-समाजवादी पार्टी के प्रदेश कार्यालय में पूर्वांचल और पश्चिम में तबलीग करने वालों का लगा जमावड़ा
-सांप्रदायिकता का उभार देश के लिए सबसे बड़ा खतरा
-अल्पसंख्यकों के लिए चल रही योजनाओं पर अमल में आएगी तेजी-मुख्यमंत्री
परवेज़ अहमद, लखनऊ: प्रदेश की मुस्लिम सियासत नई करवट ले रही है। इस्लाम में यकीन रखने वालों को छोटी मगर जरूरी हिदायतों से आगाह कराने वाली 'तबलीगी-जमातÓ अब अपनों को वोट का महत्व बतायेगी। वोट के सही इस्तेमाल सेकौम को होने वाले फायदे की जानकारी देगी। फिलहाल वे समाजवादी पार्टी की नीतियों से मुतास्सिर (प्रभावित) है। लोकसभा चुनाव में इसी के पक्ष में लोगों को गोलबंद क रते नजर आ सकते हैं।
बुधवार को समाजवादी पार्टी के प्रदेश कार्यालय में सिर्फ मुसलमानों को इस्लाम के बुनियादी सिद्धांतों से बा-खबर करने वालों का (तबलीगी जमात के लोग) जमावड़ा था। इनमें से ज्यादातर पूर्वांचल के कुशीनगर, मऊ, देवरिया, आजमगढ़ से आए थे। शामली, गोंडा और लखनऊ भी इसमें शामिल थे। जिनमें से कोई मौलाना वहीदुद्दीन खां की लिखी 'सत्य की खोजÓ पुस्तक थामे था। कुछ 'क्या परलोक जीवन का अस्तित्व हैÓ शीर्षक वाले पम्फलेट पकड़े थे। एकाध के हाथ में राज्य सरकार की उपलब्धियों वाली किताब भी थी।
तकरीबन १२ बजे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, वरिष्ठ मंत्री शिवपाल यादव, मंत्री अहमद हसन वहां पहुंचे। तबलीक करने वाले एक हाल में जमा हुए। जहां मुख्यमंत्री ने उन्हें समाजवादी सरकार की नीतियां बतायीं। कहा कि सांप्रदायिक ताकतें तेजी से पांव पसार रही हैं। सत्ता के लिए सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की कोशिश हो रही है। समाजवादी पार्टी इनको रोकने के लिए संघर्ष कर रही है। फिर तबलीग करने वालों से उनकी दुश्वारियों पूछीं?
सूत्रों का कहना है कि ज्यादातर लोगों ने कहा कि अल्पसंख्यकों के हितों की योजनाएं ठीक से जमीन पर नहीं उतरीं। महीनों से छात्रवृत्तियां नहीं बंटी है। मदरसा छात्रों का बैंक में खाता नहीं खुल रहा। अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी हर कार्य में अड़चनें खड़ी कर रहे। कब्रिस्तानों की चहारदीवारी का कार्य बेहद धीमा है। अल्पसंख्यक आयोग गठित नहीं हुआ। वाराणसी से नरेन्द्र मोदी और आजमगढ़ से मुलायम ंिसह यादव के चुनाव लडऩे की चर्चा भी हुई।
अखिलेश व शिवपाल यादव ने भरोसा दिलाया कि योजनाएं उन तक पहुंचाने का मुकम्मल इंतजाम होगा। वे चुनाव में सांप्रदायिक शक्तियों को रोकने में जुटें। तकरीबन दो घण्टे लंबी चर्चा का निष्कर्ष था कि तबलीक करने वाले मुसलमानों को वोट की कीमत समझाएंगे। सांप्रदायिक ताकतों से आगाह रहने का संदेश भी देंगे। मऊ से आए शिक्षक मो.शमीम ने कहा कि राज्य में सांप्रदायिकता सबसे बड़ा खतरा है। जिससे समाजवादी पार्टी लड़ रही है। कोशिश होगी कि मुसलमानों को वोट तकसीम नहीं हो पाए। राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त आशू मलिक ने पश्चिमी यूपी में तबलीक से जुटे लोगों को समाजवादी पार्टी के करीब लाने की पहले तेज शुरू की थी, बुधवार का यह जमावड़ा उसी कड़ी का का हिस्सा था।
