षा रिंग से दूर एक सांड़ को खदेड़ते नजर आए, अखिलेश मुस्कुराए। बोले-यह विजुअल मोदी जी को मिल जाए तो वह बाप-बेटे की सरकार का कोई किस्सा गढ़ लेंगे। मां-बेटे की सरकार की बात करेंगे... और न जाने क्या-क्या बोलेंगे। गुजरात माडल बताएंगे लेकिन मुफ्त शिक्षा,लैपटाप, बेरोजगारी भत्ता का वायदा नहीं कर पाएंगे। सफर के दौरान नौजवान मुख्यमंत्री ने युवाओं, महिलाओं, स्कूली बच्चों से जुड़ी योजनाओं का सिलसिलेवार जिक्र करते रहे, बताया कि चुनाव बाद बेरोजगारी दूर करने के लिए सेल्फ हेल्प ग्रुप की स्थापना होगी। दो लाख लोगों को सरकारी सेवा में भर्ती कराया जाएगा। इतनी साफ दृष्टि के बाद भी मुजफ्फरनगर के दंगों और कानून व्यवस्था की खराबी की वजह? अखिलेश ने कहा कुछ चूक हुई, लेकिन दुष्प्रचार ज्यादा हुआ। मुजफ्फरनगर में जितनी मदद हमने की, उतनी कभी नहीं हुई। फिर भी यह तकलीफ देह घटना तो है ही। अपराध पर दो दुष्प्रचार कुछ ज्यादा  ही है, फिर भी इस दिशा में अब और सख्ती होगी। और दिन का सफर पूरा कर हेलीकाप्टर से उतरे अखिलेश ने उत्साही नौजवान के अंदाज में जेब से मोबाइल निकाला। संवाददाता को थमा कर पायलटों के साथ तस्वीरें खिंचवाई....और कालिदास मार्ग स्थित घर लौटते ही घरेलू कर्मचारी से सवाल दागा-बच्चे कहां है और डिंपल?(अखिलेश की पत्नी) जवाब सुनकर वह अपने ड्राइंग रूम के सोफे पर धंस गए और निगाह दीवार की ओर उठायी, जहां 'सेव द टाइगरÓ स्लोगन के साथ शेर की तस्वीर देख मुस्कुराए और बोले-'खुशी दिल में हम अपने कम देखते हैं, अगर देखते हैं तो आवाम का गम देखते हैं।Ó

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