12.01.2016
प्रदेश के 226 अधिकारियों पर भ्रष्टाचार का इल्जाम
-लोकायुक्त की ओर से राज्यपाल को भेजे गए पांच साल के ब्यौरे में हुआ खुलासा
-राज्यपाल राम नाईक ने लोकायुक्त एनके मेहरोत्रा से मांगा था जांच का ब्यौरा
-पहले ब्यौरे से संतुष्ट नहीं होने पर दूसरी बार प्रोफार्मे पर राज्यपाल ने मांगी थी रिपोर्ट
राज्य ब्यूरो, लखनऊ : प्रदेश में सिर्फ मंत्री, विधायक, पंचायत अध्यक्ष पर ही नहीं बल्कि बड़ी संख्या में नौकरशाहों, इंजीनियरों पर भी भ्रष्टाचार के इल्जाम है। पांच साल के अंतराल में 119 जनप्रतिनिधियों के विरुद्ध लोकायुक्त के यहां शिकायत हुई, तो 259 अधिकारी भ्रष्टाचार के घेरे में हैं। इनमें 88 जनप्रतिनिधि व 33 अधिकारियों के खिलाफ जांच की गयी।
लोकायुक्त की ओर से राजभवन भेजी गयी रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया है। दरअसल, 24 दिसबंर को राज्यपाल राम नाईक ने लोकायुक्त न्यायमूर्ति एनके मेहरोत्रा से पांच साल के अन्तराल में दाखिल शिकायत, दर्ज परिवाद, लंबित जांच और पूरी हो चुकी जांचों का ब्यौरा मांगा था। लोकायुक्त केसंयुक्त सचिव ने 31 दिसबंर को प्रारम्भिक रिपोर्ट राजभवन भेजी, इससे संतुष्ट नहीं होने पर राज्यपाल ने दो जनवरी को लोकायुक्त को दूसरे पत्र के साथ एक प्रोफार्मा भेजा और उसके मुताबिक सूचना की अपेक्षा की।
मंगलवार को लोकायुक्त ने राज्यपाल को डेढ़ सौ पेज की एक रिपोर्ट भेजी है, जिसमें बसपा सरकार के दौरान मंत्रियों, विधायकों, पंचायत अध्यक्षों के खिलाफ दाखिल हुई शिकायतों व जांच का ब्यौरा दर्ज है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2010 से वर्ष 2012 तक की जांच में जहां 10 मंत्रियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के पर्याप्त साक्ष्य मिले, वहीं 33 अधिकारियों के खिलाफ भी साक्ष्य पाए गए। जिनके खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की गयी, अलबत्ता बसपा सरकार के ही कई मंत्रियों, भाजपा, कांग्र्रेस के विधायकों के विरुद्ध साक्ष्य नहीं मिलने पर जांच बंद कर दी गयी।
वर्ष 2012 के बाद से अब तक दाखिल शिकायतों व जांचों का विस्तार से उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि साक्ष्य के अभाव में मंत्री गायत्री प्रजापति, आजम खां, महबूब अली, ब्रह्रïाशंकर त्रिपाठी, नारद राय के खिलाफ जांच बंद की गयी मौजूदा समय में तकरीबन 29 पालिका परिषद के मुखिया के खिलाफ जांच चल रही है। 226 अधिकारियों के खिलाफ भी जांच लंबित है। लोकायुक्त न्यायमूर्ति एनके मेहरोत्रा का कहना है कि राज्यपाल राम नाईक द्वारा मांगी गयी सूचना उन्हें उपलब्ध करा दी गयी है।
ब्यौरा एक नजर में
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-88 जनप्रतिनिधियों (तत्कालीन मंत्रियों, विधायकों, पालिका अध्यक्ष शामिल)
-31 जनप्रतिनिधियों के खिलाफ जांच लंबित (इसमें 29 पालिका व जिला पंचायत अध्यक्ष)
-33 सरकारी अधिकारियों के खिलाफ आयी शिकायतों की जांच पूरी कर मुख्य सचिव को भेजी गयी
-226 अधिकारियों के विरुद्ध दाखिल शिकायतों का परीक्षण चल रहा है।
-लोकायुक्त की संस्तुति पर मंत्री राजेश त्रिपाठी का इस्तीफा हुआ। रंगनाथ मिश्र, अवध पाल सिंह यादव, बादशाह सिंह, रतन लाल अहिरवार, बाबू सिंह कुशवाहा, रामवीर उपाध्याय, अयोध्या प्रसाद पाल, नसीमुद्दीन सिद्दीकी, राम अचल राजभर (सभी तत्कालीन मंत्री) एमएलसी हुस्नां सिद्दीकी, विधायक उमाशंकर सिंह, विधायक बजरंग बहादुर सिंह के खिलाफ संस्तुति भेजी गयी। मंत्री अनीस अहमद खां उर्फ फूल बाबू के खिलाफ विधायक निधि के दुरुपयोग की जांच हुई।
