Saturday, 17 October 2015

आजम हैं कि बोलते ही जाते...

---
-आजम हैं कि बोलते ही जाते...
-लगातार विवादित बयानों से किरकिरी, सपा ने पल्ला झाड़ा
-हलाल गोश्त के बयान से मुसलमानों में भी नाराजगी
---
पहले दो बयान-
हम भगवा भारत के पीडि़त हैं।
16 अक्टूबर, लखनऊ में
-'मोदी सियासत छोड़ दें और मंदिर में जाकर घंटा बजाएं।
-14 अक्टूबर, कानपुर में
दोनों बयान सपा सरकार में नंबर दो की हैसियत वाले मंत्री आजम खां के हैं। वह ऐसा ही तीखा बोलते हैं, फिर चाहे उससे विवाद हो, उनकी पार्टी के लिए असहज स्थिति हो या उनके बोलने के बाद चारों तरफ से शुरू होने वाला बयान युद्ध हो।
आजम खां नगर विकास मंत्री हैं। यह ऐसा विभाग है जिसका काम और विफलता सबसे पहले दिखती है लेकिन, तीन साल में यह विभाग अपने काम की बदौलत कम, अपने मंत्री के कारण अधिक जाना गया। यही आजम हैं जिन्होंने बीते लोकसभा चुनाव के दौरान गाजियाबाद में कहा था कि, 1999 के कारगिल युद्ध में मुस्लिम सैनिकों ने भारत को फतह दिलाई। आजम के मुताबिक जब कारगिल मोर्चा जीता गया तो वहां कोई हिंदू सैनिक नहीं था। दो दिन पहले यह कहकर उन्होंने मुसलमानों को भी नाराज कर दिया कि, निर्यात किया जा रहा गोश्त हलाल का नहीं झटके का है और हज, उमरा पर जाने वाले वहां गोश्त न खाएं।Ó
समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में एक आजम की पहचान सोशलिस्ट नेता की रही। वर्ष 2012 में समाजवादी सरकार बनने के बाद उनके  जुमलों ने पार्टी के लिए मुश्किलें खड़ी कीं। कारगिल की लड़ाई पर उनके बयान को चुनाव आयोग ने भी 'सद्भाव बिगाडऩेÓ वाला माना था। अपनी ही सरकार के डीजीपी को लिखे उनके खत, प्रधानमंत्री से लेकर अन्य नेताओं के लिए इस्तेमाल उनके जुमले और फैसलों विवादों में रहे। उनके अपर निजी सचिवों ने तो उनके साथ काम करने से ही इंकार कर दिया। दादरी के बिसाहड़ा कांड को यूएन ले जाने का एलान कर आजम ने अपनी ही सरकार को सकते में ला दिया। यही कारण था कि दूसरे ही दिन एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस बयान को यह कहते हुए खारिज किया कि घर के मसले घर में सुलझाये जाने चाहिए।
मुलायम परिवार में आजम पर एकराय नहीं है। गुरुवार को मेरठ में समाजवादी पार्टी के महासचिव शिवपाल यादव ने कह ही दिया कि आजम का यूएन वाला बयान उनकी निजी राय थी। इसके विपरीत इस दौरान मुलायम सिंह दो बार सार्वजनिक मंच पर आए मगर इस मुद्दे पर चुप्पी साधे रहे। सपा प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने भी कुछ कहने से साफ इंकार कर दिया। यह सवाल अब आम है कि क्या समाजवादी पार्टी को आजम के बयानों से सियासी नुकसान का खतरा सताने लगा है।
----
आजम को अतिरिक्त आजादी : माथुर
आजम खां के बयानों से विवाद की स्थिति बनने पर कांग्रेस विधानमंडल दलनेता प्रदीप माथुर का कहना है कि अखिलेश सरकार में आजम खां को अतिरिक्त आजादी मिली है इसीलिए वह कुछ भी बयान दे सकते है और देते भी रहे है। इसबाबत इससे अधिक कुछ कहना मुनासिब न होगा।
---
आजम के बोल
---
-'गूगल में पर टॉप 10 क्रिमिनल सर्च करने पर नरेंद्र मोदी का नाम आता है।Ó
 -'बच्चे पैदा करने के लिए मर्दानगी की जरूरत होती है, पुरस्कार बांटने से बच्चे पैदा नहीं होते।Ó
-'मुसलमान खौफजदा है, उन्हें कुर्बानी से रोका जा रहा है, उनकी धार्मिक भावनाएं आहत की जा रही हैं।Ó

अखिलेश ने सहारा दिया अमर सिंह को...


