२७.१२.२०१३
1-आजम खां (अल्पसंख्यक कल्याण, नगर विकास, संसदीय कार्य मंत्री): आगरा में हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी से गैरहाजिर, हावर्ड विश्वविद्यालय अमेरिका के दौरे के दौरान तलाशी पर बखेड़ा, विरोध स्वरूप मुख्यमंत्री को कार्यक्रम का बहिष्कार करना पड़ा। प्रमुख सचिव प्रवीर कुमार पर अल्पसंख्यक विरोधी होने का आरोप मढ़ा। साल खत्म होते-होते मंत्री के निजी स्टाफ ने उनके खिलाफ बगावत का बिगुल बजाया, उसके बाद से उनके कार्यालय में तैनात कर्मचारियों में से ज्यादातर गैर सचिवालय कर्मी हैं।
2-राम आसरे कुशवाहा: (रिमोट सेंसिंग के अध्यक्ष पद से बर्खास्त): वह पहले ऐसे दर्जा प्राप्त नेता हैं, जिन्हें पार्टी लाइन से इतर बयानबाजी करने पर सरकारी पद से बर्खास्त किया गया। नोएडा की एक डील में कथित रूप से उनका नाम आने पर सरकार और पार्टी नेता असहज हुए।
3-कमाल फारूकी: (पूर्व राष्ट्रीय सचिव और दिल्ली की मीडिया में सपा चेहरा) आतंकवाद के आरोपी यासीन भटकल की गिरप्तारी पर उन्होंने कहा कि सिर्फ मुस्लिम होने के नाते उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। इस बयान ने विरोधी दलों ने सपा पर हमले का मौका दिया। बेचैन सपा ने उन्हें पद और पार्टी से विदा कर दिया।
4-रघुराज प्रताप ंिसह उर्फ राजा भैया: (खाद्य एवं रसद मंत्री) हाइकोर्ट की निगरानी में चल रहे खाद्यान्न घोटाले की सीबीआइ जांच में उनकी भूमिका को लेकर सवाल। कुंडा के डिप्टी एसपी जिया उल हक की हत्या की साजिश में उनकी नामजदगी, मंत्री पद से इस्तीफा। सीबीआइ जांच में क्लीन चिट, फिर से मंत्री पद की शपथ, खाद्य एवं रसद विभाग को लेकर दबाव। आखिर महकमा मिला लेकिन मुख्य भवन में कार्यालय को लेकर अब भी रार जारी।
5-विनोद कुमार ंिसह उर्फ पंडित ंिसह: (माध्यमिक शिक्षा, राज्यमंत्री) गोंडा में एनआरएचएम की भर्ती को लेकर जिले के लोगों की दावेदारी को खारिज कर बाहर के लोगों को नियुक्त किये जाने से विरोध में गोंडा के सीएमओ को ही अगवा कर लिया। मुख्यमंत्री ने मंत्री पद से इस्तीफा लिया और कुछ दिनों बाद ही दोबारा मंत्री बना दिया।
7-नरेश अग्रवाल,( राज्यसभा सदस्य) भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी को चायवाला का विवादित तमगा दिया। महिला उत्पीडऩ की बढ़़ती शिकायतों के बीच कहा था अब कोई महिला पीएस नहीं रखना चाहता।
8-अतीक अहमद पूर्व सांसद,(सुल्तानपुर से सपा के प्रत्याशी) मुकदमों की लंबी फेहरिश्त वाले पूर्व सांसद ने समाजवादी पार्टी में शामिल होने और सुल्तानपुर से प्रत्याशी बनते ही दिखाया बाहुबल, असलहों की नुमाइंश और गाडिय़ों का जलवा। मुख्यमंत्री के आदेश पर हुई जांच में भी प्रशासन ने उन्हे दिया क्लीन चिट
9-अवधेश प्रसाद, (समाज कल्याण मंत्री): खांटी समाजवादी नेता के लैपटाप वितरण कार्यक्रम से लौटी लड़की के साथ दुराचार के बाद वह सवालों के घेरे में आए। देर शाम लैपटाप वितरण को लेकर पार्टी के अन्दर और बाहर से न सिर्फ उनकी घेरेबंदी हुई बल्कि समाजवादी पार्टी को भी किरकिरी का सामना करना पड़ा।
