परवेज अहमद
लखनऊ। भ्रष्टाचार, रिसर्च
पेपर चोरी, नियमों की अनदेखी कर लाखों बच्चों का भविष्य नाकाबिल शिक्षकों के हाथों
में सौंपने जैसे गंभीर आरोपों से घिरे छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर
के कुलपति प्रो.विनय पाठक की एक और अनूठी कार्यशैली रही है। जिसमें वह जिस विश्वविद्यालय
कुलपति बनते हैं, वहां अपने साथ तकनीकी सिस्टम मैनेजर, डिप्टी रजिस्ट्रार और सेवा प्रदाता
कंपनी के जरिये सेवा देने वाले कुछ कार्मिकों को भी साथ लेकर जाते हैं। कोटा से लेकर
कानपुर विवि तक उनकी इस कार्यशैली का उदाहरण मौजूद हैं। इस शैली को पुलिस गैंग सिस्टम
कहती है, पर यहां ये शब्द लागू नहीं होता।
कानपुर के हरकोर्ट बटलर
प्रौद्योगिकी विवि के कम्प्यूटर साइंस विभाग के प्रोफेसर विनय पाठक जब पहली बार उत्तराखंड
में कुलपति बने तो इन लोगों में से कई लोगों को अपने साथ भाजपा नेता के जनसंपर्क अधिकारी
व सुरक्षा कर्मी के बेटे से समेत कई लोगों को न सिर्फ नौकरी पर रखा और फिर उनको अपने
कोर ग्रुप में शामिल कर लिया। यहां का टर्म पूरा करने के बाद राजस्थान के कोटा में
कुलपति बनने पर उत्तराखंड के आधा दर्जन कर्मचारियों को अपने साथ वहां ले गये। इनमें
से अधिकतर कर्मचारी अपने साथ ले गये। अखिलेश यादव सरकार में तत्कालीन प्राविधिक शिक्षा
मोनिका एस गर्ग के विरोध के बावजूद जब तत्कालीन राज्यपाल राम नाईक ने इन्हें अब्दुल
कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय का कुलपति नियुक्त किया वह अभिषेक नागर और आयुष श्रीवास्तव
को अपने साथ लेकर आये। इनमें से अभिषेक नागर सिस्टम मैनेजर नियुक्त कर दिया। जिसके
जरिये वित्तीय, परीक्षा व्यवस्था पर नजर रखी जाती है। उत्तर प्रदेश की उच्च शिक्षा
का शक्तिशाली व्यक्तियों में शुमार होने के बाद प्रो.विनय पाठक उत्तराखंड, राजस्थान
के विश्वविद्यालय से बड़ी संख्या तदर्थ पद, दैनिक वेतन अथवा संविदा पर काम कर रहे शिक्षक,
प्रशासक, और कर्मचारियों को उत्तर प्रदेश लाते गये। जहां-जहां कुलपति का चार्ज मिलता
गया, वहां उनमें से कुछ को पूर्णकालिक नियुक्त करते गये। इस एडजेस्टमेन्ट के जरिये
वह शिक्षा व्यवस्था पर कब्जा अप्रत्यक्ष रूप से काबिज हो गये।
सूत्रों का कहना है कि
अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय में दो बार कुलपति का कार्यकाल पूरा करने के बाद
जब वह छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के कुलपति नियुक्त हुए तो यहां पर सेवा
प्रदाता के जरिये काम कर रहे आधा दर्जन कार्मियों को अपने साथ कानपुर विवि ले गये।
इन सभी को वित्त, तकनीकी दायित्व वाले अधिकारियों के साथ तैनात कर दिया है। निष्पक्ष
दिव्य संदेश के पास एसे सभी कर्मचारियों की सूची मौजूद है जिन्हें प्रो.विनय पाठक
उत्तराखंड, राजस्थान होते हुए उत्तर प्रदेश लाये और इन्हें इंजीनियरिंग विश्वविद्यालयों
के साथ ही आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा, ख्वाजा मुईऩ उद्दीन भाषा विश्वविद्यालय लखनऊ,
अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय और छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय में
नियुक्त किया है। कांग्रेस के प्रवक्ता अमरनाथ अग्रवाल कहते हैं कि प्रो.विनय पाठक
की ये शैली व्यवस्था के साथ गंभीर दुरभि संधि की ओर इशारा करती है। राज्यपाल सचिवालय
को उच्च शिक्षा के इस खेल का पर्दाफाश करने के लिए श्वेत पत्र जारी करना चाहिए। मुख्यमंत्री
को इस पूरे मामले की जांच सीबीआई को सौंप देनी चाहिए।
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