पुन: पुन: अपडेट: लीड : शिवपाल 'बागीÓ, संकट में सपा
नोट : इंट्रो में कुछ मंत्रियों के नाम जोड़े गए हैं।
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कॉमन इन्ट्रो
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गुरुवार का दिन समाजवादी पार्टी के लिए अभूतपूर्व संकट वाला रहा। सोमवार से शुरू हुए 'गृहयुद्धÓ में गुरुवार रात होते होते शिवपाल यादव के तेवर बगावती हो गए। उनके सरकार व संगठन से इस्तीफा देने के साथ संकट और गंभीर हो गया। हालांकि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शिवपाल का मंत्री पद से इस्तीफा स्वीकार करने से इन्कार कर दिया। शिवपाल के इस कदम पर देर रात मुलायम सिंह यादव ने अखिलेश से बात भी की। सपा का संकट इस कदर गंभीर है कि देर रात मंत्री नारद राय, हाजी रियाज के अलावा अंबिका चौधरी शिवेन्द्र सिंह, रेहान, उदयराज यादव, रणविजय सिंह, रामलाल अकेला समेत दर्जन भर विधायक व बड़ी संख्या में समर्थक शिवपाल के आवास पर डट गए। शुक्रवार का दिन सपा के लिए नया इतिहास रच सकता है। इससे पहले दिन में राम गोपाल यादव ने परिवार में झगड़े के पीछे अमर सिंह को जिम्मेदार ठहराते हुए पार्टी की बर्बादी की वजह ठहराया था।
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-सरकार व संगठन के सभी पदों से इस्तीफा, समर्थक जुटे
-आवास खाली करने की दी धमकी, मुख्यमंत्री ने इस्तीफा अस्वीकारा
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लखनऊ : समाजवादी पार्टी व सरकार में वर्चस्व की जंग के बीच गुरुवार को दिल्ली से लखनऊ लौटे शिवपाल यादव ने शाम को सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव, फिर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मुलाकात की और मंत्री के साथ समाजवादी पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा देकर सपा के सामने अभूतपूर्व संकट खड़ा कर दिया। हालांकि सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री ने शिवपाल का मंत्री पद से इस्तीफा स्वीकार करने से इनकार करते हुए उसे बैरंग लौटा दिया है। माना जा रहा है कि शिवपाल द्वारा संगठन के पदों से दिया गया इस्तीफा भी सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव स्वीकार नहीं करेंगे। देर रात मुलायम ने इस मसले पर अखिलेश से बात भी की।
चार दिनों से चल रहे सियासी घटनाक्रम के बीच गुरुवार को शिवपाल यादव दिल्ली से लखनऊ लौटे। यहां पहुंचने के बाद शिवपाल ने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष पद की न कभी दावेदारी की थी न ही इसकी भनक थी। सपा मुखिया मुलायम ने यह फैसला लिया। कहा कि कोई पद छोटा, बड़ा नहीं होता। वह मंत्री हैं व प्रदेश अध्यक्ष का कार्य दिया गया है, उस दायित्व को निभाएंगे। विभाग हटाने के सवाल पर शिवपाल ने कहा कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को अपनी सरकार पर फैसला लेने का अधिकार है। विभाग वापस लेने का फैसला उनका है। मुझसे विभाग वापस लेने का फैसला मुलायम (नेताजी) की राय से नहीं लिया गया होगा। उनकी बात न मानने की हैसियत किसी में नहीं है। अब हमें एक होकर 2017 का चुनाव लडऩा है। शिवपाल ने बगैर किसी इशारे के कहा कि लोगों को अपनी बुद्धि से फैसले लेने चाहिए। किसी की कही सुनी बात पर नहीं। कहा सब बुद्धिमान मुख्यमंत्री और मुलायम सिंह नहीं बन सकते है। यह जोड़ा किहर कोई शिवपाल यादव नहीं हो सकता। बाहरी व्यक्ति के मुख्यमंत्री व प्रो.राम गोपाल के इशारे के सवाल पर शिवपाल यादव ने कहा कि पार्टी में कोई बाहरी व्यक्ति नहीं है। अमर सिंह को पार्टी में लेने का फैसला नेताजी (मुलायम सिंह) का है।
इन बातों के कुछ घंटे बाद ही वह सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव से मिलने पहुंचे। करीब एक घंटे की मुलाकात के बाद मुलायम की हिदायत पर शिवपाल मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मिलने उनके सरकारी आवास पर पहुंचे। लगभग 15 मिनट की मुलाकात के बाद शिवपाल वहां से लौटे और परिवार के साथ चर्चा के बाद मंत्री व समाजवादी पार्टी के प्रदेश प्रभारी व प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। उनके पास सपा के प्रदेश प्रभारी, मुख्य प्रवक्ता का पद भी था। प्रवक्ता ने बताया कि मंत्री ने सभी पदों से इस्तीफा दिया है। शिवपाल के इस फैसले के बाद से समाजवादी पार्टी में हड़कंप की स्थिति है, इसके दूरगामी परिणाम के संकेत हैं। चर्चा रही कि मुख्यमंत्री से वार्ता के बाद स्थितियां तेजी से बदलीं और शिवपाल के तेवर उग्र्र हो गए। शिवपाल के साथ उनके बेटे आदित्य यादव उर्फ अंकुर ने पीसीएफ के चेयरमैन पद व उनकी पत्नी सरला यादव ने कोआपरेटिव निदेशक के पद से भी इस्तीफा देने की चर्चा रही। हालांकि बाद में शिवपाल के प्रवक्ता ने इसका खंडन किया।
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इनसेट......
समर्थकों की भीड़ देख सुरक्षा बढ़ी
शिवपाल के इस्तीफे की जानकारी मिलते ही उनके समर्थकों का जमावड़ा आवास पर लगने लगा। समर्थक शिवपाल तुम संघर्ष करो, हम तुम्हारे साथ हैं, जैसे नारे लगा रहे थे। इस दौरान वहां दर्जन भर सपा विधायक भी पहुंच गए। यह सिलसिला देर रात तक चलता रहा। समर्थकों की भीड़ बढ़ती देख उनके आवास की सुरक्षा भी बढ़ा दी गयी।
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अखिलेश को हटाना नेतृत्व की गलती : रामगोपाल
-मुलायम के कहने पर बर्खास्त किए गए गायत्री, राजकिशोर
राज्य ब्यूरो, लखनऊ : समाजवादी पार्टी व परिवार की कलह के सड़क पर आने के चौथे दिन महासचिव प्रो.राम गोपाल यादव ने कहा-'अखिलेश को पार्टी की प्रदेश इकाई के प्रेसिडेंट पद से हटाकर नेतृत्व ने माइनर मिसटेक (छोटी गलती) की।Ó उनसे इस्तीफा मांगा जाना चाहिए था। उन्होंने यह भी कहा कि मुलायम सिंह के निर्देश पर ही मुख्यमंत्री ने गायत्री प्रजापति व राजकिशोर सिंह को मंत्रिमंडल से बर्खास्त किया था।
गुरुवार को लखनऊ में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मुलाकात से पहले और फिर बाद में प्रो.रामगोपाल यादव ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा कही गई पार्टी में 'बाहरी व्यक्तिÓ के हस्तक्षेप की बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि यह व्यक्ति पार्टी को बर्बाद करने पर आमादा है। इशारों में अमर सिंह को खलनायक की संज्ञा देते हुए कहा कि यह व्यक्ति नेताजी (मुलायम सिंह) की सरलता का फायदा उठाता है, उसने ही सपा के संविधान में प्रभारी, कार्यकारी का पद नहीं होने के बावजूद प्रभारी नियुक्त करा दिया। उसी ने प्रदेश अध्यक्ष बनवाया है। इस सवाल पर कि अमर सिंह तो खुद को मुलायमवादी कहते हैं? प्रो.यादव ने कहा कि जो समाजवादी नहीं हो सकता, वह मुलायमवादी नहीं हो सकता। प्रो.यादव ने कहा कि अमर सिंह का मकसद होता है कि उनका काम हो जाए पार्टी भाड़ में जाए। पार्टी के इंट्र्ेस्ट (फायदा) से उसे लेना देना नहीं है। चुनाव का समय है। अब बाहरी का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं।
