ख्वाजा मोईऩ उद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय का हाल...
-छात्रों की फीस से एकतित्र रकम घर, गेस्ट हाउस पर हुई खर्च
-बाहुबली कुलपति प्रो विनय पाठक के साथ जांच घेरे में आये शिक्षक, इंजीनियर
थे समिति के सदस्य
लखनऊ। जिस विश्वविद्यालय की स्थापना को सिर्फ दस साल हुये हों, जिसके आठ कुलपति
रह चुके हों, वीसी आवास में कुछ न कुछ रिनोवेशन (नवीनीकरण) होता रहा हो...उस कुलपति
आवास की मरम्मत पर कितना धन खर्च हो सकता है ? पांच, दस, पन्द्रह, बीस लाख ? जी नहीं-42 लाख 33 हजार रुपये।
ये ही नहीं, गेस्ट हाउस मरम्मत पर 38 लाख रुपया खर्च हो गये। यह दूरदराज नहीं बल्कि
कुलाधिपति कार्यालय से बमुश्किल 20 किलोमीटर दूर ख्वाजा मोईन उद्दीन चिश्ती भाषा विवि
का प्रकरण हैं। इस खर्च की राशि छात्रों की फीस से जुटाई गयी। जिसकी मंजूरी उस भवन
समिति ने प्रदान की, जिसके दो सदस्यों लाभ देने के लिए छत्रपति शाहूजी महाराज विवि
के कुलपति प्रो.विनय पाठक ने नियम शिथिल किये थे।
तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने 2009 में लखनऊ में मान्यवर कांशीराम स्मारक
भाषा विश्वविद्यालय की स्थापना की थी, इस विश्वविद्यालय ने जब आकार लिया, उस समय राज्य
में समाजवादी पार्टी की सरकार थी, जिसने नाम बदलकर ख्वाजा मुईऩ उद्दीन चिश्ती भाषा
विश्वविद्यालय कर दिया । बहुचर्चित सेवानिवृत आईएएस अनीस अंसारी को पहला कुलपति नियुक्त
किया गया। जिन्होंने कुलपति आवास सजाने-संवारने में कसर नहीं रखी। उनका टर्म पूरा होने
पर एक बाद एक कुलपति बदले। आखिर अब्दुल कलाम विश्वविद्यालय (एकेटीयू) के घटक संस्थान
आईईटी की सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर एनबी सिंह 27 अप्रैल 2022 को ख्वाजा
मोईऩउद्दीन विवि के आठवें कुलपति नियुक्त हुये। इस समय एकेटीयू के कुलपति प्रो.विनय
पाठक थे जो ख्वाजा मोइन उद्दीन विवि के कार्यवाहक कुलपति रह चुके थे।
सूत्रों का कहना है कि कार्यभार संभालने के कुछ अरसे बाद प्रो.एनबी सिंह ने
पहले भवन समिति का गठन किया, जिसमें एकेटीयू में सहकर्मी रहे दो सदस्यों को शामिल किया।
समित ने कुलपति आवास की मरम्मत पर 42 लाख 33 हजार प्रस्ताव पारित किया। गेस्ट हाउस मरम्मत पर 38 लाख खर्च की मंजूरी मिली।
इस धन को खर्च भी कर दिया गया। ध ये राशि किसी सरकारी अनुदान या योजना की नहीं बल्कि
छात्रों की फीस से अर्जित धनराशि थी। आवास, गेस्ट हाउस पर धन खर्च होने के बाद कुलपति
एनबी सिंह अध्यक्षता में 21 जून 2022 को कार्य समिति व भवन समिति की मीटिंग में इस
खर्च को जायज ठहराते हुए अनुमोदित कर दिया। गेस्ट हाउस 2015-16 में बनकर तैयार हुआ