-मेदांता अवध अस्पताल के शिलान्यास पर साथ दिखे मुलायम, अमर और अखिलेश
----
लखनऊ : रिश्ता निभाने की अदा हो या दूर की सियासी कौड़ी, मगर यह साफ है कि समाजवादी परिवार में अमर सिंह की स्वीकार्यता बढ़ गयी है। जाहिर है, इससे उनकी 'घर वापसीÓ की संभावनाओं को और बल मिला है।
वर्ष 2009 में सपा से निकाले जाने के बाद पांच अक्टूबर, 2014 को हुए पार्टी के राष्ट्रीय अधिवेशन में अमर सिंह मंच पर दिखे थे। गुरुवार को वह फिर सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के साथ सार्वजनिक मंच पर दिखे। एक अंतर जरूर है। अक्टबूर, 2014 में अमर सिंह मंच पर गुमसुम से थे और अग्रिम पंक्ति के नेताओं ने उनसे मुलाकात में गुरेज किया था पर एक साल बाद का दृश्य ठीक उल्टा था। मुलायम के साथ उनका अंदाज-ए-गुफ्तगू भी जल्द 'घर वापसीÓ का संकेत दे रहा था। गुरुवार को मेदांता अवध अस्पताल के शिलान्यास मंच पर अमर सिंह चढ़े तो मुलायम सिंह ने उनका हाथ थामा हुआ था। उन्होंने अमर सिंह को अपने बगल की कुर्सी दी और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को दूसरी ओर बैठने का इशारा किया। कार्यक्रम के दौरान मुलायम, अमर और डा. नरेश त्रेहन में गुफ्तगू होती रही। अमर सिंह ने कागज पर कुछ लिखा और मुख्यमंत्री की ओर इशारा किया, तो उन्होंने लपककर कागज पकड़ा। पढ़ा और फिर हंस पड़े। कागज का वह टुकड़ा मुख्यमंत्री ने जेब में रख लिया। कार्यक्रम खत्म होने के बाद मुख्यमंत्री ने सीढिय़ां उतरने तक अमर सिंह को सहारा दिये रखा।
एक घंटे का कार्यक्रम अमर सिंह की सपा में वापसी की पटकथा तैयार हो जाने का संकेत दे रहा था। यह और बात है कि अमर सिंह इसे पारिवारिक रिश्ते की मिठास के रूप में रेखांकित करते हैं।
---------
रामगोपाल, आजम पक्ष में नहीं
सपा के राष्ट्रीय अधिवेशन के बाद से अब अमर सिंह और सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के बीच हुई मुलाकातों में से छह सार्वजनिक हो चुकी हैं। वह जब-तब अखिलेश से भी मिलते रहे हैं। मुलायम भी अमर को अपना करीबी बता चुके हैं। ऐसे में उनकी वापसी की राह खुल जाने की चर्चा होती है लेकिन सूत्रों का कहना है कि सपा महासचिव प्रो.राम गोपाल यादव और मोहम्मद आजम खां अमर की घर वापसी के पक्षधर नहीं हैं।
---------

