Friday, 2 December 2022

रेप, गुन्डागर्दी और भ्रष्टाचार के मुजरिमों को सौंपा छात्रों का भविष्य !

-दुष्कर्म के आरोप में फरारी के दौरान लाइफ साइंस में असिस्टेंट प्रोफसर बने

-वित्त नियंत्रक को मारने पर नामजद एफआईआर के बाद हुये डिप्टी रजिस्ट्रार

-परीक्षा नियंत्रक पर हमले के आरोप में निलंबित रहते बने एसोसिएट प्रोफेसर

 

परवेज़ अहमद

लखनऊ। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.विनय पाठक घूसखोरी, भ्रष्टाचार, नियमों का मखौल उड़ाने के इल्जामों से ही घिरे नहीं है बल्कि दुराचार आरोपी को असिस्टेंट प्रोफेसर, गुंडागर्दी करने में चार्जशीटेड को डिप्टी रजिस्ट्रार बनाने और बीआईटी ( बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नालॉजी) के परीक्षा नियंत्रक पर जानलेवा हमला के आरोप में निलंबित को एसोसिएट प्रोफेसर नियुक्त कराने के भी आरोपों से घिरे हैं। इनमें से दो प्रकरण एकेटीयू और कानपुर विवि, एमएमएमटीयू गोरखपुर, झांसी इंजीनियरिंग कालेज का एक-एक प्रकरण हैं।

छत्रपति शाहू जी महाराज कानपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.विनय पाठक पर शिक्षक भर्ती में गड़बड़ी करने आरोप हैं ही, उन्होंने स्कूल ऑफ लाइफ साइंस एण्ड बॉयोटेक्नालाजी  में फैशन डिजाइनिंग की छात्रा से बलात्कार के आरोपी डॉ.चन्द्रेश शर्मा को असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्त दिया। जिन्होंने कार्यभार ग्रहण किया। छात्र-छात्राओं को पढ़ाने लगे। अचानक दिल्ली पुलिस ने विवि परिसर में छापा मारकर डॉ.चन्द्रेश शर्मा को गिरफ्तार कर लिया। उन पर साउथ ईस्ट दिल्ली के कालकाजी थाने में आईपीसी की धारा-376 ( बलात्कार), 328 (अपराध के लिए किसी को क्षति पहुंचाना) और 506 ( जान-माल की धमकी) की धारा में जून 2021 से एफआईआर हुई थी। जिसमें वह फरार थे, इसी दौरान असिस्टेंट प्रोफेसर भी हो गये। डॉ. चन्द्रेश की गिरफ्तारी के बाद भी उन्हें निलंबित नहीं किया गया। अलबत्ता कुलपति प्रो.विनय पाठक के नेतृत्व वाली कार्य परिषद ने प्रस्ताव संख्या-2022-2.10 में नवनियुक्त शिक्षक डॉ.चन्द्रेश के प्रार्थना पत्र पर विचार के लिए अधिवक्ता से आख्या लेने का अधिकार भी अध्यक्ष ( प्रो. विनय पाठक) को सौंप दिया।

