Saturday, 12 December 2015

मुलायम को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने की तैयारी

२७.१२.२०१३
परवेज़ अहमद, लखनऊ: समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम ंिसह यादव को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने की तैयारी है। पार्टी में उच्च स्तर पर तैयारियों के बीच मुलायम को प्रधानमंत्री बनाने के अहद (संकल्प) का आह्वïान करती होर्डिंगें  चस्पा हो गयी हैं। 11 जनवरी को झांसी में प्रस्तावित 'देश बचाओ, देश बनाओ रैलीÓ में उनकी उम्मीदवारी का ऐलान हो सकता है।
समाजवादी पार्टी के ओहदेदार केन्द्र में तीसरे मोर्चे की सरकार बनने और उसमें उनके दल की महत्वपूर्ण भूमिका का काफी दिनों से ऐलान कर रहे हैं, मगर मुलायम को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार  उनकी ओर से घोषित नहीं किया गया। सपा मुखिया मुलायम ंिसह यादव भी कार्यकर्ताओं से यह तो कहते रहे हैं कि  मजबूती के साथ उनको संसद भेजो लेकिन खुद को प्रधानमंत्री के उम्मीदवार के रूप में उन्होने पेश नहीं किया।
कुछ दिन पहले शहर में लगी बड़ी-बड़ी होर्डिगों में 'मन से मुलायम, इरादे लोहा हैंंÓ के नारे और मुलायम की तस्वीर के साथ पार्टी ने यह तो संदेश दिया कि लोकसभा चुनाव में वह मुलायम के चेहरे और उनके दृढ़ इरादों के बल पर ही 'विजय यात्राÓ  पर निकलेगी।
सूत्रों का कहना है कि पांच राज्यों के चुनावों के परिणाम और दिल्ली में आम आदमी पार्टी के चमत्कारी विजय के बाद समाजवादी पार्टी अब मुलायम ंिसह यादव को पार्टी की ओर से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर ही देश की सत्ता की जंग में कूदेगी। पार्टी के अन्दर मंथन के बीच कार्यकर्ताओं ने लखनऊ में शहर होर्डिंग लगाकर मुलायम ंिसह यादव को बकायदा प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया है। इन होर्डिंगों में जनता और समर्थकों से मुलायम को प्रधानमंत्री बनाने का अहद का आह्रïवान भी किया गया है। पार्टी के एक महासचिव का कहना है कि अब जनता स्पष्ट संदेश चाहती है,इसीलिए चुनाव से पहले ही मुलायम ंिसह यादव को पार्टी की ओर से उम्मीदवार घोषित किया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि केन्द्र में तीसरे मोर्चे की सरकार बनेगी। सपा प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी का कहना है कि मुलायम ंिसह यादव ने देश की धर्म निरपेक्षता के लिए सबसे अधिक कुर्बानी दी है। किसानों, मजदूरों बेरोजगारों और अल्पसंख्यकों के हितों के लिए संघर्ष किया है। सपा के सबसे बड़े नेता हैं। पार्टी के लाखों कार्यकर्ता और देश की जनता उन्हें प्रधानमंत्री बनते देखना चाहती है।
तैयार हो रहा है ट्रेनिंग प्रोग्र्राम
