Tuesday, 20 December 2022

कुलपति भूमिगत, खडाऊं प्रति कुलपति ने संभाली, कानपुर विवि चला कौन रहा ?

-49 दिनों से कुलपति के भूमिगत होने पर क्यों नहीं हो रही इमरजेंट कार्य परिषद

-तबादला होने पर कार्यमुक्त करने का अहसान उतार रहे कुलसचिव डॉ.अनिल यादव

-ऑनलाइन लीव मैनेजमेंट सिस्टम में वीसी माह में सिर्फ ढाई दिन अवकाश ले सकता

 

परवेज़ अहमद

लखनऊ। छत्रपति शाहू जी महाराज कानपुर विश्वविद्यालय के कुलपति उन्नचास (49 दिन ) दिन से भूमिगत हैं ? ऑनलाइन लीव मैनेजमेंट पोर्टल पर भी प्रो.विनय पाठक ने अवकाश नहीं लिया। पांच माह पहले यूपी सरकार कुलसचिव डॉ.अनिल यादव को विवि का कार्य छोड़ने का आदेश दे चुकी है, फिर भी पद नहीं छोड़ा। सवाल ये है कि कानपुर विवि प्रशासन क्या निरंकुश है। इन परिस्थितियों में सेमेस्टर परीक्षा, एडमीशन, निर्माण और नीतिगत निर्णय कौन ले रहा ?  विश्वविद्यालय कार्य परिषद की इमरजेंट मीटिंग क्यों नहीं हो रही ? दस हजार से अधिक छात्रों का भविष्य उज्जवल बनाने की जिम्मेदारी उठा रहे विश्वविद्यालय को संचालित कौन रहा ? कुलाधिपति कार्यालय, उच्च शिक्षा विभाग आंख क्यों मूंदे है।

लखनऊ के इंदिरानगर कोतवाली में 29 अक्टूबर को छत्रपति शाहू जी महाराज कानपुर विवि के कुलपति प्रो.विनय पाठक के विरुद्ध डेढ़ करोड़ घूस लेने की एफआईआर हुई। वादी मुकदमा डेविड मारियो डेनिस ने कहा है कि प्रो.विनय पाठक कहते हैं कि उन्हें ऊपर तक पैसा देना होता है। ये ऊपर कौन है ? इसका जवाब  स्पेशल टॉस्क फोर्स ढूंढ रही है। पड़ताल बढ़ने के साथ ही प्रो.विनय पाठक पर भ्रष्टाचार के इल्जामों की श्रंखला भी लंबी होती जा रही। कुलपति प्रो. विनय पाठक भूमिगत हैं। जब कुलपति के अवकाश के लिए कुलाधिपति कार्यालय ने नियम निर्धारित कर रखे हैं। ऑन लाइन लीव मैनेजमेंट सिस्टम बनाया है, तब फिर प्रो. विनय पाठक के 49 दिन से भूमिगत होने की विवि प्रबंधन को अधिकृत सूचना नहीं तो कार्य परिषद (ईसी) की इमरजेंट मीटिंग क्यों नहीं हो रही ?  कुलपति साल में सिर्फ 30 दिन का अवकाश ले सकता है। कुलपति पदधारी अगर जीवन जोखिम वाली बीमारी की चपेट में आ जाता है और बिना सूचना अस्पताल में भर्ती होता है तो कार्य परिषद की इमरजेंट मीटिंग में चर्चा होनी चाहिए, ये ही नैतिकता है ? इस मीटिंग में विवि संचालित करने का जिम्मा किसी को सौंपकर सूचना कुलाधिपति कार्यालय को दी जानी चाहिए ? पर कानपुर विवि में अब तक में ऐसा नहीं हुआ। नियम कहता है कि बिना सूचना या निर्धारित अवधि से अधिक समय तक कुलपति के गैर हाजिर होने पर पर पदेन सचिव यानी कुलसचिव डॉ.अनिल यादव को ईसी की इमरजेंट मीटिंग बुलाकर उसकी सूचना देनी चाहिए। पर, उनका तो खुद का स्थानांतरण पांच माह पूर्व हो चुका है लेकिन प्रो.विनय पाठक के अति करीब के चलते शासन के आदेशों को दरकिनार कर दिया गया है। लिहाजा वह इमरजेंट ईसी  नहीं बुला रहे। यही नहीं, विश्वविद्यालय के वरिष्ठ शिक्षकों को नजर अंदाज कर प्रो.विनय पाठक ने अपने करीबी प्रो. सुधीर अवस्थी को प्रतिकुलपति नियुक्त किया था। वह भी वो  कर्ज उतारने में लगे हैं, भले इसका खामियाजा विश्वविद्यालय के ढेरों शिक्षक, कर्मचारी व उससे संबंद्ध कालेजों के दस हजार छात्र भुक्त रहे हैं। छात्रों की अंक तालिकाओं में गड़बड़ियां हैं। छात्र फेल किये गये हैं, विरोध में आंदोलित भी हैं पर प्रो.विनय पाठक के प्रतिनिधि प्रो.सुधीर अवस्थी व डॉ.अनिल यादव छात्र समस्या व नियमों को हवा में उड़ा रहे हैं। डॉ.अनिल यादव की एक खास दल से राजनीतिक प्रतिबद्धता जगजाहिर है, आरोप है कि विवि के असमंजस में वे उस दल का लाभ तलाश रहे हैं।

