Friday, 13 May 2016

सपा में केरल से बिहार तक की दावेदारी



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-जॉय एंटोनी, देवेन्द्र, सुखराम यादव, रामजी लाल सुमन दावेदारों में शुमार
-माता प्रसाद पाण्डेय, बलराम यादव के समर्थक भी पैरवी में जुटे
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लखनऊ : राज्यसभा चुनाव की डुगडुगी बजने के साथ समाजवादी पार्टी से प्रत्याशी बनने के लिए दिग्गजों ने जोड़तोड़ तेज कर दी है। केरल व बिहार के समाजवादियों से लेकर प्रदेश के दिग्गज राज्यसभा जाने का ख्वाहिशमंद हैं। चार जुलाई को रिक्त होने वाली राज्यसभा की 11 सीटों में से सर्वाधिक सात समाजवादी पार्टी के खाते में जाने की संभावना है, लिहाजा सबसे ज्यादा जोर आजमाइश इसी दल में हैं। गुरुवार देर शाम लखनऊ पहुंचे सपा मुखिया मुलायम सिंह शुक्रवार को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, मंत्री व सपा के प्रदेश प्रभारी शिवपाल यादव के साथ प्रत्याशियों के बारे में चर्चा कर सकते हैं।
राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा हासिल करने को बेचैन समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश के बाहर के पुराने कार्यकर्ताओं को राज्यसभा में भेजकर दायरा व्यापक करने की रणनीति पर काम कर रही है। केरल के रहने वाले व राष्ट्रीय महासचिव जॉय एंटोनी को पार्टी राज्यसभा भेजने पर गंभीरता से विचार कर रही है। पूर्व मंत्री देवेन्द्र प्रसाद को भी राज्यसभा भेजकर समाजवादी पार्टी बिहार में न सिर्फ जनाधार बढ़ाने का प्रयास कर सकती है बल्कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को सियासी जवाब देने का दांव चल सकती है। इसके  अलावा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में समाजवादी झंडा उठाने और अनुसूचित जाति की नुमाइंदगी करने वाले पूर्व सांसद रामजी लाल सुमन या शैलेंद्र कुमार को राज्यसभा का टिकट मिलने की संभावना जतायी जा रही है। सपा मुखिया के संघर्ष के दिनों में साथ रहे सुखराम यादव को भी राज्यसभा का टिकट मिल सकता है। मध्य प्रदेश के सपा प्रदेश अध्यक्ष गौरी शंकर यादव की दावेदारी की भी चर्चा है।
मुस्लिम चेहरे के रूप में समाजवादी पार्टी शफीकुर्रहमान बर्क को टिकट देने पर विचार कर सकती है। वरिष्ठ मंत्री मोहम्मद आजम खां के करीबियों में शुमार बर्क के नाम पर हालांकि सपा के मुस्लिमों का दूसरा खेमा सहमत नहीं है। विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पाण्डेय व माध्यमिक शिक्षा मंत्री बलराम यादव के समर्थक भी दोनों को राज्यसभा भेजने की लामबंदी कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक पूर्व राज्यसभा सदस्य अमर सिंह का नाम सूची में अब तक सबसे ऊपर है लेकिन पार्टी के दो महासचिव उनकी दावेदारी का विरोध कर रहे हैं। ऐसे में मुलायम के वीटो से उन्हें राज्यसभा भेजे जाने की उम्मीद है। भगवती सिंह, रेवती रमण सिंह, संजय सेठ का नाम दावेदारों में लिया जा रहा है।
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बसपा का दलित-ब्राह्मïण कार्ड
राब्यू, लखनऊ : राज्यसभा में बसपा की ताकत कम होगी। बसपा के छह सदस्यों की सदस्यता समाप्त होगी और केवल दो सदस्य ही जा सकेंगे। इसमें एक सतीश मिश्रा का राज्यसभा में पुन: जाना सुनिश्चित हो चुका है। इसकी घोषणा स्वयं मायावती ने डा. अंबेडकर जयंती समारोह में की थी। राज्यसभा जाने वाला दूसरा बसपाई दलित समाज से होगा। जाहिर है दलित-ब्राह्मण कार्ड के जरिए बसपा आगामी विधानसभा चुनाव का समीकरण साधने की कोशिश करेगी।
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कैप्टन शर्मा की वापसी पर सवाल
कांग्रेस के कैप्टन सतीश शर्मा की राज्यसभा में वापसी होने पर सवाल उठ रहे हैं। भरोसेमंद सूत्रों का कहना है कि गांधी परिवार के निकटस्थ होने के बावजूद कैप्टन शर्मा की सदस्यता बची रहना आसान नहीं क्योंकि प्रदेश में नयी रणनीति बनाने में जुटा कांग्रेस नेतृत्व चौंकाने वाला फैसला ले सकता है।