यह प्रो.विनय पाठक की नई शैली नहीं है, इससे पहले अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) में गार्ड व समूह ग के कर्मचारी आरके सिंह ( राजीव कुमार सिंह) को डिप्टी रजिस्ट्रार नियुक्त करने के लिये दस्तावेजों में कई बार फेरबदल किया गया। तत्कालीन रजिस्ट्रार एके दमेले और कुलपति दुर्ग सिंह चौहान ने एक प्रमाण पत्र में इन्हें कर्मचारी बताया। इन्ही अधिकारियों ने फिर सहायक रजिस्ट्रार का प्रमाण पत्र भी दे दिया। जब ये दस्तावेज उस समय आरके सिंह नियम विरुद्ध वित्तीय फाइल पास करने से इंकार करने पर राज्य वित्त सेवा के अधिकारी एवं एकेटीयू के वित्त नियंत्रक वीरेन्द्र चौबे के साथ  मारपीट कर चुके थे। सरकारी पत्रावलियां फाड़ दी थी, लखनऊ के जानकीपुरम थाने में आईपीसी की धारा-143, 506, 553 में इसकी रिपोर्ट दर्ज हुई थी। विवेचना के बाद जानकीपुरम पुलिस ने आरके सिंह को दोषी मानते हुए 30 अप्रैल 2015 को चार्जशीट दाखिल की थी। यह मुकदमा ट्रायल की स्टेज पर है। बावजूद इसके कुलपति प्रो.विनय पाठक ने उन्हें डिप्टी रजिस्ट्रार नियुक्त करने के लिये तत्कालीन सचिव प्राविधिक शिक्षा सचिव भुवनेश कुमार से डिप्टी रजिस्ट्रार पद की स्नातक प्रथम श्रेणी वाली अर्हता को दितीय श्रेणी कराया। कई और नियम शिथिल कर डिप्टी रजिस्ट्रार नियुक्त ही कर दिया। मौजूद समय में आरके सिंह के खिलाफ विश्वविद्यालय और शासन से जांच कराई जा रही है। कर्मचारी की पहुंच का आलम ये है कि बार-बार नोटिस भी वह जांच अधिकारी को जवाब नहीं दे रहा। और एकेटीयू के दीक्षांत समारोह में प्राविधिक शिक्षा मंत्री आशीष पटेल का स्वागत करने वालों में भी अग्रणी था। ऐसे अधिकारी के पास छात्रों के भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य हैं।

तीसरा मामला, मदन मोहन मालवीय टेक्नालॉजी विश्वविद्याल (एमएमएमटीयू) के कुलसचिव रहे डॉ.जिऊत सिंह का है। मेकैनिकल इंजीनियरिंग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ.जिऊत सिंह पर कर्मचारियों, शिक्षकों से मारपीट का आदी होने का आरोप है। बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नालॉजी (बीआईटी) रांची में सहायक प्रोफेसर रहते हुए परीक्षा नियंत्रक व कर्मचारियों पर  हमला किया। पुलिस कम्पलेन्ड, एफआईआर हुई। वरिष्ठ प्रोफेसरों के जांच दल ने उन्हें दोषी पाया। बीआईटी प्रबंधन ने निलंबित कर दिया। निलम्बन के दौरान प्रो.विनय पाठक के प्रभाव वाली एमएमएमटीयू सर्च कमेटी ने इन्हें एसोसिएट प्रोफेसर पद पर नियुक्त कर लिया। जानकारी होने पर बीआईटी कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से यूपी के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति राम नाईक को ज्ञापन भेजा। उनके तत्कालीन विशेष कार्याधिकारी (पदेन) चन्द्र प्रकाश ने बीआईटी विस्तृत रिपोर्ट मांगी। बीआईटी के रजिस्ट्रार एसएन चौधरी ने कुलाधिपति सचिवालय और एमएमएमटीयू के कुलपति को 21 मार्च 2017 को भेजी रिपोर्ट में लिखा- डॉ.जिऊत सिंह मारपीट, उपद्रव में संलिप्त रहने के आदी हैं। यह रिपोर्ट होने के बाद भी एमएमएमटीयू प्रशासन ने उन्हें कुलसचिव जैसा सबसे ताकतवर ओहदा दे दिया। अब रविवार की रात गोरखपुर के खोराबार थाने में जूनियर वर्कशाप मैनेजर वीरेन्द्र चौधरी को आत्महत्या के लिए मजबूर करने की धाराओं में उनके विरुद्ध एफआईआर हुई है। डॉ.जिऊत के साथ प्रो.हरिश्चन्द्रा, और लेखा विभाग के मनोज बालोनी भी नामजद हुये हैं। कुलपति जेपी पांडेय का कहना है कि आंतिरक कमेटी बना दी गयी है। डॉ.जिऊत सिंह की नियुक्ति का प्रकरण मेरे पहले का है। हमने उन्हें कुलसचिव पद से हटा दिया है।