हलाल गोश्त पर आजम ने छेड़ा नया विवाद


-निर्यात किए जाने वाले गोश्त पर दिया बयान
लखनऊ : 'व्यंग्य बाणोंÓ से विवादित रहने वाले मंत्री आजम खां ने निर्यात किए जाने वाला हलाल का गोश्त न होने की बात कह कर नया विवाद शुरू कर दिया है। इस विवादित मसले को लेकर मुस्लिमों के एक वर्ग में आक्रोश है।
मंत्री आजम खां जब-तब ऐसे जुमले उछालते रहे हैं, जो सरकार को मुश्किल में फंसता रहते है। कभी करगिल की लड़ाई को लेकर, कभी डीजीपी को खत लिखकर मुसलमानों के खौफ में जीने की बात, कभी बकरीद पर कुर्बानी से रोके जाने का बयान समाजवादी सरकार के लिए मुश्किलें पैदा करता रहा है। दादरी के बिसाहड़ा में इकलाख की हत्या का मसला यूएन ले जाने के उनके बयान ने भी सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी थीं, अब आजम खां ने निर्यात होने वाला गोश्त हलाल नहीं होने का बयान देकर नई बहस खड़ी कर रही है।
बुधवार को उन्होंने कानपुर में कहा कि स्लाटर हाउस में जिस तरह झटका दे कर जानवरों का गोश्त निकाला जाता है, वह इस्लामी तौर-तरीके के खिलाफ है। यह पूरी तरह हराम है। यही गोश्त बाहर निर्यात होता है।
स्लाटर हाउस में जानवरों के कत्ल का वीडियो दिखाते हुए नगर विकास मंत्री आजम ने कहा था कि यह दृश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नजर नहीं आ रहा है। यह तस्वीर तो प्रोजेक्टर लगाकर लोगों को दिखानी चाहिए ताकि वह भी जान सकें कि स्लाटर हाउस में किस तरह से जानवरों का कत्ल हो रहा है? आजम ने मुसलमानों को गोश्त खाना छोडऩे की सलाह भी दी, उनके बयान का सबब कुछ भी रहा हो लेकिन इससे नई बहस जरूर शुरू हो गई है।
दरअसल भारत गोश्त का सबसे बड़ा निर्यातक है। कई सौ टन मांस प्रतिदिन निर्यात किया जाता है। ऐसे में आजम खां के इस बयान से नई बहस शुरू हो गई है। कई स्लाटर हाउस के संचालकों का कहना है कि इस तरह के बयान व्यापार बंद कराने की साजिश है।
--
आजम के बयान को बताया सियासी
कानपुर : मांस व्यवसायी सुलेमान ने आजम के इस बयान को पूरी तरह सियासी मसला बताया। उन्होंने कहा कि देश के कई स्लाटर हाउस में जानवरों से गोश्त निकालने की प्रक्रिया पूरी तरह इस्लामी है। आजम इसे सियासी चोला पहनाकर राजनीति गरमाना चाहते हैं। उद्यमियों को चाहिए कि ऐसे बयानों पर ध्यान न दें और अपना काम करें।
--
वकीलों ने जताई नाराजगी
कानपुर : वकीलों ने गुरुवार को नगर विकास मंत्री आजम खां को कचहरी स्थित शताब्दी गेट पर प्रतीकात्मक अदालत लगाकर दोषी करार देते हुए सजा सुना दी। वकीलों ने बुधवार को आजम खां द्वारा दिए गए बयान पर यह नाराजगी जताई है। वकीलों ने आजम पर देश में हिंदु-मुस्लिम के बीच वैमनस्यता फैलाने और भारत के विरुद्ध संयुक्त राष्ट्र संघ (यूएनओ) जाकर देश का बंटवारा करने का आरोप लगाया।

Thursday, 15 October 2015

गाढ़ी हो रही मुलायम-मोदी की दोस्ती !

12 oct 2015



---------------------
 लखनऊ : समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच 'दोस्तीÓ गहरा रही है? एक-दूसरे की तारीफ फिर राजनीतिक वार में नरमी, अब अच्छे कामों की सराहना में हिचक नहीं होने के मुलायम सिंह यादव के एलान से सियासी हलकों में कुछ ऐसे ही निहतार्थ निकाले जा रहे हैं।
संसद के मानसून सत्र की कार्यवाही में अवरोध पर सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए सत्र चलाने की पक्षधरता जाहिर की थी, जिसके चंद दिनों बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नेसहारनपुर में मुलायम को 'लोकतंत्र रक्षकÓ की उपमा से नवाज दिया। लोकसभा चुनाव में मुलायम पर वार के लिए इस्तेमाल '56 इंच की छातीÓ के जुमलों से इतर प्रधानमंत्री की इस सराहना को सपाइयों ने 'व्यवहारÓ निभाने की परम्परा के रूप में रेखांकित किया, मगर वक्त के साथ दोनों नेताओं के बीच चलने वाले सियासी तीरों का कसैलापन भी घटने लगा।
तीन सितंबर को बिहार में महागठंधन की अगुआ समाजवादी पार्टी ने अचानक गठबंधन से नाता तोड़ अपने बूते चुनावी जंग की घोषणा कर दी, इसकी जाहिरा वजह सीटों के बंटवारे में तवज्जो नहीं मिलना बतायी गई, मगर सियासी इकरार व इंकार की भाषा समझने का दावा करने वालों ने फैसले के पीछे मुलायम व मोदी में नजदीकी के रूप में देखा। यादव सिंह प्रकरण में सीबीआइ जांच को भी एक कारण बताया गया।
22 सितंबर को पूर्व सांसद मोहन सिंह की पुण्यतिथि पर मुलायम सिंह ने फिर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नरम रूख दिखाया और सवाल उठाया कि अच्छे कार्यो की तारीफ में बुराई क्या है?
और अब 12 अक्टूबर को लोहिया के विचारों व उनकी नीतियों का उल्लेख कर मुलायम सिंह ने कहा कि 'राष्ट्रहित, भाषा और सीमाÓ के मुद्दे पर वह भाजपा के साथ हैं। सीमा की सुरक्षा को लेकर वह पहले भी केन्द्र की सरकारों का समर्थन करते रहे हैं मगर डा.लोहिया के 'राजनीतिक छुआछूतÓ खत्म करने के विचारों की याद दिलाते हुए जिस अंदाज में कहा कि प्रधानमंत्री के अच्छे कामों की तारीफ करने में उन्हें हिचक नहीं है, उससे दोनों के बीच रिश्ते गाढ़े होने की सियासी चर्चाओं को बल मिला है। एक राजनीतिक विश्लेषक का कहना है कि मुलायम सिंह ने पार्टी के फोरमों पर भाजपा के नेता व प्रधानमंत्री की ऐसी तारीफ नहीं की। अटलजी को कुछ बातों के लिए सराहा लेकिन वह भी इस अंदाज में नहीं। उनका मानना है कि इस सराहना के पीछे कोई सियासी मजबूरी हो सकती है, इससे इनकार नहीं किया जा सकता।

