केन्द्र सरकार की स्पेशल आडिट, सेवानिवृत न्यायमूर्ति की कमेटी ने पकड़ा घोटाला, पर कोई कार्रवाई नहीं
परवेज़ अहमद
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की स्पेशल टॉस्क फोर्स (एसटीएफ) एक तरफ घूसखोरी के आरोपित
कानपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.विनय पाठक की कारगुजारियों का चिटठा जुटा रही
है। दूसरी ओर वह जहां-जहां कुलपति रहे, वहां के भ्रष्टाचार के कारनामों के दस्तावेज
शासन भेजने का क्रम चल पड़ा है। इससे जांच का दायरा बढ़ने के संकेत हैं। हालांकि एसटीएफ
डॉ.भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा तक जांच केन्द्रित किये है। पर, ये दायरा बढ़ने
की संभावना है। सूत्रों का कहना है कि डॉ. अब्दुल कलाम प्राविधिक विवि (एकेटीयू) का
कुलपति रहते हुये नियम “ताक” पर रखकर रजिस्ट्रार बनाया।
जिसके बाद करोड़ों की खरीद-फरोख्त की गयी। केन्द्र सरकार के स्पेशल ऑडिटर दल ने अपनी
जांच में नये साफ्टवेयर, एएमसी, कम्प्यूटर खरीद, नियुक्तियों में भ्रष्टाचार की पुष्टि
करते हुए कार्रवाई के लिए कहा पर तत्कालीन प्रबंधन एक के बाद एक नई जांच कमेटियों का
गठन कर रहा है।
एकेटीयू में व्यापक पैमाने पर प्रशासनिक, वित्तीय भ्रष्टाचार की शिकायत होने
पर केन्द्र सरकार के उपनिदेशक (तकनीकी शिक्षा) (शिक्षा मंत्रालय) ने 10 जनवरी 2022
के पत्र संख्या टीईक्यूआईपी-III/पीआरओसी/2022/289 के जरिये उत्तर प्रदेश
प्राविधिक शिक्षा का प्रमुख सचिव अमृत अभिजात को शिकायतों जांच कराने का निर्देश दिया। पत्र में कहा गया था
कि कूटरचित दस्तावेजों, फर्जी अभिलेखों के जरिये भ्रष्टाचार व वित्तीय अनियमितता की
गयी है। इस प्रकरण की जांच कराकर केन्द्र सरकार को उसकी जानकारी उपलब्ध करायी जाए।
जांच के लिए मुख्य रूप से 50 लाख के कम्प्यूटर खरीद, चार लाख की फोटो कापी मशीन
की खरीद और साफ्टवेयर की एएमसी व नये साफ्टवेयर तैयार कराने में 60 लाख रुपये खर्च
करने की विशेष जांच कराने को कहा गया था। 17 जनवरी 2022 को राज्य सरकार ने खरीद-फरोख्त
अधिकारी व कुलसचिव प्रदीप वाजपेयी के कारनामों की जांच कर उसकी रिपोर्ट प्रदेश व केन्द्र
सरकार को भेजने को कहा। इस निर्देश के बाद विवि प्रबंधन ने प्रतिकुलपति मनीष गौड़ के
नेतृत्व में तीन सदस्यीय कमेटी गठित की थी, जिसने समय से जांच पूरी नहीं। आरम्भिक रिपोर्ट
तैयार की जिसका विरोध होने पर दूसरी कमेटी का गठन किया गया, जिसमें भी मनीष गौड़, डॉ.एस.पी
शुक्ला (निदेशक बांदा) और भानु प्रताप सिंह को शामिल किया गया, इस कमेटी पर उंगली उठनी
शुरू हो गयी क्योंकि कमेटी सुपरवाइजर उसी अधिकारी को बनाया दिया गया, जिस पर भ्रष्टाचार
में सीधे शामिल होने का आरोप था। सूत्रों का कहना है कि शिकायतकर्ता ने जांच कमेटी
के जरिये आरोपी का बचाने का इल्जाम लगाते हुए फिर केन्द्र सरकार को लिखा, इससे पूर्व
ही प्रो.विनय पाठक का एकेटीयू का कार्यकाल पूरा हो गया। और वह कानपुर विश्वविद्यालय
का कुलपति नियुक्त कर दिया गया। प्रो. प्रदीप मिश्र को एकेटीयू का कुलपति नियुक्त कर
दिये गये और उन्होंने पूर्व की दोनों जांच कमेटियों को भंग करते हुए हाईकोर्ट के सेवानिवृत
न्यायमूर्ति प्रदीप श्रीवास्तव के नेतृत्व में चार सदस्यीय कमेटी का गठन किया। न्यायमूर्ति
श्रीवास्तव के साथ डॉ. प्रेम सिंह, मनोज शुक्ला निदेशक कन्नौज और रंजीत की जांच कमेटी
बनाई, उन्होने प्रतिकुलपति मनीष गौड़ और आरोपी को सुपरवाइजर का दायित्व से मुक्त कर
दिया।