गायत्री व राजकिशोर की मंत्रिमंडल से बर्खास्तगी और शिवपाल से विभाग छीने जाने के सवाल पर रामगोपाल ने ठीकरा मुलायम पर फोड़ते हुए कहा कि दोनों को उनके कहने पर बर्खास्त किया गया। नेताजी के बारे में वह और क्या बतायें। सरकार में किस मंत्री से क्या काम लेना है, यह मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार होता है, उन्होंने जो बेहतर समझा होगा, वह फैसला लिया। इस पूरे घटनाक्रम में चूक कहां हुई? इस सवाल पर रामगोपाल ने कहा कि अखिलेश से (पार्टी के यूपी चीफ के पद से) इस्तीफा देने को कहा जाना चाहिये था, वह इस्तीफा दे देते। उनसे कहा जा सकता था कि चुनाव नजदीक हैं, आप सीएम रहिये और प्रदेश अध्यक्ष का कामकाज वे (शिवपाल) संभालेंगे मगर ऐसा नहीं हुआ, मुझे तुरंत आदेश जारी करने को कहा गया। आप तो थिंक टैंक कहे जाते हैं, आपने मुलायम को समझाया क्यों नहीं? इस सवाल को टालते हुए रामगोपाल ने कहा कि कुछ गलतफहमी हुई। इससे ज्यादा कुछ नहीं हुआ। अब सब ठीक है। मुलायम का जो इशारा होगा, वैसा फैसला हो जाएगा। अधिकारियों की तैनाती और मुख्य सचिव को हटाने के सवाल पर सपा महासचिव ने कहा यह सवाल मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव से पूछा जाना चाहिए।
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संसदीय बोर्ड की बैठक टली
समाजवादी पार्टी की शुक्रवार को प्रस्तावित समाजवादी संसदीय बोर्ड की बैठक टाल दी गयी है। राम गोपाल यादव ने कहा कि इस मसले पर बोर्ड की बैठक की जरूरत नहीं है। टिकट और प्रत्याशी का बात होती तो बोर्ड की बैठक बुलाई जाती।
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आज 'फैसले का शुक्रवारÓ, मुलायम पर निगाहें
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-राजनीतिक गलियारों में गूंज रहे 'अब क्या होगाÓ जैसे सवाल
-राष्ट्रीय व प्रदेश कार्यकारिणी भंग करने जैसे कड़े फैसले संभव
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लखनऊ: समाजवादी परिवार के सत्ता संघर्ष में गुरुवार रात आए भूचाल के बाद शुक्रवार का दिन फैसले भरा होने की उम्मीद है। सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव पर सभी की निगाहें लगी हैं।
समाजवादी कुनबे में बीते चार दिनों से चल रहा घमासान गुरुवार को राजधानी में परिवार के सभी दिग्गजों के जुटने के बाद भी शांत नहीं हुआ। दिन भर चलीं मुलायम की कोशिशें भी रंग नहीं लाईं और रात होते-होते शिवपाल के इस्तीफे के साथ विस्फोट के रूप में सामने आईं। एक बार फिर चर्चाओं के ज्वालामुखी फटने लगे, कयासों के दौर चलने लगे और लोग 'लाइवÓ हो गए। राजनीतिक गलियारे में 'अब क्या होगा?Ó जैसा सवाल तेजी से गूंज रहा है। जिस तरह शिवपाल के घर विधायक व समर्थक जुटने शुरू हुए, उससे सपा के दोफाड़ होने की संभावनाओं पर भी चर्चा शुरू हो गयी। कार्यकर्ताओं का एक खेमा इस पूरे घटनाक्रम को अमर बनाम रामगोपाल का विस्फोटक परिणाम करार दे रहा है। अब शुक्रवार की प्रतीक्षा हो रही है। मुलायम सिंह राजधानी में ही हैं। माना जा रहा है कि शुक्रवार को वे माहौल को नियंत्रित करने के लिए कुछ कड़े फैसले भी ले सकते हैं। यही कारण है कि देर रात समाजवादी पार्टी की राष्ट्रीय व प्रदेश कार्यकारिणी भंग करने की चर्चाएं भी शुरू हो गईं। कहा गया कि अभी तक शिवपाल व अखिलेश को आमने-सामने बिठाकर मुलायम ने पंचायत नहीं की है। अब ऐसी पंचायत की संभावना से भी इन्कार नहीं किया जा रहा है।
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- घटनाक्रम को लेकर दिन भर चला कयासों का दौर
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लखनऊ : प्रदेश सरकार व समाजवादी पार्टी के फैसलों के चलते समाजवादी परिवार के घमासान का चौथे दिन केंद्र लखनऊ रहा। सुबह राम गोपाल और शाम को शिवपाल मीडिया से मुखातिब हुए तो रात में मुख्यमंत्री विक्रमादित्य मार्ग स्थित अपने आवास पर पहुंचे, जहां उनकी सपा मुखिया मुलायम सिंह से मुलाकात हुई मगर बात क्या हुई, यह छनकर बाहर नहीं आई। वैसे माना यही जा रहा है कि शुक्रवार सुबह मुख्यमंत्री व सपा मुखिया के बीच बात होगी, जिसमें बिगड़ी बात संभालने की रणनीति तय हो सकती है। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम को लेकर कयासों का क्रम चलता रहा। राजनीतिक विश्लेषक अपने-अपने तरीके से घटनाक्रम को विश्लेषित करते रहे।
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लड़ते रहे कयासों के पेंच
-मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अपने चाचा व मंत्री शिवपाल के पुराने विभाग वापस कर दें और शिवपाल अखिलेश के लिए प्रदेश अध्यक्ष का पद छोड़ दें।
-मंत्री शिवपाल मौजूदा विभाग भी छोड़ दें और समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में ही काम शुरू कर दें। हालांकि रात में शिवपाल ने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया, जिसे ठुकरा भी दिया गया।
-सपा मुखिया मुलायम सिंह मुख्यमंत्री को मंत्रिमंडल के एक और फेरबदल का निर्देश देकर नए सिरे से विभागों का बंटवारा करा दें और उसमें शिवपाल को प्रभावी विभाग मिल जाए।
- अमर सिंह को पार्टी से बाहर कर विवाद का पटाक्षेप कर दिया जाए।
- दागी, विवादित और कुछ विधायकों का टिकट काटकर अखिलेश यादव की छवि प्रभावशाली बनाने का संदेश दिया जाए।
-मंत्री शिवपाल यादव को नापंसद अधिकारियों को हटा दिया जाए।
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शिवपाल प्रदेश अध्यक्ष रहेंगे : मुलायम
सुबह दिल्ली से लखनऊ रवाना होने से पहले सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने कहा कि शिवपाल यादव समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किये गये हैं, वह प्रदेश अध्यक्ष रहेंगे। हालांकि उनके इस बयान के बाद लखनऊ में परिस्थितियों में खासा बदलाव आया है।
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-सुबह से रात तक मिलने आते रहे सूरमा
-रामगोपाल, शिवपाल, मुलायम के आने से दृश्य बदला
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लखनऊ : समाजवादी कुनबे में कलह को लेकर लोगों में बेइंतहा जिज्ञासा है। गुरुवार सुबह से कुनबे के सूरमाओं के आने-जाने का सिलसिला शुरू हुआ तो निरंतर दृश्य बदलता रहा। इनसे सवाल-दर-सवाल होते रहे और जवाब भी मिले लेकिन कौतूहल खत्म नहीं हुआ। रात में शिवपाल के इस्तीफे की घोषणा से यह कौतूहल और बढ़ गया।