Saturday, 10 October 2015

मैनपुरी बतायेगी सपा की सियासी ताकत

मैनपुरी बतायेगी सपा की सियासी ताकत

-----------------
- रैली में जुटी भीड़ होगी सपा के प्रभाव का सूचकांक

जागरण ब्यूरो, लखनऊ : तीसरे मोर्चे के ऐलान और मुजफ्फरनगर में स्थायी तनाव के बीच सपा सु्प्रीमो मुलायम सिंह अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने के लिए अपने गढ़ से हुंकार भरेंगे। गुरुवार को मैनपुरी में सपा की देश बचाओ देश बनाओ रैली बदले हुए समीकरणों की रोशनी में महत्वपूर्ण हो चली है। आजमगढ़ की जुटान से सपा को उत्साह तो मिला था लेकिन सियासी वर्चस्व की झलक मैनपुरी से ही मिलेगी जो न केवल सपा सुप्रीमो की संसदीय सीट है बल्कि उस आलू पट्टी के केंद्र में है जहां सपा का डंका बजता है। मुलायम भले ही न चाहें लेकिन मैनपुरी की इस रैली की तुलना  प्रदेश में हुई और होने वाली रैलियों से होगी क्यों कि यहां जुटी भीड़ फिरोजाबाद, एटा, फर्रुखाबाद, इटावा, कन्नौज, आगरा संसदीय क्षेत्र में सपा के प्रभाव का सूचकांक होगी।
समाजवादी पार्टी ने आजमगढ़ से चुनावी रैलियों का आगाज किया था जहां भीड़ भी जुटी थी लेकिन आजमगढ़ की रैली के बाद से सियासी समीकरण बदले हैं। उस रैली के अगले दिन दिल्ली में 17 राजनीतिक दलों के नेता एक मंच पर जुटे, जिसे तीसरे मोर्चे की पहल कदमी माना गया। इससे मुलायम के अभियान को ताकत मिली है। आजमगढ़ में मुलायम प्रधानमंत्री के प्रति नरम नजर आए थे लेकिन बदले हालात और प्रदेश सरकार पर राहुल के तीखे हमलों के मद्देनजर मैनपुरी में कांग्रेस को लेकर मुलायम का रुख उत्सुकता बढ़ा रहा है। क्यों कि अब मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी राहुल पर पलटवार शुरू कर दिये हैं।
मुजफ्फरनगर दंगों के बाद सपा ने अल्पसंख्यक व पिछड़ों पर अपना फोकस बढ़ाया है लेकिन चुनौती बहुजातीय संतुलन साधने की है क्यों कि मैनपुरी व जुड़े हुए संसदीय इलाकों में सपा का जनाधार सिर्फ अल्पसंख्यक व पिछड़ों तक सीमित नहीं है। मैनपुरी की रैली में मुलायम का जातीय संदेश काबिले गौर होगा। आजमगढ़ के बाद मुलायम की आजम से निकटता बढी है। मैनपुरी की रैली में बतायेगी सपा की भीतरी सियासत में आजम सचमुच सपा प्रमुख के करीब हुए हैं या फिर आजमगढ़ अपवाद था।
सपा ने चतुराई के साथ इस रैली को विकास योजनाओं से जोड़ा है इसलिए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव कई परियोजनाओं का ऐलान करेंगे ताकि विकास व सियासत को एक साथ साधा जा सके। मैनपुरी से लगी फिरोजाबाद, एटा,फर्रुखाबाद, इटावा, कन्नौज, आगरा संसदीय क्षेत्र में अब तक सपा का ही वर्चस्व रहा है। भाजपा नेता कल्याण सिंह एटा से निर्वाचित हुए थे, मगर सपा ने उनके खिलाफ प्रत्याशी नहीं दिया था। अलबत्ता फिरोजाबाद उपचुनाव में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव कांग्र्रेस के राजबब्बर से चुनाव हार गयी थीं।
समाजवादी पार्टी की गुरुवार को यहां होने वाली देश बचाओ-देश बनाओ महारैली के लिए मंच सजकर तैयार है। पूरा शहर समाजवादी
पार्टी के रंग में रंगा हुआ है। महारैली के लिए सपा के तमाम मंत्री,
