Saturday, 12 December 2015

दंगा राहत शिविर बंद कराने का प्रयास

२४,१२.२०१३

जागरण ब्यूरो, लखनऊ: चुनावी मुद्दा बनते जा रहे दंगा राहत शिविर बंद कराने का प्रयास शुरू हो गया है। पूरा खाका तैयार हो है। पीडि़तों अगर घर वापस लौटने को राजी नहीं हुए तो उन्हें दूसरे सुरक्षित ठिकाने पर भेजने की योजना है। वैकल्पिक स्थान की तलाश भी हो रही है।
दंगा राहत शिविरों के इंतजामों और कुछ शिविर संचालकों पर अमानत में खयानत, इमदाद में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर सरकार को घेरने की सियासत तेज हो चली है। कांग्र्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के राहत शिविरों का दौरा दिया फिर मंगलवार को माकपा महासचिव प्रकाश करात ने मुख्यमंत्री से मिलकर राहत कैम्पों का हाल बयान किया। भाजपा पहले ही सरकार की कार्य प्रणाली पर हमलावर है, सरकार इस सबको चुनावी साजिश के रूप में देख रही है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी आरोप लगाया कि कुछ षणयंत्रकारी पीडि़तों को भड़काने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने पीडि़तों से गांव वापस लौटने की अपील की है। सूत्रों का कहना है कि इस बीच शासन ने मुजफ्फरनगर, शामली के जिला प्रशासन को मौजूदा राहत शिविरों को जल्द से जल्द बंद कराने  व पीडि़तों को वापस गांव भेजने का अभियान चलाने का संदेश दिया है। सूत्रों का कहना है कि प्रशासन से कहा गया है कि पीडि़त अगर वापस गांव लौटने को तैयार नहीं होते तो उन्हें प्रशासन की देख रेख में सुरक्षित व पक्के भवनों में ले जाकर ठहराया जाए, मगर राहत शिविर बंद कराये जाएं।
इसके पीछे चुनावी समय में विरोधी दलों खासकर कांग्र्रेस और भाजपा के सियासी वार को नाकाम करने की कोशिश माना जा रहा है, गौरतलब है कि सपा प्रमुख मुलायम ंिसह य ादव ने सोमवार को कहा था कि भाजपा व कांग्र्रेस षणयंत्र कर रहे हैं, जिन्हे रोकने के लिए सतर्क रहने की जरूरत है।


प्रशासन का दावा-सब कुछ ठीक:
मुजफ्फरनगर के ग्राम लोई में चल रहे राहत शिविर में सफाई. खाने-पीने, दवा-इलाज के साथ ठंड से बचाव के व्यापक इंतजाम हैं। हर ब्लाक में दो-दो सफाई कर्मी तैनात हैं। जिला पंचायत राज अधिकारी को नोडल अधिकारी बनाये गये हैं।  ये दावा सरकारी प्रवक्ता ने मुजफ्फरनगर के डीएम कौशलराज शर्मा के हवाले से दी। उन्होंने बताया कि लोई शिविर में स्वच्छ पेयजल के लिए 10 इण्डिया मार्क-।। हैंडपम्प लगाये गये हैं। जल निकासी के लिए सोकपिट बने हैं। गर्भवती महिलाओं, माता और 7 माह से तीन साल के बच्चों की विशेष देखभाल हो रही है। नियमित पोषाहार बंट रहा है। बच्चों कोपरिषदीय विद्यालयों, मान्यता प्राप्त विद्यालयों  प्रवेश दिलाकर शिक्षा के भी इंतजाम किये गये हैं।
शिविर वासियों को अब तक 132 क्विंटल आटा, 116 क्विंटल चावल, 28 क्विंटल दाल, 525 ली0 तेल, 38 क्विंटल आलू 24.50 क्विंटल चीनी, 5.6 क्विंटल नमक, 300 क्विंटल मसाला के साथ-साथ प्रत्येक परिवार को दैनिक उपयोग की वस्तुओं टूथ पेस्ट, दरी, तौलिया, बाल्टी, मग, थाली, गिलास, चादरें, साबुन भी वितरित किया गया है।   

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