3.12.2013
एमडी के लिए भी मान्यता नहीं
- सीसीआइएम के सामने बौने साबित हुए प्रयास
- यूपीपीजी में केवल लखनऊ की सीटों पर हो सके दाखिले
- पीलीभीत इस बार भी रह गया खाली हाथ
- केवल लखनऊ के लिए ही लिए गए दाखिले
पीलीभीत
आयुर्वेदिक कॉलेज में समायोजन के मामले के बाद छात्रों की नींद एक बार फिर उड़ गई है। आयुर्वेदिक कॉलेज में इस बार फिर एमडी का सेशन जीरो हो गया है। वजह फिर से सीसीआइएम (सेंट्रल काउंसिल ऑफ इंडियन मेडिसिन) का कड़ा रख और जिम्मेदारों की कमजोर पैरवी है।
यूपी में यूपीपीजी के अंतर्गत केवल लखनऊ और पीलीभीत में ही बीएएमएस के छात्रों को एमडी की शिक्षा का विकल्प है। एमडी की सीटों पर अबकी बार लेटलतीफी होने के बाद एक माह का अतिरिक्त समय प्रदेश के कालेजों को दिया गया था कि मूलभूत चीजें और मानक पूरे कर सत्र शुरु करा लें। पर इस पर कतई गौर नहीं किया गया। नतीजा यह रहा है कि गत कई सेशन जीरो होने के बाद बीच मे एक बार आस जगी। पर अब फिर से वहीं ढाक के तीन पात वाली बात सामने आ गई है। सेंट्रल काउंसिल आफ इंडियन मेडिसिन ने पीलीभीत कालेज को मान्यता न होने के कारण एमडी सीटों पर दाखिला न करने के निर्देश दिए हैं। लिहाजा एमडी के लिए भी मान्यता नहीं होने के कारण बढ़ाई गई मियाद बेमायने साबित हो गई है।
कालेज प्रशासन ने मजबूती से दावे किये थे कि एक माह का अतिरिक्त समय मिला है तो अब कहीं दिक्कतें नहीं हैं, सब कुछ ठीक करा लेंगे। सभी दावे खोखली जमीन पर हवा हवाई ही साबित हुए। केवल लखनऊ की सात एमडी सीटों पर ही दाखिले लिए गए हैं पीलीभीत की इस सत्र में सभी छह सीटे खाली ही रहेगी। इससे आयुर्वेद छात्रों में निराशा है और शासन व कालेज प्रशासन के प्रति रोष भी है।
काफी प्रयास किए गए
पीलीभीत से लखनऊ और लखनऊ से नई दिल्ली के बीच काफी प्रयास किए गए। पर निराशा है कि एमडी में इस बार दाखिले नहीं हो सके। केवल लखनऊ में ही यूपीपीजी सीटों के लिए दाखिले की अनुमति दी गई है।
डा.प्रकाश चंद सक्सेना
प्राचार्य, आयुर्वेदिक कालेज
एमडी के लिए भी मान्यता नहीं
- सीसीआइएम के सामने बौने साबित हुए प्रयास
- यूपीपीजी में केवल लखनऊ की सीटों पर हो सके दाखिले
- पीलीभीत इस बार भी रह गया खाली हाथ
- केवल लखनऊ के लिए ही लिए गए दाखिले
पीलीभीत
आयुर्वेदिक कॉलेज में समायोजन के मामले के बाद छात्रों की नींद एक बार फिर उड़ गई है। आयुर्वेदिक कॉलेज में इस बार फिर एमडी का सेशन जीरो हो गया है। वजह फिर से सीसीआइएम (सेंट्रल काउंसिल ऑफ इंडियन मेडिसिन) का कड़ा रख और जिम्मेदारों की कमजोर पैरवी है।
यूपी में यूपीपीजी के अंतर्गत केवल लखनऊ और पीलीभीत में ही बीएएमएस के छात्रों को एमडी की शिक्षा का विकल्प है। एमडी की सीटों पर अबकी बार लेटलतीफी होने के बाद एक माह का अतिरिक्त समय प्रदेश के कालेजों को दिया गया था कि मूलभूत चीजें और मानक पूरे कर सत्र शुरु करा लें। पर इस पर कतई गौर नहीं किया गया। नतीजा यह रहा है कि गत कई सेशन जीरो होने के बाद बीच मे एक बार आस जगी। पर अब फिर से वहीं ढाक के तीन पात वाली बात सामने आ गई है। सेंट्रल काउंसिल आफ इंडियन मेडिसिन ने पीलीभीत कालेज को मान्यता न होने के कारण एमडी सीटों पर दाखिला न करने के निर्देश दिए हैं। लिहाजा एमडी के लिए भी मान्यता नहीं होने के कारण बढ़ाई गई मियाद बेमायने साबित हो गई है।
कालेज प्रशासन ने मजबूती से दावे किये थे कि एक माह का अतिरिक्त समय मिला है तो अब कहीं दिक्कतें नहीं हैं, सब कुछ ठीक करा लेंगे। सभी दावे खोखली जमीन पर हवा हवाई ही साबित हुए। केवल लखनऊ की सात एमडी सीटों पर ही दाखिले लिए गए हैं पीलीभीत की इस सत्र में सभी छह सीटे खाली ही रहेगी। इससे आयुर्वेद छात्रों में निराशा है और शासन व कालेज प्रशासन के प्रति रोष भी है।
काफी प्रयास किए गए
पीलीभीत से लखनऊ और लखनऊ से नई दिल्ली के बीच काफी प्रयास किए गए। पर निराशा है कि एमडी में इस बार दाखिले नहीं हो सके। केवल लखनऊ में ही यूपीपीजी सीटों के लिए दाखिले की अनुमति दी गई है।
डा.प्रकाश चंद सक्सेना
प्राचार्य, आयुर्वेदिक कालेज
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