सांसद, विधायक और पार्टी पदाधिकारी बरेली पहुंच चुके हैं। मुजफ्फरनगर में
हुए जातीय संघर्ष के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी का यह
पहला बड़ा कार्यक्रम है, लिहाजा पार्टी नेतृत्व ने महारैली को सफल बनाने
के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। महारैली में कहीं कोई कमी न रह जाए, इसके
लिए हर व्यवस्था को कई-कई बार परखा जा रहा है। महारैली के लिए सभी
तैयारियां पूरी हो चुकी हैं।
महारैली में लोगों की भारी भीड़ के आगमन को देखते हुए प्रशासन ने
गुरुवार को सभी स्कूल और कॉलेज बंद रखने का निर्देश दिया है। महारैली के
चलते शहर में जाम की स्थिति न पैदा हो, इसलिए बरेली में भारी वाहनों का
प्रवेश बुधवार की देर रात से प्रतिबंधित कर दिया गया है। दिल्ली-लखनऊ
राजमार्ग पर चलने वाले वाहनों को डायवर्ट करके दूसरे रास्तों से उनके
गंतव्य की ओर भेजा जाएगा। इमरजेंसी वाहनों के आने-जाने पर कोई रोक नहीं
रहेगी। महारैली में आने वाले वाहनों की पार्किंग के लिए शहर के बाहर कई
जगहों पर पार्किंग बनाई गई है। महारैली में आने वाले लोगों को कोई समस्या
होने पर उसके निदान के लिए प्रशासन ने दो हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए
हैं।
 समाजवादी पार्टी के
संयोजक सांसद धर्मेंद्र यादव ने बताया कि सभी तैयारियां पूरी हो चुकी
हैं। इस्लामिया कॉलेज के ग्राउंड में सुबह 10 बजे से होने वाली महारैली
कई मायनों में ऐतिहासिक होगी। उन्होंने बताया कि महारैली को लेकर लोगों
में जबरदस्त उत्साह है। महारैली में लोगों की रिकॉर्ड तोड़ भीड़ जुटेगी।
उन्होंने बताया कि महारैली को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष
मुलायम सिंह यादव, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, राष्ट्रीय महासचिव प्रोफेसर
राम गोपाल यादव, राज्य सरकार के वरिष्ठ मंत्री मोहम्मद आजम खान और शिवपाल
यादव समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता संबोधित करेंगे।
धर्मेंद्र यादव ने बताया कि रैली स्थल पर पार्टी नेताओं के लिए बने मुख्य
मंच के साथ ही एक और मंच बनाया गया है। इस मंच से स्थानीय नेता रैली को
संबोधित करेंगे। इसके साथ ही इस मंच से सासंकृतिक कार्यक्रम पेश किए
जाएंगे। समाजवादी पार्टी ने पूरे बरेली शहर को सपा के पोस्टर्स, बैनर्स
और झंडियों से पाट दिया है। शहर के सभी प्रमुख चौराहों को सपा की
रंग-बिरंगी झंडियों और रंगीन लाइटों से सजाया गया है।
बरेली शहर की तरफ आने वाले सभी रास्तों पर सपा नेताओं के मुस्कराते हुए
बड़े-बड़े कटआउट लगाए गए हैं। महारैली में आने वाले लोगों का इस्तक्बाल
करने के लिए सैकड़ों स्वागतद्वार बनाए गए हैं। देश बचाओ-देश बनाओ महारैली
को सफल बनाने के लिए समाजवादी पार्टी के नेता और कार्यकर्ता कोई कोर-कसर
बाकी नहीं रखना चाहते हैं। रैली स्थल इस्लामिया कॉलेज ग्राउंड और उसके
बाहर लोगों की सहूलियत के लिए कई बड़ी-बड़ी स्क्रीन लगाई जा रही हैं।
सांसद धर्मेंद्र यादव ने बताया कि महारैली सुबह 10 बजे शुरू होगी।
महारैली को देश-विदेश के करोड़ों लोग इंटरनेट पर लाइव देख सकेंगे।