गुरुवार सुबह करीब सवा दस बजे सपा महासचिव प्रोफेसर राम गोपाल यादव वीवीआइपी गेस्टहाउस पहुंचे। राम गोपाल ने पिछले घटनाक्रमों से उठे सवालों के जवाब दिए। उन्होंने दो बातें साफ तौर पर कहीं। पहली यह कि मंत्रियों की बर्खास्तगी से लेकर मुख्य सचिव के हटाने तक के फैसले नेताजी के ही थे और दूसरी यह कि अखिलेश यादव से बिना पूछे शिवपाल को प्रदेश अध्यक्ष बनाना नेतृत्व की गलती थी। उन्होंने घर में कलह के लिए अमर सिंह को जिम्मेदार ठहराया। प्रोफेसर राम गोपाल इसके बाद अखिलेश यादव से मिलने पांच कालिदास मार्ग स्थित उनके सरकारी आवास पहुंचे। दोनों के बीच भविष्य पर चर्चा हुई लेकिन अखिलेश के घर से निकलने के बाद प्रोफेसर के टोन कुछ बदल गए थे। शिवपाल के प्रति भी उनका रुख नरम था। कहा कि शिवपाल बेहतर अध्यक्ष होंगे और चुनाव अभियान को गति देंगे। दोपहर को शिवपाल सिंह यादव भी दिल्ली से लखनऊ आ गये। शिवपाल ने अध्यक्ष का दायित्व निभाने और मंत्री बने रहने की बात कहकर भविष्य की कई आशंकाओं को खारिज कर दिया। शिवपाल बोले, हमारी पार्टी में किसी की हैसियत नहीं कि नेताजी की बात टाल दे। करीब तीन बजे मुलायम सिंह यादव भी दिल्ली से लखनऊ आ गये। शाम साढ़े पांच बजे शिवपाल सिंह यादव मुलायम से मिलने उनके आवास पहुंच गये। शिवपाल दिल्ली में भी अपने पुत्र आदित्य यादव के साथ थे और दोबारा लखनऊ में उनकी मुलाकात को और महत्वपूर्ण माना गया। इस बीच यह बात उठी कि अखिलेश भी मिलने जाएंगे लेकिन वह गये नहीं। अलबत्ता अखिलेश ने दोपहर को ही विवादों की वजह बनने वाले दीपक सिंघल को राज्य सतर्कता आयोग का अध्यक्ष बनाकर यह साफ कर दिया कि वह सिंघल को लेकर समझौते को तैयार नहीं हैं। मुख्यमंत्री सिंघल की टिप्पणी से आहत हैं। नेताजी और शिवपाल के बीच क्या बात हुई यह तो पता नहीं लेकिन उनकी मुलाकात का असर यह हुआ कि करीब साढ़े सात बजे शिवपाल यादव खुद मुख्यमंत्री से मिलने उनके घर चले गये। अक्सर पहले भी मनमुटाव रहते हुए कभी अखिलेश शिवपाल के घर गये तो कभी शिवपाल अखिलेश के घर। इस बार माना जा रहा था कि शिवपाल अपने हठ पर कायम रहेंगे लेकिन उनके मुख्यमंत्री आवास जाने से एक संदेश जरूर निकला कि कुनबे की कलह सुलह में बदलने वाली है। इसके विपरीत शिवपाल ने मुख्यमंत्री आवास से लौटने के बाद रात दस बजे के आसपास सपरिवार इस्तीफे की घोषणा कर दी। इसके बाद एक बार फिर न सिर्फ समाजवादी कुनबे में, बल्कि पूरे राजनीतिक गलियारे में हलचल बढ़ गयी। उधर रामगोपाल ने कहा था कि वह सुबह छह बजे जाएंगे लेकिन मुलायम के आते ही वह सैफई चले गये।
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किस पर गिरेगी तलवार
प्रोफेसर रामगोपाल ने कहा कि जो कुछ फैसले हुए सब नेताजी ने किए। शिवपाल ने कहा कि किसी की हैसियत नहीं जो नेताजी की बात टाल दे। अखिलेश पहले से ही नेताजी की छांव में हैं। फिर इस सवाल का जवाब नहीं निकल सका कि कलह क्यों है। जब सभी फैसले नेताजी के हैं और सभी उनकी बात मानने को तैयार हैं तो दिक्कत कहां है। बाहरी के नाम पर अमर सिंह को परिवार ने निशाना बना दिया है। इसकी भूमिका अखिलेश ने लिखी और रामगोपाल ने इसे विस्तार दे दिया। उधर शिवपाल ने अमर सिंह के प्रति जो भावना उड़ेली उससे साफ है कि टकराव के केंद्र में अमर सिंह भी हैं। अटकलें यह हैं कि क्या कलह पर पटाक्षेप के लिए अमर सिंह पर तलवार गिरेगी। संकेत तो राम गोपाल ने दे दिया है लेकिन शिवपाल-अखिलेश की मुलाकात से कुछ और भी समीकरण बनने के संकेत मिले हैं।
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अखिलेश के तेवर बरकरार
अखिलेश यादव ने अपने तेवर बरकरार रखे हैं। प्रोफेसर राम गोपाल यादव हों या शिवपाल सिंह यादव सभी अखिलेश से मिलने गए। सूत्रों का कहना है कि अखिलेश ने एक बात साफ कर दी है कि वह कोई बेजा दबाव बर्दाश्त नहीं करेंगे। किसी दागी को महत्व नहीं देंगे और बिचौलियों का हस्तक्षेप भी स्वीकार नहीं करेंगे।
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टाइमलाइन
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सुबह 10:15 बजे : सपा महासचिव रामगोपाल यादव लखनऊ पहुंचे
दोपहर 12:30 बजे : रामगोपाल मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मिलने गए
अपराह्न 2:15 बजे : शिवपाल सिंह यादव दिल्ली से लखनऊ पहुंचे
अपराह्न 3:10 बजे : सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव लखनऊ पहुंचे
सायं 5:30 बजे : मुलायम सिंह से मिलने उनके घर पहुंचे शिवपाल
सायं 7:30 बजे : मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के घर पहुंचे शिवपाल
रात 9:45 बजे : शिवपाल ने सरकार व संगठन के सभी पदों से दिया इस्तीफा
रात 10:40 बजे : मुख्यमंत्री का इस्तीफा स्वीकार करने से इन्कार
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'अमर सिंह बर्बाद कर रहे पार्टीÓ
नोट : शीर्षक को इनवर्टेड में किया गया है।
-इस फाइल में कामन इंट्रो, रामगोपाल, शिवपाल और मुलायम के लखनऊ पहुंचने की खबरें हैं। खबर अपडेट हो सकती है।
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सब हेड-ठीकरा अमर के सिर, परिवार में फिलहाल शांति
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सोमवार से गुरुवार तक समाजवादी परिवार के भीतर लड़े गए 'गृहयुद्धÓ पर सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने एक सीमा तक नियंत्रण पा लिया। योद्धाओं ने घमासान का ठीकरा मुलायम के फैसलों पर फोड़ा, मगर उनके आदेश मानने का संकल्प भी दोहराया। अलबत्ता प्रो.रामगोपाल ने संकेतों में अमर सिंह को दल व परिवार का 'खलनायकÓ बताया और शिवपाल ने अमर का बचाव किया। अखिलेश पहले ही अमर सिंह को केंद्रित कर निशाना साध चुके हैं। समाजवादी परिवार में भड़की आग फिलहाल ठंडी पड़ती दिख रही है लेकिन उसकी राख में दबी चिंगारी कभी भी फिर भड़क सकती है, यह अंदाज लगाना कठिन नहीं।
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अखिलेश को हटाना नेतृत्व की गलती : रामगोपाल
-मुलायम के कहने पर बर्खास्त किए गए गायत्री, राजकिशोर
राज्य ब्यूरो, लखनऊ : समाजवादी पार्टी व परिवार की कलह के सड़क पर आने के चौथे दिन महासचिव प्रो.राम गोपाल यादव ने कहा-'अखिलेश को पार्टी की प्रदेश इकाई के प्रेसिडेंट पद से हटाकर नेतृत्व ने माइनर मिसटेक (छोटी गलती) की।Ó उनसे इस्तीफा मांगा जाना चाहिए था। उन्होंने यह भी कहा कि मुलायम सिंह के निर्देश पर ही मुख्यमंत्री ने गायत्री प्रजापति व राजकिशोर सिंह को मंत्रिमंडल से बर्खास्त किया था।
