Saturday, 12 December 2015

सांसद व विधायक से राज्य सरकार मुकदमा वापस नहीं लेने जा रही

1.06.2014
परवेज़ अहमद, लखनऊ : पश्चिम में दंगा भड़काने में नामजद मौलानाओं, सांसद व विधायक से राज्य सरकार मुकदमा वापस नहीं लेने जा रही है, केन्द्रीय गृह मंत्रालय की एक चिट्ठी से हड़बड़ाए यूपी के गृह व न्याय विभाग के अधिकारियों मुजफ्फरनगर प्रशासन से मुकदमों की स्थिति पर '13 बिन्दुओंÓ पर रिपोर्ट तलब राज्य सरकार को एक बार फिर सांसत में फंसा दिया है।
प्रदेश सरकार के गृह व न्याय विभाग ने 27 अगस्त को कबाल से शुरू होकर पश्चिम में फैले दंगों में अभियुक्तों का नाम, तफ्तीश की स्थिति, समेत 13 बिन्दुओं पर रिपोर्ट तलब की थी। इसमें यह भी पूछा गया था कि बसपा सांसद कादिर राणा पर दर्ज मुकदमें वापस लिये जा सकते हैं या नहीं? जिस पर हंगामा बरपा होने पर उच्च स्तरीय जांच शुरू हुई तो खुलासा हुआ कि राज्य सरकार ने तो मुकदमे वापसी का न कोई फैसला लिया है न ही अधिकारियों से रिपोर्ट मांगने के निर्देश दिये। अलबत्ता केन्द्र सरकार सरकार के गृह मंत्रालय (सीएस डिवीजन) के अनुसचिव मनिराम की ओर से नवम्बर माह में जारी पत्र में यूपी सरकार के गृह सचिव को निर्देशित करते हुए कहा गया है कि बसपा सांसद कादिर राना ने दंगा मामले में फर्जी मुकदमा दर्ज कराने का आरोप लगाया है, प्रकरण राज्य सरकार की कानून व्यवस्था से जुड़ा है, लिहाजा सरकार इस मामले की वस्तु स्थिति से केन्द्रीय गृह मंत्रालय को अवगत कराये।
सूत्रों का कहना है कि केन्द्रीय गृह मंत्रालय के इस पत्र से हड़बड़ाए राज्य सरकार के गृह व न्याय विभाग के अधिकारियों ने मनमानी तरीके सेमुजफ्फरनगर के जिला प्रशासन से 13 बिन्दुओं पर रिपोर्ट तलब कर ली। जिसमें आरोपितों से मुकदमा उठाने या न उठाने का बिन्दु भी शामिल था। गौरतलब है कि इससे पहले ही यूपी सरकार के गृह विभाग के अधिकारी 'सोमनाथ मंदिर निर्माणÓ संबंद्ध् में लापरवाही भरा पत्र लिखकर राज्य सरकार को मुसीबत में फंसा चुके हैं। सूत्रों का कहना है कि दूसरी ओर मुजफ्फरनगर के जिला प्रशासन ने न्याय और गृह विभाग को भेजी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि दंगा की एफआइआर पर अभी विवेचना चल रही है। अभी तो अदालत में प्रकरण गया है ही नहीं है। ऐसे में मुकदमा वापस लेने का कोई औचित्य नहीं है। जिला प्रशासन ने कानून व्यवस्था की स्थिति से भी इसे अनुचित माना है।
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मुख्यमंत्री बोले-
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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि सूचना मांगने का अर्थ यह नहीं होता है कि सरकार ने दंगों के आरोपितों से मुकदमा वापस ले लिया है। कानून अपना कार्य कर रहा है। कानून का पालन करने के मामले में सरकार कोई हस्तक्षेप नहीं करती है। कानून अपना कार्य करेगा। अलबत्ता किसी निर्दोष के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने दी जाएगी।
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जागरण ब्यूरो, लखनऊ: प्रदेश सरकार में गफलत और मनमानी का आलम ये है कि दंगा भड़काने में नामजद बसपा सांसद कादिर राणा की शिकायत परकेन्द्रीय गृह मंत्रालय से मांगी गयी सूचना पर मुजफ्फरनगर के जिला प्रशासन से मुकदमा वापसी से ताल्लुक रखने वाले 13 बिन्दुओ पर रिपोर्ट तलब कर ली। तथ्यों का खुलासा होने पर प्रमुख सचिव न्याय जेएस पाण्डेय ने आनन-फानन में प्रकरण की पत्रावली तलब सील करा दी है। रिपोर्ट मंागने की पत्रावली तैयार करने वाले सेक्शन अधिकारी व एक समीक्षा अधिकारी उनके पद से हटाकर वापस सचिवालय प्रशासन भेजने का निर्देश दिया है। दोनों समीक्षा अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी किये जाने के संकेत हैं। सूत्रों का कहना है कि गृह विभाग के उन अधिकारियों के बारे में भी छानबीन शुरू हो गयी है, जिन्होंने पत्रावली न्याय विभाग को बढ़ायी थी। 

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