-दो दर्जन कर्मचारियों से हुई पूछताछ, अखिलेश यादव सरकार में नियुक्त, निर्माण से जुड़े दस्तावेज मांगे
-पहले और दूसरे कार्यकाल में बिना शासन की अनुमति के दौ सौ करोड़ के निर्माण कार्य हुये
कानपुर विवि के कुलपति प्रो. विनय पाठक पर कसता शिकंजा
परवेज़ अहमद
लखनऊ। छत्रपति शाहू जी महराज कानपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.विनय पाठक की ‘घूसखोरी’ की जांच कर रही स्पेशल टॉस्क फोर्स (एसटीएफ) के एक दल ने अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) में सर्च शुरू कर दी है। बुधवार को विवि के दो दर्जन से अधिक अधिकारियों, कर्मचारियों से पूछताछ की गयी। जांच अधिकारियों ने कुलसचिव सचिन कुमार से अखिलेश यादव सरकार के पहले कार्यकाल में नियुक्तियों और दूसरे कार्यकाल के दौरान वित्तीय लेन-देन निर्माण कार्य, सामानों की सप्लाई करने वाली कंपनियों को हुये भुगतान की पत्रावली तलब की हैं। विश्वविद्यालयों के प्रशासनिक अधिकारियों पर परचेज कमेटियों के प्रभारी अधिकारी व प्रोफेसरों में बेचैनी है, जहां-जहां प्रो.विनय पाठक के पास कुलपति का कार्यभार रहा है।
एसटीएफ के अपर पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारियों के नेतृत्व में एसटीएफ का दल अचानक एकेटीयू पहुंचा और सबसे पहले विवि के प्रशासनिक अधिकारियों से पूछताछ की। इसमें भवन, स्टेडियम निर्माण कार्य, कम्प्यूटर, सर्वर और परीक्षा के साफ्टवेयर की खरीद से जुड़े दस्तावेजों की मांग की। एक कार्य के लिए बार-बार कमेटियों के बदलाव के कारणों की पूछताछ की अधिकारियों को कुछ घंटों के अंदर दस्तावेज उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। सूत्रों का कहना एसटीएफ अधिकारियों ने विवि प्रशासन से न्यायमूर्ति प्रमोद श्रीवास्तव की जांच रिपोर्ट की मूल प्रति मांगी है, इस रिपोर्ट में ऩिर्माण कार्यो में व्यापक अनियमितता होने की बात कही गयी है। विवि के सूत्रों के मुताबिक प्रो.विनय पाठक को लगातार दो बार कुलपति नियुक्त किया गया, छह साल के कार्यकाल में उन्होंने तकरीबन दो सौ करोड़ रूपये का निर्माण कार्य कराया गया , इन कार्यों के लिए शासन से अनुमोदन ही नहीं लिया गया।
सूत्रों का कहना है कि एकेटीयू के कई कर्मचारियों ने जांच अधिकारियों को बताया है कि तत्कालीन कुलपति अपनी संपत्तियां, धन अपने करीबी कंपनियों व रिश्तेदारों की गई है। विवि के अधिकारी के नाम पर भी उन्होंने अपनी संपत्तियां कर रखी हैं। प्रारंभिक जांच में इस तरह के बयानों से जांच अधिकारी खासे बेचैन हैं।
सूत्रों का कहना है कि प्रो.विनय पाठक का पहले कार्यकाल के दौरान तकरीबन 236 शिक्षकों की सेन्ट्रलाइज्ड नियुक्ति की थी, जिसके विरोध में शिक्षकों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। विवि के सूत्र बताते हैं कि एकेटीयू में भी तकरीबन 22 प्रोफेसरों के पद के विपरीत 28 सामान्य शिक्षकों की नियुक्ति कर दी थी, जो आज भी कार्यरत हैं। इसके खिलाफ कई कर्मचारियों ने केन्द्रीय अनुसूचित जाति आयोग में शिकायत दर्ज करायी थी, जिस पर आयोग के सहायक निदेशक तरूण खन्ना ने तल्ख टिप्पणी के साथ कार्रवाई करने की हिदायत दी थी लेकिन विवि प्रबंधन ने इसकी भी अनदेखी कर दी है। एसटीएफ अधिकारियों का कहना है कि कुलपति के खिलाफ प्रशासनिक व वित्तीय गड़बड़ियों के ढेरों साक्ष्य मिले हैं, जांच चल रही है।
इंसर्ट
दलित कर्मचारी को बार बार बर्खास्त किया
लखनऊ। अनुसूचित जाति के मनीष कुमार कम्प्यूटर आपरेटर के पद पर कार्यरत थे, जिन्होंने विनियमतीकरण की गड़बड़ियों का विरोध करने पर सेवा से बर्खास्त कर दिया जबकि वह 22 साल की सेवा कर चुके थे। इस कार्रवाई के विरोध में मनीष कुमार ने राज्यपाल के यहां शिकायत की, जांच के बाद राज्यपाल ने मनीष को पूर्व की भांति सेवा में बहाल करने का आदेश जारी कर दिया, इस आदेश के अनुपालन में उन्हे सेवा दी गयी और कुछ दिनों के अंदर ही मनीष को फिर बर्खास्त कर दिया गया। अब मनीष ने केन्द्रीय अनुसूचित जाति आयोग में न्याय की गुहार लगायी, आयोग ने तत्कालीन कुलपति पर तल्ख टिप्पणी करते हुए मनीष को सेवा में लेने आदेश दिया है और उत्पीड़न के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई का आदेश दिया है।
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कोट
मैं, कल दिल्ली में था, आज ही लौटा हूं। मुझे जानकारी मिली है कि एसटीएफ के अधिकारी पूछताछ करने आये थे, कुछ डायुमेन्ट मांगें है। कुछ लोगों से पूछताछ की है। जांच में अधिकारियों का पूरा सहयोग किया जाएगा, वह जो दस्तावेज चाहेंगे, वह दिये जाएंगे।– प्रो. प्रदीप कुमार मिश्र,
कुलपति, अब्दुल कलाम प्राविधिक विवि
अंतरिम जमानत पर हाईकोर्ट का निर्णय आज
लखनऊ। आगरा विवि में एक भुगतान के लिए घूसखोरी के आरोपित प्रो.विनय पाठक को अंतरिम जमानत के लिए आज हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। आरोपित की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एलपी मिश्र व उऩके टीम के वरिष्ठ वकीलों ने बचाव पक्ष में दलीलें दी और राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता विनोद शाही और जयदीप माथुर ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टालरेंस की नीति पर काम कर रही है। ये भ्रष्टाचार का सीधा मामला है, लिहाजा जमानत न दी जाए। अदालत ने आदेश सुरक्षित रख लिया और गुरुवार को फैसला सुनायेगा।
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