Saturday, 10 October 2015

'खाली पतीली पर टिकीं आंखें 'पनीली

'खालीÓ पतीली पर टिकीं आंखें 'पनीलीÓ
दंगे के बाद
-----------
- खाने-दाने को मोहताज हुए राहत शिविरों में रह रहे दंगा पीडि़त
- प्रशासन ने बंद किया राशन भेजना, दूध की आपूर्ति भी न के बराबर
- गन्ने के सहारे कट रही जिंदगी, सैकड़ों सो रहे भूखे पेट
 शामली
85 साल की मकसूदी भूख नहीं होने का बहाना कर बच्चों को कुछ खिला देने की बात कहती है तो उसके बहू-बेटे के चश्म तर हो जाते हैं। एक माह की रिजवाना भूख से बिलख रही है, क्योंकि खुराक की कमी से मां मोहसीना आंचल में दूध नहीं उतर रहा। एकाध नहीं, शामली के शिविरों में रह रहीं हजारों जिंदगी का यही फलसफा बन चुका है। खाने-दाने को मोहताज हुए दंगा पीडि़तों से हुकूमत ने आंखें मोड़ रखी हैं। शिविरों का अस्तित्व मानने से इंकार कर रहे हुक्मरानों ने राशन तक भेजना बंद कर दिया, जो दूध भेजा जा रहा है, उससे बच्चों के होठ भी गीले नहीं हो रहे। भूख से बेबस बच्चों की तसल्ली के लिए चूल्हों पर खाली पतीली में पानी पकाया जा रहा है तो उस पर टिकी विस्थापित परिवारों की आंखें भी आंसुओं से तर हैं।
शामली के दंगा राहत शिविरों की व्यथा और चुनौती व्यवस्था से जवाब मांग रही हैं। मलकपुर, खुरगान, बरनावी, कांधला, मन्ना माजरा के राहत कैंपों में रह रहे परिवार भूखे पेट रात गुजार रहे हैं। मलकपुर कैंप की बात करें तो यहां तकरीबन 700 परिवार शरण पाए हैं। शिविर को छह वार्डों में बांटकर करीब 5500 लोगों की खिदमत की जा रही है। इनमें पांच साल से कम उम्र के
 करीब 1200 बच्चे भी हैं। यहां सरकारी स्तर पर खाने-दाने के नाम पर सिर्फ ढाई कुंतल दूध की सप्लाई है। ऐसे में एक व्यक्ति के हिस्से में औसतन 50 ग्राम से भी कम और परिवार के हिसाब से 200 ग्राम दूध आ रहा है। खुरगान राहत कैंप की स्थिति भी ऐसी ही है। यहां रह रहे करीब 300 परिवार के प्रबंधन को संचालकों ने नौ वार्ड बनाए हैं। इन परिवारों को भी दो सौ ग्राम दूध मिल रहा है। शिविरों में परिवार हालात से मुकाबले के लिए मन मसोस रहे हैं।
एक माह से नहीं आया राशन
सीएम अखिलेश यादव भले ही शिविरों में खाने-दाने की व्यवस्था के दावे कर रहे हों, लेकिन हकीकत यह है कि तकरीबन एक महीने से सरकारी राशन पर रोक है। शिविरार्थियों अहमद, दिलशाद, रहमत आदि के मुताबिक, सर्दी में उन्हें व उनके बच्चों को भूखे पेट सोना पड़ रहा है। शिविर में रह रहे परिवारों और खिदमत में जुड़े लोगों की माने तो इमदाद के इच्छुक लोग कंबल और गर्म कपड़े तो अच्छी तादाद में भेज रहे हैं, लेकिन राशन नहीं है। शिविर संचालक दिलशाद बताते हैं कि एनजीओ आदि जरूर खुद राशन भेज देते हैं। सारा शिविर इमदाद के भरोसे है। खुरगान, मन्ना माजरा, बरनावी व कांधला शिविर का हाल भी ऐसा ही है।
ढाई माह में 11 बार राशन आया
एक माह से राशन बंद है। शिविर में सिर्फ प्रशासन ढाई कुंतल दूध भेज रहा है। प्रत्येक परिवार को 200 ग्राम दूध दिया जा रहा है।ÓÓ
-हाजी दिलशाद, संचालक, मलकपुर शिविर

