Friday, 9 October 2015

एनआरएचएम पर रिपोर्ट

 केंद्र सरकार के राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन [एनआरएचएम] योजना के मद में छह वर्ष के दौरान उत्तर प्रदेश को ८६५७ करोड़ रुपये मिले, लेकिन अधिकारियों व चिकित्सकों ने इसमें पांच हजार करोड़ रुपये की बंदरबांट कर ली। इसका राजफास नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक [कैग] की रिपोर्ट में हुआ।
यूपी सरकार की नाक के नीचे हुए इस घोटाले की जांच का काम सीबीआई को सौंपे जाने के बाद मंत्री, राजनेता व वरिष्ठ अधिकारियों के नाम सामने आए। इस घोटाले में तीन सीएमओ समेत सात लोगों की जान जा चुकी है।
कैग की रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल २००५ ंसे मार्च २०११ तक एनआरएचएम में लोगों की सेहत सुधार के लिए ८६५७.३५ करोड़ रुपये मिले, जिसमें से ४९३८ करोड़ रुपये नियमों की अनदेखी कर खर्च किए गए। करीब तीन सौ पेज की रिपोर्ट में लिखा गया है कि एनआरएचएम में १०८५ करोड़ रुपये का भुगतान बिना किसी के हस्ताक्षर ही कर दिया गया। बिना करार के ही ११७० करोड़ रुपये का ठेका चंद चहेते लोगों को दिया गया। निर्माण एवं खरीद संबंधी धनराशि को खर्च करने के आदेश जारी करने में सुप्रीम कोर्ट एवं सीवीसी के निर्देशों का पालन नहीं किया गया। परिणाम स्वरूप जांच में केंद्र से मिले ३५८ करोड़ और कोषागार के १७६८ रुपयों करोड़ का हिसाब राज्य स्वास्थ्य सोसाइटी की फाइलों में सीएजी को नहीं मिला। २३ जिलों की सीएजी जांच के दौरान एनआरएचएम में मिली धनराशि के खर्च का लेखा-जोखा तैयार करने के दौरान सच्चाई सामने आई।
१.४० की खरीद, बिल १८ का
रिपोर्ट बताती है कि एक रुपये ४० पैसे में मिलने वाले १० टेबलेट के पत्तों को अलग अलग जिलों में दो रुपये ४० पैसे से लेकर १८ रुपये तक में खरीदा गया। वर्ष २००८-०९ के वित्तीय वर्ष में दवा खरीद मामले में १.६६ करोड़ रुपये का घोटाला होने की बात रिपोर्ट में है। एनआरएचएम के कार्यक्रम मूल्यांकन महानिदेशक की ओर से २००५ से २००७ के बीच १२७७.०६ करोड़ रुपये एनआरएचएम के लेखा-जोखा से मेल नहीं खाते हैं।
गैर पंजीकृत सोसाइटी को १५४६ करोड़
गैर पंजीकृत सोसाइटी को १५४६ करोड़ रुपये दिए जाने पर रिपोर्ट में आपत्ति जताई गई। २००९-१० में बिना उपयोगिता प्रमाण पत्र के उपकेंद्रों को ५२ करोड़ रुपये मुहैया कराए जाने को नियम विरुद्ध बताया गया। सीएजी ने लिखा है कि चार जिलों के परीक्षण में ही पाया है कि ४.९० करोड़ रुपये व्यर्थ खर्च किए गए।
कम रखे गए स्टाफ नर्स
केंद्र सरकार से डाक्टर, नर्स व एनम रखने के लिए धनराशि मिलने के बावजूद ८३२७ की जगह केवल ४६०६ स्टाफ नर्से ही रखी गई। स्टाफ के मद में सरकार ७६ फीसदी कोटा ही पूरा कर सकी। सीएजी ने पाया कि प्रदेश सरकार ने घरेलू उत्पाद का केवल १.५ फीसद ही स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च किया है। जबकि लक्ष्य दो से तीन फीसद रखा गया था। रिपोर्ट में लोगों की सेहत सुधार के नाम पर हुए इस घोटाले के कई चौंकाने वाले तथ्य शामिल हैं।
जननी सुरक्षा योजना में भी धांधली
एनआरएचएम में शिशु एवं प्रसव मृत्यु दर कम करने तथा जनसंख्या पर कारगर रोक लगाने संबंधी कार्यक्रमों में जमकर धांधली की गई। सीएजी ने पाया है कि एक डीएम की कार का उपयोग टीकाकरण के कार्यक्रम में करने की हिम्मत राज्य के घोटालेबाजों ने कर डाली।
सीएजी रिपोर्ट के अनुसार सुरक्षित मातृत्व योजना में बीपीएल परिवार की महिलाओं का प्रसव कराने वाले निजी नर्सिग होम को प्रति डिलीवरी १८५० रुपये मिलना था। इस योजना के तहत बहराइच में राज अस्पताल को २५८ बीपीएल महिलाओं का प्रसव कराने के लिए ६.७७ लाख रुपये दिए गए लेकिन किसी महिला से बीपीएल का दस्तावेज नहीं लिया गया जो जरूरी था। इसी तरह की धांधली रज्च्य के अन्य जिलों में भी हुई। जननी सुरक्षा योजना के तहत स्वास्थ्य केंद्र में च्च्चा पैदा करने वाली महिलाओं को १४०० रुपये और बीपीएल परिवार की महिलाओं को घर पर प्रसव की स्थिति में ५०० रुपये की नकद सहायता दी जानी थी। इन्हें जिले के स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल लाने के लिए आशा कार्यकर्ताओं को ६०० रुपये मानदेय दिया जाना था। वर्ष २००५-११ के बीच इस योजना के तहत ६९ लाख महिलाओं के लिए १२१९ करोड़ रुपये खर्च किए गए। सीएजी ने पाया कि इस योजना के १० प्रतिशत मामलों में दी गई सहायता की जांच प्रदेश सरकार को करनी थी, लेकिन २००८ से २०११ के बीच इस योजना में खर्च हुए १०८५ करोड़ रुपये की जांच नहीं की गई। शाहजहांपुर के स्वास्थ्य केंद्र जलालाबाद में जिस नंबर की गाड़ी को किराए पर दो बार लिया गया दिखाया वो गाड़ी तो शाहजहांपुर के डीएम की सरकारी कार थी।
इसी प्रकार २००५-११ के बीच २६ लाख लोगों का नसबंदी करने में नकद राशि देने के लिए १८१ करोड़ रुपये खर्च किए गए। सीएजी ने पाया कि मिर्जापुर के चुनार में १०.८१ लाख रुपये १५१८ पुरुषों को दिए गए, लेकिन भुगतान रजिस्टर में न तो इनका अंगूठा लिया गया और न ही दस्तखत करवाए गए। जहां अंगूठा या दस्तखत लिया गया, वहां राशि अंकित नहीं की गई।

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