Tuesday, 19 April 2016

सपा की 'शहÓ पर भाजपा का 'दांवÓ


---
-चुनावी समर से पहले प्रत्याशी टूटने से बेचैनी
-अब बाकी प्रत्याशियों पर नजर, बदलेगी रणनीति
----
राज्य ब्यूरो, लखनऊ : विधानसभा चुनाव की डुगडुगी में अभी वक्त है मगर प्रदेश की बिसात पर तैयार खड़े मोहरों को पाले में कर मनोवैज्ञानिक बढ़त हासिल करने के दांव चले जाने लगे हैं। सपा ने हाल ही में आगरा की एक फायरब्रांड नेता व फतेहपुर के एक अखाड़ेबाज को भाजपा से अपने पाले में लाकर जो 'शहÓ दी थी, दो दिन बाद ही भाजपा ने आगरा (ग्रामीण) की सपा प्रत्याशी को अपने साथ मिलाकर अपना दांव चला है। यह दांव 'शहÓ के जवाब में 'मातÓ के रूप में तब्दील होगा कि नहीं, यह तो वक्त ही बताएगा किन्तु चुनावी समर से पहले प्रत्याशी टूटने से समाजवादी पार्टी में खासी बेचैनी है।
समाजवादी पार्टी ने वर्ष 2012 में हारी हुई सीटों में 143 पर मार्च में प्रत्याशी घोषित कर विपक्षी दलों पर बढ़त का प्रयास किया मगर सूची जारी होते ही प्रत्याशियों का विरोध शुरू हो गया। सहारनपुर से प्रत्याशी बनाये गए शहनवाज राणा का नाम कुछ घंटों में कट गया। वाराणसी, फतेहपुर, बांदा, बस्ती, महराजगंज में प्रत्याशियों का विरोध सड़क पर आ गया जिसे थामने के प्रयास नाकाम होने पर पार्टी ने बांदा, अयाहशाह, खागा (सु), बांदा, बिंदकी और पनियरा के प्रत्याशी बदल दिये गए, मगर कई जिलों में प्रत्याशियों का विरोध बरकरार है। ऐसे में पार्टी ने दूसरे दलों के कुछ प्रभावशाली लोगों को पार्टी में लाकर मनोवैज्ञानिक बढ़त हासिल करने का नुस्खा आजमाने का प्रयास किया। इसके अंतर्गत हाल ही में भड़काऊ बयान देकर चर्चा में आयीं भाजपा की बृज क्षेत्र उपाध्यक्ष कुंजलिका शर्मा व फतेहपुर के बिंदकी क्षेत्र निवासी पूर्व मंत्री अमरजीत जनसेवक को समाजवादी पार्टी से चुनाव लड़ाने का ऐलान तक कर दिया। यह बढ़त कोई नया गुल खिलाती इससे पहले ही भाजपा ने आगरा ग्र्रामीण से सपा की प्रत्याशी हेमलता दिवाकर को तोड़कर समाजवादी पार्टी को उसी के अंदाज में जवाब दिया। सियासी विश्लेषकों की नजर से देखा जाए तो प्रदेश सरकार चला रही पार्टी की घोषित प्रत्याशी का विपक्षी खेमें में चले जाने को सियासत की बड़ी 'मातÓ माना जा रहा है।
सूत्रों का कहना है कि आगरा ग्र्रामीण की प्रत्याशी से मिले झटके के बाद समाजवादी पार्टी ने हारी हुई सीटों पर घोषित प्रत्याशियों की कार्य प्रणाली पर न सिर्फ नजर टिका दी है बल्कि उसके दूसरे दलों से दोस्ती के प्रभाव का आकलन भी किया जा रहा है। पार्टी जल्दी ही हारी हुई सीटों पर बचे हुए प्रत्याशियों की सूची जारी करने वाली थी, लेकिन आगरा से मिले झटके ने रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया है। गौरतलब है कि इससे पहले प्राधिकारी क्षेत्र कोटे की विधान परिषद सीटों के चुनाव में सहारनपुर से शहनवाज राणा को प्रत्याशी घोषित किया था, मगर वह नामांकन दाखिल करने से पहले ही 'बीमारÓ हो गए। इसी तरह बांदा जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए सपा की घोषित प्रत्याशी दीपा गौर ने चुनाव लडऩे से ही इन्कार कर दिया और गोरखपुर, सीतापुर में पार्टी के नेताओं ने घोषित प्रत्याशी के विरुद्ध बगावत कर जीत हासिल की थी। सपा के रणनीतिकार अब इन सब बिन्दुओं पर मंथन में जुट गये हैं। सपा के राष्ट्रीय सचिव राजेश दीक्षित का कहना है कि पार्टी के पास इस बात की पुख्ता सूचना थी कि हेमलता दिवाकर का जनता में जनाधार नहींं है, लिहाजा वह क्षेत्र में टिकट में बदलाव पर विचार कर रही थी। इसकी जानकारी होने पर ही उन्होंने पाला बदला है।
----------
फेरबदल के बाद नए प्रत्याशी
------
अयाहशाह : रीता प्रजापति
खागा (सु): विनोद पासवान
बांदा : कमल सिंह मौर्य
बिंदकी : टिकट कटा नया घोषित नहीं
मडि़हान : रविन्द्र बहादुर पटेल
बस्ती : उमाशंकर पटवा
आगरा दक्षिण : डॉ.रोली मिश्र
पनियरा : श्रीमती सुमन ओझा
बिंदकी : अमर जीत सिंह जनसेवक
आगरा (उत्तर) : कुंजलिका शर्मा
------------------  

No comments:

Post a Comment