शिविर में दूध की आपूर्ति नाकाफी है। राशन भी इमदाद के भरोसे है। प्रशासन अनदेखी कर रहा है। बच्चे-बड़े भूखे पेट सो रहे हैं।ÓÓ
- मोहम्मद खलील चौहान, खुरगान शिविर
----
''संचालकों ने खाद्य सामग्री की डिमांड नहीं की तो आपूर्ति रोक दी गई। शिविर संचालकों को दूध उपलब्ध कराया जा रहा है। वही अपने हिसाब से वितरण कर रहे हैं।ÓÓ
-पीके सिंह, डीएम शामली
::::::::::::::::::::::::::::::

सम्भल के बसपा सांसद बर्क का टिकट कटा
-बसपा नेतृत्व ने अकीलुर्रहमान को बनाया प्रत्याशी
-मुनकाद ने की घोषणा, बरेली से सुधीर मौर्य का पत्ता भी साफ
जागरण संवाददाता,मुरादाबाद: लंबे अरसे से बसपा नेतृत्व की आंख की किरकिरी बने सम्भल के सांसद शफीकुर्रहमान बर्क को पार्टी नेतृत्व ने बड़ा झटका दिया है। सम्भल क्षेत्र से बर्क का टिकट काटकर पूर्व विधायक अकीलुर्रहमान को प्रत्याशी घोषित कर दिया है। बसपा के पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कोआर्डिनेटर मुनकाद अली ने यह भी एलान किया है कि बरेली से सुधीर मौर्य को भी नहीं लड़ाया जाएगा।
मुरादाबाद संसदीय क्षेत्र से सियासी पारी खेलने वाले सांसद बर्क परिसीमन के बाद 2009 में अपने गृह क्षेत्र सम्भल से बसपा के टिकट पर सांसद बने थे। इससे पहले वह तीन बार सपा के टिकट पर मुरादाबाद से सांसद चुने जा चुके हैं। पिछले विधानसभा चुनाव से ऐन पहले जब सांसद के पौत्र जियाउर्रहमान बर्क का टिकट काटकर रफतउल्ला खां उर्फ नेता छिद्दा को पार्टी ने प्रत्याशी घोषित किया, बर्क की दावेदारी पर तभी से खतरा मंडराने लगा था। बाद में दूसरा कोई विकल्प न होने पर पार्टी नेतृत्व ने सांसद शफीकुर्रहमान बर्क को प्रत्याशी घोषित कर दिया था।
असमोली से पूर्व विधायक रहे अकीलुर्रहमान की पार्टी नेतृत्व से निकटता बढऩे पर एक महीने से बर्क की फिर टिकट काटे जाने की चर्चा आम हो गईं थी। पार्टी के पश्चिमी उत्तर प्रदेश कोआर्डिनेटर मुनकाद अली ने गुरुवार को सम्भल के अकीलुर्रहमान समर्थकों के बीच पत्रकारवार्ता में बताया कि पार्टी नेतृत्व ने शफीकुर्रहमान बर्क की जगह अकीलुर्रहमान को सम्भल से चुनाव लड़ाने का निर्णय लिया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि पार्टी मुखिया की ओर से बर्क को कोई बड़ी जिम्मेदारी भी दी जा सकती है। श्री अली ने बरेली से पार्टी प्रत्याशी सुधीर मौर्य को भी न लड़ाने का ऐलान करते हुए कहा कि पार्टी ने सुधीर मौर्य को टिकट दिया था। उनके स्थान पर किसी अन्य प्रत्याशी की घोषणा अगले माह की जाएगी।

No comments:

Post a Comment