Saturday, 12 December 2015

टिकट सपाइयों का

01.06.2014
1-पारसनाथ यादव
प्रदेश सरकार में उद्यान मंत्री जौनपुर से लोकसभ प्रत्याशी हंै, जिनकी उलझन है कि कुछ दिन पहले ही उनका बेटा पार्टी कार्यकर्ताओं से मारपीट के आरोपों में घिर गया, ऊपर से पूर्व में घोषित प्रत्याशी डॉ.केपी यादव बागी हो गये हैं। और उनकी सभाओं में खासी भीड़ उमड़ रही है।
2-सुकन्या कुशवाहा
यूं तो वह पहली बार चुनावी समर में हैं लेकिन उनके पति बाबू ंिसह कुशवाहा कभी दलित-पिछड़ा राजनीति के महारथी रहे हैं, उनकी दिक्कत ये हैं कि जिस गाजीपुर संसदीय क्षेत्र से उन्हें टिकट दिया है, वहां के मौजूदा सांसद राधे मोहन ंिसह का टिकट कटा है और वह बगावती तेवर  अख्तियार किये हैं।
3-बलराम यादव
प्रदेश सरकार के ताकतवर मंत्रियों में से एक बलराम यादव तो पार्टी ने आजमगढ़ संसदीय क्षेत्र से चुनाव लडऩे के लिए लेकिन वह हिचक गये, उनकी पहल पर ही आजमगढ़ के जिलाध्यक्ष को प्रत्याशी बना दिया गया लेकिन उनकी उलझन ये है  कि अगर यहां परिणाम नकारात्मक हुए तो उनकी सियासत का क्या होगा, इसी लिए उनके खेमे से जब तक सपा मुखिया मुलायम ंिसह या उनके दूसरे बेटे प्रतीक यादव के चुनावी समर में कूदने की चर्चाएं छेड़ी जाती रही हैं।

4- राकेश सचान
फतेहपुर के सांसद राकेश को फिर से यहीं से चुनावी मैदान में उतारा गया लेकिन वह बन रहे समीकरणों को लेकर खासे विचलित हैं, लिहाजा अकबरपुर संसदीय सीट से टिकट हासिल करने की कवायद में हैं।
5-घनश्याम अनुरागी
जालौन के इस सांसद को पार्टी ने पहले दोबारा प्रत्याशी बनाया, फिर टिकट काट कर जिले एक विधायक को प्रत्याशी बनाया और फिर घनश्याम को प्रत्याशी बना दिया गया, उनकी परेशानी का सबब ये है कि बैठे-बैठाए पार्टी का एक विधायक उनसे खार खा बैठा है, अगर उसने खुले दिल से समर्थन न किया तो क्या होगा?
6- रामजी लाल सुमन
सपा के इस दिग्गज का चुनावी क्षेत्र आगरा रहा, लेकिन टिकट हाथरस से मिला है और यहां की मौजूदा सांसद सारिका बघेल को आगरा से प्रत्याशी बनाया गया है, दोनों के सियासी रिश्ते बहुत खुशगवार नहीं है, ऐसे में उनकी बेचैनी स्वाभावित की है।   

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