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एमएलसी बनने को सपा में लाबिंग तेज
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-समाजवादी पार्टी के आठ सदस्य बन सकते हैं एमएलसी
-ब्राह्मïण, क्षत्रिय, मुसलमान, अति पिछड़ा और यादव पर लग सकता है दांव
-छह जुलाई को एमएलसी की 13 सीटें रिक्त होंगी, 10 जून को होगा मतदान
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 लखनऊ : विधानसभा सदस्य (एमएलए) के वोट से विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) के निर्वाचन की तारीख घोषित होते ही समाजवादी पार्टी (सपा) में दावेदारों ने लाबिंग तेज कर दी है। छह जुलाई को रिक्त होने वाली 13 सीटों के लिए 10 जून को मतदान होना है। एमएलए की संख्या के आधार पर न्यूनतम आठ सीटें सपा के खाते में जा सकती हैं।
विधानसभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी कील-कांटा दुरुस्त करने में जुटी है। ऐसे समय में एमएलए के वोटों के कोटे की एमएलसी सीटों केचुनाव की तारीख घोषित होते ही उम्मीदवारों ने 'गॉड फादरÓ के दरवाजे खटखटाने शुरू कर दिये हैं, रणनीतिकार अभी चुप हैं मगर मिशन-2017 के समीकरणों का आकलन शुरू हो गया है। सूत्रों का कहना है कि पार्टी प्रत्याशी चयन में मुसलमान, यादव, अति पिछड़ा और ब्राह्मïण के बीच संतुलन साधने पर मंथन चल रहा है। जिन 13 सदस्यों का कार्यकाल पूरा हो रहा है, उनमें समाजवादी पार्टी के भी चार सदस्य हैं। इनमें मुसलमान, ठाकुर, यादव और अति पिछड़ा के एक-एक सदस्य हैं। पार्टी कोटे की रिक्त सीटों का संतुलन वैसा ही है, जिस पर चलने की समाजवादी पार्टी रणनीति बना रही है।  अति पिछड़ा कोटे से राम सुंदर निषाद और क्षत्रिय कोटे से यशवंत सिंह को दोबारा परिषद का चुनाव लड़ाया जा सकता है। हालांकि अंतिम फैसला अभी होना बाकी है लेकिन पार्टी में लांबिग तेज हो गयी है।
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समाजवादी पार्टी से दावेदार
समाजवादी पार्टी से विधान परिषद की सदस्यता के लिये दावेदारों में रंजना वाजपेयी, हीरा ठाकुर, नईमुल हसन, संजय लाठर , वीरेन्द्र सिंह, जूही सिंह, चन्द्रभूषण उर्फ गुड्डू राजा, कमलेश पाठक, सरफराज खां, डॉ.राम आसरे कुशवाहा, सुरेन्द्र अग्रवाल, शतरूद्ध प्रकाश, रणविजय सिंह, जयशंकर पाण्डेय और संजय सेठ का नाम चर्चा में है, जिस पर अंतिम फैसला समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली संसदीय समिति करेगी। छह जुलाई को रिटायर होने वाले यशवंत सिंह व रामसुंदर दास निषाद का दूसरी बार दावा मजबूत माना जा रहा है।
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चुनाव कार्यक्रम
विधान परिषद की रिक्त सीटों की संख्या-13
अधिसूचना की तारीख : 24 मई
नामांकन की अंतिम तारीख : 31 मई
नामांकन पत्रों की जांच: एक जून
नाम वापसी की अंतिम तारीख : तीन जून
मतदान:  10 जून, सुबह नौ से शाम चार बजे तक
मतगणना : 10 जून, शाम पांच बजे से
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छह जुलाई को रिटायर होने वाले सदस्य
अतहर खां, ऋषिपाल, रामकुमार कुरील, लाल चन्द्र निषाद, वीरेन्द्र कुमार चौहान, सतीश चन्द्र और सुबोध कुमार (सभी बहुजन समाज पार्टी), नसीब पठान (कांग्रेस), हृदय नारायण दीक्षित (भाजपा), बलराम यादव, बुक्कल नवाब, राम सुंदर निषाद और यशवंत सिंह (समाजवादी पार्टी) का विधान परिषद में कार्यकाल छह जुलाई 2016 तक है, इस दिन ये सदस्य रिटायर हो जाएंगे।
---------ब्यूरो: अपडेट: एमएलसी बनने को सपा में लाबिंग तेज
नोट : दावेदारों के नाम बढ़ाये गये हैं और कुछ तथ्यों बदले गये हैं।
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-समाजवादी पार्टी के आठ सदस्य बन सकते हैं एमएलसी
-ब्राह्मïण, क्षत्रिय, मुसलमान, अति पिछड़ा और यादव पर लग सकता है दांव
-छह जुलाई को एमएलसी की 13 सीटें रिक्त होंगी, 10 जून को होगा मतदान
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राज्य ब्यूरो, लखनऊ : विधानसभा सदस्य (एमएलए) के वोट से विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) के निर्वाचन की तारीख घोषित होते ही समाजवादी पार्टी (सपा) में दावेदारों ने लाबिंग तेज कर दी है। छह जुलाई को रिक्त होने वाली 13 सीटों के लिए 10 जून को मतदान होना है। एमएलए की संख्या के आधार पर न्यूनतम आठ सीटें सपा के खाते में जा सकती हैं।
विधानसभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी कील-कांटा दुरुस्त करने में जुटी है। ऐसे समय में एमएलए के वोटों के कोटे की एमएलसी सीटों केचुनाव की तारीख घोषित होते ही उम्मीदवारों ने 'गॉड फादरÓ के दरवाजे खटखटाने शुरू कर दिये हैं, रणनीतिकार अभी चुप हैं मगर मिशन-2017 के समीकरणों का आकलन शुरू हो गया है। सूत्रों का कहना है कि पार्टी प्रत्याशी चयन में मुसलमान, यादव, अति पिछड़ा और ब्राह्मïण के बीच संतुलन साधने पर मंथन चल रहा है। जिन 13 सदस्यों का कार्यकाल पूरा हो रहा है, उनमें समाजवादी पार्टी के भी चार सदस्य हैं। इनमें मुसलमान, ठाकुर, यादव और अति पिछड़ा के एक-एक सदस्य हैं। पार्टी कोटे की रिक्त सीटों का संतुलन वैसा ही है, जिस पर चलने की समाजवादी पार्टी रणनीति बना रही है।  अति पिछड़ा कोटे से राम सुंदर निषाद और क्षत्रिय कोटे से यशवंत सिंह को दोबारा परिषद का चुनाव लड़ाया जा सकता है। हालांकि अंतिम फैसला अभी होना बाकी है लेकिन पार्टी में लांबिग तेज हो गयी है।
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समाजवादी पार्टी से दावेदार
समाजवादी पार्टी से विधान परिषद की सदस्यता के लिये दावेदारों में रंजना वाजपेयी, हीरा ठाकुर, नईमुल हसन, संजय लाठर , वीरेन्द्र सिंह, जूही सिंह, चन्द्रभूषण उर्फ गुड्डू राजा, कमलेश पाठक, सरफराज खां, डॉ.राम आसरे कुशवाहा, सुरेन्द्र अग्रवाल, शतरूद्ध प्रकाश, रणविजय सिंह, जयशंकर पाण्डेय और संजय सेठ का नाम चर्चा में है, जिस पर अंतिम फैसला समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली संसदीय समिति करेगी। छह जुलाई को रिटायर होने वाले यशवंत सिंह व रामसुंदर दास निषाद का दूसरी बार दावा मजबूत माना जा रहा है।
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चुनाव कार्यक्रम
विधान परिषद की रिक्त सीटों की संख्या-13
अधिसूचना की तारीख : 24 मई
नामांकन की अंतिम तारीख : 31 मई
नामांकन पत्रों की जांच: एक जून
नाम वापसी की अंतिम तारीख : तीन जून
मतदान:  10 जून, सुबह नौ से शाम चार बजे तक
मतगणना : 10 जून, शाम पांच बजे से
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छह जुलाई को रिटायर होने वाले सदस्य
अतहर खां, ऋषिपाल, रामकुमार कुरील, लाल चन्द्र निषाद, वीरेन्द्र कुमार चौहान, सतीश चन्द्र और सुबोध कुमार (सभी बहुजन समाज पार्टी), नसीब पठान (कांग्रेस), हृदय नारायण दीक्षित (भाजपा), बलराम यादव, बुक्कल नवाब, राम सुंदर निषाद और यशवंत सिंह (समाजवादी पार्टी) का विधान परिषद में कार्यकाल छह जुलाई 2016 तक है, इस दिन ये सदस्य रिटायर हो जाएंगे।
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 24 मई को राज्यसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होगी
- कुल 57 सीटों के लिए 11 जून को होगा चुनाव
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 नई दिल्ली।
राज्यसभा के कुल 57 स्थान रिक्त होंगे, जिसके लिए 11 जून को चुनाव होगा। इनमें छह केंद्रीय मंत्री भी शामिल हैं। इसके लिए केंद्रीय चुनाव आयोग 24 मई को अधिसूचना जारी करेगा।
गुरुवार को राज्यसभा केवल इसीलिए बुलाई गई थी ताकि रिटायर होने वाले सदस्यों को को विदाई दी जा सके। लेकिन सदन की कार्यवाही शुरु होते ही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई। गुजरात से कांग्रेस के सांसद प्रवीण राष्ट्रपाल के निधन की खबर मिलते ही सदन में दो मिनट का मौन रखा गया।  
शुक्रवार को तो खैर कई सदस्य अपनी बात रखेंगे। इनमें से कई सदस्य वापस भी आएंगे। 15 राज्यों के 55 सदस्य जून से अगस्त के बीच रिटायर हो रहे हैैं। कांग्र्रेस के आनंद शर्मा के राजस्थान से सीट खाली करने और कर्नाटक से विजय माल्या के इस्तीफे से रिक्त हुई सीट पर भी चुनाव होना है। इस तरह कुल 57 सीटों पर निर्वाचन होगा। इन 57 सीटों में से कांग्र्रेस और भाजपा के खाते की 14-14 सीटें हैैं। जबकि बसपा की छह, जद यू की पांच और सपा, बीजू जनता दल व अन्नाद्रमुक में से प्रत्येक की तीन-तीन सीटें हैैं। डीएमके, एनसीपी और टीडीपी की दो-दो सदस्य रिटायर हो रहे हैैं। जबकि एक सदस्य शिवसेना का भी है। इसके अलावा निर्दलीय सदस्य माल्या भी है, जिसने पांच मई को अपने पद से इस्तीफा  दे दिया है।
रिटायर होने वाले राज्यसभा प्रमुख सांसदों में मोदी सरकार के छह केंद्रीय मंत्री भी शुमार हैं। इनमें एम. वेंकैया नायडू, बिरेंदर सिंह, सुरेश प्रभु, निर्मला सीतारमन, पीयूष गोयल व मुख्तार अब्बास नकवी है। इनके अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश, जद यू नेता शरद यादव और जाने-माने वकील राम जेठमलानी हैैं। फिलहाल जो आंकड़ा है उसके अनुसार भाजपा संभवत: अपना खाता बरकरार रखेगी। कांग्र्रेस की सीटें जरूर कम हो सकती हैैं। बिहार में जदयू को बड़ा नुकसान होने  जा रहा है क्योंकि पांच में से संभवत: दो ही सदस्य जदयू के खाते में जुड़ेंगे।
उत्तर प्रदेश से राज्यसभा पहुंचने वाले सबसे अधिक 11 सदस्य रिटायर हो रहे हैैं। तमिलनाडु और महाराष्ट्र की छह सीटें खाली हो रही हैैं। बिहार की पांच सीटों पर चुनाव होना है, जबकि आंध्र प्रदेश और कर्नाटक से चार-चार सदस्य रिटायर हो रहे हैैं। मध्य प्रदेश और उड़ीसा से तीन-तीन सांसद रिटायर हो रहे हैैं। पंजाब, झारखंड, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और हरियाणा की दो-दो सीटें रिक्त हो रही हैैं। जबकि उत्तराखंड की एक सीट पर चुनाव कराना पड़ेगा।






