कुलसचिव ने कार्यदायी संस्था को लिखे पत्र में स्वीकारा भुगतान के बाद भी कार्य अधूरा
विशेष प्रतिनिधि
लखनऊ। अब्दुल कलाम प्राविधिक
विश्वविद्यालय (एकेटीयू) के भ्रष्टाचारों की परत-दर-परत खुलती जा रही है। भर्ती से
लेकर ठेके पट्टे तक में भ्रष्टाचार का चरम उजागर हो रहा है बावजूद इसके वे सारे कार्य
हो रहे हैं जिसमें भ्रष्टाचार की गंध स्पष्ट महसूस हो रही है। एकेटीयू के घटक संस्थान
आईईटी में 16 नवम्बर को सड़क निर्माण के नाम पर तकरीबन दो करोड़ रुपये का भुगतान कर
दिया गया। आश्चर्यजनक बात ये है कि विवि के रजिस्ट्रार सचिन कुमार सिंह ने यूपीपीसीएल
की इकाई-14 के परियोजना प्रबंधक को लिखे पत्र में स्वीकारा है कि भुगतान के बाद भी
निर्माण कार्य नहीं किया गया है।
प्रो.विनय पाठक के कार्यकाल
में नियुक्तियों, ठेके, निर्माण कार्य, सेवा प्रदाता कंपनी, परीक्षा की गड़बड़ियों
की स्पेशल टॉस्क फोर्स पहले से जांच कर रही है। करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार का खुलासा
हो रहा है। हर दिन पत्रावलियां मांगी जा रही है। बावजूद दूसरी ओर से विश्वविद्यालय
प्रशासन आधे-अधूरे निर्माण का करोड़ों रुपया भुगतान करने पर आमादा है। ये कार्य प्रो.विनय
पाठक के दौरान ही निर्धारित किये थे, बावजूद इसके भुगतान किया जा रहा है। गत दिनों
सड़क निर्माण के लिए पौने दो करोड़ के करीब का भुगतान कर दिया गया। सूत्रों का मुताबिक
एकेटीयू के कुलपति सचिन कुमार सिंह ने 16 नवम्बर को य़ूपी प्रोजेक्ट कारपोरेशन के परियोजना
प्रबंधक ईकाई-14 को लिखे पत्र में कहा है कि अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय ने
आईईटी परिसर में सड़क की मरम्मत के लिए 209.37 लाख मंजूर किया। इसके बाद कुछ दिनों
के अंतराल में पहली किश्त के रूप में 83.75 लाख रुपये, दूसरी किश्त के रूप में
83.75 लाख रुपया और तीसरी किश्त के रूप में 22.50 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया। बावजूद इसके बाद भी निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है।
सूत्रों का कहना है कि अब तक सिर्फ 30 फीसदी काम भी नहीं हुआ है। कुलसचिव ने कार्यदायी
संस्था को लिखे पत्र में कहा है कि आईईटी प्रशासन के साथ सामंजस्य बनाकर तत्काल निर्माण
कार्य पूरा कराया जाए। राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों का कहना है कि वित्तीय गड़बड़ियों
की व्यापक जांच के दौर में भी अधूरे निर्माण कार्य का भुगतान किया जाना भ्रष्टाचार
की ओर संकेत करता है।
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