चौथा मामला एकेटीयू के घटक संस्थान आईईटी का है, जहां कम्प्यूटर खरीद, भवन निर्माण, सेवा प्रदाता कंपनी को लाभ देने जैसे आरोपों की जांच इंस्टीट्यूट के प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ चल रही। जिसका निष्कर्ष सामने नहीं आया, जबकि यह गंभीर वित्तीय अनियमितिता का मामला है। केन्द्र सरकार ने कम्प्यूटरों की खरीद व अन्य कार्यों का भुगतान रोक रखा है। फिर जांच ठंडे बस्ते में हैं। पांचवां मामला इंजीनियरिंग कालेज झांसी के निदेशक का है, उन्हें शोध छात्रा से छेड़छाड़ का दोषी ठहराया जा चुका है, पर, वह निदेशक पद पर तैनात हैं। प्रकरणों की फेहरिशत बहुत लंबी है।

 

कोट-एक

एकेटीयू के डिप्टी रजिस्ट्रार की नियुक्ति, उनके दस्तावेजों में कूटरचना, शासनादेश की शिथिलता की जांच शासन ने सौंपी है। आरके सिंह को दो बार नोटिस दिया जा चुका, मगर  अब तक उन्होंने पक्ष प्रस्तुत नहीं किया। 15 दिनों के समय के साथ अंतिम मौका दिया गया है, इसके बाद अपने अभिमत के साथ रिपोर्ट शासन को भेज दूंगा।– प्रो.जेपी पांडेय, कुलपति, एमएमएमटीयू गोरखपुर

 

कोट-2

एकेटीयू के घटक आईईटी में खरीद-फरोख्त में गड़बड़ी और भ्रष्टाचार की जांच का आदेश मिला था, जिन बिन्दुओं पर जांच के लिए कहा गया, उसे पूरा कर रिपोर्ट शासन भेज दी है।  गोपनीयता को चलते रिपोर्ट के अंश शेयर नहीं कर सकता, हमारी संस्तुतियों पर शासन को निर्णय लेना है।– प्रो.शमशेर सिंह, कुलपति, एचबीटीयू कानपुर

कोट-3

रेप के आरोपी शिक्षक को कानपुर विवि प्रबंधन ने शिक्षक कैसे नियुक्त किया, इस बारे में बोर्ड, कुलपति बता सकते हैं, मुझे जानकारी नहीं है-

डॉ.अनिल यादव, कुलसचिव छत्रपति शाहू जी कानपुर विवि

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  दूसरी खबर इंसेट डीसी में।

 

लविवि में प्रोन्नतियों, नियुक्तियों की राज्यपाल से शिकायत

शिया धर्म गुरू कल्बे जवाद ने भी कुलाधिपति को लिखा पत्र

विशेष प्रतिनिधि

लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में कार्यकाल का सिर्फ एक माह शेष होने के बाद भी तेजी से की जा रही प्रोन्नतियों, नियुक्तियों को नियम विरुद्ध ठहराते हुए कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल को एक ज्ञापन सौंपा गया है। दूसरी ओर, शिया धर्म गुरु कल्बे जवाद ने भी कुलाधिपति को पत्र लिखकर अरबी-फारसी विभाग के शिक्षक का उत्पीड़न, भेदभाव रोकने के साथ प्रकरण की जांच कराने की मांग की है।