Friday, 6 May 2016

सपा जल्दी घोषित करेगी प्रत्याशियों की दूसरी सूची

29 april 2016

 -हारी सीटों पर बचे प्रत्याशियों पर मंथन जारी
-दूसरी सूची में युवाओं को मिल सकती है तरजीह

 लखनऊ : विधानसभा चुनाव की तैयारियों का ताना-बाना बुन रही समाजवादी पार्टी ने दो दर्जन प्रत्याशियों की दूसरी सूची भी तैयार हो गयी है। जिसके जल्दी जारी होने की संभावना है।
चुनावी तैयारियों में विपक्षी दलों पर मनोवैज्ञानिक बढ़त बनाने की रणनीति पर चल रही समाजवादी पार्टी ने मार्च के आखिरी हफ्ते में वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में हारी 176 सीटों में 141 के प्रत्याशी घोषित किये। कुछ प्रत्याशियों का विरोध हुआ और कई प्रत्याशी बदले गए और मुलायम सिंह की छोटी बहू को लखनऊ कैन्ट का प्रत्याशी घोषित कर दिया गया।
 सूत्रों का कहना है कि पार्टी के रणनीतिकार प्रत्याशियों की दूसरी सूची को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। इसमें उन हारी सीटों को ही शामिल किया गया है, जिन पर अभी प्रत्याशी घोषित नहीं हुये हैं। सूत्रों का कहना है कि समाजवादी पार्टी का नेतृत्व बची हुई सीटों पर नए और युवा दावेदारों को पुराने प्रत्याशियों पर तरजीह मिलने की संभावना है। सपा के रणनीतिकारों का कहना है कि राजनीति की दिशा बदल रही है, समाजवादी पार्टी विकास के नारे व अखिलेश सरकार के काम को लेकर चुनावी मैदान में जाएगी। ऐसे में युवा प्रत्याशियों के मैदान में होने से इस वर्ग के मतदाताओं को पार्टी से जोडऩे में मदद मिलेगी। हारी सीटों के प्रत्याशी घोषित करने के बाद ही पार्टी अन्य सीटों के प्रत्याशियों का पैनल तैयार करना शुरू करेगी। ध्यान रहे समाजवादी पार्टी ने महासचिव अरविंद गोप, मंत्री शाहिद मंजूर, प्रदेश सचिव व एमएलसी एसआरएस यादव, पार्टी के पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के  नरेश उत्तम समेत आधा दर्जन मंत्रियों की कमेटी गठित कर हारी हुई सीटों पर टिकट मांग रहे दावेदारों में से तीन का पैनल बनाने का जिम्मा दिया था। उसी पैनल में दर्ज नामों में से ही एक के चयन पर शीर्ष नेतृत्व विचार कर रहा है।

सपा और चुनाव आयोग से जुड़ी कुछ खबरें

 १-०४-२०१६
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अपडेट:मुस्लिमों के सहारे असम में जमीन की तलाश

ध्यानार्थ: इन्ट्रो में बदलाव किया गया है।
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-सपा ने 15 प्रत्याशी उतारे, इनमें 12 मुस्लिम
-प्रचार के लिए जाएंगे आठ मुस्लिम मंत्री
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राज्य ब्यूरो, लखनऊ : उत्तर प्रदेश में बहुमत की सरकार चला रही समाजवादी पार्टी (सपा) अब असम में सियासी जमीन तैयार करने में जुट गयी है। राज्य की मुस्लिम बहुल सीटों में से 12 पर न सिर्फ प्रत्याशी उतारे हैं बल्कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, सपा प्रमुख मुलायम सिंह और राज्य के आठ मुस्लिम मंत्रियों को स्टार प्रचारक नियुक्त किया है।
इससे पहले समाजवादी पार्टी ने वर्ष 2011 के विधानसभा चुनाव में भी असम की 26 सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे, मगर तब पार्टी के रणनीतिकार उत्तर प्रदेश की चुनावी तैयारी में ही जुटे थे, लिहाजा वहां कोई भी प्रचार करने नहीं गया था। बावजूद इसके पार्टी को तीन फीसद वोट मिले थे। इस बार सपा उत्तर प्रदेश की सत्ता में है और नेतृत्व सपा को राष्ट्रीय पार्टी बनाने की मुहिम में जुटा है। असम की मुस्लिम बहुल सीटों में से 12 पर प्रत्याशी उतराने और उत्तर प्रदेश के मुस्लिम मंत्रियों को स्टार प्रचारक बनाने के पीछे यही रणनीति मानी जा रही है। पार्टी ने कुल 15 प्रत्याशियों को टिकट दिया है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि प्रत्याशियों की क्षेत्रीय पकड़ दिखी और सपा के नाम पर मुस्लिम वोटों में बंटवारा हुआ तो भाजपा को उसका फायदा भी हो सकता है।
सपा के स्टार प्रचारकों में मोहम्मद आजम खां व श्रम मंत्री शाहिद मंजूर का नाम सबसे ऊपर है जिन्हें मुस्लिमों का अलंबरदार माना जाता है। इनके अलावा मंत्री अहमद हसन, इकबाल महमूद, कमाल अख्तर, महबूब अली, वसीम अहमद, सांसद मुनव्वर सलीम, युवाजन सभा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नफीस अहमद, महाराष्ट्र के प्रदेश अध्यक्ष अबु आसिम आजमी, राष्ट्रीय महसचिव मौलाना यासीन अली उस्मानी का नाम शामिल है। इससे इतर आरक्षित वर्ग खासकर पिछड़ों को लुभाने के लिए पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष राम आसरे विश्वकर्मा को असम में कैम्प करने का निर्देश दिया गया है। उनके साथ राज्यसभा सदस्य विशंभर निषाद को भी लगाया गया है। पार्टी ने चुनावी अभियान की कमान महासचिव किरनमय नंदा को सौंपी है। जरूरत पडऩे पर मुलायम सिंह यादव व अखिलेश यादव की जनसभा कराने की बात भी कही गयी है।
असम के प्रदेश अध्यक्ष हाफिज रशीद अहमद चौधरी ने फोन पर बताया कि इस बार न सिर्फ पार्टी का वोट प्रतिशत बढ़ेगा बल्कि पार्टी कुछ सीटें भी जीतेगी। पार्टी के प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी का कहना है कि देश के सबसे बड़े सूबे की जनता ने सपा को बहुमत दिया है, दूसरे राज्यों में भी यहां के विकास कार्यों की जानकारी दी जा रही है। इसका फायदा उन राज्यों में भी मिलेगा।

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२-०५-२०१६
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 सपा ने भी किया 'गांव की ओरÓ रुख

-साइकिलयात्रियों के साथ रात्रि पंचायत में जाएं बड़े नेता
-केंद्र की वादाखिलाफी के साथ गिनाएं सपा की योजनाएं
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 लखनऊ : भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के ग्रामोदय अभियान के जवाब में समाजवादी पार्टी ने मंत्रियों, विधायकों व पूर्व सांसदों के साथ 'गांव की ओरÓ रुख करने का फैसला लिया है। पार्टी ने नेताओं से साइकिल यात्रियों द्वारा आयोजित रात्रि पंचायत में हिस्सा लेने का हुक्म दिया है।
समाजवादी पार्टी को ग्रामीण क्षेत्रों में पैठ वाला दल माना जाता रहा है। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव ने पार्टी को 'मार्डन नजरियाÓ दिया और जिसका नतीजा विधानसभा में पूर्ण बहुमत के रूप के सामने आया। अब उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की सरगर्मी शुरू हुई तो केन्द्र सरकार ने 'ग्रामोदय से भारत उदयÓ अभियान का एलान किया। भाजपा इस अभियान की हमसफर बन गयी। इससे चौकन्ना समाजवादी पार्टी के रणनीतिकारों ने भी कार्यकर्ताओं को गांव-गिरांव का रुख करने का हुक्म सुनाया है।
रविवार से शुरू हुई प्रदेशव्यापी साइकिल यात्रा में शामिल कार्यकर्ताओं को गांव में रात्रि पंचायत लगाने को कहा गया है। पार्टी नेतृत्व ने राज्य सरकार के मंत्रियों, विधायकों, जिला पंचायत अध्यक्षों को भी पंचायतों में शामिल होने की हिदायत दी है। सपा के प्रदेश अध्यक्ष व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने रात्रि पंचायत में केन्द्र व राज्य सरकार के कार्यो की तुलना करने का कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया है। कहा गया है कि काला धन वापस नहीं होने, सबके खाते में 15 लाख आने का वादा झूठा होने, महंगाई बढऩे के लिए केन्द्र सरकार को कटघरे में खड़ा किया जाए और राज्य की समाजवादी पेंशन योजना, बुंदेलखण्ड में तीन माह मुफ्त खाद्यान्न वितरण, एक्सप्रेसवे, एम्बुलेंस सेवा 108-102 के बारे में विस्तार से बताया जाये। पार्टी नेतृत्व ने प्रदेश सचिव व एमएलसी एसआरएस यादव को समन्वय बनाने का जिम्मा सौंपा है।
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जनता ने भी चलायी साइकिल
सपा प्रवक्ता व मंत्री राजेन्द्र चौधरी ने दावा किया कि कड़ी धूप के बावजूद आगरा, इलाहाबाद, झांसी, सहारनपुर, गोरखपुर, गाजियाबाद, मेरठ, अलीगढ़, मीरजापुर, फैजाबाद, बलरामपुर, बस्ती, रायबरेली, कानपुर, सुलतानपुर, बहराइच में साइकिल यात्रा में जनता भी शामिल हुई। लखनऊ में महिला सभा की प्रदेश अध्यक्ष व लखनऊ पूर्व की प्रत्याशी डॉ.श्वेता सिंह व कैन्ट की प्रत्याशी अपर्णा यादव ने भी अपने-अपने क्षेत्रों में साइकिल चलायी। ग्राम्य विकास मंत्री अरविन्द कुमार सिंह गोप ने साइकिल यात्रियों को रवाना किया और अपने क्षेत्र रामनगर में रात्रि चौपाल लगायी।

