Sunday, 13 November 2022

एसटीएफ के हाथ लगीं नियुक्तियों में प्रो.विनय के ‘खेल’ फाइलें !

 

 

एसटीएफ के हाथ लगीं नियुक्तियों में प्रो.विनय के खेल फाइलें !

-एचबीटीआई, कानपुर, आंबेडकर विवि, भाषा विवि से नियुक्तियों की पत्रावली मांगी

-आरोपी प्रोफेसरों, अधिकारियो की व्यक्तिगत फाइलें उपलब्ध कराने को भेजा पत्र

- प्राविधिक शिक्षा की तत्कालीन प्रमुख सचिव मोनिका एस.गर्ग की टिप्पणी वाली फाइल की भी तलाश, जिसमे गर्ग ने पाठक कुलपति बनाने से पहले उत्तराखंड, राजस्थान विवि से जांच को कहा था

 

परवेज़ अहमद

लखनऊ। छत्रपति शाहू जी महाराज कानपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.विनय पाठक के भ्रष्टाचार का अतीत खंगाल रही स्पेशल टॉस्क फोर्स ने राज्य विश्वविद्यालयों में उनके कुलपति रहने के दौरान की नियुक्तियों, प्रशासनिक पद बांटने की पत्रावलियां कब्जे में लेनी शुरू कर दी हैं। अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय ( एकेटीयू) से 11 लोगों की व्यक्तिगत पत्रावलियां मांगी गयी हैं। कुछ को कब्जे में ले लिया है। एचबीटीआई और भीमराव आंबेडकर विवि आगरा की 50 से अधिक नियुक्तियों की मूल पत्रावली मांगी गयी है। सूत्रों का कहना है कि जिस तरह से इस केस का दायरा विस्तृत हो रहा है, उससे जांच सीबीआई को सौंपने पर शीर्ष स्तर पर मंथन हो रहा है। अभी, 15 नवम्बर को प्रो.विनय पाठक की अग्रिम जमानत याचिका पर हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के निर्णय की प्रतीक्षा है।

सूत्रों का कहना है कि एसटीएफ के अधिकारी प्रो. विनय पाठक के उत्तर प्रदेश में पहली बार एकेटीयू का कुलपति बनने की प्रक्रिया से अब तक का ब्योरा खंगाल रहे हैं। समाजवादी पार्टी की सत्ता के दौरान पहली बार प्रो.विनय पाठक को एकेटीयू का कुलपति बनाने की जब प्रक्रिया शुरू हुई उसी समय उत्तराखंड व राजस्थान में उनके कुलपति रहने के दौरान की गड़बड़ियों की शिकायतों का पुलिंदा प्राविधिक शिक्षा की तत्कालीन प्रमुख सचिव मोनिका.ए.गर्ग को भेजा गया था। सुश्री गर्ग ने प्रो.पाठक के विरुद्ध शिकायतों का हवाला देकर राज्य में कुलपति न बनाने पर विचार की टिप्पणी उस शिकायत पर लिखी थी, जिसे अनदेखा कर प्रो.पाठक को एकेटीयू का कुलपति नियुक्त कर दिया गया। अब एसटीएफ को  उस पत्रावली की तलाश है। दूसरी ओर से अनजान लोग एसटीएफ अधिकारियों को एचबीटीआई, ख्वाजा मोईनउद्दीन चिश्ती भाषा विवि, कानपुर विवि और एकेटीयू में सहायक प्रोफेसरों, एसोसिएट प्रोफेसरों की भर्ती में अनियमितता से जुड़े दस्तावेजों के पुलिंदे भेज रहे हैं। जिसमें आरोप है कि अगर कोई अभ्यर्थी नियमों के मुताबिक स्क्रीनिंग में योग्य नहीं मिला या तो उसके लिए नियम शिथिल किये गये। अन्ततः उसे नियुक्त कर दिया गया। इसमें कई महिला शिक्षक भी हैं।

