लखनऊ। देश बदल रहा है। उद्योगपतियों का अंदाज बदल रहा है। भारतीय उद्योगपति विदेशों में हजारों करोड़ का निवेश कर रहे हैं। आस्ट्रेलिया, कनाडा, यूके सिंगापुर उनकी पसंद बन रहे हैं। यह ट्रेंड कुछ भारतीयों को गर्व से भर सकता है। मगर स्याह पहलू यह है कि निवेश के रूप में जितनी पूंजी भारत से बाहर जा रही है, उस तुलना में निवेश आ नहीं रहा है। इससे आर्थिक नीतियों पर ढेरों सवाल उठ रहे हैं। अलबत्ता, केन्द्रीय, सूबाई हुकूमतें विदेशी निवेशकों को रिझाने में करोड़ों रुपये फूंक रही हैं। आंकड़े गवाह हैं कि भारतीय उद्योगपतियों के विदेशी निवेश के प्रस्तावों में 77 से 78 फीसद का इजाफा हुआ है। यही नहीं, देश के ढेरों उद्योगपतियों ने 'अपनी फेमिली' दूसरे देशों में शिफ्ट करनी शुरू कर दी है। अगर थोड़ा कठोर शब्दों में कहें तो पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में यह सिलसिला दो दशक पहले शुरू हुआ था, क्या हम उसी राह पर हैं ?
वैसे भी यह राष्ट्रवाद का नहीं, मुनाफा कमाने का मामला है। इसलिए देश के उद्योगपतियों ने विदेशी धरती की ओर रुख कर लिया है। गत अप्रैल से फरवरी तक के रिजर्व बैंक के आंकड़ें कहते हैं कि विभिन्न देशों में निवेश के लिए भारतीय उद्योगपतियों के प्रस्तावों में तकरीबन 78 फीसद बढ़ोत्तरी हुई है। यह निवेश भारतीय कंपनियों और तकनीकी रूप से रजिस्टर्ड पार्टनरशिप फर्मो के जरिये किया गया है। सूत्रों का कहना है कि इस अवधि में देसी कारोबारियों ने 2830 प्रस्ताव सौंपे। जिनके जरिए 1635.20 करोड़ डॉलर का निवेश किया। सूत्रों का कहना है कि गुजरे कुछ सालों के दौरान कारोबार में भी मोनोपॉली का दौर चल पड़ा है। ऐसे में मझोले उद्योगपतियों ने विदेशी निवेश बढ़ाने का फैसला किया है। कारोबार जगत के सूत्रों पर भरोसा करें तो दिल्ली, मुंबई, गुजरात, कर्नाटक के दो सौ से अधिक मझोले कारोबारियों ने यूके, आस्ट्रेलिया, कनाडा में कारोबारी ठौर बनाना शुरू कर दिया है। कुछ ने फेमिली भी शिफ्ट करनी शुरू कर दी है। सूत्रों का कहना है कि इस पीछे नौकरशाही की अडंगेबाजी बड़ी वजह है। बिजली, पानी कनेक्शन से लेकर पर्यावरण क्लीयरिंग तक में खड़ी की जाने वाली दुश्वारियां मझोले कारोबारियों को विदेशी धरती पर निवेश को प्रेरित कर रही हैं। कथित रूप से बीमारू कहे जाने वाला उत्तर प्रदेश की नजर से देखें तो यहां के भी कई बड़े कारोबारी घरानों ने कनाडा, आस्ट्रेलिया में पैर जमा लिया है। दक्षिण अफ्रीका में भी यहां कारोबारी माइन्स के क्षेत्र में निवेश कर रहे हैं। जबकि सूबे की सरकार निवेश लाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च करके समिट आयोजित कर रही है। कारोबार समेट रहे एक व्यापारी का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के तमाम प्रयासों के बाद भी सिंगल बिन्डो सिस्टम धरातल पर नहीं उतरा। 150 वॉट का बिजली कनेक्शन लेने के लिए तीन माह से इंजीनियर इधर से उधर दौड़ा रहे हैं। घूस की मांग हो रही है। वह कहते हैं कि हम छोटे व्यापारी हैं, इसलिए दूसरे राज्य में निवेश करने पर विचार कर रहे हैं, जिनके पास बड़ी पूंजी कै वे विदेश का रुख करते हैं। सिंगापुर, आस्ट्रेलिया ऐसी जगह हैं जहां पेपर तैयार होते ही क्लियिरिंग मिलती है।
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