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३.-०५.२०१६

 आयोग भी जुटा चुनावी तैयारी में
-जर्जर, ध्वस्त मतदान केन्द्रों का ब्यौरा मांगा
-राजनीतिक दलों की सहमति से नए प्रस्ताव मांगे
 लखनऊ : चुनाव आयोग ने विधानसभा चुनाव-2017 के इम्तिहान की तैयारी शुरू कर दी है। जिला निर्वाचन अधिकारियों को जर्जर या ध्वस्त हो चुके मतदान केन्द्रों का ब्योरा जुटाने और राजनीति दलों के क्षेत्रीय नुमाइंदों के साथ बैठक कर नये केन्द्रों का 30 जून तक प्रस्ताव आयोग को भेजने को कहा गया है।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का समय धीरे-धीरे करीब आ रहा है, सियासी दलों ने अपने लश्कर और तरकश दुरुस्त करने शुरू कर दिये हैं तो चुनाव आयोग भी पीछ नहीं है। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी अरुण सिंहल ने जिला निर्वाचन अधिकारियों से उनके क्षेत्र में ध्वस्त, जर्जर मतदान केन्द्रों की ब्यौरा तैयार करने और विकल्प के रूप में नए केन्द्रों का प्रस्ताव बनाने का हिदायत दी है।
 जिला निर्वाचन अधिकारियों से गया है कि नए मतदान केन्द्रों का प्रस्ताव तैयार करने से पहले सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के क्षेत्रीय नुमाइंदों के साथ संयुक्त बैठक की जाये और आम सहमति सेमतदान केन्द्रों का चयन किया जाए।  30 जून तक प्रस्ताव आयोग को भेजने को कहा गया है। आयोग अधिकारियों का कहना है कि पांच सालों में कई मतदान केन्द्र गिर जाते हैं। कई भवन का विस्तार हो जाता है, ऐसे में चुनाव से पहले की यह सामान्य कवायद होती है। नए मतदान केन्द्रों का प्रस्ताव आने पर उसे केन्द्रीय निर्वाचन आयोग को भेज दिया जाता है।
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-अभी पोलिंग बूथों की संख्या-1,40,259
-पोलिंग स्टेशनों की संख्या-89,377

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०४.०५.२०१६
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 एक मतदान केन्द्र पर सिर्फ दो बूथ होंगे
-चुनाव आयोग ने शुरू की कवायद
-अभी दो से अधिक बूथ बनते रहे हैं

 लखनऊ : चुनाव आयोग एक मतदान केन्द्र पर सिर्फ दो बूथ बनाने की कवायद में जुट गया है। अभी एक केन्द्र पर दो से अधिक बूथ बनते रहे हैं। इस प्रयास के पीछे मतदान के दौरान सुरक्षा पुख्ता करने की मंशा है।
 विधानसभा के चुनाव की कुछ माह के अंदर उल्टी गिनती शुरू होगी, लिहाज चुनाव आयोग अभी से अपनी तैयारी में जुट गया है। इस बार एक मतदान केन्द्र पर अधिकतम दो बूथ बनाने की कवायद शुरू की गयी है। दरअसल, 15 सौ मतदाता पर एक बूथ बनाने का नियम है, राज्य में तकरीबन तीन हजार ऐसे मतदान केन्द्र हैं, जहां एक बूथ पर 15 दूसरे पर आठ सौ मतदाता हैं। यानी एक बूथ में कम और दूसरे में काफी ज्यादा मतदाता हैं, लिहाजा ऐसे केन्द्रों पर आयोग तीन बूथ बनाने की इजाजत देता रहा है, इस बार एक मतदान केन्द्र पर दो से अधिक बूथ नहीं बनाने की हिदायत दी गयी है यदि तीसरा बूथ बनाने के सिवाय विकल्प नहीं होने पर उसका कारण भी स्पष्ट करना होगा।
आयोग के अधिकारियों का कहना है कि एक मतदान केन्द्र के जिन दो बूथों में मतदाताओं की संख्या में अंतर है, वहां मतदाता संख्या का समान बंटवारा कर दिया जाएगा। इससे तीसरा बूथ बनाने की जरूरत खत्म हो जाएगा। इससे चुनाव में संसाधन कम होगा। सुरक्षा व्यवस्था बेहतर हो सकेगी। आयोग ने जिला निर्वाचन अधिकारियों से ऐसे केन्द्रों का ब्यौरा मांगा है। ध्यान रहे, गत दिनों चुनाव आयोग जिला निर्वाचन अधिकारियों को पांच सालों के अंतराल में जर्जर या ध्वस्त हो गए मतदान केन्द्रों का ब्यौरा तैयार करने की हिदायत दी है। ताकि ऐसे मतदान केन्द्रों में बदलाव किया जा सके।

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२२.०४.२०१६
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 नजर में रहेंगी बूथ कमेटियां

-अब हर दो माह में होगी राज्य कार्य कारिणी की बैठक
-अखिलेश यादव चेहरा होंगे और शिवपाल संगठन संभालेंगे
lucknow : समाजवादी पार्टी (सपा) के चुनावी अभियान का रंग धीरे-धीरे चटक हो रहा है। हारी सीटों पर प्रत्याशियों की घोषणा फिर एक अप्रत्याशित फैसले में प्रदेश प्रभारी की नियुक्ति के बाद अब मुलायम सिंह यादव बूथ कमेटियों के गठन की निगरानी भी करेंगे। और हर दो माह पर राज्य कार्यकारिणी की बैठक होगी। सपा छह माह से 'एक बूथ-बीस यूथÓ की रणनीति पर चल रही है।
सपा अपने प्रदेश अध्यक्ष व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की छवि व प्रदेश प्रभारी शिवपाल यादव की संगठनात्मक क्षमता के बूते विधानसभा-2017 के चुनावी मैदान में कूदने की रणनीति तैयार कर रही है। कुछ माह पहले शुरू हुए एक बूथ पर बीस यूथ की योजना पर अमल की समीक्षा भी शुरू हो गयी है। प्रभारी नियुक्त होने के बाद शिवपाल यादव ने जिलाध्यक्षों को एक पखवारे के अंदर बूथ कमेटियों के गठन का कार्य पूरा करने की हिदायत दी है। पदाधिकारियों को बताया गया है कि चुनावी साल में पार्टी पूर्व की भांति दो माह पर राज्य कार्यकारिणी की बैठक आयोजित करेगी, जिसमें अपनी चुनावी तैयारियों व विपक्ष की रणनीति पर चर्चा होगी। इसमें सामने आयी जानकारी उसी दिन जिलाध्यक्ष, नगर अध्यक्ष व महामंत्रियों के साथ साझा की जाएगी। बैठक को मुलायम सिंह यादव भी संबोधित किया करेंगे।
सपा के लोगों का दावा है कि मुख्यमंत्री के रूप में अखिलेश की छवि साफ-सुथरी है, लिहाजा उन्हें विकास की राह पर ही चलते रहने का मंत्र दिया गया है, जबकि शिवपाल को विपक्ष के हमले पर त्वरित प्रतिक्रिया देने के साथ संगठन को सक्रिय बनाने का दायित्व दिया गया है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि चुनावी कार्यो में विभाजन के बाद भी मुलायम खुद बूथ कमेटियों की समीक्षा करेंगे। सूत्रों का कहना है कि बीते सप्ताह में दो बार मुलायम ने दाधिकारियों से बूथ कमेटियों की तैयारियों की जानकारी ली है। जिलाध्यक्षों को भी वह लगातार चेता रहे हैं कि अगर एक भी बूथ कमेटी फर्जी मिली को उसी समय अनुशासनहीनता की कार्रवाई होगी, उसके परिणाम चाहे जो हों। सपा प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी का कहना है कि पार्टी का संगठन सबसे बड़ा है, बूथ कमेटियों के गठन का कार्य पूरा हो गया है। कार्यकर्ता उत्साह में है। इन्ही कार्यकर्ताओं के बल समाजवादी पार्टी की सरकार रिपीट होगी।