गुरुवार को लखनऊ में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मुलाकात से पहले और फिर बाद में प्रो.रामगोपाल यादव ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा कही गई पार्टी में 'बाहरी व्यक्तिÓ के हस्तक्षेप की बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि यह व्यक्ति पार्टी को बर्बाद करने पर आमादा है। इशारों में अमर सिंह को खलनायक की संज्ञा देते हुए कहा कि यह व्यक्ति नेताजी (मुलायम सिंह) की सरलता का फायदा उठाता है, उसने ही सपा के संविधान में प्रभारी, कार्यकारी का पद नहीं होने के बावजूद प्रभारी नियुक्त करा दिया। उसी ने प्रदेश अध्यक्ष बनवाया है। इस सवाल पर कि अमर सिंह तो खुद को मुलायमवादी कहते हैं? प्रो.यादव ने कहा कि जो समाजवादी नहीं हो सकता, वह मुलायमवादी नहीं हो सकता। प्रो.यादव ने कहा कि अमर सिंह का मकसद होता है कि उनका काम हो जाए पार्टी भाड़ में जाए। पार्टी के इंट्र्ेस्ट (फायदा) से उसे लेना देना नहीं है। चुनाव का समय है। अब बाहरी का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं।
गायत्री व राजकिशोर की मंत्रिमंडल से बर्खास्तगी और शिवपाल से विभाग छीने जाने के सवाल पर रामगोपाल ने ठीकरा मुलायम पर फोड़ते हुए कहा कि दोनों को उनके कहने पर बर्खास्त किया गया। नेताजी के बारे में वह और क्या बतायें। सरकार में किस मंत्री से क्या काम लेना है, यह मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार होता है, उन्होंने जो बेहतर समझा होगा, वह फैसला लिया। इस पूरे घटनाक्रम में चूक कहां हुई? इस सवाल पर रामगोपाल ने कहा कि अखिलेश से (पार्टी के यूपी चीफ के पद से) इस्तीफा देने को कहा जाना चाहिये था, वह इस्तीफा दे देते। उनसे कहा जा सकता था कि चुनाव नजदीक हैं, आप सीएम रहिये और प्रदेश अध्यक्ष का कामकाज वे (शिवपाल) संभालेंगे मगर ऐसा नहीं हुआ, मुझे तुरंत आदेश जारी करने को कहा गया। आप तो थिंक टैंक कहे जाते हैं, आपने मुलायम को समझाया क्यों नहीं? इस सवाल को टालते हुए रामगोपाल ने कहा कि कुछ गलतफहमी हुई। इससे ज्यादा कुछ नहीं हुआ। अब सब ठीक है। मुलायम का जो इशारा होगा, वैसा फैसला हो जाएगा। अधिकारियों की तैनाती और मुख्य सचिव को हटाने के सवाल पर सपा महासचिव ने कहा यह सवाल मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव से पूछा जाना चाहिए।
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संसदीय बोर्ड की बैठक टली
समाजवादी पार्टी की शुक्रवार को प्रस्तावित समाजवादी संसदीय बोर्ड की बैठक टाल दी गयी है। राम गोपाल यादव ने कहा कि इस मसले पर बोर्ड की बैठक की जरूरत नहीं है। टिकट और प्रत्याशी का बात होती तो बोर्ड की बैठक बुलाई जाती।
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मुझे हटाने का फैसला नेताजी की राय से हुआ होगा : शिवपाल
-अमर सिंह का बचाव किया, सबको जोडऩे से संगठन मजबूत होता है
राज्य ब्यूरो, लखनऊ : समाजवादी पार्टी में वर्चस्व की जंग के बीच प्रदेश अध्यक्ष के रूप में दिल्ली से लखनऊ लौटे शिवपाल यादव ने कहा कि इस पद की न दावेदारी कभी की न भनक थी। सपा मुखिया मुलायम ने यह फैसला लिया। कहा कि कोई पद छोटा, बड़ा नहीं होता। वह मंत्री हैं व प्रदेश अध्यक्ष का कार्य दिया गया है, उस दायित्व को निभाएंगे।
विभाग हटाने के सवाल पर शिवपाल यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को अपनी सरकार पर फैसला लेने का अधिकार है। विभाग वापस लेने का फैसला उनका है। मुझसे विभाग वापस लेने का फैसला मुलायम (नेताजी) की राय से लिया गया होगा। उनकी बात न मानने की हैसियत किसी में नहीं है। अब हमें एक होकर 2017 का चुनाव लडऩा है। शिवपाल ने बगैर किसी इशारे के कहा कि लोगों को अपनी बुद्धि से फैसले लेने चाहिए। हालांकि सब बुद्धिमान हो जाएंगे तो सभी मुख्यमंत्री बन जाएंगे।हर कोई शिवपाल यादव नहीं हो सकता।
बाहरी व्यक्ति के मुख्यमंत्री व प्रो.राम गोपाल के इशारे के सवाल पर शिवपाल यादव ने कहा कि पार्टी में कोई बाहरी व्यक्ति नहीं है। अमर सिंह को पार्टी में लेने का फैसला नेताजी (मुलायम सिंह) का है। कहा कि सबको जोडऩे से संगठन को मजबूती मिलेगी, तोडऩे से संगठन मजबूत नहीं होते हैं। कोई भी व्यक्ति पद से न बड़ा और न ही छोटा होता है। बाद में गुरुवार शाम शिवपाल पहले सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव से मिलने उनके घर पहुंचे। एक घंटे की बातचीत के बाद वह वहां से निकल कर सीधे पांच कालिदास मार्ग स्थित मुख्यमंत्री आवास पहुंचे और अखिलेश से तकरीबन एक घंटे तक बातचीत की। माना जा रहा है कि चार दिनों से चल रहे घमासान को नियंत्रित करने के प्रयास हुआ।
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मुलायम लखनऊ पहुंचे, सीएम से करेंगे बात
घमासान के चौथे दिन यानी गुरुवार दोपहर पार्टी सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव लखनऊ पहुंचे और विक्रमादित्य मार्ग स्थित अपने आवास पर कुछ नेताओं से मुलाकात की। सूत्रों का कहना है कि वह मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव समेत कुछ लोगों से मुलाकात कर सकते हैं। इससे पहले दिल्ली हवाई अड्डे पर उन्होंने कुछ मीडिया कर्मियों से कहा है कि दल व परिवार में ऐसी बातें पहले भी हुई हैं, तब सबसे बात कर उसे सुलझाया था। इस बार भी बात कर सब ठीक कर दिया जाएगा।
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फाइनल अपडेट: टाइमलाइन
नोट : टाइमलाइन में अंत में दो प्वाइंट बढ़ाए गए हैं।
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टाइमलाइन
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सुबह 10:15 बजे : सपा महासचिव रामगोपाल यादव लखनऊ पहुंचे
दोपहर 12:30 बजे : रामगोपाल मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मिलने गए
अपराह्न 2:15 बजे : शिवपाल सिंह यादव दिल्ली से लखनऊ पहुंचे
अपराह्न 3:10 बजे : सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव लखनऊ पहुंचे
सायं 5:30 बजे : मुलायम सिंह से मिलने उनके घर पहुंचे शिवपाल
सायं 7:30 बजे : मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के घर पहुंचे शिवपाल
रात 9:45 बजे : शिवपाल ने सरकार व संगठन के सभी पदों से दिया इस्तीफा
रात 10:40 बजे : मुख्यमंत्री का इस्तीफा स्वीकार करने से इन्कार
रात 11 बजे : शिवपाल के आवास पर जुटने लगे विधायक व कार्यकर्ता
रात 12:25 बजे : शिवपाल ने घर के बाहर आकर कार्यकर्ताओं से वापस जाने की अपील की
