Thursday, 10 December 2015

-तलाक, मेहर, वसीयत व शरई कानून पर हुई चर्चा


-अल्पसंख्यकों की रहनुमाई करेगा पर्सनल ला बोर्ड
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अमरोहा : आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की दीन व दस्तूर बचाओ कांफ्रेंस में मुसलमानों से कुरान व हदीस के मुताबिक ङ्क्षजदगी गुजारने के लिए कहा गया। मुसलमानों की तलाक, वसीयत व मेहर के साथ ही कानूनी अधिकारों के संबंध में आने वाली परेशानियों को भी शरई तौर पर खत्म करने का फैसला लिया गया। उलमा ने मुसलमानों के तालीम से जुड़ऩे पर जोर देते हुए कहा कि कुछ फिरकापरस्त ताकतें अपना मकसद पूरा करने के लिए मुल्क का माहौल बिगाडऩे की कोशिश कर रही हैं। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड व मुसलमान उन्हें कामयाब नहीं होने देंगे।
गुरुवार को ईदगाह मैदान में शुरु हुई आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की दीन व दस्तूर बचाओ कांफ्रेंस में देशभर से उलमा पहुंचे हैं। हालांकि बोर्ड के नायब सदर व सदारत कर रहे मौलाना कल्बे सादिक ने अपने ख्यालात का इजहार नहीं किया, लेकिन सचिव मौलाना वली रहमानी, बोर्ड के सदस्य अब्दुल्ला मुगीसी, मौलाना यासीन अली उस्मानी, आचार्य प्रमोद कृष्णम्, सरदार बलदीप ङ्क्षसह, बामन मेसन, जगद्गुरु मृत्युजंय, एसी माइकल, डॉ. जॉन दयाल ने मुल्क के मौजूदा हालात पर अपने ख्याल पेश किए। पांच घंटे चली कांफ्रेंस में मुसलमानों के हालात पर चर्चा की गई।
उलमा ने कहा कि मुसलमान अपने तलाक, मेहर, वसीयत जैसे मुद्दों को शरई कानून के मुताबिक ही निपटाएं। चूंकि यह मसले इतने पेचीदा हैं कि इनका हल सिर्फ शरई कानून में है। वह शरई कानून का पालन करते हुए देश के कानून का भी पालन करें। बोर्ड के पदाधिकारियों व सदस्यों ने स्पष्ट किया कि मुस्लिम बोर्ड देश के मुसलमानों को किसी भी हालत में कमजोर नहीं होने देगा। बशर्ते मुसलमान कुरान व हदीस के रास्ते पर चलें। 

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