 

संविधान पीठ का फैसला भी बेअसर

केन्द्र सरकार ने भ्रष्टाचार के आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई की पैरवी करते हुए सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि 2015 के एक फैसले पर पुर्नविचार का अवसर है। इसके बाद दो दिन पहले हुई सुनवाई में इसी प्रकरण में न्यायमूर्ति अब्दुल नजीर, न्यायमूर्ति बीआर गवई, न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना, न्यायमूर्ति रामा सुब्राम्णयम और न्यायमूर्ति नागरत्ना की संविधान पीठ ने कहा-शासन को प्रभावित करने में भ्रष्टाचार की बड़ी भूमिका होती है। इससे ईमानदार अधिकारियों, नागरिकों का मनोबल कम होता है। संविधान पीठ ने  कहा- प्रत्यक्ष सबूतों या फिर मौखिक या दस्तावेजी प्रकृति के सबूतों को आधार पर लोकसेवक को दोषी ठहराया जा सकता है। मगर कानपुर विश्वविद्यालय पर ये फैसला अभी बेअसर है। कुलपति प्रो.विनय पाठक के खिलाफ घूसखोरी की एफआईआर उनकी मुखौटा कंपनी को ऑनलाइन धन ट्रांसफर होने के साक्ष्य उपलब्ध होने और पांच अन्य विश्वविद्यालयों की खामियों का पुलिंदा बिखरा होने के बाद भी कुलाधिपति कार्यालय ने चुप्पी साध रखी है। कानपुर विवि की कार्य परिषद के सदस्य भी खामोश हैं।

 

कानपुर विवि के ईसी मेम्बर

छत्रपति शाहू जी महाराज कानपुर विवि की कार्य परिषद में 24 लोग हैं। इनमें से कई बड़े शिक्षाविद, उद्योगपति भी हैं लेकिन सबके सब खामोश हैं। सूत्रों के मुताबिक प्रो.विनय पाठक अध्यक्ष, डॉ. सुधीर अवस्थी, प्रतिकुलपति सदस्य, न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति श्रीकांत त्रिपाठी, डॉ.जेएऩ गुप्ता जागरण एजूकेशन फाउंडेशन, डॉ. महेन्द्र अग्रवाल आईआईटी, प्रो.आरसी मिश्र, डॉ.संजय काला, प्रो.मुकेश रंगा, डॉ.सुधांशु पांडिया, डॉ.अंशू यादव, डॉ.एसके श्रीवास्तव, डॉ.रिपुदमन सिंह, डॉ.जोसफ डेनियल, डॉ.एमएच सिद्दीकी, डॉ.राजेश कुमार त्रिपाठी, डॉ.राजेश कुमार, डॉ.प्रमोद कुमार यादव, डॉ.उमेश चन्द्र वाजपेयी, डॉ.सुधीर कुमार वर्मा, प्रेम शंकर चौधरी वित्त अधिकारी, डॉ.अंजनी कुमार मिश्र और कुलसचिव अनिल कुमार यादव शामिल हैं।

 

कुलपति के अवकाश का नियम

 

-    वर्तमान तिथि से आगामी 10 दिनों के लिए अवकाश का आवेदन नहीं कर सकेंगे। (अर्थातः 10 दिन का अवकाश लेने के लिए प्रॉयर सूचना देनी होगी)

-    अवकाश कैलेंडर में बतौर अवकाश चिन्हित तिथियों के लिए अवकाश नहीं ले सकेंगे । (अर्थातः होली, दीपावली, ईद, गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस का अवकाश नहीं ले सकेंगे)

-    शनिवार और रविवार के दिन कुलपति अवकाश नहीं ले सकता।

-    वर्तमान तिथि व पूर्व की तिथि (अर्थातः सोमवार को अवकाश लेना है तो सोमवार को ही आवेदन नहीं कर सकते, इसके लिए रविवार को ही आवेदन करना होगा और एडवांस में कोई छुट्टी नहीं ले सकते)

-    एक जनवरी से 31 दिसम्बर तक यानी एक साल में तीस दिन अवकाश ले सकता हैं। अर्थात माह में सिर्फ ढाई दिन की छुट्टी अनुमन्य है।

 

कोट

मैं, बहुत व्यस्त हूं। बहुत काम है। सब ठीक चल रहा है। कार्य परिषद और कुलपति जी के संबंध में सही जानकारी जनसंपर्क अधिकारी ही दे सकते हैं, ( ध्यान रहे जनसंपर्क अधिकारी संविदा कर्मचारी हैं। कुछ माह पहले प्रो.विनय पाठक ने उन्हें नियुक्त किया) उनसे बात कीजिए। हम जानकारी नहीं दे सकते। बात में बात करेंगे- प्रति कुलपति सुधीर अवस्थी

 

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