समाजवादी पार्टी अपने मुखिया मुलायम ंिसह यादव को प्रधानमंत्री पद बनाने में कोई कसर छोडऩे को तैयार नहीं है। उसके लिए कई कार्ययोजना बनी लेकिन, जिसमें कार्यकर्ता ट्रेनिंग प्रोग्र्राम भी शामिल है। सूत्रों का कहना है कि लंबे समय से बंद कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण का कार्य जल्द ही शुरू करने की तैयारी है। इसमें डॉ. लोहिया के विचारों के साथ ही बूथ प्रबंधन की जानकारी देने की भी तैयारी है। 'चिन्तन सभाÓ को ट्रेनिंग की कमान सौंपे जाने के संकेत मिल रहे हैं।
२८.१२.२०१३
जागरण ब्यूरो, लखनऊ: नया साल राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी का साल होने के आसार हैं। राजस्थान, मध्य प्रदेश की तर्ज पर मातृ एवं शिशु चिकित्सा सुविधा के लिए 'कॉल 102 एम्बुलेंसÓ शुरू होगी। मुफ्त एक्स-रे के साथ ही बड़े सरकारी चिकित्सालयों में सुपर स्पेशियलिटी इकाइयां स्थापित होंगी। पीएचसी, सीएचसी में चौबीसो घण्टों इमरजेसी सेवाएं देने की भी तैयारी है।
समय से इलाज के अभाव में राज्य में हर साल 16 हजार गर्भवती दम तोड़ देती हैं। ऐसी महिलाओं को समय से चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार एनआरएचएम (राष्ट्रीय ग्र्रामीण स्वास्थ्य मिशन) के धन से डॉयल 102 एम्बुलेंस सेवा शुरू करने जारी है। इस योजना के तहत राज्य में 1972 एम्बुलेंस चलायी जाएंगी। एम्बुलेंस में जीवन रक्षक दवाओं के साथ प्रसूति कराने में प्रशिक्षित फार्मासिस्ट और आशा बहू भी तैनात रहेगी। सूचना मिलने के 30 मिनट के अन्दर यह एम्बुलेंस गर्भवती महिला को नजदीकी चिकित्सालय तक पहुंचाएगी। प्रसव के बाद उसे घर भी छोड़ेगी। डॉक्टरों का मानना है कि इससे मातृ-शिशु मृत्यु दर में गिरावट आएगी। क्योंकि 40 फीसद मौत समय से ट्रांसपोर्ट की सुविधा न मिल पाने से होती है।
स्वास्थ्य मंत्री अहमद हसन कहना है कि वह सरकारी चिकित्सालयों में मुफ्त एक्सरे के साथ ही आशा बहुओं को मोबाइल की सुविधा भी जल्द ही उपलब्ध करा देंगे। कुछ बड़े चिकित्सालयों में सुपर स्पेशियलिटी चिकित्सा सुविधा के लिए इकाइयां स्थापित करने की तैयारी हैं। इस साल ये इकाइयां स्थापित हो जाएंगी। लखनऊ समेत पांच जिलों में दो-दो सौ बिस्तरों वाले चिकित्सालयों की स्थापना का कार्य भी इस साल पूरा जाएगा। यानी नया साल चिकित्सा सुविधाओं की बेहतरी का साल होगा।
तथ्य
-प्रदेश में हर से 16000 गर्भवती महिलाओं की मौत होती है, जिनमें से 40 फीसद की समय से ट्रांसपोर्ट की सुविधा न मिलने से मौत होती है।
-जन्म लेने वाले एक हजार बच्चों में से 53 की मृत्यु हो जाती है।
- 40 फीसद बच्चे कुपोषण के शिकार होते हैं
-औसतन साल में 51 लाख बच्चों का जन्म होता है।
उम्मीदें
-102 नम्बर डॉयल करने के 30 मिनट के अन्दर गर्भवती को नजदीकी चिकित्सालय में पहुंचा दिया जाएगा।
-सरकार आशा बहुओं (कार्यकत्रियों ) को सीयूजी मोबाइल की सुविधा उपलब्ध करा देगी।
-लखनऊ समेत पांच जिलों में 200 बिस्तरों के चिकित्सालय शुरू हो जाएंगे।
-सरकारी चिकित्सालयों में एमसीएच (आपरेशन की विशेषज्ञ सुविधा) शाखा स्थापित होने के आसार
-जरूरतमंद मरीज को मुफ्त एक्स-रे की सुविधा की तैयारी
-पीएचसी, सीएचसी में 24 घण्टे की इमरजेंसी सेवा की उम्मीद 