इतनी बड़ी संख्या में दस्तावेज मिलने से हतप्रभ एसटीएफ के अधिकारियों ने जांच दल में न सिर्फ सदस्यों की संख्या में इजाफा किया है बल्कि अब उन विवि प्रबंधन से नियुक्तियों, निर्माण से जुड़ी पत्रावलियां भी मांगी है, जिनमें गड़बड़ियों की संभावना है। सूत्रों का कहना है एकेटीयू में प्रशासनिक पदों पर तैनात अधिकारियों प्रोफेसरों की पत्रावलियां मांगी गयी हैं और कुछ पत्रावलियां कब्जे में भी लेनी शुरू कर दी है। भर्ती की स्क्रीनिंग कमेटी के प्रोफेसरों, अध्यक्ष व विज्ञापनों का ब्योरा भी मांगा गया है। सूत्रों का कहना है कि यह भी पूछा जा रहा है कि क्या किसी कमेटी में एसा प्रोफेसर शामिल रहा हो जिसके परिवार, रिश्तेदारी का कोई व्यक्ति अभ्यर्थी रहा हो और उसका अंतिम चयन हो गया हो। सूत्रों का कहना है कि इस पूरे खेल में  सब कुछ साफ नहीं है, नियमों-कानूनों का इस तरह से तोड़ा-मरोड़ा गया है कि जांच अधिकारियों को अब विशेषज्ञों की मदद की जरूरत पड़ने लगी है।

 

एकेटीयू से इनकी पत्रावलियां मांगी

1-डॉ.विनीत कुमार कंसल, निदेशक आईईटी व प्रतिकुलपति एकेटीयू

2-डॉ.अनुराग त्रिपाठी, परीक्षा नियंत्रक, एकेटीयू

3-डॉ. अरुण कुमार तिवारी, इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा के समन्वयक

4-डॉ.सीता लक्ष्मी, पीएचडी प्रवेश व पीएचडी अवार्ड समन्वयक

5-डॉ.मलय कुमार दत्ता, सीएएस, एकेटीयू निदेशक

6-डॉ.योगेश कुमार, केएऩआईटी सुल्तानपुर में प्रोफेसर

7-डॉ. प्रगति शुक्ला, आईईटी लखनऊ, सहायक प्रोफेसर इंग्लिश

8-प्रदीप कुमार वाजपेयी, रजिस्ट्रार, आईईटी लखनऊ

9-आरके सिंह ( राजीव कुमार सिंह), डिप्टी रजिस्ट्रार एकेटीयू

10-राजीव मिश्र, डिप्टी रजिस्ट्रार, आईईटी लखनऊ 

11-आशीष मिश्र को दिये काम का विवरण

 

 

इंजीनियरिंग कालेजों में रोटेशन सिस्टम तक लागू नहीं !

फर्नीचर खरीद में भी टेंडर के नियमों की अनदेखी  

विशेष प्रतिनिधि

लखनऊ। उच्च शिक्षा में कुलपति बनने का इतिहास गढ़ने वाले और छत्रपति शाहूजी महाराज कानपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.विनय पाठक ने एकेटीयू का कुलपति रहते हुए इस विवि में वित्तीय, शैक्षिक नियमों की अनदेखी नहीं की बल्कि उनके कार्यकाल में सरकारी इंजीनियरिंग कालेजों के निदेशक भी मनमाने ढंग से फैसले लेते रहे हैं। इनमें इंजीनियरिंग कालेज अतर्रा, इंजीनियरिंग कालेज आंबेडकरनगर, आईईटी लखनऊ भी शामलि हैं। अतर्रा कालेज में विभागाध्यक्ष नियुक्त करने में रोटेशन भी लागू नहीं किया। नियमों अनदेखी कर लाखों रुपय़े का फर्नीचर, कम्प्यूटर खरीदे गये।

