Wednesday, 9 November 2022

‘सितारों’ की चाल समझने के लिये प्रो.पाठक ने नियुक्त किया ज्योतिषी !

 


 

 


-प्रोफेसरों की नियुक्ति में मानकों की अनदेखी, किसी को 1.40 लाख मासिक, किसी को सिर्फ 40 हजार, तीन महिला शिक्षकों को 21600 मासिक वेतन तय किया

-छत्रपति शाहूजी महाराज कानपुर विवि में भी किया गोलमाल

 

परवेज अहमद

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के सरकारी विश्वविद्यालयों में समानांतर सत्ता चलाने के आरोपों से घिरे छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.विनय पाठक ने सितारों की चाल समझने के लिये विवि में ज्योतिष व हिन्दू दो नये पाठ्यक्रम शुरू कर दिये और यही नहीं इन कोर्सो को पढ़ाने के लिए जिन शिक्षकों की नियुक्त की गई, उन्हें पांच सौ रुपये प्रति घंटा के हिसाब से वेतन भी निर्धारित कर दिया। विवि के कुलसचिव अनिल कुमार यादव ने 31 अगस्त 2022 को इसका आदेश जारी किया। यही नहीं प्रो.विनय पाठक की अध्यक्षता वाली समिति ने दो दर्जन से अधिक शिक्षकों को नियुक्तियां और इच्छानुसार उनका वेतन तय कर दिया। किसी को एक लाख 40 हजार रुपया महीना और किसी को 21 हजार छह सौ रुपया वेतन तय किया गया।

उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और राजस्थान के विश्वविद्यालयों में कुलपतियों का ओहदा संभाल चुके और मौजूदा समय में छत्रपति शाहू जी महाराज विवि कानपुर के कुलपति प्रो.विनय पाठक जिन-जिन विश्वविद्यालयों में तैनात रहे हैं, वहां उन्होंने खुद के नियम बनाये और उसे लागू किया। प्रत्येक विवि की भर्ती में व्यापक अनियमितता की शिकायतें हुई। जब भी किसी ने इस पर आपत्ति जताई तो अति सुरक्षा घेरे में रहने वाले भवन में बुलाकर फटकारे जाने के भी आरोप हैं। एकेटीयू में भर्ती की गड़बड़ियों के बाद कानपुर विवि में भर्ती में गड़बड़ी का क्रम जारी रखने का आरोप है।

प्रो. विनय पाठक की अगुवाई वाली शैक्षिक समिति ने जुलाई माह में कानपुर विश्वविद्यालय में सितारों की चाल समझने के लिए ज्योतिष का एक नया पाठ्यक्रम लांच कर दिया। इसमें दाखिले की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गयी। यही नहीं इस विश्वविद्यालय में हिन्दू स्ट़डी नाम से एक कोर्स भी लांच कर दिया। इन दोनों ही कोर्सों को लांच करने से पहले प्रोफेसर, सहायक प्रोफेसर के पद सृजित नहीं किये गये, शासन से इसकी अनुमति भी नहीं ली गयी। उल्टे अतिथि प्रवक्ता को नियुक्त करते हुए कोर्स संचालित कर दिया गया। इन कोर्सों में अध्यापन के लिए 500 रुपये प्रतिघंटा का भुगतान करते हुए शिक्षक नियुक्त कर दिये। हिन्दू स्टडी पढ़ाने के लिए आकाश अवस्थी और सितारों की चाल समझने और समझाने अभिनव त्रिपाठी को नियुक्त कर दिया गया।

सूत्रों का कहना है कि प्रो.पाठक की अगुवाई वाली जिस समिति ने असिस्टेंट, सहायक और प्रोफेसर की नियुक्त की है, उसके लिए वेतन का कोई मानक निर्धारित नहीं किया गया है। एक प्रोफेसर को एक लाख 40 हजार मासिक वेतन दिया गया। एक सहायक प्रोफेसर को 50 हजार, दूसरे को 40 हजार और तीन सहायक प्रोफेसरों को 21 हजार 600 मासिक वेतन निर्धारित किया गया है। इस नियुक्ति का कुलसचिव ने 31 अगस्त 2022 को लिखिक आदेश जारी किया है।

नियम क्या है ?