यूपी में 'आपÓ प्रभाव से खुश है समाजवादी पार्टी

२९.१२.२०१३


-उसका मानना है कि आप का प्रभाव शहरी क्षेत्रों में होगा, जिससे भाजपा का नुकसान होगा
-सपा का मुख्य जनाधार ग्र्रामीण क्षेत्रों में लिहाजा उस पर कोई असर नहीं होगा
-पार्टी के लोगों तर्क लैपटाप योजना से युवाओं के बीच अखिलेश और उनकी सरकार की बढी है लोकप्रियता

परवेज़ अहमद, लखनऊ : दिल्ली की सत्ता में काबिज होने के साथ ही यूपी में भी आम आदमी पार्टी (आप) का सियासी दखल बढऩे से समाजवादी पार्टी खुश है। वह मानती है कि आप का प्रभाव शहरी क्षेत्रों में ही होगा, जिसका ज्दाया नुकसान भाजपा को होगा। सपा के प्रभाववाली लोकसभा सीटों पर अब भी जातीय संतुलन और राज्य सरकार के विकास कार्य ही गुल खिलायेंगे।
दिल्ली विधानसभा चुनाव में 28 सीटें जीतने के साथ ही 'आपÓ ने लोकसभा चुनाव में यूपी में प्रत्याशी उतारने का संकेत दिया है, जिससे सियासत के छोटे-बड़े अखाड़ेबाजों में बेचैनी है। शनिवार को अरविन्द केजरीवाल के शपथ ग्र्रहण में जिस तरह से युवाओं की भीड़ उमड़ी उससे यूपी के सूरमाओं की धड़कने बढ़ गयी हैं। ये और बात है कि  फिलहालसमाजवादी पार्टी इससे खुश है। वह आप की बढ़त में भाजपा का नुकसान देख रही है।  सपा के एक महासचिव का कहना है कि मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के स्टार प्रचारक अखिलेश यादव युवाओं के बीच खासी लोकप्रियता है। इंटरमीडिएट उत्तीर्ण छात्र-छात्राओं को लैपटाप वितरित कर उन्होंने युवाओं को तकनीक से जोड़ा है ये युवा सपा के साथ हैं। ऐसे में 'आपÓ का प्रभाव उसके जनाधार पर नहीं पडऩे वाला है। दूसरे पार्टी की ग्र्रामीण क्षेत्रों में मजबूत पकड़ है। 1996 से लेकर अब तक लोकसभा चुनावों का परिणाम से ही साफ है कि पार्टी किसानों, गरीबो, दलितों औअल्पसंख्यकों और पिछड़ों को साथ लेकर चलती रही, उसके हितों का संरक्षण करती रही है। जहां जातीय संतुलन, विकास कार्यो के आधार पर वोट पड़ते हैं। सपा के एक और प्रदेश सचिव कहते हैं कि पार्टी के पास बांदा, जालौन, नगीना, मिर्जापुर, फतेहपुर जैसी सीटें भी हैं यहां खाद, बीज, सिंचाई की समस्या है, जिसे दूर करने में समाजवादी पार्टी की सरकार ने कसर नहीं छोड़ी है, ऐसे में इन क्षेत्रों में आप का प्रभाव नहीं होने वाला है।
वह कहते है ंकि सपा मुखिया मुलायम ंिसह यादव ने प्रोन्नति में आरक्षण का विरोध कर और 17 पिछड़ी जातियों के लोगों को अनुसूचित जाति का दर्जा देने के लिए लड़ाई लड़ी है। धर्म निरेपक्षता के लिए संघर्ष किया है। लिहाजा पार्टी का जनाधार पहले से बढ़ा है। आप का सपा पर कोई प्रभाव पडऩे वाला नहीं है।
समाजवादी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी कहते हैं कि लोकतंत्र में हर किसी को चुनाव लडऩे की आजादी है। यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का दरवाजा हर किसी के लिए खुला रहता है। उन्होंने लोकतंत्र बहाल किया है। ऐसे आम आदमी पार्टी से समाजवादी पार्टी पर कोई प्रभाव नहीं पढऩे वाला है।