10-अंबिका चौधरी, (विकलांग कल्याण, पिछड़ा वर्ग मंत्री) विधानसभा चुनाव हारने के बाद सरकार ने उन्हे राजस्व जैसे अतिमहत्वपूर्ण महकमे का मंत्री बनाया लेकिन कुछ अरसे में ही पूर्वांचल के कई विवादों में घिरने और पार्टी के नेताओं से छत्तीस के आंकड़े के बाद सरकार ने उनका कद कम किये जाना चर्चा का विषय रहा। फिलहाल वह विकलांग कल्याण और पिछड़ा वर्ग महकमे के मंत्री हैं।
11-नरेन्द्र ंिसह भाटी: (मंत्री का दर्जा प्राप्त और नोएडा से सपा के प्रत्याशी) नोएडा में निर्माणाधीन मस्जिद की दीवार गिरवाने के आरोप में प्रशिक्षु आइएएस दुर्गा नागपाल के निलंबन को लेकर उनके विवादित बयान ने सरकार के सामने मुश्किल खड़ी की, उन्होंने सार्वजनिक सभा में यहां तक कह डाला कि मैंने चंद मिनटों में ही दुर्गा को हटवा दिया। बाद में उन पर आरोप लगा कि अवैध खनन के चलते दुर्गा को हटवाया।
12-मनोज पारस: ( स्टाम्प एवं न्यायालय शुल्क, पंजीयन शुल्क राज्यमंत्री): बलात्कार की पुरानी घटना के मामले में अदालत से समन जारी होने और फिर लोकायुक्त के यहां पहुंची शिकायत को लेकर सरकार के लिए परेशानी की वजह बने।
13-ब्राह्रïमाशंकर त्रिपाठी: (होमगाडर््स एवं प्रांतीय रक्षक दल मंत्री) समाजवादी सरकार के पहले मंत्री जिनके खिलाफ पहुंची जांच में लोकायुक्त ने विह्रिवत जांच शुरू की। होमगार्डो की ड्यूटी लगाने को लेकर विवादों में आए, जिसमें मुख्यमंत्री ने दखल दिया और होमगार्डो की ड्यूटी कम्प्यूटराइज करायी।
1-आजम खां (अल्पसंख्यक कल्याण, नगर विकास, संसदीय कार्य मंत्री): आगरा में हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी से गैरहाजिर, हावर्ड विश्वविद्यालय अमेरिका के दौरे के दौरान तलाशी पर बखेड़ा, विरोध स्वरूप मुख्यमंत्री को कार्यक्रम का बहिष्कार करना पड़ा। प्रमुख सचिव प्रवीर कुमार पर अल्पसंख्यक विरोधी होने का आरोप मढ़ा। साल खत्म होते-होते मंत्री के निजी स्टाफ ने उनके खिलाफ बगावत का बिगुल बजाया, उसके बाद से उनके कार्यालय में तैनात कर्मचारियों में से ज्यादातर गैर सचिवालय कर्मी हैं।
2-राम आसरे कुशवाहा: (रिमोट सेंसिंग के अध्यक्ष पद से बर्खास्त): वह पहले ऐसे दर्जा प्राप्त नेता हैं, जिन्हें पार्टी लाइन से इतर बयानबाजी करने पर सरकारी पद से बर्खास्त किया गया। नोएडा की एक डील में कथित रूप से उनका नाम आने पर सरकार और पार्टी नेता असहज हुए।
3-कमाल फारूकी: (पूर्व राष्ट्रीय सचिव और दिल्ली की मीडिया में सपा चेहरा) आतंकवाद के आरोपी यासीन भटकल की गिरप्तारी पर उन्होंने कहा कि सिर्फ मुस्लिम होने के नाते उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। इस बयान ने विरोधी दलों ने सपा पर हमले का मौका दिया। बेचैन सपा ने उन्हें पद और पार्टी से विदा कर दिया।
4-रघुराज प्रताप ंिसह उर्फ राजा भैया: (खाद्य एवं रसद मंत्री) हाइकोर्ट की निगरानी में चल रहे खाद्यान्न घोटाले की सीबीआइ जांच में उनकी भूमिका को लेकर सवाल। कुंडा के डिप्टी एसपी जिया उल हक की हत्या की साजिश में उनकी नामजदगी, मंत्री पद से इस्तीफा। सीबीआइ जांच में क्लीन चिट, फिर से मंत्री पद की शपथ, खाद्य एवं रसद विभाग को लेकर दबाव। आखिर महकमा मिला लेकिन मुख्य भवन में कार्यालय को लेकर अब भी रार जारी।