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बसपा सरकार में इनकी जांच बंद हुई
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मंत्री सुभाष पाण्डेय, उद्यान मंत्री नारायण सिंह सुमन, ग्राम्य विकास मंत्री दद्दू प्रसाद, सिंचाई राज्यमंत्री जयवीर सिंह, उच्च शिक्षा मंत्री राकेश धर त्रिपाठी, लघु उद्योग मंत्री चन्द्रदेव राम यादव, वन मंत्री फतेह बहादुर सिंह, बेसिक शिक्षा मंत्री धर्म सिंह सैनी, खाद्य एवं रसद मंंत्री राम प्रसाद चौधरी मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण, धिायक श्याम सुंदर शर्मा, भाजपा विधायक सतीश महाना, पंचायती राज मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य, चिकित्सा शिक्षा मंत्री लालजी वर्मा (सभी तत्कालीन मंत्री) की जांच बंद हुई। इसके अलावा विधायक श्याम सुंदर शर्मा, कांग्र्रेस विधायक प्रदीप माथुर, भाजपा विधायक सतीश महाना की जांच बंद हुई।
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सपा सरकार में इनकी बंद हुई जांच
आशा किशोर विधायक सपा, मंत्री आजम खां, मंत्री गायत्री प्रजापति (तीन शिकायतों की जांच बंद हुई), मंत्री ब्रह्मïशंकर त्रिपाठी, मंत्री महबूब अली, सपा विधायक नारद राय, सपा विधायक लक्ष्मी गौतम, विधायक इकबाल, विधायक राम प्रकाश कुशवाहा, सपा विधायक व तत्कालीन मंत्री मनोज पारस, विधायक फागू चौहान, विधायक आदित्य पाण्डेय।
प्रदेश के 226 अधिकारियों पर भ्रष्टाचार का इल्जाम
-लोकायुक्त की ओर से राज्यपाल को भेजे गए पांच साल के ब्यौरे में हुआ खुलासा
-राज्यपाल राम नाईक ने लोकायुक्त एनके मेहरोत्रा से मांगा था जांच का ब्यौरा
-पहले ब्यौरे से संतुष्ट नहीं होने पर दूसरी बार प्रोफार्मे पर राज्यपाल ने मांगी थी रिपोर्ट
राज्य ब्यूरो, लखनऊ : प्रदेश में सिर्फ मंत्री, विधायक, पंचायत अध्यक्ष पर ही नहीं बल्कि बड़ी संख्या में नौकरशाहों, इंजीनियरों पर भी भ्रष्टाचार के इल्जाम है। पांच साल के अंतराल में 119 जनप्रतिनिधियों के विरुद्ध लोकायुक्त के यहां शिकायत हुई, तो 259 अधिकारी भ्रष्टाचार के घेरे में हैं। इनमें 88 जनप्रतिनिधि व 33 अधिकारियों के खिलाफ जांच की गयी।
लोकायुक्त की ओर से राजभवन भेजी गयी रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया है। दरअसल, 24 दिसबंर को राज्यपाल राम नाईक ने लोकायुक्त न्यायमूर्ति एनके मेहरोत्रा से पांच साल के अन्तराल में दाखिल शिकायत, दर्ज परिवाद, लंबित जांच और पूरी हो चुकी जांचों का ब्यौरा मांगा था। लोकायुक्त केसंयुक्त सचिव ने 31 दिसबंर को प्रारम्भिक रिपोर्ट राजभवन भेजी, इससे संतुष्ट नहीं होने पर राज्यपाल ने दो जनवरी को लोकायुक्त को दूसरे पत्र के साथ एक प्रोफार्मा भेजा और उसके मुताबिक सूचना की अपेक्षा की।
मंगलवार को लोकायुक्त ने राज्यपाल को डेढ़ सौ पेज की एक रिपोर्ट भेजी है, जिसमें बसपा सरकार के दौरान मंत्रियों, विधायकों, पंचायत अध्यक्षों के खिलाफ दाखिल हुई शिकायतों व जांच का ब्यौरा दर्ज है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2010 से वर्ष 2012 तक की जांच में जहां 10 मंत्रियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के पर्याप्त साक्ष्य मिले, वहीं 33 अधिकारियों के खिलाफ भी साक्ष्य पाए गए। जिनके खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की गयी, अलबत्ता बसपा सरकार के ही कई मंत्रियों, भाजपा, कांग्र्रेस के विधायकों के विरुद्ध साक्ष्य नहीं मिलने पर जांच बंद कर दी गयी।