घोटालेबाजों के पास है महत्वपूर्ण कार्य

.४.१.२०१४

घोटालेबाजों के पास है महत्वपूर्ण कार्य
परवेज़ अहमद, लखनऊ: दलित महापुरुषों की याद में नोएडा और लखनऊ में बने स्मारकों के घोटाले में पूर्व मंत्रियों, इंजीनियरों के खिलाफ भले एफआइआर हो गयी हो, मगर राजकीय निर्माण निगम (आरएनएन) पर उसका असर नहीं हुआ। घोटाले के आरोपितों में शामिल यहां के 20 इंजीनियरों को महत्वपूर्ण भवनों का निर्माण का जिम्मा सौंपा गया है। इसमें हाईकोर्ट, एनआरएचएम के  चिकित्सालय, सतर्कता अधिष्ठान, एसटीएफ दफ्तर का निर्माण तक शामिल है।
लोकायुक्त की जांच में बसपाराज में लखनऊ व नोएडा में दलित महापुरुषों की याद में बने स्मारक निर्माण घोटाले में पूर्व मंत्री बाबू ंिसह कुशवाहा, पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी समेत 198 लोगों को आरोपित किया गया। इसमें  जिसमें आइएएस, ठेकेदार और राजकीय निर्माण निगम के तकरीबन 40 अधिकारी भी शामिल है। लोकायुक्त ने इन सभी के खिलाफ कार्रवाई की राज्य सरकार से संस्तुति की थी। जिस पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एफआइआर दर्ज कराकर पूरे घोटाले की विवेचना सतर्कता अधिष्ठान को सौंपी थी। बुधवार को सतर्कता अधिकारियों ने पूर्व मंत्रियों समेत 19 के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराकर विवेचना शुरू कर दी, बावजूद इसके राजकीय निर्माण निगम पर फर्क नहीं पड़ा। घोटाले के ज्यादातर आरोपित अति महत्वपूर्ण निर्माण कार्य का जिम्मा संभाल रहे हैं। इनमें से कई तीन परियोजना प्रबंधकों के पास हाईकोर्ट भवन के निर्माण की जिम्मेदारी है। एक अधिकारी सपा मुखिया मुलायम ंिसह यादव के संसदीय क्षेत्र मैनपुरी में होने वाले निर्माण कार्यो का जिम्मा संभाल रहे हैं। घोटालेबाजी में आरोपित महाप्रबंधक एसके अग्र्रवाल दिल्ली और एस कुमार वाराणसी इकाई में चल रहे करोड़ों के कार्य कर रहे हैं। गौतमबुद्धनगर के निर्माण कार्य भी स्मारक घोटाले के आरोपितों को ही सौंपा गया है। सतर्कता विभाग के एक अधिकारी का कहना है कि घोटाले और एफआइआर में शामिल तथ्यों की विवेचना हो रही है। जो भी दोषी मिलेगा कानूनों के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी।
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कोट: राजकीय निर्माण निगम के पास उपलब्ध इंजीनियरों से ही कार्य लिया जा रहा है, अभी इंजीनियरों पर आरोप की बात सामने आयी है, उनका कोई दोष सिद्ध नहीं हुआ है, लिहाजा उन्हें दोषी नहीं ठहराया जा सकता है। हां, आरोपितों में से कुछ के पास जरूर महत्वपूर्ण कार्य है, जिसकी समीक्षा करायी जाएगी।-आरएन यादव, प्रबंध निदेशक राजकीय निर्माण निगम
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कोट:
बसपा सरकार के घोटालों की जांच करा रही समाजवादी पार्टी की सरकार में भी आरोपितों को महत्वपूर्ण कार्य दिया जाने से राज्य सरकार की नियत पर संदेह साफ नजर आ रहा है।-अमरनाथ अग्र्रवाल, प्रदेश प्रवक्ता कांग्र्रेस
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घोटाले के  आरोपितों को खास काम
नाम              मौजूदा कार्य
एके सक्सेना-  इटावा में प्रोजेक्ट मैनेजर
पीके जैन- महाप्रबंधक महत्वपूर्ण पद
एसके अग्र्रवाल- महाप्रबंधक(दिल्ली)आरके ंिसह- प्रोजेक्ट मैनेजर यूनिट-21 जिसके पास (एसटीएफ, सतर्कता भवन, टाउन प्लानिंग का कार्य)
-एसके चौबे- डॉ.मनोहर लोहिया मेडिकल इंस्टीट्यूट का निर्माण कार्य
केके अस्थाना- मुख्य वास्तु विद, भवनों निर्माण को अंतिम रूप देने का जिम्मा
-एस कुमार- महाप्रबंधक वाराणसी का अतिमहत्वपूर्ण कार्यभार
-एके गौतम-  महाप्रबंधक झारखण्ड के पद से 31 दिसम्बर को सेवानिवृत
-अनिल कुमार- परियोजना प्रबंधक निर्माणाधीन हाईकोर्ट भवन
-एए रिजवी, अपर परियोजना प्रबंधक निर्माणाधीन हाईकोर्ट भवन


