राजस्थान, उत्तराखंड से साक्ष्य लेकर एसटीएफ के पास पहुंच रहे हैं लोग
परवेज़ अहमद
लखनऊ। छत्रपति शाहूजी महाराज
कानपुर विवि के कुलपति प्रो.विनय पाठक ने अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय का कुलपति
रहते हुए सरकारी इंजीनियरिंग कालेजों की गुणवत्ता बेहतर करने, संसाधन बढ़ाने वाले करोड़ों
रुपये दूसरे विश्वविद्यालयों को आवंटित कर दिये थे। एसटीएफ की जांच में यह खुलासा हो
रहा है। सूत्रों का कहना है कि यूपी, उत्तराखंड और राजस्थान विवि में वित्तीय व प्रशासनिक
अनियमितताओं से जुड़े दस्तावेज लोग स्वतः ही स्पेशल टॉस्क फोर्स (यूपीएसटीएफ) को उपलब्ध
करा रहे हैं। इनमें से कुछ लोग एसटीएफ के गवाह बनने तक को तैयार हैं।
डेढ़ दशक से लंबे समय से लगातार किसी न किसी विश्वविद्यालय के कुलपति बनते आ
रहे प्रो.विनय पाठक के खिलाफ उच्च शिक्षा से जुड़े लोगों की नाराजगी का आलम ये है कि
वे उत्तराखंड व राजस्थान से दस्तावेज लेकर लखनऊ में एसटीएफ के अधिकारियों से संपर्क
कर रहे हैं। सामन्यतः जब किसी प्रकरण की जांच करती है कि शिकायतकर्ता के अतिरिक्त कोई
अन्य व्यक्ति साक्ष्य उपलब्ध कराने को पुलिस के सामने नहीं आता है। मगर, प्रो.विनय
पाठक के मामले में यह उल्टा है। सूत्रों का कहना है कि प्रो.विनय पाठक ने दीनदयाल उपाध्याय क्वालिटी इमप्रूवमेंट प्रोग्राम
(डीडीयूक्यूआईपी) मिले 300 करोड़ रुपये में भारी राशि बीआईटी झांसी, मदन मोहन मालवीय
विवि गोरखपुर और एचबीटीआई को आवंटित कर दिया। यह राशि राज्य सरकार द्वारा इंजीनियिरंग
कालेज में प्रवेश परीक्षा शुल्क के जरिये जुटाये गये थे, जिसे प्राविधिक शिक्षा विभाग
ने एकेटीयू को सरकारी इंजीनियरिंग कालेजों को आवंटित करने के लिए आवंटित किया था। सूत्रों
का कहना है कि बीआईटी को 15 करोड़, एचबीआईटी को 10 और मदन मोहन मालवीय विवि को दस-दस
करोड़ रुपया आवंटित किया गया था। सूत्रों का कहना है कि इतना ही नहीं कुलपति प्रो.विनय
पाठक के कार्यकाल में कम्प्यूटर लैब बनाने के नाम पर भी भारी वित्तीय गड़बड़ी की गयी
है।
प्राविधिक शिक्षा के
उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि एचबीटीआई, बीआईटी और मदनमोहनल मालवीय खुद स्वायत्तशासी
व स्वतंत्र संस्था हैं। ये संस्थाएं अपनी प्रवेश परीक्षाएं स्वतः कराती है। इन संस्थाओं
को एकेटीयू ने आखिर किस आधार पर धन आवंटित किया। वित्तीय हैंडबुक के मुताबिक कोई विवि
दूसरे विवि को योजनामद का धन आवंटित नहीं कर सकता है। इस प्रकरण की शिकायत हुई लेकिन
उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। सूत्रों का कहना है कि इस मामले की शिकायत कुलाधिपति
व राजभवन कार्यालय को भी की गयी थी, मगर उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गयी।
राजभवन की खामोशी पर चर्चा !
लखनऊ। कानपुर विवि के कुलपति के खिलाफ घूसखोरी की एफआईआर, भ्रष्टाचार की नित्य
नई परतें खुलने के बाद कुलाधिपति व राजभवन कार्यालय की चुप्पी पर सवाल उठने लगे हैं।
कल छह पूर्व विधायकों के पत्र में कानपुर विवि के कुलपति के खिलाफ कार्रवाई न होन पर
सवाल उठाया गया था। सूत्रों का कहना है कि प्रो.विनय पर लगे आरोपों की जांच कर रहे
एसटीएफ के शीर्ष अधिकारियों ने भी राजभवन को बताया है कि जिन विवि का प्रो.विनय के
पास चार्ज था, वहां से बड़े पैमाने पर दस्तावेजी शिकायतें मिल रही हैं। कल मुख्यमंत्री
योगी आदित्यनाथ ने भी राजभवन जाकर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से मुलाकात की थी, जाहिरा
तौर पर यह शिष्टाचार मुलाकात थी लेकिन सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री कानपुर विवि
के कुलपति प्रो.विनय पाठक पर लगे आरोपों, जांच की दिशा पर भी चर्चा की है, हालांकि
इसकी पुष्टि नहीं है। इस संबंध में पक्ष जानने
के लिए राज्यपाल की प्रमुख सचिव कल्पना अवस्थी से बात का कई बार प्रयास किया गया लेकिन
उनसे संपर्क नहीं हो सका।
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