संतुलन साधने की समाजवादी कोशिश

 जागरण ब्यूरो, लखनऊ: बदल रहे राजनीतिक समीकरणों में संतुलन साधने की समाजवादी पार्टी की कोशिशों का परिणाम शुक्रवार को मंत्रि परिषद विस्तार के रूप में दिखेगा। निर्दल विधायक रघुराज प्रताप ंिसंह उर्फ राजा भैया की मंत्रिपरिषद में वापसी होगी ही, उनके साथ एक राज्यमंत्री को प्रोन्नत और एक नए चेहरे के सरकार में शामिल होने के भी आसार हैं।
मुजफ्फरनगर के दंगे, भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी की रैलियों के ऐलान के बाद से यूपी के सियासी समीकरणों में खासा बदलाव है। इसको लेकर समाजवादी पार्टी के रणनीतिकार खासे दबाव में थे। मंत्रियों के समूह से लेकर, राज्य संसदीय बोर्ड तक के मंथन में सियासी परिदृश्य को माफिक करने के लिए विधानसभा चुनाव के समय के समीकरणों को फिर साधने पर जोर दिया जा रहा था। इसका नतीजा  मंत्रिपरिषद के विस्तार के रूप में शुक्रवार को नजर आएगा।
इस दिन डेढ़ साल पुरानी अखिलेश यादव सरकार का चौथा मंत्रि परिषद विस्तार होगा। जिसमें रघुराज प्रताप ंिसह उर्फ राजा भैया की मंत्रिपरिषद में वापसी तय है। वह ऐसे दूसरे मंत्री होंगे, जिन्हें इसी सरकार में दूसरी बार  शामिल किया जाएगा। उनके मंत्रि परिषद में शामिल होने की बुनियाद  आजम खां और रघुराज के बीच मुलाकात में ही रखी गयी थी। सपा प्रमुख मुलायम ंिसह यादव की पहल पर दोनों नेताओं ने न सिर्फ गिले शिकवे दूर किये थे, बल्कि मुजफ्फरनगर के दंगों से बदले सियासी हालात पर एक दूसरे की मदद का भाव भी जगाया था। इस मुलाकात के बाद ही 'दैनिक जागरणÓ ने राजा भैया के मंत्रिपरिषद में शामिल होने की राह खुलने की खबर प्रकाशित की थी।
सूत्रों का कहना है कि रघुराज प्रताप ंिसह के अलावा खादी ग्र्रामोद्योग राज्यमंत्री रियाज अहमद, श्रम राज्यमंत्री मंजूर अहमद में से किसी एक को प्रोन्नत कर कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया जा सकता है। रियाज अहमद के पक्ष में बात ये जाती है कि उन्हें संगठन ने मण्डलीय अल्पसंख्यक सम्मेलन की जिम्मेदारी सौपी है। ऐसे ही श्रम राज्यमंत्री शाहिद मंजूर को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सभी वर्गो के बीच स्वीकार्य और आक्रामक शैली वाला नेता माना जाता है। मुजफ्फरनगर के दंगों के बाद लोगों में सदभाव कायम  करने में उन्होंने महती भूमिका निभायी है, इसी बिना पर उनकी प्रोन्नति का दावा सामने है।
सूत्रों का कहना है कि लम्बे समय से गंभीर रूप से बीमार श्रम मंत्री वकार अहमद के बेटे यासिर शाह को राज्यमंत्री का दर्जा मिल सकता है। उसके पीछे बहराइच और आसपास के क्षेत्र में समाजवादी पार्टी की ताकत को पुख्ता करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि महिला और शिया बिरादरी की इकलौती विधायकशादाब फातिमा का नाम भी मंत्री बनने वाले दावेदारों में है।
दरअसल, नियमों के मुताबिक सरकार में मुख्यमंत्री समेत 60 मंत्री ही बनाये जा सकते हैं। मौजूदा समय में मुख्यमंत्री समेत 58 मंत्री हैं। सिर्फ दो पद खाली है। इनमें से एक राजा भैया को मिलना तय है। दूसरे के लिए कई लोगों की दावेदारी है। यासिर और शादाब फातिमा की दावेदारी औरों से थोड़ा ऊपर मानी जा रही है।
विशेष विमान से आएंगे राज्यपाल: आनन-फानन में मंत्रि परिषद विस्तार की रणनीति तैयार करने के बाद प्रदेश सरकार ने अवकाश पर राजस्थान गए राज्यपाल बीएल जोशी को वापस बुलाने के लिए हवाई जहाज भेजा है। सुबह साढे दस बजे मंत्रिपरिषद का विस्तार होना है।