-राजेश चौधरी, परियोजना प्रबंधक निर्माणाधीन हाईकोर्ट भवन
-मसूद अहमद, इकाई प्रभारी, मैनपुरी
-सुनील कुमार त्यागी, इकाई प्रभारी गौतमबुद्धनगर
-छेदी लाल, इकाई प्रभारी गौतमबुद्धनगर
-राजवीर ंिसह, महाप्रबंधक झांसी
- अवनी कुमार, महाप्रबंधक (तकीनीकी) आरएनएन अति महत्वपूर्ण शाखा है यह।
-पीके शर्मा, परियोजना प्रबंधक निर्माणाधीन सहारनपुर मेडिकल कालेज
-आरएन यादव- तत्कालीन महाप्रबंधक विद्युत अंचल अब प्रबंध निदेशक
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इंसर्ट
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जांच की भी होगी जांच
जागरण ब्यूरो, लखनऊ: उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान स्मारक घोटाले की शुरूआती जांच करने वाली आर्थिक अपराध शाखा (इओडब्ल्यू) के विवेचनाधिकारियों से कुछ की भूमिका खंगालने की तैयारी में जुट गया है।
लोकायुक्त के आधीन स्मारक घोटाले की जांच करने वाली इओडब्ल्यू के विवेचनाधिकारियों ने अपनी जांच में तीन आइएएस अधिकारियों, लखनऊ के तत्कालीन मण्डलायुक्त, पीडब्ल्यूडी के तत्कालीन प्रमुख अभियंता (विकास) की भूमिका को संदिग्ध तो ठहराया है लेकिन उनके खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई की संस्तुति नहीं की है।
सूत्रों का कहना है कि इओडब्ल्यू की 117 पेज की जांच रिपोर्ट में ही संदेह के घेरे में आए कई इंजीनियरों, ठेकेदारों और अधिकारियों के बयानों का उल्लेख भी नहीं किया है। आखिर ऐसे क्यों हुआ? यही सवाल सतर्कता अधिकारियों को मथ रहा है। सूत्रों का कहना है कि इन्हीं सवालों के जवाब की तलाश के लिए सतर्कता अधिकारी इओडब्ल्यू के विवेचनाधिकारियों से उनके बयान लेने की तैयारी कर रहे हैं।सतर्कता अधिष्ठान के महानिदेशक ए.एल बनर्जी का कहना है कि अभी एफआइआर की विवेचना शुरू हुई लेकिन सभी पहलुओं की जांच होगी।

टिकट सपाइयों का

01.06.2014
1-पारसनाथ यादव
प्रदेश सरकार में उद्यान मंत्री जौनपुर से लोकसभ प्रत्याशी हंै, जिनकी उलझन है कि कुछ दिन पहले ही उनका बेटा पार्टी कार्यकर्ताओं से मारपीट के आरोपों में घिर गया, ऊपर से पूर्व में घोषित प्रत्याशी डॉ.केपी यादव बागी हो गये हैं। और उनकी सभाओं में खासी भीड़ उमड़ रही है।
2-सुकन्या कुशवाहा
यूं तो वह पहली बार चुनावी समर में हैं लेकिन उनके पति बाबू ंिसह कुशवाहा कभी दलित-पिछड़ा राजनीति के महारथी रहे हैं, उनकी दिक्कत ये हैं कि जिस गाजीपुर संसदीय क्षेत्र से उन्हें टिकट दिया है, वहां के मौजूदा सांसद राधे मोहन ंिसह का टिकट कटा है और वह बगावती तेवर  अख्तियार किये हैं।
3-बलराम यादव
प्रदेश सरकार के ताकतवर मंत्रियों में से एक बलराम यादव तो पार्टी ने आजमगढ़ संसदीय क्षेत्र से चुनाव लडऩे के लिए लेकिन वह हिचक गये, उनकी पहल पर ही आजमगढ़ के जिलाध्यक्ष को प्रत्याशी बना दिया गया लेकिन उनकी उलझन ये है  कि अगर यहां परिणाम नकारात्मक हुए तो उनकी सियासत का क्या होगा, इसी लिए उनके खेमे से जब तक सपा मुखिया मुलायम ंिसह या उनके दूसरे बेटे प्रतीक यादव के चुनावी समर में कूदने की चर्चाएं छेड़ी जाती रही हैं।

