Wednesday, 21 October 2015

राजभवन भेजे गए नौ नाम

लखनऊ. यूपी के गवर्नर राम नाइक ने राज्य सरकार द्वारा भेजे गए एमएलसी के नौ नामों की लिस्ट में से चार नामों पर अपनी सहमति दे दी है। वहीं, पांच अन्य नामों को वापस लौटा दिया है। गवर्नर ने एसआरएस यादव, लीलावती कुशवाहा, रामवृक्ष यादव और जीतेंद्र यादव एमएलसी के लिए नामित किया है। 
 
बता दें कि जितेंद्र यादव, राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के संबंधी हैं। विधान परिषद में बीते 25 मई से एमएलसी की नौ सीटें खाली हैं। इन सीटों के लिए राज्य सरकार की ओर से राजभवन भेजे गए नौ नामों पर राज्यपाल आपत्ति जता चुके थे। गुरुवार को राजभवन के बुलावे पर सीएम अखि‍लेश यादव ने राज्‍यपाल राम नाइक से मिलने पहुंचे थे।
 
पांच नामों से राज्यपाल हैं असहमत
राज्‍यपाल ने सीएम अखिलेश को बताया कि सूची में शामि‍ल पांच नाम रोक लि‍ए गए हैं। इ‍नमें डॉ. कमलेश कुमार पाठक, संजय सेठ, रणविजय सिंह, अब्दुल सरफराज खां और डॉ. राजपाल कश्यप का नाम शामि‍ल है। इन लोगों की ओर से अपने पक्ष में शपथ पत्र भी राजभवन को सीएम के जरि‍ए उपलब्‍ध कराया गया था, लेकि‍न राजभवन को मि‍ली शि‍कायतों के आधार पर सभी के नाम रोक लि‍ए गए। मुलाकात के दौरान राज्‍यपाल ने रोके गए नामों को लेकर प्राप्‍त शि‍कायतों की जांच कराकर सीएम से आख्‍या भेजने को कहा है।

राजभवन ने राज्य सरकार से पूछे तीन सवाल
साहि‍त्‍य, कला, संस्‍कृति के जरि‍ए पहचान बनाने वाले लोगों की बजाए सरकार की तरफ से नौ सदस्‍यों की भेजी गई सूची में सभी नाम राजनीति‍क पृष्‍ठभूमि से हैं। ऐसे में नि‍यमावली के मुताबिक, राजभवन की तरफ से इन सभी नामों का परीक्षण कराया जा चुका है। पत्रावली के परीक्षण के बाद राजभवन ने सरकार से तीन बिंदुओं पर जवाब मांगा था। राजभवन से पूछे गए सवाल में सबसे पहले यह जानकारी मांगी गई है कि जो नाम मनोनयन को लेकर भेजे गए हैं, उनमें कि‍तने नाम लेखन, साहि‍त्‍य, कला, संस्‍कृति की पृष्‍ठभूमि से ताल्‍लुक रखते हैं। 
 
दूसरे सवाल में कि‍तने ऐसे नाम हैं, जि‍न पर मुकदमे या आपराधि‍क केस चल रहे हैं? कहीं इनमें से कि‍सी को पूर्व में कोर्ट से सजा तो नहीं हुई है। तीसरे सवाल में सूची में कि‍तने ऐसे नाम है, जि‍न्‍होंने बैंक से लोन लि‍या है? क्या उनको डि‍फॉल्‍टर घोषि‍त कर दि‍या गया है? राजभवन के इस तरह के सवाल पूछने के बाद फ्रांस दौरे से लौटकर सीएम अखि‍लेश यादव ने शपथपत्र के साथ सूची दी थी।

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