तृतीय जांच कमेटी ने एक अप्रैल 2022 को सौंपी अपनी जांच में कम्प्यूटर, साफ्टवेयर
खरीद में भारी भ्रष्ट्चार के साथ अऩ्य प्रकरणों में भी करोड़ों के भ्रष्टाचार की पुष्टि
की। न्यायमूर्ति श्रीवास्तव ने अपनी जांच रिपोर्ट के नौवें बिन्दु साफ लिखा कि कूटरचित
दस्तावेजों के बल पर भारी भ्रष्टाचार किया गया है। उन्होने क्रय अधिकारी व कुलसचिव
के साथ ही अन्य अधिकारियों के विरूद्ध कठोर कार्रवाई की संस्तुति की। जांच रिपोर्ट
में केन्द्र सरकार के स्पेशल आडिट दल की रिपोर्ट की भी पुष्टि की गयी।
सूत्रों का कहना है कि इस जांच रिपोर्ट के बाद “उच्च स्तर” भारी दबाव के बाद एक और कमेटी
गठित कर दी गयी, जिसको भुगतान की छानबीन और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई निर्धारित
करने का दायित्व सौंपा गया। सूत्रों का कहना है कि इस कमेटी में एकेटीयू के अधिकारियों
को ही फिर शामिल कर दिया गया। सूत्रों का कहना है कि 18 माह बीतने के बाद भी ये कमेटी
दोषियों का दायित्व निर्धारित नहीं कर पायी है।
‘रूसा’ में करोड़ों के घोटाले के साक्ष्य भी एसटीएफ के हाथ !
प्रभारी संजय चौधरी से पूछताछ, पूर्व कुलपति अशोक मित्तल भी तलब
लखनऊ। कानपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.विनय पाठक के खिलाफ भ्रष्टाचार की
जांच कर रही एसटीएफ अधिकारियों ने आगरा विश्वविद्यालय में डेरा डाल दिया है। जांच अधिकारी
ने मंगलवार को राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) योजना में करोड़ों का भुगतान
किये जाने के दस्तावेजों की छानबीन की। रूसा के प्रभारी अधिकारी प्रो.संजय चौधरी से
तीन सालों में खर्च की गयी राशि का पूरा श्रेणी क्रम में ब्यौरा मांगा है। सूत्रों का कहना है कि केन्द्र सरकार
की रूसा योजना के तहत बिना कार्य कराये ही भुगतान किया गया है। सबसे ज्यादा धन ललित
कला संस्थान के उन्नयन पर निकाला गया है। सूत्रों का कहना है कि पूर्व कुलपति अशोक
मित्तल को पूछताछ के लिए तलब किया गया है। इस संबंध में पक्ष जानने के लिए प्रो.विनय
पाठक से फोन पर संपर्क किया गया, परन्तु उनका नम्बर बंद है। एसटीएफ अधिकारियों का कहना
है कि प्रारम्भिक जांच का कार्य पूर्ण होन पर विनय पाठक को पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा।
गार्ड को डिप्टी रजिस्ट्रार बना दिया !
कर्मचारियों की शिकायत पर कमेटी बनी, नतीजा सिफर
लखनऊ। अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय के कर्मचारियों के विनियमतीकरण व
पदोन्नति में भी तत्कालीन कुलपति प्रो.विनय पाठक पर व्यापाक भ्रष्टाचार का इल्जाम लगा
था, विश्वविद्यालय के कर्मचारियों की ओर से की गयी शिकायत पर भी उत्तर प्रदेश सरकार
ने जांच का आदेश दिया था, जिस पर प्रतिकुलपित के नेतृत्व में चार सदस्यीय कमेटी का
गठन किया था, मगर इस कमेटी ने अब तक अपनी रिपोर्ट शासन को नहीं भेजी थी।
एकेटीयू के कर्मचारी कमल कुमार, राधेश्याम समेत 50 से अधिक कर्मचारियों ने शासन
को भेजी शिकायत में कहा था कि पदोन्नति में “वसूली” की जा रही है। विनियमतीकरण
में धांधली की जा रही है। सूत्रों का कहना है कि इसके जरिये एक सुरक्षा कर्मचारी आरके
सिंह को सीधे डिप्टी रजिस्ट्रार बना दिया गया था। इस शिकायत पर प्राविधिक शिक्षा अनुभाग
एक के उपसचिव ने कुलपति को पूरे मामले की जांच कराकर कार्रवाई करने का निर्देश दिया
था। शासन के रुख पर एक जांच कमेटी का गठन किया गया, मगर उसकी रिपोर्ट अब तक तैयार नहीं
हुई है।

No comments:
Post a Comment