Saturday, 10 October 2015

जांच दल के अगुवा को हटाया

पुलिस अधीक्षक के स्थान पर अब अपर पुलिस अधीक्षक होंगी जांच दल की मुखिया

जागरण ब्यूरो, लखनऊ: दंगों की तफ्तीश के लिए गठित एसआइसी (विशेष जांच प्रकोष्ठ) में अधिकारियों की तैनाती के कुछ घण्टों के अन्दर ही जांच दल के अगुवा (टीम लीडर) रहे पुलिस अधीक्षक के.एन.मिश्र को हटा दिया गया, उनका दायित्व अब मुजफ्फरनगर की एएसपी (अपराध) कल्पना सक्सेना को सौंपा गया है।
यह जानकारी एडीजी /आइजी राजकुमार विश्वकर्मा ने दी, आखिर आखिर चंद घण्टों के अन्दर ही एसआइसी का मुखिया क्यों बदला गया? इस सवाल का उन्होंने जवाब देने से इनकार कर दिया। एडीजी ने बताया कि पुलिस महानिरीक्षक (अपराध) लखनऊ में रहते हुए ही विवेचनाओं की निगरानी करेंगे। राहत शिविरों में रहे व्यक्तियों की ओर से एफआइआर के लिए दी जा रही तहरीरों पर बिना अपराध संख्या के मुकदमा दर्ज किया जा रहा है, इसे बाद में संबंधित थानों में भेज दिया जाएगा। एफआइआर कराने वालों की पुलिस पूरी मदद भी कर रही है। उन्होंने बताया कि फिलहाल केएन मिश्र के स्थान पर कल्पना सक्सेना को जांच दल की अगुवाई की जिम्मेदारी सौंपी गयी, बाकी जांच दल उनके साथ काम करेगी। शासन ने मुजफ्फरनगर के दंगों की जांच एसआइसी कराने का ऐलान किया था। 24 सितम्बर को एसआइसी में अधिकारियों की तैनाती की ऐलान किया गया, जिसमें पुलिस अधीक्षककेएन मिश्र की अगुवाई में 20 इंस्पेक्टर, तीन डिप्टी एसपी और दो अपर पुलिस अधीक्षकों को संबद्ध करने की जानकारी दी गयी थी। चौबीस घण्टों के अन्दर ही पुलिस अधिकारियों ने जांच दल का मुखिया ही बदल दिया। एसपी के स्थान पर अपर पुलिस अधीक्षक को जांच दल का मुखिया बना दिया, जबकि दो अपर पुलिस अधीक्षक पहले ही इस दल में शामिल हैं। एडीजी राज कुमार विश्वकर्मा ने बताया कि विशेष जांच प्रकोष्ठ मुजफ्फरनगर के 106 एफआईआर के अलावा मेरठ, शामली और बागपत में दंगों को लेकर दर्ज हुई एफआइआर की विवेचना करेगी। उन्होंने बताया कि एफआइआर की संख्या बढऩे के भी आसार हैं।  एडीजी ने बताया कि अभी सभी पहलुओं का आकलन हो रहा है, उन्होंने जांच दल से एसपी स्तर के किसी अन्य अधिकारी को संबंद्ध किये जाने की उम्मीद से इनकार नहीं किया।

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