-कानपुर के छह पूर्व विधायकों ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री के लिखे पत्र में लगाया आरोप
-राजस्थान, उत्तराखंड
और यूपी के चार विवि में प्रो.विनय पाठक के कार्यकाल की सीबीआई, ईडी जांच की मांग की
परवेज अहमद
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की
उच्च शिक्षा में बेहद ‘प्रभावी’ व छत्रपति शाहूजी महाराज
विश्वविद्यालय कानपुर के कुलपति प्रो.विनय पाठक पर अब छह पूर्व विधायकों ने भ्रष्टाचार,
भर्ती में गड़बड़ी, सत्र अनियमित करना और उच्च शिक्षा की गरिमा गिराने का आरोप लगाते
हुए राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को पत्र लिखा है। इसकी एक कापी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
को भी भेजी गयी है। पत्र में साफ कहा गया है कि केन्द्र सरकार के एक वरिष्ठतम मंत्री
व उनके परिवार के सदस्यों व राज्य सरकार के कुछ मंत्रियों व अधिकारियों का भी उन्हें
संरक्षण है, जिसके चलते जांच शिथिल की जा रही है। पूर्व विधायकों ने कहा है कि प्रो.विनय
पाठक के कारनामों की जांच सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों से करायी
जाए, क्योंकि आरोपी के भ्रष्टाचार का दायरा राजस्थान, उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त उतराखंड
तक फैला हुआ है, जिसकी जांच यूपी एसटीएफ के अधिकार क्षेत्र से बाहर है।
पूर्व विधायक भूधर नारायण
मिश्र, पूर्व विधायक गणेश दीक्षित, पूर्व विधायक नेकचन्द्र पांडेय, पूर्व विधायक संजीव
दरियाबादी, पूर्व विधायक सरदार कुलदीप सिंह और पूर्व विधायक हाफिज मोहम्मद उमर के संयुक्त
हस्ताक्षर से राज्यपाल व राज्य के विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल को भेजे
गये पत्र में संस्कृत के श्लोक जिसका अर्थ है कि “बिना साफ सुधरी और उच्च शिक्षा के मानव समाज अधूरा
है।“ से बात शुरू करके प्रो.विनय पाठक पर गंभीर आरोपों
का उल्लेख किया गया है। कहा गया है कि प्रो.विनय
पाठक उच्च शिक्षा में भ्रष्टाचार कदाचार के पर्याय हैं। उन्होंने शिक्षा के उच्च मंदिरों,
हल्द्वानी (उत्तराखंड) कोटा (राजस्थान), अब्दुल कलाम प्राविधिक विवि (एकेटीयू), आंबेडकर
विवि आगरा, ख्वाजा मुईन उद्दीन चिश्ती भाषा विवि और छत्रपति शाहू जी महाराज कानपुर
विवि के निर्माण कार्य, भर्ती, आधुनिकीकरण, कर्मचारियों, प्रोफेसरों की नियुक्त में
व्यापक अनियमितता की है। एसे लोगों को संविदा शिक्षक या पूर्णकालिक प्रोफेसरों का पद
पर नियुक्त किया गया है, जो किसी भी यूजीसी के मानकों को पूरा नहीं करते हैं। इस काम
में रूकावट पैदा करने वाले शिक्षकों, कर्मचारियों, अधिकारियों को उत्पीड़त किया जा
रहा है।
अब आंबेडकर विवि आगरा
के एक मामले में घूसखोरी की एफआईआर होने और दस्तावेजी सबूत होने के बाद अब तक प्रो.विनय
पाठक की गिरफ्तारी न होना, उनकी बेनामी संपत्तियों तक बुलडोजर के न पहुंचने से ढेरों
सवाल खड़े हो रहे हैं। अखिर विनय पाठक को राज्यपाल ने अब तक निलंबित क्यों नहीं किया
? पूर्व विधायकों ने पत्र में कहा है कि एसा प्रतीत होता है कि केन्द्र सरकार
के एक वरिष्ठतम मंत्री व उनके परिवार के दबाव में कार्रवाई के नाम पर सिर्फ लीपापोती
चल रही है। इससे उच्च शिक्षा की गरिमा, छात्रों के भविष्य और मेहनत से कमा कर विवि
में जमा कराई गयी फीस की राशि पर ग्रहण लग गया है। जबिक प्रो.पाठक का “कुकृत्य” से जनता की करोड़ों की लूट
हुई है। पत्र में कहा गया है कि कुलपति का पद आदर्श और गरिमा का प्रतीक होता है, भ्रष्टाचार
की सारी सीमाएँ लांघ जाने वाले इस कुलपति के विरूद्ध एफआईआर दर्ज होने के बाद भी अब
