Saturday, 10 October 2015

पश्चिम के दंगों के कोलाहल में


लखनऊ: प्रदेश सरकार ने अल्पसंख्यकों के हित में इस साल कई कदम उठाए। &0 महकमों की 85 योजनाओं का 20 फीसद लाभ देने का फैसला लिया। असर होने से पहले ही ये योजनाएं पश्चिम के दंगों के कोलाहल में छिप गयी हैं। अल्पसंख्यकों खासकर मुस्लिमों का तकरीबन एकमुश्त वोट लेकर राज्य की सत्ता में आयी समाजवादी पार्टी ने अगस्त 201& में &0 महकमों की 85 योजनाओं का लाभ अल्पसंख्यक बाहुल शहरों, कस्बों और गांवों में पहुंचाने का फैसला लिया। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की अगुवाई वाली मंत्रि परिषद ने फैसला लिया है कि इन योजनाओं का 20 फीसद लाभ अल्पसंख्यकों तक पहुंचाया जाएगा, इस पर तेजी से अमल का फैसला लिया गया। लेकिन शिथिल गवर्नेंस के चलते योजनाओं की निगरानी के लिए गठित होने वाली जिला समितियों के गठन का कार्य भी पूरा नहीं हो पाया। योजनाओं की जानकारी गांव-गलियारे तक पहुंचाने का फैसले पर भी अब तक ठीक से अमल नहीं हुआ, नतीजे में पश्चिम के दंगों से उठे शोर में ये कल्याणकारी योजनाएं दब कर रह गयीं। उल्टे यह आवाज जरूर बुलंद हो गयी है कि अगर सरकार ने अब तक अल्पसंख्यक आयोग का गठन नहीं किया। मुसलमानों के एक बड़े तबके  को मलाल है कि अगर आयोग का गठन हो गया होता तो वह अपनी छोटी-मोटी शिकायतें तो वहां दर्ज करा पाते। जहां से उन्हें कुछ लाभ मिल पाता। अगर कुछ शब्दों में निष्कर्ष निकाला जाए तो ये होगा कि अल्पसंख्यकों के लिए सरकार की ओर से की गयी घोषणाएं और उसके फैसले वर्ष 201& में जमीन पर आकार नहीं ले सके।
योजनाएं जो शुरू हुई
-हमारी बेटी, उसका कल योजना में एक मुश्त तीस हजार रुपए की मदद
-इस योजना के तहत &0 विभागों में संचालित 85 योजनाएं शामिल
-अल्पसंख्यकों की 25 फीसद आबादी वाले क्षेत्र में हैण्डपम्पों की स्थापना, आंगनबाड़ी केन्द्र खोलने और ग्रामीण सम्पर्क मार्ग बनवाने का फैसला
- अल्पसंख्यक आबादी वाले क्षेत्रों में
सामाजिक पेंशन योजनाएं, ग्रामीण एवं शहरी आवास, कन्या विद्याधन, नि:शुल्क बोरिंग का फैसला
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जो अब तक नहीं हुआ
-अल्पसंख्यक आयोग का गठन नहीं हुआ
-उर्दू अकादमी का गठन नहीं हुआ
-फखरूद्ीन अहमद कमेटी नहीं बनायी गयी
-शिया वक्फ बोर्ड का गठन नहीं हुआ
-सुन्नी वक्फ बोर्ड का गठन

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