-जिस विश्वविद्यालय के कुलपति बने कैंटीन ठेकेदार भी बदले
-नये ठेकेदारों ने बिजली बिल, भवन किराया भी नहीं जमा किया
-ठेका बदलने पर छात्रों ने दुकानदार की उधारी लौटाने से मना किया
परवेज अहमद
लखनऊ । उत्तर प्रदेश की उच्च, तकनीकी शिक्षा के प्रभावशाली कुलपति प्रो.विनय
पाठक की दिलचस्पी विश्वविद्यालयों, सबंद्ध सरकारी कालेजों की कैंटीन (चाय, नाश्ता,
भोजन) के ठेकों में भी रहती है। जिस विश्वविद्यालय के वह कुलपति नियुक्त होते हैं,
वहां संचालित कैंटीनों के पुराने ठेकेदारों को हटाकर पसंदीदा के ठेकेदार को ठेका आवंटित
करते हैं। एकेटीयू, उसके घटक संस्थान आईईटी, ख्वाजा मोइनउद्दीन भाषा विवि, भीमराव आंबेडकर
विवि और छत्रपति शाहू जी महाराज कानपुर विवि के कैंटीनों का पुराना ठेका रद कर नये
लोगों को ठेका दे दिया। जिनमें से कई संचालकों ने भवन किराया, बिजली बिल तक जमा नहीं
किया है।
डॉ.भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा के परीक्षा कार्यों के लिए डेढ़ करोड़
घूस लेने के एक प्रकरण में कानपुर विवि के कुलपति प्रो.विनय पाठक नामजद हैं। एसटीएफ
जांच कर रही। जिसमें लगातार खुलासा हो रहा है कि उन्होंने यूपी के पांच विश्वविद्यालयों
का कुलपति रहते हुये नियमों के विपरीत प्रोफेसरों, सहायक प्रोफेसर और सह प्रोफेसरों
की नियुक्तियां की । यौन उत्पीड़न , गुंडागर्दी के आरोपियों को उच्च पदों पर नियुक्त
किया। अधूरी शैक्षिक योग्यता वालों को शिक्षक बनाया। मुखौटा कंपनियों को परीक्षा, स्टेशनरी
जैसे करोड़ों के कार्य दिये। उन पर अपने से जुड़े लोगों को कुलपति बनवाने का भी आरोप
है। एसटीएफ की जांच में ढेरों वित्तीय, प्रशासनिक गड़बड़ियों के साथ भ्रष्टाचार के
तत्थ सामने आये हैं। फिर भी अभी तक उन पर सरकार या कुलाधिपति कार्यालय से कोई कार्रवाई
नहीं हुई।
अब ये भी खुलासा हो रहा है कि प्रो.विनय पाठक का बड़े मामलों के साथ छोटे-छोटे
मामलों में भी सीधे हस्तक्षेप था। कैंटीन जैसे कार्य जिसका कस्टोडियन कुलसचिव होता
है, उसमें भी उनके इन्वॉल्वमेंट का खुलासा हो रहा है। सूत्रों का कहना है कि अब्दुल
कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय का कुलपति नियुक्त होने के बाद प्रो.विनय पाठक के नेतृत्व
वाले प्रबंधन ने परिसर में 20 लाख रुपए खर्च कर कैंटीन बनवाई। उसका ठेका दूर के रिश्तेदार
को दिया गया। विश्वविद्यालय के घटक संस्थान आईईटी में बरसों से चल रहे अमूल पार्लर
को बंद कराकर ठेका करीबी को दिया गया। ख्वाजा मोईन उद्दीन चिश्ती विश्वविद्यालय का
कुलपति बनने पर प्रो.विनय पाठक ने यहां के पुराने कैंटीन संचालक को हटाकर उसके स्थान
पर करीबी मित्र के मित्र को ठेका आवंटित कराया। ठेका आवंटन के प्रस्ताव पर कार्य परिषद
की मंजूरी की मुहर भी लगवाई गयी।
छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय का कुलपति बनने पर प्रो.विनय पाठक ने बरसों से
परिसर में जीराक्स कॉपी ( फोटो कापी) की दुकान चलाने वाले व्यक्ति को तीन दिनों के
अंदर हटा दिया। उसके स्थान पर एचबीटीयू की एक महिला प्रोफेसर के परिचित को यह कार्य
दिया गया। दस साल पुरानी चाय-नाश्ता की दुकान बंद कराकर कानपुर की होटलचेन संस्था को
ठेका दे दिया गया। सूत्रों का कहना है कि इस होटल चेन संचालक ने लंबे समय से विवि के
बिजली का भुगतान नहीं किया। कैंटीन के रूप में इस्तेमाल स्थान का किराया भी नहीं दिया
है। सूत्रों का कहना है कि तीन दिनो के नोटिस पर ही कानपुर विवि की कैन्टीन बंद कराने
से संचालक को 20 लाख से अधिक की चपत लग गई। दरअसल, लंबे समय से कैन्टीन चलाने के चलते
बड़ी संख्या में छात्र उसके यहां उधार चाय-काफी करते रहे हैं। अचानक कैन्टीन बंद होने
से छात्रों ने उधार रकम देने से इंकार दिया है।
हाईलाइटर
कैंटीन आवंटन की प्रक्रिया क्या है ? ये सवाल भाषा विवि, एकेटीयू
और कानपुर विवि के रजिस्ट्रार से जानने का प्रयास किया गया, सब का एक ही जवाब था ये
विवि का आंतरिक मामला है।
नियम क्या है ?
उत्तर प्रदेश सरकार के बिजनेस रूल और अधिकतर विश्वविद्यालयों की परिनियमावली
में कैंटीन, छात्रावास मेस संचालन का ठेका टेंडर से दिये जाना आवश्यक है। प्रो.विनय
पाठक ने इन कानूनों के शिंकजे से बचने की कार्य परिषद की मीटिंगों में टेंडर प्रक्रिया
पूरी होने की प्रत्याशा में पसंदीदा लोगों को ठेका आवंटित कर दिया।
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