तक कोई कार्रवाई नहीं की गयी है। जबकि वह स्वच्छंद रूप से कानपुर, लखनऊ और दिल्ली घूम
रहा है। पत्र में तो यहां तक आरोप लगाया गया है कि प्रो.विनय पाठक ने भ्रष्टाचार से
अर्जित धनराशि अपने संरक्षणदाताओं पर खर्च की गयी है। जिसके चलते राज्य सरकार के छोटे
अधिकारी कार्रवाई करने में डर रहे हैं।
पूर्व विधायकों ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से
प्रो.विनय पाठक की तत्काल गिरफ्तारी की मांग करने के साथ पूरे मामले की सीबीआई और ईडी
से जांच कराने की मांग की है। पत्र में कहा गया है कि जनता का विश्वास मजबूत रखने के
लिए इनके खिलाफ कार्रवाई के साथ साफ सुथरी छवि के कुलपतियों की विवि में नियुक्त करने
की मांग की गयी है।
इंसेट
( आशीष पटेल की फोटो लगा दीजिए।)
शासन की मंजूरी के बगैर 250 कालेजों को दिया एफिलिएशन
इसमें इजीनियरिंग, प्रबंधन, फार्मा. आकिर्टेचर के कोर्स शामिल
एकेटीयू का कुलपति रहते प्रो.विनय पाठक का कारनामा
विशेष प्रतिनिधि
लखनऊ। घूसखोरी के आरोप में घिरे छत्रपति शाहू जी महराज कानपुर विश्वविद्यालय
के कुलपति प्रो.विनय पाठक ने शासन की अनुमति के बिना 250 कालेजों को अब्दुल कलाम प्राविधिक
विश्वविद्यालय (एकेटीयू) से संबंद्धता प्रदान कर दी। शीट मैट्रिक्स में अनियमितता के
जरिये करोड़ों रुपय़े की वसूली की है। उत्तर प्रदेश के प्राविधिक शिक्षा मंत्री आशीष
पटेल ने मदन मोहन मालवीय विवि के कुलपति जेपी पांडेय की अध्यक्षता में एक जांच कमेटी
गठित की है। लेकिन ये जांच भी लंबे समय से लंबित है।
अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय इजीनियरिंग, प्रबंधन, फार्मा. आकिर्टेचर
के कोर्सों को मान्यता प्रदान करता है। विवि अधिनियम में स्पष्ट रूप से कहा गया है
कि किसी भी निजी कालेजों के कोर्सो को मान्यता देने से पहले प्राविधक शिक्षा के प्रमुख
सचिव की अध्यक्षता वाली कमेटी से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होता है। बिना इस अनुमति
के किसी भी कालेज व कोर्स को संबद्धता प्रदान नहीं की जा सकती, यहां तक कि सरकारी कालेजों
के कोर्स को भी सबंद्धता से पहले शासन की पूर्व अनुमति लेना आवश्यक है। पर, एकेटीयू
के तत्कालीन कुलपित ने बिना पूर्व अनुमति चार सालों के अन्तराल में लगभग 250 कालेजों
को मान्यता प्रदान कर दी गयी। सूत्रों कहना है कि इस एक कोर्स की मान्यता में ही करोड़ों
के वारे न्यारे किये हैं। यही नहीं इन कालेजों की सीट मैट्रिक में भी व्यापक गड़बड़ियां
की गयी।
क्या होता है शीट मैट्रिक्स
किसी भी कोर्स की मान्यता के बाद विवि प्रशासन एक आन लाइन शीट तैयार करता है।
जिसमें प्रत्येक कालेज की छात्रों की संख्या,
आरक्षित सीटों की संख्या, भरी हुई सीट की संख्या, कितनी लड़कियां, कितने लड़के, कितनी
सीटें भरी और कितनी खाली के ब्योरो को शीट मैट्रिक्स कहा गया जाता है। विवि की इसी
शीट मैट्रिक को एऩआईसी (नेशनल इनफरर्मेशन सेन्टर) मान्यता प्रदान करता है। शिकायत कर्ताओं
का आरोप है कि सबंद्धता प्रदान में गड़बड़ी के साथ शीट मैक्ट्रिक्स में भी व्यापक गड़बड़ी
की गयी। जिससे वास्तिवक छात्रों का उसका लाभ नहीं मिला और रिक्त सीटों पर सांठगाठ के
जरिये प्रवेश का खेल किया गया।
प्राविधक शिक्षा मंत्री ने जांच कमेटी बनायी
संबद्धता और शीटमैट्रिक्स में गड़बड़ी के प्रारम्भिक साक्ष्य मिलने के बाद प्राविधिक
शिक्षा मंत्री आशीष पटेल ने इस पूरे प्रकरण की जांच के लिए मदन मोहन मालवीय विवि के
कुलपति प्रो.जेपी पांडेय की अध्यक्षता दो सदस्यीय कमेटी का गठित कर दी है। जिसने अभी जांच भी शुरू नहीं की है। बताया गया है
कि जांच अधिकारी पर जांच विलंबित करने का भारी दबाव है।
No comments:
Post a Comment