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नोट : इंट्रो में कुछ मंत्रियों के नाम जोड़े गए हैं।
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कॉमन इन्ट्रो
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गुरुवार का दिन समाजवादी पार्टी के लिए अभूतपूर्व संकट वाला रहा। सोमवार से शुरू हुए 'गृहयुद्धÓ में गुरुवार रात होते होते शिवपाल यादव के तेवर बगावती हो गए। उनके सरकार व संगठन से इस्तीफा देने के साथ संकट और गंभीर हो गया। हालांकि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शिवपाल का मंत्री पद से इस्तीफा स्वीकार करने से इन्कार कर दिया। शिवपाल के इस कदम पर देर रात मुलायम सिंह यादव ने अखिलेश से बात भी की। सपा का संकट इस कदर गंभीर है कि देर रात मंत्री नारद राय, हाजी रियाज के अलावा अंबिका चौधरी शिवेन्द्र सिंह, रेहान, उदयराज यादव, रणविजय सिंह, रामलाल अकेला समेत दर्जन भर विधायक व बड़ी संख्या में समर्थक शिवपाल के आवास पर डट गए। शुक्रवार का दिन सपा के लिए नया इतिहास रच सकता है। इससे पहले दिन में राम गोपाल यादव ने परिवार में झगड़े के पीछे अमर सिंह को जिम्मेदार ठहराते हुए पार्टी की बर्बादी की वजह ठहराया था।
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-सरकार व संगठन के सभी पदों से इस्तीफा, समर्थक जुटे
-आवास खाली करने की दी धमकी, मुख्यमंत्री ने इस्तीफा अस्वीकारा
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लखनऊ : समाजवादी पार्टी व सरकार में वर्चस्व की जंग के बीच गुरुवार को दिल्ली से लखनऊ लौटे शिवपाल यादव ने शाम को सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव, फिर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मुलाकात की और मंत्री के साथ समाजवादी पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा देकर सपा के सामने अभूतपूर्व संकट खड़ा कर दिया। हालांकि सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री ने शिवपाल का मंत्री पद से इस्तीफा स्वीकार करने से इनकार करते हुए उसे बैरंग लौटा दिया है। माना जा रहा है कि शिवपाल द्वारा संगठन के पदों से दिया गया इस्तीफा भी सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव स्वीकार नहीं करेंगे। देर रात मुलायम ने इस मसले पर अखिलेश से बात भी की।
चार दिनों से चल रहे सियासी घटनाक्रम के बीच गुरुवार को शिवपाल यादव दिल्ली से लखनऊ लौटे। यहां पहुंचने के बाद शिवपाल ने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष पद की न कभी दावेदारी की थी न ही इसकी भनक थी। सपा मुखिया मुलायम ने यह फैसला लिया। कहा कि कोई पद छोटा, बड़ा नहीं होता। वह मंत्री हैं व प्रदेश अध्यक्ष का कार्य दिया गया है, उस दायित्व को निभाएंगे। विभाग हटाने के सवाल पर शिवपाल ने कहा कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को अपनी सरकार पर फैसला लेने का अधिकार है। विभाग वापस लेने का फैसला उनका है। मुझसे विभाग वापस लेने का फैसला मुलायम (नेताजी) की राय से नहीं लिया गया होगा। उनकी बात न मानने की हैसियत किसी में नहीं है। अब हमें एक होकर 2017 का चुनाव लडऩा है। शिवपाल ने बगैर किसी इशारे के कहा कि लोगों को अपनी बुद्धि से फैसले लेने चाहिए। किसी की कही सुनी बात पर नहीं। कहा सब बुद्धिमान मुख्यमंत्री और मुलायम सिंह नहीं बन सकते है। यह जोड़ा किहर कोई शिवपाल यादव नहीं हो सकता। बाहरी व्यक्ति के मुख्यमंत्री व प्रो.राम गोपाल के इशारे के सवाल पर शिवपाल यादव ने कहा कि पार्टी में कोई बाहरी व्यक्ति नहीं है। अमर सिंह को पार्टी में लेने का फैसला नेताजी (मुलायम सिंह) का है।
इन बातों के कुछ घंटे बाद ही वह सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव से मिलने पहुंचे। करीब एक घंटे की मुलाकात के बाद मुलायम की हिदायत पर शिवपाल मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मिलने उनके सरकारी आवास पर पहुंचे। लगभग 15 मिनट की मुलाकात के बाद शिवपाल वहां से लौटे और परिवार के साथ चर्चा के बाद मंत्री व समाजवादी पार्टी के प्रदेश प्रभारी व प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। उनके पास सपा के प्रदेश प्रभारी, मुख्य प्रवक्ता का पद भी था। प्रवक्ता ने बताया कि मंत्री ने सभी पदों से इस्तीफा दिया है। शिवपाल के इस फैसले के बाद से समाजवादी पार्टी में हड़कंप की स्थिति है, इसके दूरगामी परिणाम के संकेत हैं। चर्चा रही कि मुख्यमंत्री से वार्ता के बाद स्थितियां तेजी से बदलीं और शिवपाल के तेवर उग्र्र हो गए। शिवपाल के साथ उनके बेटे आदित्य यादव उर्फ अंकुर ने पीसीएफ के चेयरमैन पद व उनकी पत्नी सरला यादव ने कोआपरेटिव निदेशक के पद से भी इस्तीफा देने की चर्चा रही। हालांकि बाद में शिवपाल के प्रवक्ता ने इसका खंडन किया।
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इनसेट......
समर्थकों की भीड़ देख सुरक्षा बढ़ी
शिवपाल के इस्तीफे की जानकारी मिलते ही उनके समर्थकों का जमावड़ा आवास पर लगने लगा। समर्थक शिवपाल तुम संघर्ष करो, हम तुम्हारे साथ हैं, जैसे नारे लगा रहे थे। इस दौरान वहां दर्जन भर सपा विधायक भी पहुंच गए। यह सिलसिला देर रात तक चलता रहा। समर्थकों की भीड़ बढ़ती देख उनके आवास की सुरक्षा भी बढ़ा दी गयी।
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अखिलेश को हटाना नेतृत्व की गलती : रामगोपाल
-मुलायम के कहने पर बर्खास्त किए गए गायत्री, राजकिशोर
राज्य ब्यूरो, लखनऊ : समाजवादी पार्टी व परिवार की कलह के सड़क पर आने के चौथे दिन महासचिव प्रो.राम गोपाल यादव ने कहा-'अखिलेश को पार्टी की प्रदेश इकाई के प्रेसिडेंट पद से हटाकर नेतृत्व ने माइनर मिसटेक (छोटी गलती) की।Ó उनसे इस्तीफा मांगा जाना चाहिए था। उन्होंने यह भी कहा कि मुलायम सिंह के निर्देश पर ही मुख्यमंत्री ने गायत्री प्रजापति व राजकिशोर सिंह को मंत्रिमंडल से बर्खास्त किया था।
गुरुवार को लखनऊ में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मुलाकात से पहले और फिर बाद में प्रो.रामगोपाल यादव ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा कही गई पार्टी में 'बाहरी व्यक्तिÓ के हस्तक्षेप की बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि यह व्यक्ति पार्टी को बर्बाद करने पर आमादा है। इशारों में अमर सिंह को खलनायक की संज्ञा देते हुए कहा कि यह व्यक्ति नेताजी (मुलायम सिंह) की सरलता का फायदा उठाता है, उसने ही सपा के संविधान में प्रभारी, कार्यकारी का पद नहीं होने के बावजूद प्रभारी नियुक्त करा दिया। उसी ने प्रदेश अध्यक्ष बनवाया है। इस सवाल पर कि अमर सिंह तो खुद को मुलायमवादी कहते हैं? प्रो.यादव ने कहा कि जो समाजवादी नहीं हो सकता, वह मुलायमवादी नहीं हो सकता। प्रो.यादव ने कहा कि अमर सिंह का मकसद होता है कि उनका काम हो जाए पार्टी भाड़ में जाए। पार्टी के इंट्र्ेस्ट (फायदा) से उसे लेना देना नहीं है। चुनाव का समय है। अब बाहरी का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं।