मंगलवार को कुलाधिपति व राज्यपाल आऩंदीबेन पटेल के सचिवालय को सौंपे गये ज्ञापन में कहा गया है कि लविवि के कुलपति प्रो. आलोक राय अपने कार्यकाल के अंतिम दिनों में 46 लोगों की नियुक्ति और प्रोन्नति कर चुके हैं। जबकि कुलाधिपति की ओर से हाईकोर्ट में दाखिल काउटंर शपथ पत्र में कहा गया है कि तीन माह शेष बचने पर कुलपति नीतिगत निर्णय नहीं ले सकता। राज्यपाल को ज्ञापन देने वाले अरबी, फारसी विभाग के प्रो.सैयद अरशद अली जाफरी ने नियमों, कानूनों का हवाला देते हुये प्रोन्नित रोकने और उत्पीड़ित करने वालों पर कार्रवाई की मांग की है। दूसरी ओर शिया धर्म गुरु कल्बे जवाद ने कुलाधिपति को लिखे विस्तृत पत्र में  प्रो.अरशद अली के साथ उत्पीड़नात्मक कार्रवाई का उल्लेख करते हुए न्याय की मांग की है। पत्र में कानून का हवाला दिया है। यह भी कहा गया है कि उच्च शिक्षा में दो अलग व्यक्तियों के लिए दो अलग कानून लागू नहीं किया जा सकता है। विश्वविद्यालय का कानून सभी के लिए समान होना चाहिए। उन्होंने लविवि में भेदभाव पूर्ण कार्रवाई पर दुख जाहिर करते हुए पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराये जाने की मांग की है।

 

 

 

कानपुर विवि परिसर के महादेव मंदिर का स्ट्रक्चर तोड़ने पर नाराजगी

( फोटो है)

वि.प्र

लखनऊ। छत्रपति शाहू जी महाराज कानपुर विश्वविद्यालय परिसर के अंदर बने श्रीविशेश्वर महादेव मंदिर का ऐतिहासिक स्वरूप तोड़ने को लेकर शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्रों के एक वर्ग में खासी नाराजगी है। आरोप है कि ये मंदिर विवि की स्थापना के समय का है जिसमें लाखों लोगों की आस्था है। परिसर के बाहर के श्रद्धालु भी प्रत्येक सोमवार को यहां दर्शन करने आते हैं। कुलपति प्रो.विनय पाठक ने इस परिसर का ऐतिहासिक स्ट्रक्चर तुड़वाना शुरू कर दिया है, जिससे मंदिर का मूल स्वरूप नष्ट हो रहा है। आरोप है कि इसे मंदिरा का सुंदरीकरण कार्य बताया जा  रहा है, जिसकी आड़ में विवि का धन खुर्द-बुर्द करने की तैयारी है। कई लोगों ने इसे आस्था से खिलवाड़ बताया है। कुलसचिव अनिल यादव ने इस मुद्दे पर कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया है।

 

इंसेट

ठेंगे पर है शासन का आदेश

लखनऊ। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.विनय पाठक उत्तर प्रदेश सरकार और उच्च शिक्षा विभाग के आदेशों को ठेंगे पर रखते हैं। प्रदेश सरकार ने 30 जून 2022 को कुलसचिव अनिल कुमार यादव का स्थानांतरण लखनऊ विश्वविद्यालय के लिए कर दिया था । विशेष सचिव श्रवण कुमार सिंह की ओर से उच्च शिक्षा अनुभाग-एक जारी आदेश में कहा गया था कि अनिल यादव प्रतिस्थानी की प्रतीक्षा किये बगैर वर्तमान पर से कार्यमुक्त होकर लविवि में कार्य ग्रहण करें, मगर प्रो.विनय पाठक का प्रभाव का ये असर है कि कुलसचिव ने शासन के आदेश पर अमल ही नहीं किया और शासन ने भी इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं की। इसी तरह सहायक कुलसचिव ज्ञानेन्द्र कुमार को स्थानांतरित करते हुए  जननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय बलिया भेजा गया था, मगर उन्होंने भी कार्यभार नहीं छोड़ा। अब विवि में सवाल उठ रहा है कि क्या प्रो.विनय पाठक सरकार, शासन से भी ऊपर हैं।

 

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