-एनथ्रोपॉलाजी की शिक्षिका
प्रो.किया पांडेय को प्रोफेसर पद पर प्रोन्नति देने की तैयारी
-कुलपति का कार्यकाल 29 दिन बचे होने पर भी ताबड़तोड़ प्रोन्नति, नियुक्ति जारी
परवेज़ अहमद
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के
गरिमापूर्ण विश्वविद्यालयों में शुमार लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आलोक राय
पर कार्यकाल के अंतिम दिनों में करीबियों को उपकृत करने की कोशिशों का आरोप लग रहा
है। उनके कार्यकाल में सिर्फ 29 दिन शेष हैं। एनथ्रोपॉलाजी (मानव शास्त्र) की शिक्षिका
प्रो.किया पांडेय को प्रोफेसर पद पर प्रमोशन की तिथि घोषित करने से चालीस साल पुराना
“टीम-52” का जिन फिर बाहर आ गया है। उधर, हाल के दिनों में
जिन शिक्षकों को प्रोन्नति देने का निर्णय लिया गया, उस पर मंजूरी के लिए कार्य परिषद
की इमरजेंट मीटिंग की जा रही है। इससे नाराज शिक्षक कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल की ओर
से हाईकोर्ट को दिये शपथ पत्र, जिसमें तीन माह का कार्यकाल शेष रहते नीतिगत निर्णय
नहीं लिये जाने की बात कही गयी है।
वर्ष 1997-98 में लविवि के तत्कालीन कुलपति ने शिक्षण
की गुणवत्ता बेहतर करने की मंशा से 52 अंशकालिक शिक्षक नियुक्त कर उन्हें अध्यापन दायित्व
दे दिया, बदले में इन्हें मानदेय मिलता था। मगर इनको नियुक्ति पत्र जारी नहीं किया
गया था। छह सालों से अधिक की सेवा पर इन शिक्षकों को रेग्युलर करने का दबाव बनाया।
10 जून 2004 की लखनऊ विवि की कार्य परिषद ने उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय अधिनियिम
की धारा-31-3 (सी) के तहत तीन कैटेगरी के आधार पर रिक्त पद , अर्हता , योग्यता , उसी
वर्ग की रिक्तता पर शिक्षकों को लेक्चरर के पद पर सेवायोजित करने का फैसला लिया। इसकी
तीन श्रेणी भी बना दी। पहली श्रेणी में 26 शिक्षक थे, जिनमें सबसे अधिक फिजिक्स विभाग
में थे। बी श्रेणी में भी पद और उसी वर्ग की रिक्तता के आधार पर नियुक्त करने का निर्णय
था। तीनों श्रेणी के शिक्षकों को पद रिक्तता के आधार समायोजित करने की प्रक्रिया चलती
रही।
इस अंतराल में टीम-52
की एक सदस्य ने 2012 में हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर समायोजन प्रोन्नति की गुहार
लगायी, अदालत ने अर्हता व उसी वर्ग का पद रिक्त होने पर समायोजित करने का आदेश दिया। सूत्रों का कहना है
कि लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति का पद संभालने के बाद प्रो.आलोक राय ने टीम-52 की
सदस्य डॉ.किया पांडेय को न सिर्फ विवि के कोर ग्रुप में शामिल किया बल्कि गर्ल्स छात्रावास
की जिम्मेदारी सौंप दी। यहां उन पर 13 लाख से अधिक की वित्तीय गड़बड़ी का आरोप लगा।
उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों व राजभवन से शिकायत हुई। इतना ही नहीं, कार्यकाल के
29 दिन शेष होने के बावजूद कुलपति आलोक राय ने प्रोन्नति कमेटी की ताबड़तोड़ निर्धारित
कर दीं। आश्चर्यजनक बात ये है कि अंतिम दिनों के फैसलों पर कार्य परिषद की इमरजेंट
मीटिंगें बुलाकर उस पर सहमित की मुहर लगवाई जा रही है। आरोप है कि इस क्रम में अब डॉ.किया
पाण्डेय को 2014 से प्रोफेसर पद पर प्रोन्नति के लिए प्रोन्नति कमेटी की मीटिंग बुलाई
गयी है जबकि इन वर्षो में पद रिक्त नहीं था। इस पद पर पहले से ही शिक्षक कार्यरत थे।
सवाल ये है कि क्या एक पदों पर दो लोगों को वेतन दिया जाएगा ?
विवि में बहुत से शिक्षकों
का प्रमोशन रुका था, मैने अपने कार्यकाल में बहुत से शिक्षकों का प्रमोशन किया है,
उसी क्रम में ये प्रमोशन भी है। हाईकोर्ट ने अंतिम दिन तक कुलपति को फैसला लेने की
बात कही है। आपत्तियों पर दृष्टि बनी हुई है।–प्रो.आलोक राय, कुलपति लखनऊ विवि
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