Monday, 2 May 2016

दूसरे विश्वविद्याालय का दर्जा

2 may 2016 published_ 3 may
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-लंबित छह विधेयकों में दो-तीन भेजे जा सकते हैं राष्ट्रपति को
-वापसी की दशा में संशोधित विधेयक को मिल सकती है मंजूरी
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लखनऊ: राज्यपाल राम नाईक ने सैफई के ग्रामीण इंस्टीट्यूट को प्रदेश के दूसरे चिकित्सा विश्वविद्यालय  का दर्जा देकर  भले ही सपा सरकार को बड़ी राहत दी हो लेकिन अन्य लंबित विधेयकों को यूं ही राजभवन से हरी झंडी मिलती नहीं दिख रही है। अब आधा दर्जन लंबित विधेयकों में से दो-तीन को जहां राज्यपाल, राष्ट्रपति को भेज सकते हैं वहीं शेष को तभी मंजूरी मिलने के आसार हैं जब राज्य सरकार, राज्यपाल द्वारा उठाई गई आपत्तियों को दूर करने को तैयार हो।
दरअसल, महापौरों के अधिकारों में कटौती करने संबंधी उत्तर प्रदेश नगर निगम (संशोधन) विधेयक-2015 सहित कुल सात विधेयक पिछले वर्ष से राजभवन में लंबित थे। विधानमंडल से पारित इस विधेयक को मंजूरी न मिलने पर तो संसदीय कार्यमंत्री मो. आजम खां सदन के अंदर से बाहर तक राज्यपाल पर लगातार टिप्पणी कर रहे हैं। इस पर नाराज नाईक द्वारा कड़ी आपत्ति उठाने पर 30 अप्रैल को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव खुद राजभवन पहुंचे थे। लगभग एक घंटे की मुलाकात में नाईक ने अखिलेश को बताया कि आखिर वह क्यों विधेयकों को मंजूरी नहीं दे रहे हैं? मुलाकात के बाद ही राज्यपाल ने दो-चार दिनों में सभी विधेयकों को निस्तारित करने के संकेत दिए थे।
हुआ भी वैसा ही, रविवार के अवकाश के बाद सोमवार दोपहर में ही राजभवन के प्रवक्ता ने राज्यपाल द्वारा उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, सैफई, इटावा, विधेयक, 2015 को मंजूरी देने की जानकारी दी। उल्लेखनीय है कि सैफई से जुड़े विधेयक को हरी झंडी दिलाने के लिए पूर्व में सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव भी राज्यपाल से मिलने पहुंचे थे।
गौर करने की बात यह कि अब राजभवन में लंबित रह गए छह विधेयकों में से किसी पर भी मौजूदा रूप में राज्यपाल की सहमति मिलने की कतई उम्मीद नहीं है। सूत्रों के मुताबिक राज्यपाल द्वारा उठाई गई आपत्तियों के मद्देनजर जिन विधेयकों को सरकार संशोधित करने को तैयार होगी उन्हें राज्यपाल एक-दो दिन में वापस सरकार को भेज देंगे। इनमें डॉ0 राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान विधेयक, 2015 व आईआईएमटी विश्वविद्यालय, मेरठ, उत्तर प्रदेश विधेयक, 2016 हो सकता है। चूंकि लोकायुक्त का चयन हो चुका है इसलिए अब उत्तर प्रदेश लोक आयुक्त एवं उप लोक आयुक्त  (संशोधन) विधेयक, 2015 को लेकर सरकार भी फिक्रमंद नहीं है। सरकार इसे वापस ले सकती है।
सूत्र बताते हैं कि महापौरों के अधिकारों में कटौती करने संबंधी उत्तर प्रदेश नगर निगम (संशोधन) विधेयक, 2015, उत्तर प्रदेश नगरपालिका विधि (संशोधन) विधेयक, 2015, उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग (संशोधन) विधेयक, 2015 को राज्यपाल राष्ट्रपति को भेज सकते हैं। कारण है कि आजम के रुख से यही लगता है कि सरकार इन विधेयकों में किसी तरह का बदलाव नहीं करना चाहती है। राज्यपाल भी इन्हें वापस नहीं करना चाहेंगे क्योंकि यदि सरकार ने फिर विधानमंडल से पारित कराकर राजभवन को भेजा तो उनके सामने सिवाय मंजूरी देने के दूसरा कोई रास्ता नहीं बचेगा। ऐसे में यही माना जा रहा है कि राज्यपाल इन विधेयकों को राष्ट्रपति को भेज सकते हैं। अगर ऐसा हुआ तो शायद ही मौजूदा सरकार के दौरान संबंधित विधेयक को हरी झंडी मिल पाए।
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क्या है लंबित विधेयकों में
1-उत्तर प्रदेश नगर निगम (संशोधन) विधेयक-2015 : नगर निगम से लेकर नगर पालिका परिषद व नगर पंचायतों के लिए सरकार एक कानून चाहती है। वर्तमान में नगर पालिका परिषद व नगर पंचायतों के लिए सौ वर्ष पुराना उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम-1916 जबकि नगर निगमों के लिए उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम-1959 है। विधेयक में चूंकि कर्तव्यों एवं दायित्वों के निर्वहन में किसी तरह की चूक के लिए प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर नगर पालिका परिषद व नगर पंचायतों के अध्यक्षों की तरह कारण बताओ नोटिस जारी होते ही महापौर के भी वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार पर रोक लगाने और जांच में दोषी पाए जाने पर सरकार द्वारा उन्हें पद से हटाने की व्यवस्था है, इसलिए महापौर इसे संंविधान की मंशा के विपरीत बताते हुए इसका विरोध कर रहे हैं।
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2.-उत्तर प्रदेश नगर पालिका विधि (संशोधन) विधेयक-2015 : इससे राज्य सरकार नगर निगम में नामित पार्षदों को निगम की बैठक तथा नगर पालिका परिषद व नगर पंचायत में नामित सदस्य को नगर पालिका की बैठकों में मत देने के अधिकार को समाप्त करना चाहती है। गौरतलब है वर्ष 2005 में उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम-1916 व उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम-1959 में संशोधन कर सरकार ने नामित पार्षदों व सदस्यों को मत देने का अधिकार दिया था। अब मनोनीत पार्षदों व सदस्यों को बैठकों में मत देने के अधिकार को संविधान के विपरीत मानते हुए सरकार, उत्तर प्रदेश विधि (संशोधन) विधेयक के माध्यम से मताधिकार समाप्त करना चाहती है। राज्य सकार नगर निगम में 10 पार्षद और नगर पालिका परिषद में पांच व नगर पंचायतों में तीन सदस्य नामित कर सकती है।
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3. उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग (संशोधन) विधेयक, 2015: इसमें अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष को राज्यमंत्री का दर्जा देने का प्रस्ताव है। इसके लिए राज्य सरकार ने अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम 1994 में संशोधन करने का निर्णय किया था। सूत्रों के मुताबिक अध्यक्ष को राज्यमंत्री का दर्जा देने को संवैधानिक व्यवस्था के विपरीत मानते हुए ही राज्यपाल इस विधेयक को मंजूरी नहीं दे रहे हैं।
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उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष के मंत्री का दर्जा देने की प्रक्रिया राज्य सरकार ने सितंबर 2014 में शुरू हुई थी। समाजवादी सरकार ने उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम, 1994 (उप्र अधिनियम संख्या 22) में बदलाव करते हुए उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग (संशोधन) अध्यादेश-2014 के जरिये आयोग के अध्यक्ष को कैबिनेट मंत्री का दर्जा देने का प्रस्ताव राजभवन भेजा था। राज्यपाल राम नाईक अध्यादेश पर हस्ताक्षर करने के बजाय सरकार से कुछ सवालों के जवाब मांगे। 10 सितंबर 2014 को राज्यपाल ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र कहा था कि अध्यादेश में 'तात्कालिकताÓ होना जरूरी शर्त होती है जब 1994 से अब तक आयोग बिना मंत्री के दर्जा के चल रहा है, तब अध्यादेश क्यों? इसके अलावा राज्यपाल ने कहा कि केन्द्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष को सिर्फ लोकसेवक माना गया है और राज्य के दूसरे आयोग के अध्यक्षों को मंत्री का दर्जा नहीं है। इसके अलावा सांविधानिक और अदालती आदेशों का हवाला दिया था।
राजभवन के इस रुख के बाद समाजवादी सरकार ने अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष को राज्यमंत्री का दर्जा देने का बिल विधानमंडल के दोनों सदनों से पारित कराया। और उसे उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग (संशोधन) विधेयक, 2015 नाम देते हुए राजभवन को भेज दिया। राज्यपाल ने इस बिल पर अभी हस्ताक्षर नहीं किये हैं।