उच्च, तकनीकी शिक्षा विभाग और एआईसीटीयू के नियमों के मुताबिक किसी भी इंजीनियरिंग कालेज में प्रत्येक तीन सालों में रोटेशन के आधार पर विभागध्यक्ष पर शिक्षकों का बदलाव किया जाना चाहिए। ये नियम केन्द्रीय विश्वविद्यालयों में भी लागू है लेकिन अब्दुल कलाम प्राविधिक विवि (एकेटीयू) के आधीन अधिकतर सरकारी इंजीनियरिंग कालेजों में रोटेशन नियम ही लागू नहीं किया गया। अतर्रा इंजीनियरिंग कालेज में 10 सालों से ये नियम लागू नहीं किया गया। इतना ही नहीं फर्नीचरों की खरीद-फऱोख्त में टेंडर से बचने के लिए लाखों रुपये की कुर्सी. कार्यालय टेबल, कम्प्यूटर वर्क आर्डर पर खरीदे गये। सूत्रों का कहना है कि बांदा फर्नीचर गैलरी नाम की एक दुकान से 22 अप्रैल 2019 को तकरीबन 10 लाख रुपये की रिवाल्विंग चेयर खरीदी गयी। उसी दिन यहीं एक लाख 56 हजार की एक आफिस मीटिंग टेबल खरीद ली गयी। यही नहीं, दीनदयाल योजना के फन्ड से 50 से अधिक कम्प्यूटर खरीद लिये गये, जिनका अब तक उपयोग ही नहीं हुआ है।

सूत्रों कहना है कि राजकीय इंजीनियरिंग कालेज अतर्रा बांदा के अतिरिक्त राजकीय इंजीनियरिंग कालेज आंबेडकरनगर समेत सात कालेजों में खरीद-फरोख्त में नियमों के शिथिलकरण का लाभ लेते हुए करोड़ों रुपये की खरीद-फऱोख्त हुई है। सबसे आश्चर्यजनक बाद ये है कि इन कालेजों में सीनियर फेक्लटी तक नहीं हैं। सिर्फ असिस्टेंट प्रोफेसरों के जरिये इंजीनियरिंग कालेज चलाया जा रहा है। इंजीनियरिंग की पढ़ाई की गुणवत्ता बढ़ाने ने नाम पर मनपसंद वस्तुएं खरीदी गयी हैं। सूत्रों का कहना तो यहां तक कहना है कि अधिकांश कालेजों के निदेशक कुलपति प्रो.विनय पाठक की संस्तुति पर बनाये गये हैं, लिहाजा इन्होंने लोगों ने बिना सामान खरीदे ही बड़ी संख्या में कंपनियों को भुगतान किया और जीएसटी का धन उन्हें देकर बाकी ब्लैकमनी के रूप में वापस ले लिया। ये सारा धन कहां और किसके खाते में गया ? यह जांच का विषय है। समाजवादी पार्टी के विधायक व विधानसभा में सपा विधायकों के मुख्य सचेतक मनोज पांडेय का कहना है कि तकनीकी व प्राविधिक शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार चरम पर है। इसमें नीचे से लेकर ऊपर तक सभी की मिलीभगत है। इस भ्रष्टाचार की जांच के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को न्यायिक जांच आयोग का गठन करना चाहिए।    

 

 इंजीनियरिंग कालेजों में ऊपर से नीचे तक भ्रष्टाचार है। मुख्यमंत्री को इस भ्रष्टाचार की जांच के लिए न्यायिक आयोग का गठन करना चाहिए। वह भ्रष्टाचार पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग करते हैं।

–मनोज पांडेय, पूर्व मंत्री व विधानसभा में सपा विधायक दल के मुख्य सचेतक

 

राजकीय इंजीनियिरंग कालेज अतर्रा में सिर्फ एक प्रोफेसर है, सभी विभाग असिस्टेंट प्रोफेसरों के जरिये संचालित किया जा रहा। सीनियर को कार्यवाहक विभागाध्यक्ष का जिम्मा दिया गया। प्रोफेसर व एसोसिएट न होने के चलते रोटेशन सिस्टम लागू नहीं हो सका। नियमों को लागू करने के लिए एकेटीयू से पत्राचार किया गया है।–

एसपी शुक्ला, निदेशक राजकीय इंजीनियरिंग कालेज अतर्रा

   

No comments:

Post a Comment