Saturday, 10 October 2015

ताजा शिकार स्वामी प्रसाद मौर्य

 लखनऊ: जब-तब सवालों के घेरे में रहने वाली नौकरशाही के कामकाज के तरीके के 'ताजा शिकारÓ नेता प्रतिपक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य हुए हैं। इलाहाबाद प्रशासन ने उनकी सरकारी गाड़ी में पेट्रोल डलवाने से इंकार कर दिया।
लखनऊ पहुंचते ही उन्होंने शिकायत दर्ज करायी। शासन ने जांच का आदेश दिया। प्रारम्भिक जांच में इलाहाबाद के तत्कालीन एडीएम प्रोटोकाल को लापरवाही का जिम्मेदार पाया गया है।
उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य गत दिनों इलाहाबाद के दौरे पर थे। जहां उनकी सरकारी गाड़ी (नम्बर-यूपी 32 बीजी, 5818) में पेट्रोल खत्म हो गया। बताया गया कि मौर्य के निजी सचिव और सरकारी गाड़ी के चालक ने प्रशासन से पेट्रोल डलवाने का 'अनुरोधÓ किया। आरोप है कि इलाहाबाद प्रशासन ने गाड़ी में तेल डलवाने से इनकार कर दिया। सिर्फ इतना ही नहीं वहां के अधिकारियों पर चालक के साथ बदसलूकी की गई। इससे नाराज नेता प्रतिपक्ष ने अपनी जेब से सरकारी गाड़ी में तेल डलवाया और लखनऊ पहुंचते ही उन्होंने प्रोटोकाल विभाग में शिकायत दर्ज करा दी।
नेता प्रतिपक्ष की गाड़ी को तेल नहीं दिये जाने की गंभीर शिकायत पर शासन ने आनन-फानन में जांच उच्चाधिकारियों को जांच के आदेश दिये। सूत्रों का कहना है कि बुधवार को कार्मिक विभाग में पहुंची शुरूआती जांच में रिपोर्ट में इलाहाबाद के तत्कालीन अपर जिलाधिकारी (प्रोटोकाल) को लापरवाही का जिम्मेदार ठहराया गया है। उनके खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की गयी।
नियम क्या है: विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की सरकारी गाडिय़ों में खर्च होने वाले डीजल पेट्रोल का भुगतान राज्य सरकार करती है। जिस जिले में गाडिय़ों को पेट्रोल, डीजल की जरूरत होगी, वहां प्रशासन को उसमें तेल डलवाना होता है। अगर ड्राइवर ने निजी धन से गाड़ी में तेल डलवा लिया तो नेता प्रतिपक्ष द्वारासत्यापित बिल का भुगतान भी सरकार करती है। 

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