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4-डॉ.राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान विधेयक, 2015 :  इसमें संजय गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआइ) की तुलना में राज्यपाल का हस्तक्षेप कम किया गया है। एसजीपीजीआइ में निदेशक की नियुक्ति सहित अन्य अतिमहत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन राज्यपाल, संस्थान के विजिटर के रूप में करते हैं। लोहिया संस्थान में यह भूमिका समाप्त कर अध्यक्ष के रूप में मुख्य सचिव को सौंप दी गयी है। माना जा रहा है कि इसी कारण राज्यपाल ने यह विधेयक अब तक मंजूर नहीं किया है।
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5-उत्तर प्रदेश लोक आयुक्त तथा उप लोक आयुक्त (संशोधन) विधयेक, 2015: इसमें लोकायुक्त चयन समिति से हाईकोर्ट मुख्य न्यायाधीश की भूमिका खत्म करने और उनके स्थान पर नयी चयन समिति का प्रस्ताव है। मौजूदा समय में लोकायुक्त समिति में मुख्यमंत्री, हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सदस्य हैं। इस विधेयक के विचाराधीन रहते ही सुप्रीम कोर्ट ने लोकायुक्त की नियुक्ति कर दी है।
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6-आइआइएमटी विश्वविद्यालय, मेरठ, उप्र विधेयक, 2016 : इस विधेयक के कुछ प्रावधानों से राज्यपाल सहमत नहीं है। विधेयक में विश्वविद्यालय कर्मचारियों की सेवा शर्तों को लेकर उन्हें आपत्ति है। विधेयक की धारा-32 में प्रावधान है कि विश्वविद्यालय और उसमें मौलिक रूप से नियुक्त किसी कर्मचारी के बीच हुआ विवाद कुलपति को संदर्भित किया जाएगा। कुलपति विवाद के संदर्भित होने से तीन महीने के अंदर कर्मचारी को अवसर देने के बाद विवाद का निपटारा करेगा। कुलपति के आदेश से व्यथित कर्मचारी कुलाधिपति को अपील कर सकता है। ऐसे मामले में कुलाधिपति का निर्णय अंतिम होगा जिसके खिलाफ किसी न्यायालय में कोई वाद नहीं दाखिल किया जाएगा। कर्मचारियों को अदालत जाने के अधिकार से वंचित करने के प्रावधान से राज्यपाल असहमत हैं। विधेयक में कहा गया है कि प्रायोजक निकाय विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा निर्धारित मानकों व शर्तों को पूरा करेगा। लेकिन विधेयक के कई प्रावधान यूजीसी की मंशा के विपरीत हैं जिनसे राज्यपाल संतुष्ट नहीं हैं। 

Sunday, 1 May 2016

रार पर राजभवन से नहीं मिला करार

10th april 2016 publi
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-विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पाण्डेय पहुंचे राज्यपाल से मिलने
-लंबित विधेयकों से लेकर अधिकारों तक पर हुई चर्चा
-आजम की टिप्पणियों को फिर आपत्तिजनक कहा नाईक ने
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राज्य ब्यूरो, लखनऊ : विधेयक रोकने को लेकर विधानसभा में राजभवन की कार्यशैली पर टिप्पणी से शुरू 'रारÓ पर विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय की शनिवार को राज्यपाल राम नाईक से हुई मुलाकात में भी 'करारÓ जैसी स्थितियां न बन सकीं। राज्यपाल ने सांविधानिक शक्तियों का हवाला देते हुए विधेयक विचाराधीन रखने के कारण जरूर गिना दिये। माना जा रहा है अब मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जल्द ही राज्यपाल से मिल सकते हैं।
शनिवार शाम को ही राजधानी में हुए एक कार्यक्रम में राज्यपाल ने यह भी कह दिया कि उन्होंने विधेयकों को उनकी कानूनी कमियों के कारण रोका है। इससे पहले विधानसभा अध्यक्ष व राज्यपाल में 50 मिनट तक छह विधेयकों को लंबित रखने के कारणों पर चर्चा हुई। सूत्रों का कहना है कि राज्यपाल ने विधानसभा के बजट सत्र के दौरान संसदीय कार्य मंत्री आजम खां द्वारा की गयी टिप्पणियों को आपत्तिजनक ठहराया। कहा कि वह मुख्यमंत्री से चर्चा करेंगे। अध्यक्ष ने भी मुख्यमंत्री से चर्चा की बात कही। राजभवन प्रवक्ता ने बताया कि  राज्यपाल ने मुलाकात के दौरान कौन-कौन से विधेयक किन कारणों से उनके पास विचाराधीन हैं, इसकी जानकारी अध्यक्ष को दी और दो जून, 1949 को संविधान सभा में राज्यों के प्रशासनिक एवं विधायी विषयों पर मुख्यमंत्रियों से सूचनाएं और अभिलेख तलब करने संबंधी राज्यपालों के अधिकारों और मुख्यमंत्रियों के कर्तव्यों पर हुई बहस की प्रति विधानसभा अध्यक्ष को सौंपी। संविधान सभा में अनुच्छेद 147 पर बहस प्रारम्भ हुई थी जिसे अंतत: संविधान सभा द्वारा अनुच्छेद 167 के रूप में स्वीकार किया गया। इसमें राज्यपाल को सरकार से कोई भी दस्तावेज, सूचना तलब करने का अधिकार है।
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राजभवन में विचाराधीन विधेयक
1-उत्तर प्रदेश नगर निगम (संशोधन) विधेयक-2015
नगर निगम से लेकर नगर पालिका परिषद व नगर पंचायतों के लिए सरकार एक कानून चाहती है। वर्तमान में नगर पालिका परिषद व नगर पंचायतों के लिए सौ वर्ष पुराना उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम-1916 जबकि नगर निगमों के लिए उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम-1959 है। विधेयक में चूंकि कर्तव्यों एवं दायित्वों के निर्वहन में किसी तरह की चूक के लिए प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर नगर पालिका परिषद व नगर पंचायतों के अध्यक्षों की तरह कारण बताओ नोटिस जारी होते ही महापौर के भी वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार पर रोक लगाने और जांच में दोषी पाए जाने पर सरकार द्वारा उन्हें पद से हटाने की व्यवस्था है, इसलिए महापौर इसे संविधान की मंशा के विपरीत बताते हुए इसका विरोध कर रहे हैं।
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2.-उत्तर प्रदेश नगर पालिका विधि (संशोधन) विधेयक-2015 इससे राज्य सरकार नगर निगम में नामित पार्षदों को निगम की बैठक तथा नगर पालिका परिषद व नगर पंचायत में नामित सदस्य को नगर पालिका की बैठकों में मत देने के अधिकार को समाप्त करना चाहती है। गौरतलब है वर्ष 2005 में उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम-1916 व उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम-1959 में संशोधन कर सरकार ने नामित पार्षदों व सदस्यों को मत देने का अधिकार दिया था। अब मनोनीत पार्षदों व सदस्यों को बैठकों में मत देने के अधिकार को संविधान के विपरीत मानते हुए सरकार, उत्तर प्रदेश विधि (संशोधन) विधेयक के माध्यम से मताधिकार समाप्त करना चाहती है। राज्य सकार नगर निगम में 10 पार्षद और नगर पालिका परिषद में पांच व नगर पंचायतों में तीन सदस्य नामित कर सकती है।
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3. उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग (संशोधन) विधेयक, 2015
इसमें अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष को राज्यमंत्री का दर्जा देने प्रस्ताव है। इसके लिए राज्य सरकार ने अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम 1994 में संशोधन करने का निर्णय लिया था।
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4.- उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, सैफई इटावा विधेयक, 2015
उप्र ग्रामीण आयुर्विज्ञान एवं अनुसंधान संस्थान का गठन 15 दिसंबर 2005 को हुआ था। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय से संबद्ध संस्थान को विश्वविद्यालय का दर्जा देने के लिए आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, सैफई विधेयक -2015 राज्यपाल को भेजा था, इसमें विश्वविद्यालय का कुलाधिपति मुख्यमंत्री को बनाने की बात थी। कुलाधिपति के बिन्दु पर ही एतराज जताते हुए राज्यपाल ने बिल रोक रखा है।
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5 -उत्तर प्रदेश लोक आयुक्त तथा उप लोक आयुक्त (संशोधन) विधयेक, 2015
इसमें लोकायुक्त चयन समिति से हाईकोर्ट मुख्य न्यायाधीश की भूमिका खत्म करने और उनके स्थान पर नयी चयन समिति का प्रस्ताव है। मौजूदा समय में लोकायुक्त समिति में मुख्यमंत्री, हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सदस्य हैं। इस बिल के विचाराधीन रहते ही सुप्रीम कोर्ट ने लोकायुक्त की नियुक्ति कर दी।
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6- डॉ.राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान विधेयक, 2015
इसमें लखनऊ स्थित राम मनोहर लोहिया संयुक्त चिकित्सालय का लोहिया आयुर्विज्ञान में विलय कर विश्वविद्यालय का दर्जा देने और मुख्यमंत्री को इसका कुलाधिपति नियुक्त करने की बात है, सामान्यत: विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति राज्यपाल होते हैं। मुख्यमंत्री को कुलाधिपति बनाने के प्रस्ताव पर राजभवन को एतराज है।

