हर चुनावी परिणाम कुछ खास संदेश देते हैं। इस बार के सूबाई परिणाम यूपी की 80
लोकसभा सीटों पर नजर गड़ाये लड़ाकों को सियासत में करवट का संदेश हैं। ग्र्रामीण और शहरी मतदाता का नजरिया जुदा है। शहरी मतदाता ठोस, त्वरित परिणाम के साथ पारदर्शिता की पक्षधरता में नजर आया तो ग्र्रामीण क्षेत्र सत्ता अनाज और बच्चों के मुस्तकबिल संवारने वाले योजनाओं के साथ एकजुट नजर आया। इत्तिफाक से यूपी की आबादी में अरबन और ग्र्रामीण पृष्ठभूमि का मिश्रण हैं। इसके पश्चिम हिस्से में अरबन और पूर्वी इलाके में ग्र्रामीण क्षेत्रों की बहुलता है। इस प्रदेश की सत्ता की बागडोर संभाल रही समाजवादी पार्टी का अब तक कस्बों और गांवों में मजबूत पकड़ रही है लेकिन पार्टी अब तक शहरी और ग्र्रामीण दोनों में मतदाताओं के बीच कोई स्पष्ट संदेश नहीं छोड़ पायी है, यहां के मुख्यमंत्री युवा है। सो, दूसरे की तुलना युवा मतदाताओं की उनसे उम्मीदें कुछ ज्यादा हैं। इन बातों को पार्टी को आत्मसात करना होगा और मौजूदा तौर-तरीकों में बदलाव लाना होगा।
अन्यथा, उनके लिए लोकसभा की राह मुश्किल हो तो आश्चर्य नहीं होगा, दूसरे
अखाड़ेबाजों में शुमार बहुजन समाज पार्टी ने मूल सियासी मंत्र बहुजन समाज
से सर्वजन तक की राह पर चली लेकिन उसका मूलाधार अब भी गांव में ही है। उस पर भ्रष्टाचार के आरोपों का भार भी है, जबकि युवा मतदाता अब जाति, धर्म के बंधन से बाहर निकलकर ईमानदार और सीधी राजनीति में पक्षधरता दिखाते नजर आ रहे हैं, यूपी के विधानसभा चुनावों में इस झलक नजर भी आयी थी। भाजपा को विरोधी दलों की इनकम्बेंसी और नरेन्द्र मोदी के चेहरे के चमत्कारÓ की उम्मीद से इतर धरातल पर उतरने का संदेश इन
राज्यों के चुनावों से है। कांग्रेस के लिए तो संगठन से लेकर अमूल चूल परिवर्तन का संदेश है लेकिन वह इस दिशा में अब कितना ठोस कदम उठा पाती है, वह
देखने वाली बात होगी। लेकिन इतना तय है कि अब युवा मतदाता चाहे वह गांव का हो या शहर सिर्फ उम्मीदों की आस में किसी का इंतजार नहीं कर सकता और किसी की प्रतिबद्धता का कायल नहीं है। उसे चाहिए परिणाम
लोकसभा सीटों पर नजर गड़ाये लड़ाकों को सियासत में करवट का संदेश हैं। ग्र्रामीण और शहरी मतदाता का नजरिया जुदा है। शहरी मतदाता ठोस, त्वरित परिणाम के साथ पारदर्शिता की पक्षधरता में नजर आया तो ग्र्रामीण क्षेत्र सत्ता अनाज और बच्चों के मुस्तकबिल संवारने वाले योजनाओं के साथ एकजुट नजर आया। इत्तिफाक से यूपी की आबादी में अरबन और ग्र्रामीण पृष्ठभूमि का मिश्रण हैं। इसके पश्चिम हिस्से में अरबन और पूर्वी इलाके में ग्र्रामीण क्षेत्रों की बहुलता है। इस प्रदेश की सत्ता की बागडोर संभाल रही समाजवादी पार्टी का अब तक कस्बों और गांवों में मजबूत पकड़ रही है लेकिन पार्टी अब तक शहरी और ग्र्रामीण दोनों में मतदाताओं के बीच कोई स्पष्ट संदेश नहीं छोड़ पायी है, यहां के मुख्यमंत्री युवा है। सो, दूसरे की तुलना युवा मतदाताओं की उनसे उम्मीदें कुछ ज्यादा हैं। इन बातों को पार्टी को आत्मसात करना होगा और मौजूदा तौर-तरीकों में बदलाव लाना होगा।
अन्यथा, उनके लिए लोकसभा की राह मुश्किल हो तो आश्चर्य नहीं होगा, दूसरे
अखाड़ेबाजों में शुमार बहुजन समाज पार्टी ने मूल सियासी मंत्र बहुजन समाज
से सर्वजन तक की राह पर चली लेकिन उसका मूलाधार अब भी गांव में ही है। उस पर भ्रष्टाचार के आरोपों का भार भी है, जबकि युवा मतदाता अब जाति, धर्म के बंधन से बाहर निकलकर ईमानदार और सीधी राजनीति में पक्षधरता दिखाते नजर आ रहे हैं, यूपी के विधानसभा चुनावों में इस झलक नजर भी आयी थी। भाजपा को विरोधी दलों की इनकम्बेंसी और नरेन्द्र मोदी के चेहरे के चमत्कारÓ की उम्मीद से इतर धरातल पर उतरने का संदेश इन
राज्यों के चुनावों से है। कांग्रेस के लिए तो संगठन से लेकर अमूल चूल परिवर्तन का संदेश है लेकिन वह इस दिशा में अब कितना ठोस कदम उठा पाती है, वह
देखने वाली बात होगी। लेकिन इतना तय है कि अब युवा मतदाता चाहे वह गांव का हो या शहर सिर्फ उम्मीदों की आस में किसी का इंतजार नहीं कर सकता और किसी की प्रतिबद्धता का कायल नहीं है। उसे चाहिए परिणाम
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