Thursday, 24 November 2022

कुलपति के भ्रष्टाचार की ‘थाह’ नहीं ले पा रही एसटीएफ

 एक संशोधित शासनादेश की आड़ में एपीआई की अनदेखी कर भर्ती किये प्रोफेसर

परवेज़ अहमद

लखनऊ । छत्रपति शाहूजी महराज कानपुर विवि के कुलपति प्रो.विनय पाठक के नियमों के विरुद्ध निर्णयों की एसटीएफ  थाह को नहीं मिल पा रही। वह जितनी ही गहराई में जा रही है, भ्रष्टाचार की उतनी परते खुलती जा रही हैं। अब आउटसोर्सिग में गड़बड़ी का जिन्न भी सामने आ गया है। जांच में निर्माण, भर्ती, कम्प्यूटर खरीद, धन आवंटन से जुड़े 45 अधिकारी जांच अधिकारियों के रडॉर पर हैं। जिनसे पूछताछ के लिए एसटीएफ नई एफआईआर दर्ज करने की तैयारी में हैं।

सूत्रों का कहना है कि प्रो.विनय पाठक के जमाने में निर्माण कार्यों के साथ सबसे अधिक गड़बड़ियां भर्ती में हुई हैं। प्रोफेसरों, सहायक प्रोफेसरों असिस्टेंट प्रोफेसर इंडेक्ट ( एपीआई ) की स्क्रीनिंग की आड़ में बढे पैमाने में योग्य दावेदारों को बाहर कर पंसदीदा अभ्यर्थियों को नौकरियों पर रखा गया है। ये कार्य अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू), डॉ.भीमराव आंबेडकर विवि आगरा, ख्वाजा मोइन उद्दीन भाषा विवि लखनऊ और छात्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय में इसी तरह की गड़बड़ियां की गयी हैं। कानपुर विवि और एकेटीयू के कई अभ्यर्थियों ने न्याय के लिए कोर्ट में गुहार लगा रही है। दरअसल, किसी भी व्यक्ति को सहायक प्रोफेसर, एसोशिएट प्रोफेसर बनाने के लिए 100 नम्बर की मार्किंग होती है। इसमें 80 नम्बर एपीआई के होते। जिसमें अभ्यर्थी का अकादमिक (शैक्षिक) आकलन किया जाता है। यानी उसके उसकी डिग्री, नेट, पीचएडी के अतिरिक्त रिसर्च पेपर, टीचिंग एक्सपीरिंयस आदि आदि होता है और 20 नम्बर का साक्षात्कार होता है। जिस भी अभ्यर्थी को 50 फीसद से ऊपर के अंक मिल जाते हैं, वह भर्ती के योग्य मान लिया जाता है। परन्तु एक नियम में संशोधन करके अब एपीआई को स्कीनिगं अंकों में तबदील कर दिया गया। जिसकी आड़ में बड़े पैमाने पर एसे अभ्यर्थियों को सहायक. एसोसिएट और प्रोफेसर बनाया जा रहा है जो योग्य नहीं हैं। प्रो.विनय पाठक की अगुवाई वाली साक्षात्कार समिति ने एपीआई इंडेक्स में अंतिम पायदान वाले व्यक्ति को सहायक प्रोफेसर बना दिया गया। जबिक उनसे ऊपर नौ और लोग थे।

सूत्रों का कहना है कि एकेटीयू के कुलपति रहते हुए प्रो.विनय पाठक ने इसी आदेश की आड़ में दर्जन भर अधिक लोगों को न सिर्फ प्रोन्नतियां प्रदान कर दी बल्कि अपने मुखालिफों को डिमोट भी कर दिया। वे जहां जहां कुलपति रहे, वहां-वहां उन्होंने इसी नियम की आड़ में व्यापक भर्तियां की। कई एसे लोगों को प्रोफेसर, एसोशिएट प्रोफेसर नियुक्त किया गया तो अर्हता के मानकों को पूरा नहीं करते हैं। ये सारे दस्तावेज एसटीएफ को उपलब्ध कराये गये हैं।

 

 

नई एफआईआर की तैयारी !

एसटीएफ सूत्रों का कहना है कि लकनऊ के इंदिरानगर थाने में दर्ज जिस एफआईआर के सहारे वह जांच कर रहे हैं, कानूनों के हिसाब से उसका दायरा बहुत छोटा है। दूसरे विश्वविद्यालयों के दस्तावेजों को कब्जे में लेने के लिए उन्हें पहली एफआईआर की विवेचना में सामने आये गवाहों के बयान लेने होंगे और बयान उस केस से सीधा जुड़ेगा  तभी जांच आगे बढ़  सकती है। सूत्रों का कहना है कि एसटीएफ को अभी इस तरह के गवाह नहीं मिले हैं, जिनके बयानों से सारी कड़ियां एक दूसरे से जुटे हैं। पर, चारों विश्वविद्यालय में फैले साक्ष्य जरूर व्यापाक भ्रष्टाचार के संकेत कर रहे हैं। सूत्रों कहना है कि इन्हीं तकनीकी दिक्कतों को दूर करने के लिए एसटीएफ अधिकारी अब एक नई एफआईआर कराने की तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए विविध परीक्षण का कार्य चल रहा है।

 

कुलपति का चार्ज लेने से  अफसर ने इंकार किया !

छत्रपति शाहूजी महाराज विवि कानपुर के कुलपति प्रो.विनय पाठक के खिलाफ भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियममितता और गड़बड़ियों के ढेरों साक्ष्य मिलने के बाद आखिर कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने भी उन्हें हटाकर उनका कार्यभार किसी अन्य को देने पर मंथन शुरू कर दिया है। सूत्रों का कहना है कि कानपुर में तैनात एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी को कार्यवाहक कुलपति का चार्ज देने तैयारी थी, उनसे ओपेनियन मांगी गयी तो अधिकारी ने चार्ज लेने में असमर्थता जाहिर कर दी है। अब राजभवन ने विवि के कुलसचिव डॉ.अनिल यादव से विवि के तीन वरिष्ठ प्रोफेसरों का पैनल मांगा है। इनमें से ही किसी को कार्यवाहक कुलपति का चार्ज दिया जाएगा।

 

कुलपति के समर्थक भी सक्रिय !

कानपुर विवि के कुलपति पर जैसे जैसे कानून का शिकंजा कस रहा है, वैसे-वैसे समर्थक सक्रिय हो गये हैं। शिकायतकर्ता से लगातार संपर्क कर प्रकरण को शांत कराने का दबाव बनाया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि आरोपी कुलपति के कार्यशैली के विरोधियों की संख्या इतनी अधिक है कि एक को शांत कराते हुए दूसरे उठ खड़ा होता है। बताया गया है कि कुलपति के कार्यों से राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ भी खासा नाराज है। जल्द ही उनकी ओर से भी सरकार को कार्रवाई तेज करने के संकेत दिये जा सकते हैं।

  

 

   

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