गायत्री व राजकिशोर की मंत्रिमंडल से बर्खास्तगी और शिवपाल से विभाग छीने जाने के सवाल पर रामगोपाल ने ठीकरा मुलायम पर फोड़ते हुए कहा कि दोनों को उनके कहने पर बर्खास्त किया गया। नेताजी के बारे में वह और क्या बतायें। सरकार में किस मंत्री से क्या काम लेना है, यह मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार होता है, उन्होंने जो बेहतर समझा होगा, वह फैसला लिया। इस पूरे घटनाक्रम में चूक कहां हुई? इस सवाल पर रामगोपाल ने कहा कि अखिलेश से (पार्टी के यूपी चीफ के पद से) इस्तीफा देने को कहा जाना चाहिये था, वह इस्तीफा दे देते। उनसे कहा जा सकता था कि चुनाव नजदीक हैं, आप सीएम रहिये और प्रदेश अध्यक्ष का कामकाज वे (शिवपाल) संभालेंगे मगर ऐसा नहीं हुआ, मुझे तुरंत आदेश जारी करने को कहा गया। आप तो थिंक टैंक कहे जाते हैं, आपने मुलायम को समझाया क्यों नहीं? इस सवाल को टालते हुए रामगोपाल ने कहा कि कुछ गलतफहमी हुई। इससे ज्यादा कुछ नहीं हुआ। अब सब ठीक है। मुलायम का जो इशारा होगा, वैसा फैसला हो जाएगा। अधिकारियों की तैनाती और मुख्य सचिव को हटाने के सवाल पर सपा महासचिव ने कहा यह सवाल मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव से पूछा जाना चाहिए।
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संसदीय बोर्ड की बैठक टली
समाजवादी पार्टी की शुक्रवार को प्रस्तावित समाजवादी संसदीय बोर्ड की बैठक टाल दी गयी है। राम गोपाल यादव ने कहा कि इस मसले पर बोर्ड की बैठक की जरूरत नहीं है। टिकट और प्रत्याशी का बात होती तो बोर्ड की बैठक बुलाई जाती।
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आज 'फैसले का शुक्रवारÓ, मुलायम पर निगाहें
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-राजनीतिक गलियारों में गूंज रहे 'अब क्या होगाÓ जैसे सवाल
-राष्ट्रीय व प्रदेश कार्यकारिणी भंग करने जैसे कड़े फैसले संभव
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लखनऊ: समाजवादी परिवार के सत्ता संघर्ष में गुरुवार रात आए भूचाल के बाद शुक्रवार का दिन फैसले भरा होने की उम्मीद है। सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव पर सभी की निगाहें लगी हैं।
समाजवादी कुनबे में बीते चार दिनों से चल रहा घमासान गुरुवार को राजधानी में परिवार के सभी दिग्गजों के जुटने के बाद भी शांत नहीं हुआ। दिन भर चलीं मुलायम की कोशिशें भी रंग नहीं लाईं और रात होते-होते शिवपाल के इस्तीफे के साथ विस्फोट के रूप में सामने आईं। एक बार फिर चर्चाओं के ज्वालामुखी फटने लगे, कयासों के दौर चलने लगे और लोग 'लाइवÓ हो गए। राजनीतिक गलियारे में 'अब क्या होगा?Ó जैसा सवाल तेजी से गूंज रहा है। जिस तरह शिवपाल के घर विधायक व समर्थक जुटने शुरू हुए, उससे सपा के दोफाड़ होने की संभावनाओं पर भी चर्चा शुरू हो गयी। कार्यकर्ताओं का एक खेमा इस पूरे घटनाक्रम को अमर बनाम रामगोपाल का विस्फोटक परिणाम करार दे रहा है। अब शुक्रवार की प्रतीक्षा हो रही है। मुलायम सिंह राजधानी में ही हैं। माना जा रहा है कि शुक्रवार को वे माहौल को नियंत्रित करने के लिए कुछ कड़े फैसले भी ले सकते हैं। यही कारण है कि देर रात समाजवादी पार्टी की राष्ट्रीय व प्रदेश कार्यकारिणी भंग करने की चर्चाएं भी शुरू हो गईं। कहा गया कि अभी तक शिवपाल व अखिलेश को आमने-सामने बिठाकर मुलायम ने पंचायत नहीं की है। अब ऐसी पंचायत की संभावना से भी इन्कार नहीं किया जा रहा है।
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- घटनाक्रम को लेकर दिन भर चला कयासों का दौर
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लखनऊ : प्रदेश सरकार व समाजवादी पार्टी के फैसलों के चलते समाजवादी परिवार के घमासान का चौथे दिन केंद्र लखनऊ रहा। सुबह राम गोपाल और शाम को शिवपाल मीडिया से मुखातिब हुए तो रात में मुख्यमंत्री विक्रमादित्य मार्ग स्थित अपने आवास पर पहुंचे, जहां उनकी सपा मुखिया मुलायम सिंह से मुलाकात हुई मगर बात क्या हुई, यह छनकर बाहर नहीं आई। वैसे माना यही जा रहा है कि शुक्रवार सुबह मुख्यमंत्री व सपा मुखिया के बीच बात होगी, जिसमें बिगड़ी बात संभालने की रणनीति तय हो सकती है। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम को लेकर कयासों का क्रम चलता रहा। राजनीतिक विश्लेषक अपने-अपने तरीके से घटनाक्रम को विश्लेषित करते रहे।
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लड़ते रहे कयासों के पेंच
-मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अपने चाचा व मंत्री शिवपाल के पुराने विभाग वापस कर दें और शिवपाल अखिलेश के लिए प्रदेश अध्यक्ष का पद छोड़ दें।
-मंत्री शिवपाल मौजूदा विभाग भी छोड़ दें और समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में ही काम शुरू कर दें। हालांकि रात में शिवपाल ने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया, जिसे ठुकरा भी दिया गया।
-सपा मुखिया मुलायम सिंह मुख्यमंत्री को मंत्रिमंडल के एक और फेरबदल का निर्देश देकर नए सिरे से विभागों का बंटवारा करा दें और उसमें शिवपाल को प्रभावी विभाग मिल जाए।
- अमर सिंह को पार्टी से बाहर कर विवाद का पटाक्षेप कर दिया जाए।
- दागी, विवादित और कुछ विधायकों का टिकट काटकर अखिलेश यादव की छवि प्रभावशाली बनाने का संदेश दिया जाए।
-मंत्री शिवपाल यादव को नापंसद अधिकारियों को हटा दिया जाए।
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शिवपाल प्रदेश अध्यक्ष रहेंगे : मुलायम
सुबह दिल्ली से लखनऊ रवाना होने से पहले सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने कहा कि शिवपाल यादव समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किये गये हैं, वह प्रदेश अध्यक्ष रहेंगे। हालांकि उनके इस बयान के बाद लखनऊ में परिस्थितियों में खासा बदलाव आया है।
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-सुबह से रात तक मिलने आते रहे सूरमा
-रामगोपाल, शिवपाल, मुलायम के आने से दृश्य बदला
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लखनऊ : समाजवादी कुनबे में कलह को लेकर लोगों में बेइंतहा जिज्ञासा है। गुरुवार सुबह से कुनबे के सूरमाओं के आने-जाने का सिलसिला शुरू हुआ तो निरंतर दृश्य बदलता रहा। इनसे सवाल-दर-सवाल होते रहे और जवाब भी मिले लेकिन कौतूहल खत्म नहीं हुआ। रात में शिवपाल के इस्तीफे की घोषणा से यह कौतूहल और बढ़ गया।
