Saturday, 12 December 2015

घोटालेबाजों के पास है महत्वपूर्ण कार्य

.४.१.२०१४

घोटालेबाजों के पास है महत्वपूर्ण कार्य
परवेज़ अहमद, लखनऊ: दलित महापुरुषों की याद में नोएडा और लखनऊ में बने स्मारकों के घोटाले में पूर्व मंत्रियों, इंजीनियरों के खिलाफ भले एफआइआर हो गयी हो, मगर राजकीय निर्माण निगम (आरएनएन) पर उसका असर नहीं हुआ। घोटाले के आरोपितों में शामिल यहां के 20 इंजीनियरों को महत्वपूर्ण भवनों का निर्माण का जिम्मा सौंपा गया है। इसमें हाईकोर्ट, एनआरएचएम के  चिकित्सालय, सतर्कता अधिष्ठान, एसटीएफ दफ्तर का निर्माण तक शामिल है।
लोकायुक्त की जांच में बसपाराज में लखनऊ व नोएडा में दलित महापुरुषों की याद में बने स्मारक निर्माण घोटाले में पूर्व मंत्री बाबू ंिसह कुशवाहा, पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी समेत 198 लोगों को आरोपित किया गया। इसमें  जिसमें आइएएस, ठेकेदार और राजकीय निर्माण निगम के तकरीबन 40 अधिकारी भी शामिल है। लोकायुक्त ने इन सभी के खिलाफ कार्रवाई की राज्य सरकार से संस्तुति की थी। जिस पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एफआइआर दर्ज कराकर पूरे घोटाले की विवेचना सतर्कता अधिष्ठान को सौंपी थी। बुधवार को सतर्कता अधिकारियों ने पूर्व मंत्रियों समेत 19 के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराकर विवेचना शुरू कर दी, बावजूद इसके राजकीय निर्माण निगम पर फर्क नहीं पड़ा। घोटाले के ज्यादातर आरोपित अति महत्वपूर्ण निर्माण कार्य का जिम्मा संभाल रहे हैं। इनमें से कई तीन परियोजना प्रबंधकों के पास हाईकोर्ट भवन के निर्माण की जिम्मेदारी है। एक अधिकारी सपा मुखिया मुलायम ंिसह यादव के संसदीय क्षेत्र मैनपुरी में होने वाले निर्माण कार्यो का जिम्मा संभाल रहे हैं। घोटालेबाजी में आरोपित महाप्रबंधक एसके अग्र्रवाल दिल्ली और एस कुमार वाराणसी इकाई में चल रहे करोड़ों के कार्य कर रहे हैं। गौतमबुद्धनगर के निर्माण कार्य भी स्मारक घोटाले के आरोपितों को ही सौंपा गया है। सतर्कता विभाग के एक अधिकारी का कहना है कि घोटाले और एफआइआर में शामिल तथ्यों की विवेचना हो रही है। जो भी दोषी मिलेगा कानूनों के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी।
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कोट: राजकीय निर्माण निगम के पास उपलब्ध इंजीनियरों से ही कार्य लिया जा रहा है, अभी इंजीनियरों पर आरोप की बात सामने आयी है, उनका कोई दोष सिद्ध नहीं हुआ है, लिहाजा उन्हें दोषी नहीं ठहराया जा सकता है। हां, आरोपितों में से कुछ के पास जरूर महत्वपूर्ण कार्य है, जिसकी समीक्षा करायी जाएगी।-आरएन यादव, प्रबंध निदेशक राजकीय निर्माण निगम
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कोट:
बसपा सरकार के घोटालों की जांच करा रही समाजवादी पार्टी की सरकार में भी आरोपितों को महत्वपूर्ण कार्य दिया जाने से राज्य सरकार की नियत पर संदेह साफ नजर आ रहा है।-अमरनाथ अग्र्रवाल, प्रदेश प्रवक्ता कांग्र्रेस
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घोटाले के  आरोपितों को खास काम
नाम              मौजूदा कार्य
एके सक्सेना-  इटावा में प्रोजेक्ट मैनेजर
पीके जैन- महाप्रबंधक महत्वपूर्ण पद
एसके अग्र्रवाल- महाप्रबंधक(दिल्ली)आरके ंिसह- प्रोजेक्ट मैनेजर यूनिट-21 जिसके पास (एसटीएफ, सतर्कता भवन, टाउन प्लानिंग का कार्य)
-एसके चौबे- डॉ.मनोहर लोहिया मेडिकल इंस्टीट्यूट का निर्माण कार्य
केके अस्थाना- मुख्य वास्तु विद, भवनों निर्माण को अंतिम रूप देने का जिम्मा
-एस कुमार- महाप्रबंधक वाराणसी का अतिमहत्वपूर्ण कार्यभार
-एके गौतम-  महाप्रबंधक झारखण्ड के पद से 31 दिसम्बर को सेवानिवृत
-अनिल कुमार- परियोजना प्रबंधक निर्माणाधीन हाईकोर्ट भवन
-एए रिजवी, अपर परियोजना प्रबंधक निर्माणाधीन हाईकोर्ट भवन


-राजेश चौधरी, परियोजना प्रबंधक निर्माणाधीन हाईकोर्ट भवन
-मसूद अहमद, इकाई प्रभारी, मैनपुरी
-सुनील कुमार त्यागी, इकाई प्रभारी गौतमबुद्धनगर
-छेदी लाल, इकाई प्रभारी गौतमबुद्धनगर
-राजवीर ंिसह, महाप्रबंधक झांसी
- अवनी कुमार, महाप्रबंधक (तकीनीकी) आरएनएन अति महत्वपूर्ण शाखा है यह।
-पीके शर्मा, परियोजना प्रबंधक निर्माणाधीन सहारनपुर मेडिकल कालेज
-आरएन यादव- तत्कालीन महाप्रबंधक विद्युत अंचल अब प्रबंध निदेशक
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इंसर्ट
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जांच की भी होगी जांच
जागरण ब्यूरो, लखनऊ: उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान स्मारक घोटाले की शुरूआती जांच करने वाली आर्थिक अपराध शाखा (इओडब्ल्यू) के विवेचनाधिकारियों से कुछ की भूमिका खंगालने की तैयारी में जुट गया है।
लोकायुक्त के आधीन स्मारक घोटाले की जांच करने वाली इओडब्ल्यू के विवेचनाधिकारियों ने अपनी जांच में तीन आइएएस अधिकारियों, लखनऊ के तत्कालीन मण्डलायुक्त, पीडब्ल्यूडी के तत्कालीन प्रमुख अभियंता (विकास) की भूमिका को संदिग्ध तो ठहराया है लेकिन उनके खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई की संस्तुति नहीं की है।
सूत्रों का कहना है कि इओडब्ल्यू की 117 पेज की जांच रिपोर्ट में ही संदेह के घेरे में आए कई इंजीनियरों, ठेकेदारों और अधिकारियों के बयानों का उल्लेख भी नहीं किया है। आखिर ऐसे क्यों हुआ? यही सवाल सतर्कता अधिकारियों को मथ रहा है। सूत्रों का कहना है कि इन्हीं सवालों के जवाब की तलाश के लिए सतर्कता अधिकारी इओडब्ल्यू के विवेचनाधिकारियों से उनके बयान लेने की तैयारी कर रहे हैं।सतर्कता अधिष्ठान के महानिदेशक ए.एल बनर्जी का कहना है कि अभी एफआइआर की विवेचना शुरू हुई लेकिन सभी पहलुओं की जांच होगी।

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