है। आश्चर्यजनक बात ये है कि कुलपति आवास, गेस्ट हाउस पर 80 लाख से अधिक खर्च करने
वाली समिति ने शैक्षिक कार्यों, छात्रों के इस्तेमाल के लिए जरूरी लिफ्ट शुरू कराने
के लिए जरूरी धन का प्रस्ताव शासन भेज दिया। विवि प्रबंधन ने लड़कियों व लड़कों के
छात्रावास की मरम्मत पर पर भी दो करोड़ रुपये खर्च कर डाले।
भवन समिति में कौन-कौन
प्रो.एनबी सिंह कुलपति अध्यक्ष, प्रवीण त्रिपाठी वित्त अधिकारी, मसऊद आलम संकायाध्यक्ष
कला एवं मानविकी संकाय, डॉ. तत्हीर फातिमा संकायाध्यक्ष-विज्ञान संकाय, कौशलेश कुमार
शाह सहायक आचार्य (सिविल) सदस्य थे। अधिसाशी अभियंता लोक निर्माण निर्माणखंड-1 सत्यपाल
सिंह, पीडी आरएनएन संदीप सिंह, प्रो.वीरेन्द्र पाठक सीईडी, आईईटी (एकेटीयू घटक संस्थान)
और आशीष मिश्र एकेटीयू को विशेष सदस्य नामित किया गया था। इन सभी ने मीटिंग में हिस्सा
लिया। प्रो.वीरेन्द्र पाठक पर ये आरोप है कि जिन सालों में वे विदेश में रहे, उन सालों
को जोड़की प्रो. विनय पाठक ने उन्हें प्रोफेसर बनाया गया। इंजीनियर आशीष मिश्र पर एकेटीयू
में करोड़ों के कार्य में अनियमितता समेत ढेरों आरोप हैं।
कहां कितना खर्च
-महिला छात्रावास रंगाई-पुताई ( पार्ट ए-बी) : 114.58 लाख
-बालीवाल व टेनिस कोर्ट व अन्य मरम्मत : 8705.65 लाख
- नौ सौ क्षमता के आडिटोरियम निर्माण: 1949.81 लाख
- शैक्षणिक भवन, लाइब्रेरी में चैनल निर्माण: 03.55 लाख
- महिला, पुरुष छात्रावास की खिड़की, दरवाजे मरम्मत: 03,94,458 लाख
- महिला एव पुरुष छात्रावास की सिनेटरी फिटिंग पर : 11,32,487
कुलपति प्रो.एनबी सिंह बोले-
कुलपति आवास की बाउंड्री बनीं थी, छात्र कई बार धरना-प्रदर्शन कर चुके हैं,
सुरक्षा की दृष्टि से आवास की बाउंड्री बनवाई गयी है। कई सालों से रंगाई-पुताई का कार्य
नहीं हुआ था, इसलिए इस पर धनराशि खर्च की गयी। कोरोना काल में तत्कालीन कुलपति ने गेस्ट
हाउस को कोरनटाइन सेंटर बना दिया था, इसके बाद कुछ समय इस गेस्ट हाउस में पीएसी की
टुकड़ी रही, जिससे गेस्ट हाउस रहने लायक नहीं बचा था। कुछ दिनों में राष्ट्रीय सेमिनार
होने वाले हैं, इसलिए 38 लाख रुपये खर्च करके गेस्ट हाउस का रिनीवेशन कराया गया है।
कुलपति की ये भी सफाई
मेरे कार्यभार संभालने के बाद विवि के दो शिक्षकों में मारपीट हुई थी, जिन शिक्षक
की ज्यादती समझ में आ रही थी, उन्होंने ही
जांच कराने की मांग की थी। जिस पर एक कमेटी बना दी गयी है। इस कमेटी बनने पर शिक्षकों
ने एक समझौता ज्ञापन दिया, जिसे जांच कमेटी को भेज दिया गया है। ये लोग इस ज्ञापन के
आधार पर जांच खत्म करने का दबाव बना रहे थे। जिसे मानने से इनकार करने पर कई तरह के
आरोप लगा रहे हैं।
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