जांच दल के अगुवा को हटाया

पुलिस अधीक्षक के स्थान पर अब अपर पुलिस अधीक्षक होंगी जांच दल की मुखिया

जागरण ब्यूरो, लखनऊ: दंगों की तफ्तीश के लिए गठित एसआइसी (विशेष जांच प्रकोष्ठ) में अधिकारियों की तैनाती के कुछ घण्टों के अन्दर ही जांच दल के अगुवा (टीम लीडर) रहे पुलिस अधीक्षक के.एन.मिश्र को हटा दिया गया, उनका दायित्व अब मुजफ्फरनगर की एएसपी (अपराध) कल्पना सक्सेना को सौंपा गया है।
यह जानकारी एडीजी /आइजी राजकुमार विश्वकर्मा ने दी, आखिर आखिर चंद घण्टों के अन्दर ही एसआइसी का मुखिया क्यों बदला गया? इस सवाल का उन्होंने जवाब देने से इनकार कर दिया। एडीजी ने बताया कि पुलिस महानिरीक्षक (अपराध) लखनऊ में रहते हुए ही विवेचनाओं की निगरानी करेंगे। राहत शिविरों में रहे व्यक्तियों की ओर से एफआइआर के लिए दी जा रही तहरीरों पर बिना अपराध संख्या के मुकदमा दर्ज किया जा रहा है, इसे बाद में संबंधित थानों में भेज दिया जाएगा। एफआइआर कराने वालों की पुलिस पूरी मदद भी कर रही है। उन्होंने बताया कि फिलहाल केएन मिश्र के स्थान पर कल्पना सक्सेना को जांच दल की अगुवाई की जिम्मेदारी सौंपी गयी, बाकी जांच दल उनके साथ काम करेगी। शासन ने मुजफ्फरनगर के दंगों की जांच एसआइसी कराने का ऐलान किया था। 24 सितम्बर को एसआइसी में अधिकारियों की तैनाती की ऐलान किया गया, जिसमें पुलिस अधीक्षककेएन मिश्र की अगुवाई में 20 इंस्पेक्टर, तीन डिप्टी एसपी और दो अपर पुलिस अधीक्षकों को संबद्ध करने की जानकारी दी गयी थी। चौबीस घण्टों के अन्दर ही पुलिस अधिकारियों ने जांच दल का मुखिया ही बदल दिया। एसपी के स्थान पर अपर पुलिस अधीक्षक को जांच दल का मुखिया बना दिया, जबकि दो अपर पुलिस अधीक्षक पहले ही इस दल में शामिल हैं। एडीजी राज कुमार विश्वकर्मा ने बताया कि विशेष जांच प्रकोष्ठ मुजफ्फरनगर के 106 एफआईआर के अलावा मेरठ, शामली और बागपत में दंगों को लेकर दर्ज हुई एफआइआर की विवेचना करेगी। उन्होंने बताया कि एफआइआर की संख्या बढऩे के भी आसार हैं।  एडीजी ने बताया कि अभी सभी पहलुओं का आकलन हो रहा है, उन्होंने जांच दल से एसपी स्तर के किसी अन्य अधिकारी को संबंद्ध किये जाने की उम्मीद से इनकार नहीं किया।