5-विनोद कुमार ंिसह उर्फ पंडित ंिसह: (माध्यमिक शिक्षा, राज्यमंत्री) गोंडा में एनआरएचएम की भर्ती को लेकर जिले के लोगों की दावेदारी को खारिज कर बाहर के लोगों को नियुक्त किये जाने से विरोध में गोंडा के सीएमओ को ही अगवा कर लिया। मुख्यमंत्री ने मंत्री पद से इस्तीफा लिया और कुछ दिनों बाद ही दोबारा मंत्री बना दिया।
7-नरेश अग्रवाल,( राज्यसभा सदस्य) भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी को चायवाला का विवादित तमगा दिया। महिला उत्पीडऩ की बढ़़ती शिकायतों के बीच कहा था अब कोई महिला पीएस नहीं रखना चाहता।
8-अतीक अहमद पूर्व सांसद,(सुल्तानपुर से सपा के प्रत्याशी) मुकदमों की लंबी फेहरिश्त वाले पूर्व सांसद ने समाजवादी पार्टी में शामिल होने और सुल्तानपुर से प्रत्याशी बनते ही दिखाया बाहुबल, असलहों की नुमाइंश और गाडिय़ों का जलवा। मुख्यमंत्री के आदेश पर हुई जांच में भी प्रशासन ने उन्हे दिया क्लीन चिट
9-अवधेश प्रसाद, (समाज कल्याण मंत्री): खांटी समाजवादी नेता के लैपटाप वितरण कार्यक्रम से लौटी लड़की के साथ दुराचार के बाद वह सवालों के घेरे में आए। देर शाम लैपटाप वितरण को लेकर पार्टी के अन्दर और बाहर से न सिर्फ उनकी घेरेबंदी हुई बल्कि समाजवादी पार्टी को भी किरकिरी का सामना करना पड़ा।
10-अंबिका चौधरी, (विकलांग कल्याण, पिछड़ा वर्ग मंत्री) विधानसभा चुनाव हारने के बाद सरकार ने उन्हे राजस्व जैसे अतिमहत्वपूर्ण महकमे का मंत्री बनाया लेकिन कुछ अरसे में ही पूर्वांचल के कई विवादों में घिरने और पार्टी के नेताओं से छत्तीस के आंकड़े के बाद सरकार ने उनका कद कम किये जाना चर्चा का विषय रहा। फिलहाल वह विकलांग कल्याण और पिछड़ा वर्ग महकमे के मंत्री हैं।
11-नरेन्द्र ंिसह भाटी: (मंत्री का दर्जा प्राप्त और नोएडा से सपा के प्रत्याशी) नोएडा में निर्माणाधीन मस्जिद की दीवार गिरवाने के आरोप में प्रशिक्षु आइएएस दुर्गा नागपाल के निलंबन को लेकर उनके विवादित बयान ने सरकार के सामने मुश्किल खड़ी की, उन्होंने सार्वजनिक सभा में यहां तक कह डाला कि मैंने चंद मिनटों में ही दुर्गा को हटवा दिया। बाद में उन पर आरोप लगा कि अवैध खनन के चलते दुर्गा को हटवाया।
12-मनोज पारस: ( स्टाम्प एवं न्यायालय शुल्क, पंजीयन शुल्क राज्यमंत्री): बलात्कार की पुरानी घटना के मामले में अदालत से समन जारी होने और फिर लोकायुक्त के यहां पहुंची शिकायत को लेकर सरकार के लिए परेशानी की वजह बने।
13-ब्राह्रïमाशंकर त्रिपाठी: (होमगाडर््स एवं प्रांतीय रक्षक दल मंत्री) समाजवादी सरकार के पहले मंत्री जिनके खिलाफ पहुंची जांच में लोकायुक्त ने विह्रिवत जांच शुरू की। होमगार्डो की ड्यूटी लगाने को लेकर विवादों में आए, जिसमें मुख्यमंत्री ने दखल दिया और होमगार्डो की ड्यूटी कम्प्यूटराइज करायी।
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