Monday, 28 November 2022

कुलाधिपति रामनाईक ने भी प्रो.विनय पाठक को दिया संरक्षण

 -इग्नू के डिप्टी डायरेक्टर ने प्रो.पाठक के विरुद्ध भ्रष्टाचार, षणयंत्र का मुकदमा चलाने की राम नाईक से मांगी थी अनुमति

-आईआईटी कानपुर के पूर्व निदेशक प्रो.संजय धाण्डे ने प्रो.पाठक का इग्नू में उपकुलपति बनाने का इन्टरव्यू किया, विजिलेंस क्लीयरेंस में फंसी थी फाइल

परवेज अहमद

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की तकनीकी शिक्षा के शीर्ष अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) के कुलपति प्रो.विनय पाठक के संरक्षण में तत्कालीन राज्यपाल राम नाईक ने इंदिरागांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) के डिप्टी डायरेक्टर डॉ.आर.सुदर्शन के उस ई-मेल और दस्तावेजों को रद्दी टोकरी में डाल दिया, जिसमें प्रो.विनय के विरुद्ध आपराधिक षडयंत्र का मुकदमा चलाने की अनुमति मांगी गई थी। आरोपों के समर्थन में इग्नू कार्य परिषद की चार मीटिंगों के मिनट्स, कानूनों की धाराओं, दिल्ली हाईकोर्ट फिर सुप्रीमकोर्ट की याचिका का उल्लेख था। आश्चर्यजनक बात ये है कि अपने बायोडेटा में छोटी-छोटी उपलब्धियों का उल्लेख करने वाले प्रो.विनय पाठक ने इग्नू बोर्ड ऑफ मैनेजमेन्ट (बीओएम) का सदस्य होने और तत्कालीन कुलपति प्रो.एम.आलम की गैरमौजूदगी में विवि की प्रोसीडिंग का नेतृत्व करने का उल्लेख नहीं किया है। सूत्रों का कहना है कि डॉ भीमराव आंबेडकर विवि के प्रिंटिंग कार्य में घूसखोरी की जांच कर रही यूपी स्पेशल टॉस्क फोर्स (एसटीएफ) ने आर.सुदर्शन के गुडगांव ( हरियाणा) में संपर्क साधा है।

केन्द्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के मुख्यमंत्रित्व काल (यूपी) में उनके सचिव रह चुके उत्तर प्रदेश कॉडर के आईएएस अनंत कुमार सिंह के मानव संसाधन मंत्रालय (शिक्षा मंत्रालय) में संयुक्त सचिव उच्च शिक्षा रहते हुए प्रो.विनय पाठक इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) कार्य परिषद के सदस्य नियुक्त हुये थे । कुछ अरसे बाद ही इग्नू के बाद उपकुलपति पद पर योग्य उम्मीदवार चयनित करने के लिए तीन सदस्यीय पैनल गठित किया गया, इस पैनल में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर के निदेशक प्रो.संजय गोविंद धाण्डे (प्रो.विनय पाठक के पीएचडी के गाइड), यूजीसी के पूर्व अध्यक्ष डॉ.हरिगौतम और सीएसआईआर के निदेशक प्रो.एससी जोशी शामिल थे। इस कमेटी ने दस उम्मीदवारों की सूची तैयार की मगर साक्षात्कार सिर्फ प्रो.कपिल कुमार, प्रो.रविन्द्र कुमार श्रीवास्तव, प्रो.विनय पाठक का कराया गया। नियमानुसार उपकुलपति पद के लिए पैनल में शामिल उम्मीदवारों की विजिलेंस व आईबी (इंटेलीजेंस ब्यूरो) की क्लीयरेंस आवश्यक होती है। सूत्रों का कहना है विजिलेंस जांच से पहले ही इन तीनों उम्मीदवारों के विरुद्ध किस्म-किस्म के आरोपों का कुलासा होने लगा। लिहाजा  उपकुलपति नियुक्त करने की प्रोसीडिंग रुक गई। मगर प्रो.विनय पाठक कार्य परिषद के सदस्य बने रहे।