4- राकेश सचान
फतेहपुर के सांसद राकेश को फिर से यहीं से चुनावी मैदान में उतारा गया लेकिन वह बन रहे समीकरणों को लेकर खासे विचलित हैं, लिहाजा अकबरपुर संसदीय सीट से टिकट हासिल करने की कवायद में हैं।
5-घनश्याम अनुरागी
जालौन के इस सांसद को पार्टी ने पहले दोबारा प्रत्याशी बनाया, फिर टिकट काट कर जिले एक विधायक को प्रत्याशी बनाया और फिर घनश्याम को प्रत्याशी बना दिया गया, उनकी परेशानी का सबब ये है कि बैठे-बैठाए पार्टी का एक विधायक उनसे खार खा बैठा है, अगर उसने खुले दिल से समर्थन न किया तो क्या होगा?
6- रामजी लाल सुमन
सपा के इस दिग्गज का चुनावी क्षेत्र आगरा रहा, लेकिन टिकट हाथरस से मिला है और यहां की मौजूदा सांसद सारिका बघेल को आगरा से प्रत्याशी बनाया गया है, दोनों के सियासी रिश्ते बहुत खुशगवार नहीं है, ऐसे में उनकी बेचैनी स्वाभावित की है।   

सांसद व विधायक से राज्य सरकार मुकदमा वापस नहीं लेने जा रही

1.06.2014
परवेज़ अहमद, लखनऊ : पश्चिम में दंगा भड़काने में नामजद मौलानाओं, सांसद व विधायक से राज्य सरकार मुकदमा वापस नहीं लेने जा रही है, केन्द्रीय गृह मंत्रालय की एक चिट्ठी से हड़बड़ाए यूपी के गृह व न्याय विभाग के अधिकारियों मुजफ्फरनगर प्रशासन से मुकदमों की स्थिति पर '13 बिन्दुओंÓ पर रिपोर्ट तलब राज्य सरकार को एक बार फिर सांसत में फंसा दिया है।
प्रदेश सरकार के गृह व न्याय विभाग ने 27 अगस्त को कबाल से शुरू होकर पश्चिम में फैले दंगों में अभियुक्तों का नाम, तफ्तीश की स्थिति, समेत 13 बिन्दुओं पर रिपोर्ट तलब की थी। इसमें यह भी पूछा गया था कि बसपा सांसद कादिर राणा पर दर्ज मुकदमें वापस लिये जा सकते हैं या नहीं? जिस पर हंगामा बरपा होने पर उच्च स्तरीय जांच शुरू हुई तो खुलासा हुआ कि राज्य सरकार ने तो मुकदमे वापसी का न कोई फैसला लिया है न ही अधिकारियों से रिपोर्ट मांगने के निर्देश दिये। अलबत्ता केन्द्र सरकार सरकार के गृह मंत्रालय (सीएस डिवीजन) के अनुसचिव मनिराम की ओर से नवम्बर माह में जारी पत्र में यूपी सरकार के गृह सचिव को निर्देशित करते हुए कहा गया है कि बसपा सांसद कादिर राना ने दंगा मामले में फर्जी मुकदमा दर्ज कराने का आरोप लगाया है, प्रकरण राज्य सरकार की कानून व्यवस्था से जुड़ा है, लिहाजा सरकार इस मामले की वस्तु स्थिति से केन्द्रीय गृह मंत्रालय को अवगत कराये।
सूत्रों का कहना है कि केन्द्रीय गृह मंत्रालय के इस पत्र से हड़बड़ाए राज्य सरकार के गृह व न्याय विभाग के अधिकारियों ने मनमानी तरीके सेमुजफ्फरनगर के जिला प्रशासन से 13 बिन्दुओं पर रिपोर्ट तलब कर ली। जिसमें आरोपितों से मुकदमा उठाने या न उठाने का बिन्दु भी शामिल था। गौरतलब है कि इससे पहले ही यूपी सरकार के गृह विभाग के अधिकारी 'सोमनाथ मंदिर निर्माणÓ संबंद्ध् में लापरवाही भरा पत्र लिखकर राज्य सरकार को मुसीबत में फंसा चुके हैं। सूत्रों का कहना है कि दूसरी ओर मुजफ्फरनगर के जिला प्रशासन ने न्याय और गृह विभाग को भेजी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि दंगा की एफआइआर पर अभी विवेचना चल रही है। अभी तो अदालत में प्रकरण गया है ही नहीं है। ऐसे में मुकदमा वापस लेने का कोई औचित्य नहीं है। जिला प्रशासन ने कानून व्यवस्था की स्थिति से भी इसे अनुचित माना है।
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मुख्यमंत्री बोले-
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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि सूचना मांगने का अर्थ यह नहीं होता है कि सरकार ने दंगों के आरोपितों से मुकदमा वापस ले लिया है। कानून अपना कार्य कर रहा है। कानून का पालन करने के मामले में सरकार कोई हस्तक्षेप नहीं करती है। कानून अपना कार्य करेगा। अलबत्ता किसी निर्दोष के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने दी जाएगी।
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जागरण ब्यूरो, लखनऊ: प्रदेश सरकार में गफलत और मनमानी का आलम ये है कि दंगा भड़काने में नामजद बसपा सांसद कादिर राणा की शिकायत परकेन्द्रीय गृह मंत्रालय से मांगी गयी सूचना पर मुजफ्फरनगर के जिला प्रशासन से मुकदमा वापसी से ताल्लुक रखने वाले 13 बिन्दुओ पर रिपोर्ट तलब कर ली। तथ्यों का खुलासा होने पर प्रमुख सचिव न्याय जेएस पाण्डेय ने आनन-फानन में प्रकरण की पत्रावली तलब सील करा दी है। रिपोर्ट मंागने की पत्रावली तैयार करने वाले सेक्शन अधिकारी व एक समीक्षा अधिकारी उनके पद से हटाकर वापस सचिवालय प्रशासन भेजने का निर्देश दिया है। दोनों समीक्षा अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी किये जाने के संकेत हैं। सूत्रों का कहना है कि गृह विभाग के उन अधिकारियों के बारे में भी छानबीन शुरू हो गयी है, जिन्होंने पत्रावली न्याय विभाग को बढ़ायी थी। 