Saturday, 30 April 2016

उच्च सदन पहुंचे रामूवालिया, वसीम और मधुकर








30 april 2016

-छह माह पूरे होने के एक दिन पहले एमएलसी बने कारागार मंत्री
-साहित्य कोटे से एमएलसी नामित हुए वसीम बरेलवी
 लखनऊ : मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की सिफारिश पर राज्यपाल राम नाईक ने मशहूर शायर वसीम बरेलवी, कारागार मंत्री बलवंत सिंह रामूवालिया व मधुकर जेटली को विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) नामित करने पर सहमति दे दी है। इनके साथ ही राजपाल कश्यप के दूसरी बार भेजे गए नाम पर फिर सहमति न जताते हुए राज्यपाल ने मुख्यमंत्री को पत्र लिख दिया है।
विधान परिषद में नामित कोटे की पांच सीटें जहां पिछले वर्ष 25 मई से रिक्त चल रही थी वहीं इसी माह की सात तारीख को एक और सीट खाली हो गई थी। इन सीटों को भरने को लेकर लंबे समय से कयास लग रहे थे। पिछले कुछ दिनों से कारागार मंत्री बलवंत सिंह रामूवालिया के कार्यकाल को लेकर दिलचस्पी बढ़ गयी थी। दरअसल, विधानमंडल के किसी भी सदन का सदस्य न होने के बावजूद उनके मंत्री बने रहने की छह माह की अवधि 30 अप्रैल को पूरी हो रही थी। ऐसे में उनके सियासी भविष्य पर राजनीतिक पंडितों की निगाहें तो थी हीं, यह उम्मीद भी थी कि मुख्यमंत्री उन्हें नामित कोटे से एमएलसी नियुक्त करने का प्रस्ताव राज्यपाल को भेज सकते हैं।
उम्मीद के अनुरूप मुख्यमंत्री ने शुक्रवार शाम बलवंत सिंह रामूवालिया, वसीम बरेलवी, मधुकर जेटली और राजपाल कश्यप को एमएलसी नामित करने का प्रस्ताव राज्यपाल को भेजा। राजभवन ने भी त्वरित निर्णय लेते हुए साहित्य कोटे से जहीर हसन 'वसीम बरेलवीÓ व समाजसेवा क्षेत्र से रामूवालिया व मधुकर जेटली को एमएलसी नामित कर दिया। इसके साथ ही उच्च सदन में सपा सदस्यों की संख्या अब 61 हो गई है।
राजपाल कश्यप के नाम पर सहमति न जताते हुए राज्यपाल ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कश्यप के खिलाफ दर्ज मामलों का ब्योरा मांगा है। सूत्र बताते हैं कि सरकार ने तो कश्यप के खिलाफ चल रहे मुकदमों को फरवरी में वापस ले लिया है लेकिन अभी उनके खिलाफ अपील की जा सकती है क्योंकि 90 दिन नहीं हुए हैं। विदित हो कि पहले भी सरकार ने राजपाल कश्यप को एमएलसी नामित करने का प्रस्ताव राजभवन भेजा था, तब भी राज्यपाल ने मंजूरी नहीं दी थी। इन नामांकन के बाद भी विधान परिषद में नामित कोटे की तीन सीटें रिक्त हैं। जानकार बताते हैं कि सरकार व सपा नेतृत्व में अन्य नामों पर सहमति नहीं बन पायी, जिसके चलते उन पर बाद में निर्णय लेने का फैसला लिया गया है।