वर्ष 2012 के बाद से अब तक दाखिल शिकायतों व जांचों का विस्तार से उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि साक्ष्य के अभाव में मंत्री गायत्री प्रजापति, आजम खां, महबूब अली, ब्रह्रïाशंकर त्रिपाठी, नारद राय के खिलाफ जांच बंद की गयी मौजूदा समय में तकरीबन 29 पालिका परिषद के मुखिया के खिलाफ जांच चल रही है। 226 अधिकारियों के खिलाफ भी जांच लंबित है। लोकायुक्त न्यायमूर्ति एनके मेहरोत्रा का कहना है कि राज्यपाल राम नाईक द्वारा मांगी गयी सूचना उन्हें उपलब्ध करा दी गयी है।
ब्यौरा एक नजर में
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-88 जनप्रतिनिधियों (तत्कालीन मंत्रियों, विधायकों, पालिका अध्यक्ष शामिल)
-31 जनप्रतिनिधियों के खिलाफ जांच लंबित (इसमें 29 पालिका व जिला पंचायत अध्यक्ष)
-33 सरकारी अधिकारियों के खिलाफ आयी शिकायतों की जांच पूरी कर मुख्य सचिव को भेजी गयी
-226 अधिकारियों के विरुद्ध दाखिल शिकायतों का परीक्षण चल रहा है।
-लोकायुक्त की संस्तुति पर मंत्री राजेश त्रिपाठी का इस्तीफा हुआ। रंगनाथ मिश्र, अवध पाल सिंह यादव, बादशाह सिंह, रतन लाल अहिरवार, बाबू सिंह कुशवाहा, रामवीर उपाध्याय, अयोध्या प्रसाद पाल, नसीमुद्दीन सिद्दीकी, राम अचल राजभर (सभी तत्कालीन मंत्री) एमएलसी हुस्नां सिद्दीकी, विधायक उमाशंकर सिंह, विधायक बजरंग बहादुर सिंह के खिलाफ संस्तुति भेजी गयी। मंत्री अनीस अहमद खां उर्फ फूल बाबू के खिलाफ विधायक निधि के दुरुपयोग की जांच हुई।
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बसपा सरकार में इनकी जांच बंद हुई
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मंत्री सुभाष पाण्डेय, उद्यान मंत्री नारायण सिंह सुमन, ग्राम्य विकास मंत्री दद्दू प्रसाद, सिंचाई राज्यमंत्री जयवीर सिंह, उच्च शिक्षा मंत्री राकेश धर त्रिपाठी, लघु उद्योग मंत्री चन्द्रदेव राम यादव, वन मंत्री फतेह बहादुर सिंह, बेसिक शिक्षा मंत्री धर्म सिंह सैनी, खाद्य एवं रसद मंंत्री राम प्रसाद चौधरी मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण, धिायक श्याम सुंदर शर्मा, भाजपा विधायक सतीश महाना, पंचायती राज मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य, चिकित्सा शिक्षा मंत्री लालजी वर्मा (सभी तत्कालीन मंत्री) की जांच बंद हुई। इसके अलावा विधायक श्याम सुंदर शर्मा, कांग्र्रेस विधायक प्रदीप माथुर, भाजपा विधायक सतीश महाना की जांच बंद हुई।
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सपा सरकार में इनकी बंद हुई जांच
आशा किशोर विधायक सपा, मंत्री आजम खां, मंत्री गायत्री प्रजापति (तीन शिकायतों की जांच बंद हुई), मंत्री ब्रह्मïशंकर त्रिपाठी, मंत्री महबूब अली, सपा विधायक नारद राय, सपा विधायक लक्ष्मी गौतम, विधायक इकबाल, विधायक राम प्रकाश कुशवाहा, सपा विधायक व तत्कालीन मंत्री मनोज पारस, विधायक फागू चौहान, विधायक आदित्य पाण्डेय।
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