गुरुवार सुबह करीब सवा दस बजे सपा महासचिव प्रोफेसर राम गोपाल यादव वीवीआइपी गेस्टहाउस पहुंचे। राम गोपाल ने पिछले घटनाक्रमों से उठे सवालों के जवाब दिए। उन्होंने दो बातें साफ तौर पर कहीं। पहली यह कि मंत्रियों की बर्खास्तगी से लेकर मुख्य सचिव के हटाने तक के फैसले नेताजी के ही थे और दूसरी यह कि अखिलेश यादव से बिना पूछे शिवपाल को प्रदेश अध्यक्ष बनाना नेतृत्व की गलती थी। उन्होंने घर में कलह के लिए अमर सिंह को जिम्मेदार ठहराया। प्रोफेसर राम गोपाल इसके बाद अखिलेश यादव से मिलने पांच कालिदास मार्ग स्थित उनके सरकारी आवास पहुंचे। दोनों के बीच भविष्य पर चर्चा हुई लेकिन अखिलेश के घर से निकलने के बाद प्रोफेसर के टोन कुछ बदल गए थे। शिवपाल के प्रति भी उनका रुख नरम था। कहा कि शिवपाल बेहतर अध्यक्ष होंगे और चुनाव अभियान को गति देंगे। दोपहर को शिवपाल सिंह यादव भी दिल्ली से लखनऊ आ गये। शिवपाल ने अध्यक्ष का दायित्व निभाने और मंत्री बने रहने की बात कहकर भविष्य की कई आशंकाओं को खारिज कर दिया। शिवपाल बोले, हमारी पार्टी में किसी की हैसियत नहीं कि नेताजी की बात टाल दे। करीब तीन बजे मुलायम सिंह यादव भी दिल्ली से लखनऊ आ गये। शाम साढ़े पांच बजे शिवपाल सिंह यादव मुलायम से मिलने उनके आवास पहुंच गये। शिवपाल दिल्ली में भी अपने पुत्र आदित्य यादव के साथ थे और दोबारा लखनऊ में उनकी मुलाकात को और महत्वपूर्ण माना गया। इस बीच यह बात उठी कि अखिलेश भी मिलने जाएंगे लेकिन वह गये नहीं। अलबत्ता अखिलेश ने दोपहर को ही विवादों की वजह बनने वाले दीपक सिंघल को राज्य सतर्कता आयोग का अध्यक्ष बनाकर यह साफ कर दिया कि वह सिंघल को लेकर समझौते को तैयार नहीं हैं। मुख्यमंत्री सिंघल की टिप्पणी से आहत हैं। नेताजी और शिवपाल के बीच क्या बात हुई यह तो पता नहीं लेकिन उनकी मुलाकात का असर यह हुआ कि करीब साढ़े सात बजे शिवपाल यादव खुद मुख्यमंत्री से मिलने उनके घर चले गये। अक्सर पहले भी मनमुटाव रहते हुए कभी अखिलेश शिवपाल के घर गये तो कभी शिवपाल अखिलेश के घर। इस बार माना जा रहा था कि शिवपाल अपने हठ पर कायम रहेंगे लेकिन उनके मुख्यमंत्री आवास जाने से एक संदेश जरूर निकला कि कुनबे की कलह सुलह में बदलने वाली है। इसके विपरीत शिवपाल ने मुख्यमंत्री आवास से लौटने के बाद रात दस बजे के आसपास सपरिवार इस्तीफे की घोषणा कर दी। इसके बाद एक बार फिर न सिर्फ समाजवादी कुनबे में, बल्कि पूरे राजनीतिक गलियारे में हलचल बढ़ गयी। उधर रामगोपाल ने कहा था कि वह सुबह छह बजे जाएंगे लेकिन मुलायम के आते ही वह सैफई चले गये।
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किस पर गिरेगी तलवार
प्रोफेसर रामगोपाल ने कहा कि जो कुछ फैसले हुए सब नेताजी ने किए। शिवपाल ने कहा कि किसी की हैसियत नहीं जो नेताजी की बात टाल दे। अखिलेश पहले से ही नेताजी की छांव में हैं। फिर इस सवाल का जवाब नहीं निकल सका कि कलह क्यों है। जब सभी फैसले नेताजी के हैं और सभी उनकी बात मानने को तैयार हैं तो दिक्कत कहां है। बाहरी के नाम पर अमर सिंह को परिवार ने निशाना बना दिया है। इसकी भूमिका अखिलेश ने लिखी और रामगोपाल ने इसे विस्तार दे दिया। उधर शिवपाल ने अमर सिंह के प्रति जो भावना उड़ेली उससे साफ है कि टकराव के केंद्र में अमर सिंह भी हैं। अटकलें यह हैं कि क्या कलह पर पटाक्षेप के लिए अमर सिंह पर तलवार गिरेगी। संकेत तो राम गोपाल ने दे दिया है लेकिन शिवपाल-अखिलेश की मुलाकात से कुछ और भी समीकरण बनने के संकेत मिले हैं।
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अखिलेश के तेवर बरकरार
अखिलेश यादव ने अपने तेवर बरकरार रखे हैं। प्रोफेसर राम गोपाल यादव हों या शिवपाल सिंह यादव सभी अखिलेश से मिलने गए। सूत्रों का कहना है कि अखिलेश ने एक बात साफ कर दी है कि वह कोई बेजा दबाव बर्दाश्त नहीं करेंगे। किसी दागी को महत्व नहीं देंगे और बिचौलियों का हस्तक्षेप भी स्वीकार नहीं करेंगे।
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टाइमलाइन
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सुबह 10:15 बजे : सपा महासचिव रामगोपाल यादव लखनऊ पहुंचे
दोपहर 12:30 बजे : रामगोपाल मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मिलने गए
अपराह्न 2:15 बजे : शिवपाल सिंह यादव दिल्ली से लखनऊ पहुंचे
अपराह्न 3:10 बजे : सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव लखनऊ पहुंचे
सायं 5:30 बजे : मुलायम सिंह से मिलने उनके घर पहुंचे शिवपाल
सायं 7:30 बजे : मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के घर पहुंचे शिवपाल
रात 9:45 बजे : शिवपाल ने सरकार व संगठन के सभी पदों से दिया इस्तीफा
रात 10:40 बजे : मुख्यमंत्री का इस्तीफा स्वीकार करने से इन्कार
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'अमर सिंह बर्बाद कर रहे पार्टीÓ
नोट : शीर्षक को इनवर्टेड में किया गया है।
-इस फाइल में कामन इंट्रो, रामगोपाल, शिवपाल और मुलायम के लखनऊ पहुंचने की खबरें हैं। खबर अपडेट हो सकती है।
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सब हेड-ठीकरा अमर के सिर, परिवार में फिलहाल शांति
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सोमवार से गुरुवार तक समाजवादी परिवार के भीतर लड़े गए 'गृहयुद्धÓ पर सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने एक सीमा तक नियंत्रण पा लिया। योद्धाओं ने घमासान का ठीकरा मुलायम के फैसलों पर फोड़ा, मगर उनके आदेश मानने का संकल्प भी दोहराया। अलबत्ता प्रो.रामगोपाल ने संकेतों में अमर सिंह को दल व परिवार का 'खलनायकÓ बताया और शिवपाल ने अमर का बचाव किया। अखिलेश पहले ही अमर सिंह को केंद्रित कर निशाना साध चुके हैं। समाजवादी परिवार में भड़की आग फिलहाल ठंडी पड़ती दिख रही है लेकिन उसकी राख में दबी चिंगारी कभी भी फिर भड़क सकती है, यह अंदाज लगाना कठिन नहीं।
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अखिलेश को हटाना नेतृत्व की गलती : रामगोपाल
-मुलायम के कहने पर बर्खास्त किए गए गायत्री, राजकिशोर
राज्य ब्यूरो, लखनऊ : समाजवादी पार्टी व परिवार की कलह के सड़क पर आने के चौथे दिन महासचिव प्रो.राम गोपाल यादव ने कहा-'अखिलेश को पार्टी की प्रदेश इकाई के प्रेसिडेंट पद से हटाकर नेतृत्व ने माइनर मिसटेक (छोटी गलती) की।Ó उनसे इस्तीफा मांगा जाना चाहिए था। उन्होंने यह भी कहा कि मुलायम सिंह के निर्देश पर ही मुख्यमंत्री ने गायत्री प्रजापति व राजकिशोर सिंह को मंत्रिमंडल से बर्खास्त किया था।
