-उत्तर प्रदेश के सभी 18 मंडलों में भ्रष्टाचार निरोधक इकाई गठित करने का आदेश
-सीबीआई, ईडी से सिर्फ जांच की सिफारिश नहीं, भ्रष्टाचार के साक्ष्य भी दे रही
सरकार
परवेज़ अहमद
लखनऊ। सरकारी ‘सरपरस्ती’ में घोटालों, भ्रष्टाचार
की फसल पीढ़ी दर पीढ़ी लहलहा रही है-‘तुम्हारी फाइलों में गांव
का मौसम गुलाबी है, मगर ये आंकड़े झूठे हैं, ये दावा किताबी है।‘ डेढ़ दशक पहले अदम गोंडवी ने ये लिखकर उस जन भावना को स्वर दिया,
पर भ्रष्टाचार के कोलाहल में ये स्वर अनसुना हो गया। अब “योगी” व कर्मकांडी मुख्यमंत्री
योगी आदित्यनाथ ने इन पंक्तियों का ‘संज्ञान’ लिया है। उन्होंने भ्रष्टाचार
के खिलाफ न सिर्फ जंग छेड़ी है। ‘जीरो टालरेंस’ शब्द को सचाई में तब्दील
करने वाले इकलौते राजनीतिक योद्धा बनकर खड़े हो गये हैं। अब राज्य के सभी 18 मंडलों
में भ्रष्टाचार उन्मूलन इकाई खोलने की हरी झन्डी दिखायी है। ये उत्तर प्रदेश की राजनीति
का सुनहरा रंग है, परिस्थितियों ने करवट नहीं बदली तो नागरिकों को भ्रष्टाचार के दानव
से मुक्ति मिलती दिखने लगेगी।
मई 2017 में मुख्यमंत्री का ओहदा संभालने के बाद योगी आदित्यनाथ ने भ्रष्टाचार
के खिलाफ हथौड़ा चलाने का वादा किया। उन दिनों उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के
2600 करोड़ के पीएफ घोटाले का शोर था। व्यवस्था संचालकों की संलिप्तता के इल्जाम थे।
योगी आदित्यनाथ ने जांच सीबीआई को सौंपी। फिर युवाओं के अरमानों, मेधा, मेहनत पर पानी
फेरने के आरोपों में डूबे उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग की भर्तियों की जांच सीबीआई को
सौंपी। प्रदेश की सबसे बड़े भर्ती आयोग पर भाई-भतीजा करने, पारदर्शिता नहीं बरतने का
इल्जा था। जिसके विरोध में युवा सड़कों पर पर थे। न्याय की गुहार हाईकोर्ट तक पहुंच
गई थी। योगी आदित्यनाथ सरकार ने जांच सौंपने के साथ सीबीआई को वे सभी संसाधन मुहैया
कराये जिससे जांच तेजी से बढ़ सके। सपा सरकार के ड्रीम प्रोजेक्टों में शुमार रिवर
फ्रन्ट में भी घोटाला होने का जिन्न निकला तो ये प्रकरण भी सीबीआई के हवाले कर दिया।
आजम खां के नेतृत्व वाले जल निगम में भर्ती घोटाला का खुलासा हुआ तो योगी आदित्यनाथ
ने केन्द्र की सबसे महत्वपूर्ण एजेंसी व जनमानस में साख रखने वाली सीबीआई को सौंपा।
कई और जांचें भी सीबीआई को सौंपी गयी। उत्तर की सत्ता में बदलाव की नई बयार में महत्वपूर्ण रहे खनन घोटाले की पहले से सीबीआई जांच
कर रही थी, राज्य के अधिकारियों को निर्देश दिया जा गया कि जांच एजेंसी को उनकी मांग
के अनुरूप हर पत्रावली उपलब्ध करायी जाए। योगी आदित्यनाथ ने जांच एजेंसी को संसाधन
उपलब्ध कराने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
पर, पांच साल से अधिक का समय गुजर जाने के बाद ये केन्द्रीय जांच एजेंसी किसी
निष्कर्ष तक नहीं पहुंची। आरोपों से घिरे कई अधिकारी धीरे-धीरे सेवानिवृत हो गये। कुछ
आरोपी राजनेताओं ने राजनीतिक पाला बदल लिया। इससे कार्रवाई शिथिल हो गई। इससे भ्रष्टाचार
के प्रति जीरो टालरेंस की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनथ और दृढ़ हो गये। जांच के नाम पर
लंबा समय लगाने और भारी संसाधनों के खर्च को रोकने के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार ने
उत्तर प्रदेश में संगठित अपराध के लिए गठित स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) को माफिया
के साथ भ्रष्टाचारियों के खिलाफ दस्तावेजी साक्ष्य जुटाने का अतिरिक्त जिम्मा सौंपा।
सूत्रों का कहना है कि इसके बाद माफिया की मनी लांड्रिंग हो, काले कारोबार में संलिप्त सफेदपोश या फिर नौकरशाह सबका लेखा-जोखा
जुटाने, संपत्तियों की पत्रावली तैयार करने का कार्य तेज हो गया। सूत्रों का कहना है
कि मुख्यमंत्री की दृढ इच्छा का ही नतीजा है कि एसटीएफ ने राज्य के ढेरों एसे लोगों
की पत्रावलिया तैयार कर ली हैं जिन्होंने भ्रष्टाचार, पद के दुरुयोग, संगठित अपराध
से अकूत दौलत कमाई है। सूत्रों का कहना है कि राज्य सरकार अब अपने संसाधनों से जुटाये
गये साक्ष्य केन्द्रीय गृह मंत्रालय के जरिये भ्रष्टाचार के खिलाफ कारगर कार्रवाई कर
रही जांच एजेंसियों को भेज रहे हैं। इसका नतीजा ये है कि साक्ष्य जुटाने की आड़ में
कार्रवाई को लंबित रखने के कतिपय प्रयास थमना शुरू हो गये हैं। माफिया मुख्तार अंसारी
व उनके परिवार का मामला हो या पूर्व एमएलसी इकबाल, पूर्व विधायक विजय मिश्रा की संपत्तियों
का मामला दस्तावेज प्रवर्तन निदेशालय को भेजे जा रहे हैं। पीडब्ल्यूडी के शीर्ष अधिकारियों
का निलंबन भी भ्रष्टाचार रोकने की दिशा में एक बढ़ता कदम है। सूत्रों का कहना है कि
कई नौकरशाहों, राजनेताओं का चिट्ठा ईडी, आयकर अधिकारियों को भी भेजा गया है। उच्च शिक्षा
में गहरी पैठ रखने वाले प्रो.विनय पाठक पर का भ्रष्टाचार पर कार्रवाई, राज्य के कुछ
आर्थिक भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कार्रवाई मुख्यमंत्री की इसी दूरगामी सोंच का परिणाम
है। बिना नीट आयुर्वेद कालेजों में दाखिले की सीबीआई जांच के साथ निदेशक आयुर्वेद का
निलंबन, होम्योपैथी व यूनानी के निदेशकों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई भी मुख्यमंत्री
योगी आदित्यनाथ के जीरो टालरेंस का परिणाम है। सिर्फ “बिग गन” के खिलाफ नहीं छोटे भ्रष्टाचारियों
पर लगाम कसने के लिए भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
ने राज्य के सभी मंडलों में पुलिस की भ्रष्टाचार निरोधक इकाई स्थापित करने को मंजूरी
प्रदान कर दी है।
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