सूत्रों का कहना है कि प्रो.एम आलम ने इग्नू का कार्यवाहक कुलपति रहते हुए और फिर पूर्णकालिक कुलपति के रूप में प्रो. विनय पाठक को विभिन्न कमेटियों का अध्यक्ष नामित किया। प्रो.आलम खुद भी भ्रष्टाचार, गैर कानूनी ढंग से विश्वविद्यालयों को मान्यता देने के आरोपों से घिरे थे। अपुष्ट आरोप तो ये भी है कि प्रो.विनय पाठक ने अपने राजनीतिक रसूखों के बल प्रो.आलम को पूर्णकालित कुलपति नियुक्त कराया था। सूत्रों का कहना है कि इग्नू के कुलपति, कई कमेटियों के चेयरमैन की कार्यशैली का विरोध करने पर तत्कालीन डिप्टी डायरेक्टर योजना एवं विकास डॉ.आर सुदर्शन को पहले न सिर्फ प्रताड़ित किया गया बल्कि नवम्बर 2014 में निलंबित कर दिया गया। प्रो. विनय पाठक की कमेटी ने 6 दिसम्बर 2014 को 45 दिनों के लिए निलंबन बढ़ा दिया। आर.सुदर्शन ने इग्नू कार्य परिषद की 118, 119, 120 और 122वीं की रिपोर्टों का हवाला देते हुये याचिका में साबित करने का प्रयास किया कि प्रो.विनय पाठक ने अनुशासन समिति की अध्यक्षता करते हुए आपराधिक साजिश के तहत उन्हें निलंबित कराया। इस बीच उत्तर प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति ने आईआईटी कानपुर के तत्कालीन निदेशक प्रो.संजय धाण्डे को ही एकेटीयू की कुलपति चयन के लिए सर्च कमेटी का अध्यक्ष बना दिया और अनंततः प्रो.विनय पाठक ही अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय के कुलपति नियुक्त हो गये।

आखिर आर.सुदर्शन ने राज्य विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति व राज्यपाल राम नाईक को ई-मेल, डाक से दस्तावेजों के साथ प्रत्यावेदन भेजा। जिसमें प्रो.विनय पाठक की आपराधिक साजिशों का उल्लेख करते हुए उसमें इग्नू के तत्कालीन कुलपति प्रो.एम आलम को दोषी बताते हुये पाठक के खिलाफ आपराधिक षणयंत्र का मुकदमा चलाने की अनुमति मांगी थी। ल तत्कालीन राज्यपाल राम नाईक के कार्यालय ने तथ्यों से भरी इस शिकायत को नजर अंदाज कर दिया था।

 

इग्नू के 263वें प्रतिवेदन में भी गड़बड़ी का उल्लेख

राज्यसभा के 10 और लोकसभा के 31 सांसदों वाली समिति ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय का कार्यकरण दो सौ तिरसठवां प्रतिवेदन में विवि के कार्यवाहक कुलपति और कार्य परिषद की कार्यशैली पर सवाल उठाया गया है। 11 जून 2014 को राज्यसभा के पटल पर पेश इस रिपोर्ट में विवि प्रबंधन की मनमानी, नियम विरुद्ध निर्णय, मान्यता में गड़बड़ी जैसे उल्लेख बार-बार आये हैं। प्रोफेसरों, अधिकारियों के निलंबन पर समिति ने आश्चर्य जाहिर किया है। जिम्मेदारों पर कार्रवाई की संस्तुति भी की है। सूत्रों का कहना कि इग्नू के कुलपति प्रो.एम आलम ने ही राजस्थान और उत्तराखंड के विश्वविद्यालयों में कुलपति पद पर प्रो.विनय पाठक की नियुक्ति की प्रोसीडिंग को बढ़ाया है। प्रो.आलम से फोन पर संपर्क का प्रयास किया गया लेकिन वह उपलब्ध नहीं हुए।

 

कोट----

हां, मैने प्रो.विनय पाठक के विरुद्ध आपराधिक कार्रवाई करने और स्थानीय स्तर पर पाठक की कार्यशैली व अतीत की जांच कराने के लिए उत्तर प्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल राम नाईक को विस्तृत विवरण के साथ ई-मेल भेजा था। अदालत में मुकदमा चलाने की मंजूरी मांगी थी, मगर मुझे कोई जवाब नहीं मिला- डॉ.आर सुदर्शन, पूर्व डिप्टी डायरेक्टर उच्च शिक्षा मानव संसाधन मंत्रालय ( फोन पर इस संवाददाता से)

 

 

 

 

 

  

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