उच्च शिक्षा की नियमावली के मुताबिक जब भी कोई विवि सेल्फ फाइनेंस कोर्स शुरू करता है तो छात्रों से फीस के रूप में वसूली जानी धनराशि का 80 फीसदी हिस्सा उस विभाग के शिक्षकों पर खर्च किया जाता है। 20 फीसदी हिस्सा विवि प्रबंधन रखरखाव आदि के लिए सुरक्षित रखता है। सवाल ये है कि पाठक्रमों के लिए ये कोर्स शुरू किये गये हैं-उसमें छात्रों की संख्या ही इतनी नहीं कि निर्धारित की गई राशि का उन्हें भुगतान किया जा सके, एसे में इन अध्यापकों को किस मद से भुगतान किया जा रहा है। वित्त विभाग के विशेषज्ञों का कहना है कि इसके लिए कुलपति के विवेकाधीन धन कोष का इस्तेमाल होता है। विवि अधिनियमों में कुलपति को असीमित अधिकार दिये हैं। इसी की आढ़ में प्रो.विनय पाठक बड़ी संख्या में मनमानी तरीके से नियुक्तियां की हैं।

 

 डीआरआई के निदेशक डॉ.सुधीर हो सकते हैं कार्यवाहक कुलपति

भ्रष्टाचार के आरोपों में नामजद प्रो.विनय पाठक की कार्यशैली की एक एक परत उधड़ने के बाद छत्रपति शाहू जी महाराज विवि कानपुर के लिए कार्यवाह कुलपति की तलाश चल रही है। कानपुर के कमिश्नर ने चार्ज लेने से इनकार कर दिया, जिसके बाद तीन सदस्यीय पैनल तीन दिन पहले ही राजभवन भेजा जा चुका है। इसमें वरिष्ठता क्रम में सबसे ऊपर नाम प्रो.नंदलाल यादव का नाम है, उसके बाद प्रो. संजय स्वर्णकार और तीसरे नम्बर प्रो.सुधीर अवस्थी का नाम है। प्रो. अवस्थी भष्टाचार के आरोपों से घिरे कुलपति प्रो.विनय पाठक के बेहद करीबी हैं, उन्होंने ही इन्हें प्रतिकुलपति नियुक्त किया था। प्रो.अवस्थी के पक्ष में एक बात और ये है कि वे दीन दयाल उपाध्याय शोध संस्थान (डीआरआई) के निदेशक भी हैं। अगर विनय पाठक की कुलपति पद से विदाई हुई तो प्रो.अवस्थी का नाम शीर्ष पर होने की संभावना है।

 

हाईकोर्ट के फैसले पर सबकी नजर

प्रो.विनय कुमार पाठक के खिलाफ दर्ज मामले को लेकर हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में आज सुनवाई होनी है। ये सुनवाई प्रो.विनय की उस याचिका पर होनी है, जिसमें उन्होंने लखनऊ के इंदिरानगर में दर्ज एफआईआर को रद करने और उन्हें अग्रिम जमानत देने की मांग की गयी है। सूत्रों का कहना है कि सुनवाई से पहले ही प्रकरण की जांच कर रही एसटीएफ ने सरकारी अधिवक्ता के जरिये इस मामले में अब तक दो लोगों को गिरफ्तारी उनसे हुई बरामदगी और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का ब्यौरा अदालत में दाखिल कर दिया है। अब उच्च शिक्षा की दुनिया से जुड़े लोगों की निगाहें हाईकोर्ट के निर्ण पर टिकी हैं।

  

 


No comments:

Post a Comment