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एकराय में दुश्वारी या फिर रणनीति!
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विधान परिषद सदस्यों के नामांकन में मुलायम की छाप
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लखनऊ : विधान परिषद में नामित कोटे की सीटों के लिए शुक्रवार को महज चार नाम भेजे जाने ने सपा नेतृत्व की रणनीति पर भी सवाल खड़े किये हैं। कहा जा रहा है कि यह दावेदारों में एकराय बनाने की दुश्वारी का परिणाम है या फिर सरकार की कोई रणनीति? वैसे राजभवन भेजी गयी सूची में सपा मुखिया मुलायम सिह यादव की छाप भी साफ नजर आ रही है।
सौ सदस्यों वाली विधान परिषद की दस सीटें नामित कोटे हैं। इन्हें साहित्य, सहकारिता, समाजसेवा, कला एवं संस्कृति क्षेत्र के प्रभावशाली लोगों से भरे जाने की परिकल्पना है। सरकार इन क्षेत्रों के लोगों के नाम राज्यपाल को भेजती है और वह उस पर मंजूरी की मुहर लगाती हैं। इस कोटे की नौ सीटें मई 2015 में रिक्त हुई थी और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जिन नौ लोगों को विधान परिषद में नामित करने की संस्तुति की थी, उन पर राज्यपाल राम नाईक ने सवाल उठा दिये थे। मुख्यमंत्री से चर्चा के बाद राज्यपाल ने दो जुलाई 2015 को एसआरएस यादव, लीलावती कुशवाहा, रामवृक्ष यादव और जितेन्द्र यादव को एमएलसी नामित कर अन्य नामों पर एतराज जाहिर कर दिया। उसके बाद से रिक्त चल रही पांच सीटों को भरने के लिए सरकार की ओर से पहल न होते देख चर्चा ने जोर पकड़ा कि एकराय नहीं होने के चलते सरकार खामोशी अख्तियार किये रही। समाजवादी पार्टी के रणनीतिकारों का मानना था कि नामित कोटे की सीटें भरने की कोई समय सीमा नहीं है। जिस दिन से कोई व्यक्ति नामित होता है, उसी दिन से छह साल तक उसका कार्यकाल रहता है। ऐसे में परिषद में ताकत ज्यादा दिन तक बढ़ी रहती है। तकरीबन 11 माह से रिक्त सीटों में से तीन भरे जाने के बाद अभी तीन और सीटें खाली रहने के निहितार्थ निकाले जा रहे हैं। हालांकि शुक्रवार को जिन लोगों को एमएलसी नामित किया गया है, वे तीनों सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के करीबी माने जाते हैं। रामूवालिया को छह माह पहले इसी कारण पंजाब से यहां लाकर मंत्री बनाया गया था। वसीम बरेलवी की तो मुलायम सार्वजनिक मंचों पर प्रशंसा करते रहे हैं। मधुकर जेटली कुछ माह पूर्व तक प्रदेश सरकार के एनआरआइ विभाग के सलाहकार की भूमिका में थे।
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सपा जल्दी घोषित करेगी प्रत्याशियों की दूसरी सूची
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-हारी सीटों पर बचे प्रत्याशियों पर मंथन जारी
-दूसरी सूची में युवाओं को मिल सकती है तरजीह
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लखनऊ : विधानसभा चुनाव की तैयारियों का ताना-बाना बुन रही समाजवादी पार्टी ने दो दर्जन प्रत्याशियों की दूसरी सूची भी तैयार हो गयी है। इसके जल्दी जारी होने की संभावना है।
चुनावी तैयारियों में विपक्षी दलों पर मनोवैज्ञानिक बढ़त बनाने की रणनीति पर चल रही समाजवादी पार्टी ने मार्च के आखिरी हफ्ते में वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में हारी 176 सीटों में 141 के प्रत्याशी घोषित किये। कुछ प्रत्याशियों का विरोध हुआ और कई प्रत्याशी बदले गए। मुलायम सिंह की छोटी बहू को लखनऊ कैंट का प्रत्याशी घोषित कर दिया गया।
 सूत्रों का कहना है कि पार्टी के रणनीतिकार प्रत्याशियों की दूसरी सूची को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। इसमें उन हारी सीटों को ही शामिल किया गया है, जिन पर अभी प्रत्याशी घोषित नहीं हुए हैं। बची हुई सीटों पर नए और युवा दावेदारों को पुराने प्रत्याशियों पर तरजीह मिलने की संभावना है। सपा के रणनीतिकारों का कहना है कि राजनीति की दिशा बदल रही है। पार्टी विकास के नारे व अखिलेश सरकार के काम को लेकर चुनावी मैदान में जाएगी। ऐसे में युवा प्रत्याशियों के मैदान में होने से इस वर्ग के मतदाताओं को पार्टी से जोडऩे में मदद मिलेगी। हारी सीटों के प्रत्याशी घोषित करने के बाद ही पार्टी अन्य सीटों के प्रत्याशियों का पैनल तैयार करना शुरू करेगी। समाजवादी पार्टी ने महासचिव अरविंद गोप, मंत्री शाहिद मंजूर, प्रदेश सचिव व एमएलसी एसआरएस यादव, पार्टी के पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के  नरेश उत्तम समेत आधा दर्जन मंत्रियों की कमेटी गठित कर हारी हुई सीटों पर टिकट मांग रहे दावेदारों में से तीन का पैनल बनाने का जिम्मा दिया था। उसी पैनल में दर्ज नामों में से ही एक के चयन पर शीर्ष नेतृत्व विचार कर रहा है।
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Tuesday, 19 April 2016

सपा की 'शहÓ पर भाजपा का 'दांवÓ


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-चुनावी समर से पहले प्रत्याशी टूटने से बेचैनी
-अब बाकी प्रत्याशियों पर नजर, बदलेगी रणनीति
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राज्य ब्यूरो, लखनऊ : विधानसभा चुनाव की डुगडुगी में अभी वक्त है मगर प्रदेश की बिसात पर तैयार खड़े मोहरों को पाले में कर मनोवैज्ञानिक बढ़त हासिल करने के दांव चले जाने लगे हैं। सपा ने हाल ही में आगरा की एक फायरब्रांड नेता व फतेहपुर के एक अखाड़ेबाज को भाजपा से अपने पाले में लाकर जो 'शहÓ दी थी, दो दिन बाद ही भाजपा ने आगरा (ग्रामीण) की सपा प्रत्याशी को अपने साथ मिलाकर अपना दांव चला है। यह दांव 'शहÓ के जवाब में 'मातÓ के रूप में तब्दील होगा कि नहीं, यह तो वक्त ही बताएगा किन्तु चुनावी समर से पहले प्रत्याशी टूटने से समाजवादी पार्टी में खासी बेचैनी है।
समाजवादी पार्टी ने वर्ष 2012 में हारी हुई सीटों में 143 पर मार्च में प्रत्याशी घोषित कर विपक्षी दलों पर बढ़त का प्रयास किया मगर सूची जारी होते ही प्रत्याशियों का विरोध शुरू हो गया। सहारनपुर से प्रत्याशी बनाये गए शहनवाज राणा का नाम कुछ घंटों में कट गया। वाराणसी, फतेहपुर, बांदा, बस्ती, महराजगंज में प्रत्याशियों का विरोध सड़क पर आ गया जिसे थामने के प्रयास नाकाम होने पर पार्टी ने बांदा, अयाहशाह, खागा (सु), बांदा, बिंदकी और पनियरा के प्रत्याशी बदल दिये गए, मगर कई जिलों में प्रत्याशियों का विरोध बरकरार है। ऐसे में पार्टी ने दूसरे दलों के कुछ प्रभावशाली लोगों को पार्टी में लाकर मनोवैज्ञानिक बढ़त हासिल करने का नुस्खा आजमाने का प्रयास किया। इसके अंतर्गत हाल ही में भड़काऊ बयान देकर चर्चा में आयीं भाजपा की बृज क्षेत्र उपाध्यक्ष कुंजलिका शर्मा व फतेहपुर के बिंदकी क्षेत्र निवासी पूर्व मंत्री अमरजीत जनसेवक को समाजवादी पार्टी से चुनाव लड़ाने का ऐलान तक कर दिया। यह बढ़त कोई नया गुल खिलाती इससे पहले ही भाजपा ने आगरा ग्र्रामीण से सपा की प्रत्याशी हेमलता दिवाकर को तोड़कर समाजवादी पार्टी को उसी के अंदाज में जवाब दिया। सियासी विश्लेषकों की नजर से देखा जाए तो प्रदेश सरकार चला रही पार्टी की घोषित प्रत्याशी का विपक्षी खेमें में चले जाने को सियासत की बड़ी 'मातÓ माना जा रहा है।
सूत्रों का कहना है कि आगरा ग्र्रामीण की प्रत्याशी से मिले झटके के बाद समाजवादी पार्टी ने हारी हुई सीटों पर घोषित प्रत्याशियों की कार्य प्रणाली पर न सिर्फ नजर टिका दी है बल्कि उसके दूसरे दलों से दोस्ती के प्रभाव का आकलन भी किया जा रहा है। पार्टी जल्दी ही हारी हुई सीटों पर बचे हुए प्रत्याशियों की सूची जारी करने वाली थी, लेकिन आगरा से मिले झटके ने रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया है। गौरतलब है कि इससे पहले प्राधिकारी क्षेत्र कोटे की विधान परिषद सीटों के चुनाव में सहारनपुर से शहनवाज राणा को प्रत्याशी घोषित किया था, मगर वह नामांकन दाखिल करने से पहले ही 'बीमारÓ हो गए। इसी तरह बांदा जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए सपा की घोषित प्रत्याशी दीपा गौर ने चुनाव लडऩे से ही इन्कार कर दिया और गोरखपुर, सीतापुर में पार्टी के नेताओं ने घोषित प्रत्याशी के विरुद्ध बगावत कर जीत हासिल की थी। सपा के रणनीतिकार अब इन सब बिन्दुओं पर मंथन में जुट गये हैं। सपा के राष्ट्रीय सचिव राजेश दीक्षित का कहना है कि पार्टी के पास इस बात की पुख्ता सूचना थी कि हेमलता दिवाकर का जनता में जनाधार नहींं है, लिहाजा वह क्षेत्र में टिकट में बदलाव पर विचार कर रही थी। इसकी जानकारी होने पर ही उन्होंने पाला बदला है।
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फेरबदल के बाद नए प्रत्याशी
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अयाहशाह : रीता प्रजापति
खागा (सु): विनोद पासवान
बांदा : कमल सिंह मौर्य
बिंदकी : टिकट कटा नया घोषित नहीं
मडि़हान : रविन्द्र बहादुर पटेल
बस्ती : उमाशंकर पटवा
आगरा दक्षिण : डॉ.रोली मिश्र
पनियरा : श्रीमती सुमन ओझा
बिंदकी : अमर जीत सिंह जनसेवक
आगरा (उत्तर) : कुंजलिका शर्मा
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