Thursday, 10 December 2015

-तलाक, मेहर, वसीयत व शरई कानून पर हुई चर्चा


-अल्पसंख्यकों की रहनुमाई करेगा पर्सनल ला बोर्ड
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अमरोहा : आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की दीन व दस्तूर बचाओ कांफ्रेंस में मुसलमानों से कुरान व हदीस के मुताबिक ङ्क्षजदगी गुजारने के लिए कहा गया। मुसलमानों की तलाक, वसीयत व मेहर के साथ ही कानूनी अधिकारों के संबंध में आने वाली परेशानियों को भी शरई तौर पर खत्म करने का फैसला लिया गया। उलमा ने मुसलमानों के तालीम से जुड़ऩे पर जोर देते हुए कहा कि कुछ फिरकापरस्त ताकतें अपना मकसद पूरा करने के लिए मुल्क का माहौल बिगाडऩे की कोशिश कर रही हैं। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड व मुसलमान उन्हें कामयाब नहीं होने देंगे।
गुरुवार को ईदगाह मैदान में शुरु हुई आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की दीन व दस्तूर बचाओ कांफ्रेंस में देशभर से उलमा पहुंचे हैं। हालांकि बोर्ड के नायब सदर व सदारत कर रहे मौलाना कल्बे सादिक ने अपने ख्यालात का इजहार नहीं किया, लेकिन सचिव मौलाना वली रहमानी, बोर्ड के सदस्य अब्दुल्ला मुगीसी, मौलाना यासीन अली उस्मानी, आचार्य प्रमोद कृष्णम्, सरदार बलदीप ङ्क्षसह, बामन मेसन, जगद्गुरु मृत्युजंय, एसी माइकल, डॉ. जॉन दयाल ने मुल्क के मौजूदा हालात पर अपने ख्याल पेश किए। पांच घंटे चली कांफ्रेंस में मुसलमानों के हालात पर चर्चा की गई।
उलमा ने कहा कि मुसलमान अपने तलाक, मेहर, वसीयत जैसे मुद्दों को शरई कानून के मुताबिक ही निपटाएं। चूंकि यह मसले इतने पेचीदा हैं कि इनका हल सिर्फ शरई कानून में है। वह शरई कानून का पालन करते हुए देश के कानून का भी पालन करें। बोर्ड के पदाधिकारियों व सदस्यों ने स्पष्ट किया कि मुस्लिम बोर्ड देश के मुसलमानों को किसी भी हालत में कमजोर नहीं होने देगा। बशर्ते मुसलमान कुरान व हदीस के रास्ते पर चलें।