-सांप्रदायिकता का उभार देश के लिए सबसे बड़ा खतरा
-अल्पसंख्यकों के लिए चल रही योजनाओं पर अमल में आएगी तेजी-मुख्यमंत्री
परवेज़ अहमद, लखनऊ: प्रदेश की मुस्लिम सियासत नई करवट ले रही है। इस्लाम में यकीन रखने वालों को छोटी मगर जरूरी हिदायतों से आगाह कराने वाली 'तबलीगी-जमातÓ अब अपनों को वोट का महत्व बतायेगी। वोट के सही इस्तेमाल सेकौम को होने वाले फायदे की जानकारी देगी। फिलहाल वे समाजवादी पार्टी की नीतियों से मुतास्सिर (प्रभावित) है। लोकसभा चुनाव में इसी के पक्ष में लोगों को गोलबंद क रते नजर आ सकते हैं।
बुधवार को समाजवादी पार्टी के प्रदेश कार्यालय में सिर्फ मुसलमानों को इस्लाम के बुनियादी सिद्धांतों से बा-खबर करने वालों का (तबलीगी जमात के लोग) जमावड़ा था। इनमें से ज्यादातर पूर्वांचल के कुशीनगर, मऊ, देवरिया, आजमगढ़ से आए थे। शामली, गोंडा और लखनऊ भी इसमें शामिल थे। जिनमें से कोई मौलाना वहीदुद्दीन खां की लिखी 'सत्य की खोजÓ पुस्तक थामे था। कुछ 'क्या परलोक जीवन का अस्तित्व हैÓ शीर्षक वाले पम्फलेट पकड़े थे। एकाध के हाथ में राज्य सरकार की उपलब्धियों वाली किताब भी थी।
तकरीबन १२ बजे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, वरिष्ठ मंत्री शिवपाल यादव, मंत्री अहमद हसन वहां पहुंचे। तबलीक करने वाले एक हाल में जमा हुए। जहां मुख्यमंत्री ने उन्हें समाजवादी सरकार की नीतियां बतायीं। कहा कि सांप्रदायिक ताकतें तेजी से पांव पसार रही हैं। सत्ता के लिए सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की कोशिश हो रही है। समाजवादी पार्टी इनको रोकने के लिए संघर्ष कर रही है। फिर तबलीग करने वालों से उनकी दुश्वारियों पूछीं?
सूत्रों का कहना है कि ज्यादातर लोगों ने कहा कि अल्पसंख्यकों के हितों की योजनाएं ठीक से जमीन पर नहीं उतरीं। महीनों से छात्रवृत्तियां नहीं बंटी है। मदरसा छात्रों का बैंक में खाता नहीं खुल रहा। अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी हर कार्य में अड़चनें खड़ी कर रहे। कब्रिस्तानों की चहारदीवारी का कार्य बेहद धीमा है। अल्पसंख्यक आयोग गठित नहीं हुआ। वाराणसी से नरेन्द्र मोदी और आजमगढ़ से मुलायम ंिसह यादव के चुनाव लडऩे की चर्चा भी हुई।
अखिलेश व शिवपाल यादव ने भरोसा दिलाया कि योजनाएं उन तक पहुंचाने का मुकम्मल इंतजाम होगा। वे चुनाव में सांप्रदायिक शक्तियों को रोकने में जुटें। तकरीबन दो घण्टे लंबी चर्चा का निष्कर्ष था कि तबलीक करने वाले मुसलमानों को वोट की कीमत समझाएंगे। सांप्रदायिक ताकतों से आगाह रहने का संदेश भी देंगे। मऊ से आए शिक्षक मो.शमीम ने कहा कि राज्य में सांप्रदायिकता सबसे बड़ा खतरा है। जिससे समाजवादी पार्टी लड़ रही है। कोशिश होगी कि मुसलमानों को वोट तकसीम नहीं हो पाए। राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त आशू मलिक ने पश्चिमी यूपी में तबलीक से जुटे लोगों को समाजवादी पार्टी के करीब लाने की पहले तेज शुरू की थी, बुधवार का यह जमावड़ा उसी कड़ी का का हिस्सा था।
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