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१० फरवरी २०१६
प्रदीप शुक्ला पर फिर लटकी निलंबन की तलवार
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राब्यू, लखनऊ : एनआरएचएम घोटाले में उत्तर प्रदेश कैडर के आइएएस अधिकारी प्रदीप शुक्ला के जेल जाने से फिर उन पर निलंबन की तलवार लटकने लगी है। कार्मिक विभाग के नियमों के मुताबिक जेल जाने के 48 घंटे के अन्दर संबंधित अधिकारी को निलंबन किया जाना जरूरी होता है।
उत्तर प्रदेश के बहुचर्चित एनआरएचएम घोटाले में आरोपित होने पर 11 मई 2012 को 1981 बैच के आइएएस अधिकारी प्रदीप शुक्ला को सीबीआइ ने गिरफ्तार किया था, निर्धारित अवधि में आरोप पत्र दाखिल नहीं होने पर अदालत ने उन्हें जमानत दे दी थी, बाद में अदालत ने ही जमानत खारिज कर दी थी, दो साल जेल में रहने के बाद बीमारी के चलते जमानत मिली और तीन जुलाई 2015 को सरकार ने उन्हें बहाल करते हुए राजस्व परिषद के सदस्य पद पर तैनात कर दिया था। बाद में उन्हें सामान्य प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव पद पर नियुक्त किया गया।बुधवार को जमानत खारिज होने के बाद जेल भेजे जाने से अब उन पर निलंबन की तलवार लटक गयी है। कार्मिक व अखिल भारतीय सेवा नियमावली के मुताबिक किसी अधिकारी के आपराधिक मामले में गिरफ्तार होने के 48 घंटे के अंदर निलंबित करना आवश्यक होता है। शासन के अधिकारियों का कहना है कि अभी तक उन्हें प्रदीप शुक्ला के जेल भेजे जाने की कोई जानकारी नहीं है। अदालत या जेल से जानकारी मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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एनआरएचएम घोटाला : प्रदीप शुक्ला फिर गए जेल
जासं, गाजियाबाद : एनआरएचएम घोटाले के आरोपी वरिष्ठ आइएएस अधिकारी प्रदीप शुक्ला को सीबीआइ अदालत ने जेल भेज दिया। अभी तक घोटाले के तीन मामलों में स्वास्थ्य का हवाला देकर प्रदीप जमानत पर थे। जेल जाने के आदेश सुनने के बाद व्हील चेयर पर बैठे प्रदीप शुक्ला काफी परेशान नजर आए। इस मामले में उन्होंने जमानत की अर्जी लगाई थी। अदालत ने जेल भेजते हुए 12 फरवरी को जमानत पर सुनवाई की तिथि सुनिश्चित की है।
डॉ. एसपी राम जेल से बाहर : एनआरएचएम घोटाले के आरोपी व परिवार कल्याण एवं स्वास्थ्य के पूर्व महानिदेशक डॉ. एसपी राम को जमानतदार मिलने से बुधवार को जेल से बाहर आ गए। डॉ. राम घोटाले में चार साल पहले डासना जेल में बंद थे। सीबीआइ अदालत ने दस लाख जमा कराने के साथ ही पचास-पचास हजार रुपये बांड के आठ जमानतदार पेश करने का आदेश दिया था।
१० फरवरी २०१६
प्रदीप शुक्ला पर फिर लटकी निलंबन की तलवार
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राब्यू, लखनऊ : एनआरएचएम घोटाले में उत्तर प्रदेश कैडर के आइएएस अधिकारी प्रदीप शुक्ला के जेल जाने से फिर उन पर निलंबन की तलवार लटकने लगी है। कार्मिक विभाग के नियमों के मुताबिक जेल जाने के 48 घंटे के अन्दर संबंधित अधिकारी को निलंबन किया जाना जरूरी होता है।
उत्तर प्रदेश के बहुचर्चित एनआरएचएम घोटाले में आरोपित होने पर 11 मई 2012 को 1981 बैच के आइएएस अधिकारी प्रदीप शुक्ला को सीबीआइ ने गिरफ्तार किया था, निर्धारित अवधि में आरोप पत्र दाखिल नहीं होने पर अदालत ने उन्हें जमानत दे दी थी, बाद में अदालत ने ही जमानत खारिज कर दी थी, दो साल जेल में रहने के बाद बीमारी के चलते जमानत मिली और तीन जुलाई 2015 को सरकार ने उन्हें बहाल करते हुए राजस्व परिषद के सदस्य पद पर तैनात कर दिया था। बाद में उन्हें सामान्य प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव पद पर नियुक्त किया गया।बुधवार को जमानत खारिज होने के बाद जेल भेजे जाने से अब उन पर निलंबन की तलवार लटक गयी है। कार्मिक व अखिल भारतीय सेवा नियमावली के मुताबिक किसी अधिकारी के आपराधिक मामले में गिरफ्तार होने के 48 घंटे के अंदर निलंबित करना आवश्यक होता है। शासन के अधिकारियों का कहना है कि अभी तक उन्हें प्रदीप शुक्ला के जेल भेजे जाने की कोई जानकारी नहीं है। अदालत या जेल से जानकारी मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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एनआरएचएम घोटाला : प्रदीप शुक्ला फिर गए जेल
जासं, गाजियाबाद : एनआरएचएम घोटाले के आरोपी वरिष्ठ आइएएस अधिकारी प्रदीप शुक्ला को सीबीआइ अदालत ने जेल भेज दिया। अभी तक घोटाले के तीन मामलों में स्वास्थ्य का हवाला देकर प्रदीप जमानत पर थे। जेल जाने के आदेश सुनने के बाद व्हील चेयर पर बैठे प्रदीप शुक्ला काफी परेशान नजर आए। इस मामले में उन्होंने जमानत की अर्जी लगाई थी। अदालत ने जेल भेजते हुए 12 फरवरी को जमानत पर सुनवाई की तिथि सुनिश्चित की है।
डॉ. एसपी राम जेल से बाहर : एनआरएचएम घोटाले के आरोपी व परिवार कल्याण एवं स्वास्थ्य के पूर्व महानिदेशक डॉ. एसपी राम को जमानतदार मिलने से बुधवार को जेल से बाहर आ गए। डॉ. राम घोटाले में चार साल पहले डासना जेल में बंद थे। सीबीआइ अदालत ने दस लाख जमा कराने के साथ ही पचास-पचास हजार रुपये बांड के आठ जमानतदार पेश करने का आदेश दिया था।
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१२ फरवरी
२०१६
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