गुरुवार को लखनऊ में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मुलाकात से पहले और फिर बाद में प्रो.रामगोपाल यादव ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा कही गई पार्टी में 'बाहरी व्यक्तिÓ के हस्तक्षेप की बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि यह व्यक्ति पार्टी को बर्बाद करने पर आमादा है। इशारों में अमर सिंह को खलनायक की संज्ञा देते हुए कहा कि यह व्यक्ति नेताजी (मुलायम सिंह) की सरलता का फायदा उठाता है, उसने ही सपा के संविधान में प्रभारी, कार्यकारी का पद नहीं होने के बावजूद प्रभारी नियुक्त करा दिया। उसी ने प्रदेश अध्यक्ष बनवाया है। इस सवाल पर कि अमर सिंह तो खुद को मुलायमवादी कहते हैं? प्रो.यादव ने कहा कि जो समाजवादी नहीं हो सकता, वह मुलायमवादी नहीं हो सकता। प्रो.यादव ने कहा कि अमर सिंह का मकसद होता है कि उनका काम हो जाए पार्टी भाड़ में जाए। पार्टी के इंट्र्ेस्ट (फायदा) से उसे लेना देना नहीं है। चुनाव का समय है। अब बाहरी का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं।
गायत्री व राजकिशोर की मंत्रिमंडल से बर्खास्तगी और शिवपाल से विभाग छीने जाने के सवाल पर रामगोपाल ने ठीकरा मुलायम पर फोड़ते हुए कहा कि दोनों को उनके कहने पर बर्खास्त किया गया। नेताजी के बारे में वह और क्या बतायें। सरकार में किस मंत्री से क्या काम लेना है, यह मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार होता है, उन्होंने जो बेहतर समझा होगा, वह फैसला लिया। इस पूरे घटनाक्रम में चूक कहां हुई? इस सवाल पर रामगोपाल ने कहा कि अखिलेश से (पार्टी के यूपी चीफ के पद से) इस्तीफा देने को कहा जाना चाहिये था, वह इस्तीफा दे देते। उनसे कहा जा सकता था कि चुनाव नजदीक हैं, आप सीएम रहिये और प्रदेश अध्यक्ष का कामकाज वे (शिवपाल) संभालेंगे मगर ऐसा नहीं हुआ, मुझे तुरंत आदेश जारी करने को कहा गया। आप तो थिंक टैंक कहे जाते हैं, आपने मुलायम को समझाया क्यों नहीं? इस सवाल को टालते हुए रामगोपाल ने कहा कि कुछ गलतफहमी हुई। इससे ज्यादा कुछ नहीं हुआ। अब सब ठीक है। मुलायम का जो इशारा होगा, वैसा फैसला हो जाएगा। अधिकारियों की तैनाती और मुख्य सचिव को हटाने के सवाल पर सपा महासचिव ने कहा यह सवाल मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव से पूछा जाना चाहिए।
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संसदीय बोर्ड की बैठक टली
समाजवादी पार्टी की शुक्रवार को प्रस्तावित समाजवादी संसदीय बोर्ड की बैठक टाल दी गयी है। राम गोपाल यादव ने कहा कि इस मसले पर बोर्ड की बैठक की जरूरत नहीं है। टिकट और प्रत्याशी का बात होती तो बोर्ड की बैठक बुलाई जाती।
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मुझे हटाने का फैसला नेताजी की राय से हुआ होगा : शिवपाल
-अमर सिंह का बचाव किया, सबको जोडऩे से संगठन मजबूत होता है
राज्य ब्यूरो, लखनऊ : समाजवादी पार्टी में वर्चस्व की जंग के बीच प्रदेश अध्यक्ष के रूप में दिल्ली से लखनऊ लौटे शिवपाल यादव ने कहा कि इस पद की न दावेदारी कभी की न भनक थी। सपा मुखिया मुलायम ने यह फैसला लिया। कहा कि कोई पद छोटा, बड़ा नहीं होता। वह मंत्री हैं व प्रदेश अध्यक्ष का कार्य दिया गया है, उस दायित्व को निभाएंगे।
विभाग हटाने के सवाल पर शिवपाल यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को अपनी सरकार पर फैसला लेने का अधिकार है। विभाग वापस लेने का फैसला उनका है। मुझसे विभाग वापस लेने का फैसला मुलायम (नेताजी) की राय से लिया गया होगा। उनकी बात न मानने की हैसियत किसी में नहीं है। अब हमें एक होकर 2017 का चुनाव लडऩा है। शिवपाल ने बगैर किसी इशारे के कहा कि लोगों को अपनी बुद्धि से फैसले लेने चाहिए। हालांकि सब बुद्धिमान हो जाएंगे तो सभी मुख्यमंत्री बन जाएंगे।हर कोई शिवपाल यादव नहीं हो सकता।
बाहरी व्यक्ति के मुख्यमंत्री व प्रो.राम गोपाल के इशारे के सवाल पर शिवपाल यादव ने कहा कि पार्टी में कोई बाहरी व्यक्ति नहीं है। अमर सिंह को पार्टी में लेने का फैसला नेताजी (मुलायम सिंह) का है। कहा कि सबको जोडऩे से संगठन को मजबूती मिलेगी, तोडऩे से संगठन मजबूत नहीं होते हैं। कोई भी व्यक्ति पद से न बड़ा और न ही छोटा होता है। बाद में गुरुवार शाम शिवपाल पहले सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव से मिलने उनके घर पहुंचे। एक घंटे की बातचीत के बाद वह वहां से निकल कर सीधे पांच कालिदास मार्ग स्थित मुख्यमंत्री आवास पहुंचे और अखिलेश से तकरीबन एक घंटे तक बातचीत की। माना जा रहा है कि चार दिनों से चल रहे घमासान को नियंत्रित करने के प्रयास हुआ।
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मुलायम लखनऊ पहुंचे, सीएम से करेंगे बात
घमासान के चौथे दिन यानी गुरुवार दोपहर पार्टी सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव लखनऊ पहुंचे और विक्रमादित्य मार्ग स्थित अपने आवास पर कुछ नेताओं से मुलाकात की। सूत्रों का कहना है कि वह मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव समेत कुछ लोगों से मुलाकात कर सकते हैं। इससे पहले दिल्ली हवाई अड्डे पर उन्होंने कुछ मीडिया कर्मियों से कहा है कि दल व परिवार में ऐसी बातें पहले भी हुई हैं, तब सबसे बात कर उसे सुलझाया था। इस बार भी बात कर सब ठीक कर दिया जाएगा।
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फाइनल अपडेट: टाइमलाइन
नोट : टाइमलाइन में अंत में दो प्वाइंट बढ़ाए गए हैं।
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टाइमलाइन
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सुबह 10:15 बजे : सपा महासचिव रामगोपाल यादव लखनऊ पहुंचे
दोपहर 12:30 बजे : रामगोपाल मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मिलने गए
अपराह्न 2:15 बजे : शिवपाल सिंह यादव दिल्ली से लखनऊ पहुंचे
अपराह्न 3:10 बजे : सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव लखनऊ पहुंचे
सायं 5:30 बजे : मुलायम सिंह से मिलने उनके घर पहुंचे शिवपाल
सायं 7:30 बजे : मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के घर पहुंचे शिवपाल
रात 9:45 बजे : शिवपाल ने सरकार व संगठन के सभी पदों से दिया इस्तीफा
रात 10:40 बजे : मुख्यमंत्री का इस्तीफा स्वीकार करने से इन्कार
रात 11 बजे : शिवपाल के आवास पर जुटने लगे विधायक व कार्यकर्ता
रात 12:25 बजे : शिवपाल ने घर के बाहर आकर कार्यकर्ताओं से वापस जाने की अपील की
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