-प्रो.विनय पाठक पर शिकंजा कसते ही कुछ शिक्षकों, अधिकारियों के परिजनों में सोशल मीडिया अकाउंट, ग्रुप डिएक्टीवेट किये
-सुबह शाम तक तारीफों के लिए कसे जाने वाले प्रेम जुमले बंद, अधिकतर लोगों ने
वाल्क टाइम भी बदला
विशेष प्रतिनिधि/ परवेज अहमद
लखनऊ।...जहां पतियों की विजयगान होता। सफलता की डींगे हांकी जाती। नये गहनों
की नुमाइश होती... भाभी, जेठानी, बहन, ननद के रिश्ते गढ़े जाते। बेटे-बेटियों की शादी
का जिक्र फिर समधी मान रिश्ता और मजबूत करने की बातें होती।...”ह्वाट का ब्यूटीफुल साड़ी”, “नाइज मेकप”, लुकिंग लाइक...जैसे जुमलों
से छेड़खानियां ( मजाक) होती, अब उस आवासीय परिसर में सन्नाटा है। कुछ घरों में ताला
लटकने लगा है। यानी स्त्रियां मायके चली गयी।... और प्रेम का पंचौरा बंद हो गया। जिनके
पति जांच के घेरे में हैं, उऩमें से अधिकतर ने आश्चर्यजनक रूप से अपना सोशल मीडिया
अकांउट डिएक्टीवेट कर दिया।
ये किस्सागोई है-अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) के घटक संस्थान आईईटी कैम्पस में स्थित शिक्षक, प्रशासनिक
अधिकारियों के आवासीय परिसर की। यहां की रौनक पर अजीब से रहस्यमयी सन्नाटे की परत चढ़
गई है। सब एक दूसरे को संदेह की नजर से देखने लगे हैं।किसी के घर नये व्यक्ति के आने
की भनक लगते ही ये जानने का प्रयास शुरू हो जाता है कि वह व्यक्ति कहीं स्पेशल टॉस्क
फोर्स (एसटीएफ), इंटेलीजेंस ब्यूरो (आईबी), एलआईओ ( लोकल इंटेलीजेंस ब्यूरो) का नुमाइंदा
तो नहीं ?
आप सोंच रहे होंगे, क्यों हुआ-ये सब ? जानिये। अब्दुल कलाम प्राविधिक
विश्वविद्यालय और उसके घटक संस्थान आईईटी के 60 से 70 फीसदी लोगों की नियुक्तियां,
प्रोन्नतियां अथवा प्रशासनिक कार्रवाईयां प्रो.विनय पाठक के कुलपति रहते हुई हैं। इनमें
वह सीधे इंवाल्ब रहते थे। अब प्रो.पाठक की वित्तीय, प्रशासनिक कारगुजारियों की गहराई
से जांच हो रही है। उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज है। ये भी इत्तिफाक है कि हर दिन उनके नये
भ्रष्टाचार का पर्दाफाश हो रहा। संकेत मिल रहे हैं कि सरकार रियायत करने को तैयार नहीं
है। इससे उन परिवारों में दहशत फैल गई जिनके
परिजन नियमों के विपरीत एकेटीयू अथवा आईईटी में नौकरी पर रखे गये, प्रोन्नित पाये।
जो लाभ पाये फिर प्रताड़ित भी हुये वे भी परेशान
हैं। पुराने निजाम के कई दागियों ने नये निजाम के साथ सहमे-सहमें अंदाज में गलबहियां
शुरू कर दी हैं, पर उनके परिजन भी खौफ में हैं।
सूत्रों का कहना है कि आईईटी परिसर में रहने वाले शिक्षकों, प्रशासनिक अधिकारियों
व समूह ख के अधिकारियों के परिवार का एक ग्रुप था। सोशल मीडिया के प्लेटफार्म पर वे
एक दूसरे से जुड़े थे। मार्निग, इवनिंग वाल्क के समय खुलेमन और दिल से चुहलबाजियां
करते। पतियों अथवा पत्नियों की कामयाबी और घर के लिए खरीदे गये नये सामानों की चर्चा
होती थी। पेशेगत से बातों से ऊपर उठकर रक्त संबंध जोड़ने के वादे किये, कराये जाते
थे। एक दूसरे घरों में पार्टियां होती। प्रो.विनय पाठक से जुड़े और आरोपों से घिरे
लोगों की पत्रावलियां एसटीएफ ले क्या गई और कुछ को लखनऊ में रहने की हिदायत क्या दे
डाली, एकेटीयू के नौकरीपेशों लोगों के परिजनों की सोशल गतिविधियां ठप हो गयीं। सूत्रों
का कहना है कि कई लोगों ने घरों के सामने खड़ी रहने वाली रूतबे की प्रतीक कीमती गाडियां
हटा दी हैं। कुछ लोगों ने परिवार के सदस्यों को अनयंत्र भेज दिया। यहां नौकरी करते
हुए कई करोड़ की सम्पतियों के मालिक बने और परिसर के बाहर रह रहे कतिपय लोगों ने घर
से बेशकीमती सजावटी सामान हटाने शुरू कर दिये हैं। उन्हें डर है कि एसटीएफ के साथ आयकर,
प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों ने सर्च कर ली तो आय का जरिया क्या बतायेंगे। रसीदें
कहां से दिखायेंगे क्योंकि वेतन तो समूह ग, ख की श्रेणी का है। नतीजे में परिसर में
रह रहे परिवारों के दिल के ओसन में खुशी नहीं गम का विस्फोट हो रहा है। यही नहीं, छात्रों
के अभिभावकों की हाड़तोड़ मेहनत से कमाई गई राशि को दोनों हाथों से खर्च करने वाले
प्रशासनिक अधिकारियों , शिक्षकों के कमरों, कार्यालयों में भी सन्नाटा बिखर गया है।
बस, सबको परिणाम का इंतजार है।
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